तीन महीने से बीमार बाघिन ‘बिजली’ को आखिरकार बेहतर इलाज के लिए गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा भेजा गया है। रायपुर की जंगल सफारी में जन्मी ‘बिजली’ करीब ढाई महीने से यूट्रस और ओरल इंफेक्शन से जूझ रही थी। हाल के दिनों में उसने खाना-पीना तक छोड़ दिया था, जिससे उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी। मंगलवार को उसे हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस से रवाना किया गया। बिजली के साथ वन विभाग और वनतारा के पशु चिकित्सकों की टीम भी मौजूद रही।
रेलवे स्टेशन पर अफसरों का चालान
जब बिजली को ट्रेन में शिफ्ट किया जा रहा था, उस समय रायपुर रेलवे स्टेशन पर वन विभाग के अफसर बिना प्लेटफार्म टिकट पहुंचे। इसको लेकर रेलवे अधिकारियों से उनकी बहस हो गई। मामला बढ़ने पर रेलवे मजिस्ट्रेट ने चालान काटने के आदेश दिए और वन अमले को जुर्माना भरना पड़ा।
अनुमति मिलने में हुई देरी
सीटी स्कैन रिपोर्ट में बाघिन के गर्भाशय में संक्रमण (पायोमीट्रा) की पुष्टि के बाद वन विभाग ने उसे वनतारा भेजने का फैसला किया था। इसके लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) से अनुमति मांगी गई, जो मिलने में 10 दिन लग गए। अनुमति के बाद बिजली को विशेष टीम की निगरानी में रवाना किया गया।
जांच में सामने आया संक्रमण
शुरुआती जांच में ‘बिजली’ की बीमारी को गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल समस्या माना गया था। बाद में जब अल्ट्रासाउंड और हेमेटोलॉजिकल जांच हुई, तो किडनी और यूट्रस में संक्रमण का पता चला। 26 सितंबर को वनतारा की विशेषज्ञ टीम रायपुर पहुंची और पिछले 10 दिनों से वह लगातार बिजली का इलाज कर रही थी। अब उसके आगे के उपचार के लिए गुजरात भेजा गया है।

