मित बघेल बोले- मारवाड़ी-सिंधी समाज ने छत्तीसगढ़ के लिए क्या किया, माफी पर कहा- जैसा करोगे वैसा पाओगे

छत्तीसगढ़ में उस समय राजनीतिक हलचल मच गई जब जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल ने मारवाड़ी और सिंधी समाज को लेकर विवादित टिप्पणी कर दी। यह मामला तब शुरू हुआ जब छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को तोड़ने की घटना के बाद जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने प्रदर्शन किया।

इस दौरान बघेल के बयान से मारवाड़ी और सिंधी समाज के लोग नाराज़ हो गए और प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। रायपुर और सरगुजा में उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है।

बघेल ने आरोप लगाया कि पुलिस इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी वीर नारायण सिंह, डॉ. खूबचंद बघेल और गुरु घासीदास जैसे महान व्यक्तियों की मूर्तियों का अपमान किया गया, लेकिन किसी पर कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा — “छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति की गर्दन काट दी गई और सरकार ने आरोपी को पागल बताया। क्या जनता पागल है या सरकार?”

भावनाएं आहत होने के सवाल पर बघेल ने कहा — “हमारी प्रतिक्रिया आक्रोश में थी। यह अपमान सीधे छत्तीसगढ़ के पुरखों का अपमान है। बाहर से आने वाले लोगों को यहां उद्योग, टिकट और सम्मान मिलता है, लेकिन वे हमारी संस्कृति नहीं समझते।”

उन्होंने धार्मिक आयोजनों में दिखावे और अश्लीलता पर भी सवाल उठाए — “छठ पूजा में अश्लील डांस होता है, गरबा में फिल्मी गाने चलते हैं — यह कैसी धार्मिकता है?”

31 अक्टूबर के रायपुर बंद को लेकर बघेल ने कहा कि यह शांतिपूर्ण बंद होगा और सभी समाजों से समर्थन की अपील की जाएगी ताकि यह संदेश जाए कि “छत्तीसगढ़ महतारी का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

“छत्तीसगढ़िया कौन?” इस सवाल पर उन्होंने कहा — “दो चिन्हारी नहीं चलेगी। जो यहां रहता है उसे पूरी तरह छत्तीसगढ़िया बनना होगा। मैं पंजाबी हूं पर छत्तीसगढ़िया हूं — यह सही नहीं है।”

हालांकि बघेल ने दाऊ कल्याण सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि वे छत्तीसगढ़ के सच्चे पुत्र हैं और उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता।

माफी की मांग पर बघेल ने कहा — “अगर वे मुझे अपना मानते तो FIR से पहले बातचीत करते। गलती मेरी हो या उनकी, बात करने से ही हल निकलता है। ताली एक हाथ से नहीं बजती। प्यार दोगे तो प्यार मिलेगा, दुश्मनी करोगे तो वैसा ही लौटेगा।”

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