छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस (1 नवंबर 2025) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवा रायपुर में बने नए विधानसभा भवन का उद्घाटन करेंगे। इस भवन की नींव 28 अगस्त 2020 को कांग्रेस सरकार के समय रखी गई थी और करीब 5 साल बाद यह भव्य भवन पूरी तरह से तैयार हो चुका है।

🔹 पर्यावरण के अनुकूल डिजाइन
नवा रायपुर के सेक्टर-19 में 20.78 हेक्टेयर क्षेत्र में बना यह भवन पूरी तरह इको-फ्रेंडली है। इसका वास्तुशिल्प पारंपरिक छत्तीसगढ़ी शैली के साथ-साथ आधुनिकता का मिश्रण है। इसमें गुम्बदनुमा संरचना राष्ट्रपति भवन जैसी झलक देती है।
🔹 भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखी गई क्षमता
वर्तमान में प्रदेश में 90 विधायक हैं, लेकिन नई विधानसभा में 120 विधायकों की बैठक व्यवस्था की गई है। भवन परिसर में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा भी स्थापित की गई है।
🔹 तीन ब्लॉकों में विभाजित संरचना
नई विधानसभा तीन ब्लॉकों — A, B और C — में तैयार की गई है।
- ब्लॉक A में सचिवालय, प्रशासनिक दफ्तर और सुरक्षा शाखाएं होंगी।
- ब्लॉक B में विधानसभा कक्ष, स्पीकर, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के दफ्तर, मीटिंग हॉल, और मीडिया गैलरी शामिल हैं।
- ब्लॉक C में मंत्रियों और विधायकों के कक्ष हैं। नीचे की मंजिल पर तीन अस्पताल — एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक — बनाए गए हैं।
🔹 बस्तर और सरगुजा कला की झलक
भवन के कॉरिडोर और आर्ट गैलरी को बस्तर और सरगुजा की पारंपरिक कला से सजाया गया है। परिसर में गार्डन और लैंडस्केपिंग के लिए वास्तुशास्त्र के अनुसार पौधे लगाए जा रहे हैं।
🔹 अत्याधुनिक सुविधाएं
नई विधानसभा में हाईटेक लाइब्रेरी, 500 सीटों वाला ऑडिटोरियम, सेंट्रल हॉल, VIP लाउंज, ट्रांसजेंडर और दिव्यांगों के लिए अलग टॉयलेट, कैंटीन, और लिफ्ट सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
🔹 ऊर्जा और जल संरक्षण की व्यवस्था
भवन को ग्रीन बिल्डिंग के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसमें ऊर्जा व जल संरक्षण प्रणाली, पेपरलेस वर्क सिस्टम, और सौर ऊर्जा उपयोग जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं।
🔹 पुराने भवन से मिली सीख
पुराना विधानसभा भवन शहर के बीचोंबीच होने के कारण ट्रैफिक और सुरक्षा की समस्याओं से घिरा था। नई विधानसभा को मंत्रालय और संचालनालय के करीब रखा गया है ताकि कामकाज में सुगमता रहे।
🔹 निर्माण लागत और समय
भवन के निर्माण में लगभग 273 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसे पहले 394 करोड़ के डीपीआर के आधार पर प्लान किया गया था, जिसे बाद में घटाकर स्वीकृत किया गया।

