एम्स रायपुर में मरीजों से वसूला जा रहा पार्किंग शुल्क, ठेकेदार के गुर्गों से बढ़ा विवाद का खतरा

गरीब और जरूरतमंद मरीजों को राहत देने के उद्देश्य से शुरू किया गया एम्स रायपुर अब मरीजों के लिए परेशानी का केंद्र बन गया है। अस्पताल में प्रवेश करने से पहले अब हर मरीज को वाहन पार्किंग शुल्क देना अनिवार्य कर दिया गया है। बाइक वालों से ₹10 और ऑटो या कार से आने वालों से ₹30 वसूले जा रहे हैं। 12 घंटे से अधिक रुकने पर यह शुल्क दोगुना हो जाता है।

मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि पिछले 11 सालों में कभी भी पार्किंग शुल्क नहीं लिया गया था। अब अचानक से शुल्क लागू होने से आर्थिक तंगी झेल रहे लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। मरीजों और पार्किंग कर्मचारियों के बीच लगातार बहस की स्थिति बन रही है।

चीना पांडे के गिरोह के हाथों में पार्किंग ठेका
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह पार्किंग ठेका कोरबा के बदमाश चीना पांडे और उसके साथियों द्वारा संचालित किया जा रहा है। उस पर हत्या, डकैती, वसूली और अपहरण जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। यहां तक कि उस पर जिला बदर की कार्रवाई भी हो चुकी है। अब ऐसे अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के हाथों में एम्स जैसे संवेदनशील स्थान की पार्किंग व्यवस्था आने से सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

पहली बार पार्किंग शुल्क का ठेका
एम्स रायपुर में यह पहली बार है जब पार्किंग शुल्क वसूली का ठेका दिया गया है। रोजाना करीब 3,000 मरीज ओपीडी में आते हैं और लगभग इतनी ही गाड़ियां परिसर में प्रवेश करती हैं। प्रवेश द्वार पर बिना शुल्क दिए किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। ठेका कंपनी एसएस मल्टीसर्विसेज एम्स रायपुर के नाम से पूरे परिसर में किराया सूची के बैनर लगाए गए हैं।

अन्य अस्पतालों में भी वसूली का चलन
डॉ. अंबेडकर अस्पताल में भी लंबे समय से एक ही कंपनी पार्किंग ठेका संभाले हुए है, जहां साइकिल से ₹10 और कार से ₹50 तक वसूले जाते हैं। वहीं डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कोई आधिकारिक पार्किंग ठेका नहीं है, लेकिन सिक्योरिटी गार्ड ही अनौपचारिक रूप से शुल्क वसूलते हैं।

मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
एम्स में इलाज के लिए आने वाले मरीज अब पहले पार्किंग ठेकेदारों से उलझ रहे हैं, फिर अस्पताल की कतारों में लगते हैं। वहीं ऑटो चालकों ने भी पार्किंग शुल्क के चलते किराया बढ़ा दिया है। इस पूरे मामले ने अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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