इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में ‘मिलेट मैन ऑफ इंडिया’ डॉ. खादर वली का संबोधन: बोले — गेहूं-धान पर निर्भरता छोड़कर पारंपरिक फसलों को अपनाना होगा

रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) और कृषक कल्याण परिषद, छत्तीसगढ़ की ओर से आयोजित एक विशेष सेमिनार में पद्मश्री डॉ. खादर वली, जिन्हें देशभर में ‘मिलेट मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है, ने मिलेट्स (श्री अन्न) के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

डॉ. वली ने कहा कि भारत में कभी बाजरा, ज्वार, कोदो, रागी जैसी फसलें किसानों और आम जनता के जीवन का हिस्सा थीं, लेकिन हरित क्रांति के बाद गेहूं और धान पर अत्यधिक निर्भरता के कारण पारंपरिक फसलें पीछे छूट गईं। उन्होंने कहा — “हम केवल दो फसलों पर निर्भर रहकर अपने स्वास्थ्य और कृषि प्रणाली दोनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।”

🌾 जलवायु अनुकूल और कम लागत वाली फसलें

डॉ. वली ने बताया कि मिलेट्स ऐसी फसलें हैं जो कम पानी, कम उर्वरक और कठिन जलवायु में भी बेहतर उत्पादन देती हैं।
उन्होंने कहा — “10 से 35 डिग्री तापमान इनके लिए उपयुक्त है। ये C4 प्रकार के पौधे हैं, जो कम संसाधनों में भी अधिक उपज देते हैं और पर्यावरण के लिए टिकाऊ हैं।”

💪 ‘मिलेट्स से मजबूत होगा स्वास्थ्य’

अपने व्याख्यान में उन्होंने बताया कि मिलेट्स में प्राकृतिक फाइबर, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो पाचन, ब्लड शुगर कंट्रोल और हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं।
उन्होंने कहा — “अगर लोग अपने भोजन में फिर से मिलेट्स शामिल करेंगे, तो भारत न केवल स्वस्थ बनेगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अग्रणी होगा।”

📚 अनुसंधान और प्रचार की जरूरत

डॉ. वली ने विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिकों और छात्रों से अपील की कि वे मिलेट्स पर नए अनुसंधान और नवाचार करें ताकि यह फसल फिर से किसानों की पहली पसंद बन सके।

🎓 कार्यक्रम में 200 से अधिक प्रतिभागी

कार्यक्रम की अध्यक्षता सुरेंद्र चंद्रवंशी (अध्यक्ष, कृषक कल्याण परिषद) ने की।
मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. आरती गुहे, डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी और डॉ. एस.एस. टुटेजा मौजूद रहे।
प्रतिभागियों को “मिलेट न्यूट्री” के उत्पाद जैसे ज्वार चिवड़ा, पीनट कुकीज, कोदो ग्लूटेन-फ्री कुकीज, बाजरा पॉप्स और रागी पापड़ी वितरित किए गए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शुभा बनर्जी, सहायक प्राध्यापक द्वारा किया गया।

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