दुर्ग में सरकारी नौकरी का झांसा देकर 45 लाख की ठगी, 3 आरोपी गिरफ्तार

दुर्ग। जिले में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 45 लाख रुपए ठगे गए। आरोपियों ने खुद को मंत्रालय में बड़ा अधिकारी बताकर 25 लोगों को अपने विश्वास में लिया और उनसे पैसे ऐंठे। मामला अंजोरा चौकी क्षेत्र का है। पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता अरुण मेश्राम को गिरफ्तार किया, जबकि दो अन्य आरोपी पहले ही जेल में हैं।

🔹 ठगी की पूरी योजना

ठगी का मामला 2 जुलाई 2022 का है। ग्राम चिरचार निवासी संतराम देशमुख ने शिकायत दर्ज कराई कि आरोपी भेषराम देशमुख और रविकांत देशमुख ने अरुण मेश्राम के साथ मिलकर खुद को मंत्रालय में अधिकारी बताकर नौकरी के नाम पर 5 लाख रुपए लिए थे। वादा पूरा नहीं होने पर अन्य लोगों की शिकायतों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया।

🔹 अरुण मेश्राम का फरार रहना

मुख्य साजिशकर्ता अरुण मेश्राम (54) कांकेर में किराये के मकान में छिपकर रह रहा था। पुलिस को सूचना मिलने पर 14 अक्टूबर को टीम बनाकर दबिश दी और उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर 20 से 25 लोगों से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर रकम ऐंठी

🔹 ठगी की रकम का बंटवारा

अरुण मेश्राम ने बताया कि ठगी की रकम तीनों आरोपी आपस में बांट लेते थे। अपने हिस्से से उसने कांकेर में 15 लाख रुपए का प्लॉट खरीदा और पिछले तीन साल से इसी रकम से घर खर्च चला रहा था। गिरफ्तार आरोपी से प्लॉट खरीदने का एग्रीमेंट और 4,000 रुपए नकद बरामद किए गए।

🔹 पहले गिरफ्तार आरोपी

6 सितंबर 2025 को अंजोरा निवासी भेषराम देशमुख और उसका बेटा रविकांत देशमुख को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उन्होंने कबूल किया कि उन्होंने अरुण मेश्राम के साथ मिलकर लोगों को मंत्रालय में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों की ठगी की।

🔹 पुलिस की कार्रवाई

पुलिस अब ठगी के शिकार अन्य लोगों की पहचान कर रही है। इसके अलावा ठगी से खरीदी गई अन्य संपत्तियों की भी जांच की जा रही है। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है।

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