छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक बड़ी साइबर ठगी का मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने शहर के नामी बिल्डर सुबोध सिंघानिया के नाम पर 8.70 लाख रुपए हड़प लिए। आरोपियों ने बैंक अधिकारियों को झांसा देकर यह रकम कोलकाता के एक निजी खाते में ट्रांसफर करवाई।
पुलिस के मुताबिक ठगों ने खुद को सिंघानिया बताकर बैंक मैनेजर और असिस्टेंट मैनेजर से फोन व वॉट्सऐप पर संपर्क किया। उन्होंने सिंघानिया का फर्जी लेटरहेड भेजकर तात्कालिक भुगतान करने के लिए दबाव बनाया। इस रकम को ‘फेक अकाउंट होल्डर–APK’ के जरिए मंगाया गया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
छत्तीसगढ़ में बढ़ती साइबर ठगी
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में पिछले तीन सालों में 791 करोड़ रुपए की ऑनलाइन धोखाधड़ी दर्ज हो चुकी है। विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार 2023 से जून 2025 के बीच 67,000 से अधिक शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज की गईं। इनमें से कुछ पीड़ितों को रकम वापस भी कराई गई।

‘फेक अकाउंट होल्डर’ स्कैम क्या है
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यह धोखाधड़ी का नया तरीका है। ठग खुद को बैंक के बड़े ग्राहक के रूप में पेश करता है, फोन पर बातचीत कर भरोसा जीतता है और फिर फर्जी दस्तावेज दिखाकर बैंक अधिकारियों से ही रकम ट्रांसफर करवा लेता है। पैसे नहीं भेजने पर अकाउंट बंद करने की धमकी दी जाती है।
‘फेक ई-चालान’ और APK फाइल स्कैम
हाल के दिनों में ठग वॉट्सऐप या SMS के जरिए नकली ट्रैफिक चालान का संदेश भेजते हैं। साथ में एक APK फाइल या लिंक होता है, जिसे डाउनलोड करने पर फोन में मालवेयर इंस्टॉल हो जाता है। यह मालवेयर SMS, कॉन्टैक्ट्स, बैंकिंग एप्स, OTP और पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारी चुरा लेता है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ और फास्टैग फ्रॉड
एक और नया पैटर्न ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर नकली आईडी कार्ड और कोर्ट वारंट दिखाते हैं और आपसे जुर्माना या जमानत राशि की मांग करते हैं।
इसी तरह फास्टैग से जुड़े फ्रॉड में ठग नकली कॉल, SMS, वेबसाइट या QR कोड से आपकी जानकारी और बैलेंस चुरा लेते हैं।
‘जम्प्ड डिपॉजिट’ और ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी
UPI यूजर्स को ठग ‘जम्प्ड डिपॉजिट’ स्कैम में फंसाते हैं। पहले वे खाते में छोटी राशि भेजते हैं, फिर उसे वापस करने का बहाना बनाकर आपके PIN से पैसा निकाल लेते हैं।
ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कैम में अपराधी फर्जी प्लेटफॉर्म बनाकर तेज मुनाफे का लालच देते हैं और पैसा लेने के बाद वापसी नहीं करते।
डेटा चोरी के संकेत और सावधानी
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर फोन का डेटा अचानक ज्यादा खर्च होने लगे, बैटरी जल्दी खत्म हो, डिवाइस गर्म हो या एप्स असामान्य रूप से काम करने लगें तो यह डेटा चोरी का संकेत हो सकता है।
ऐसे स्कैम से बचने के लिए
- APK या एप सिर्फ आधिकारिक स्टोर से डाउनलोड करें।
- OTP, UPI PIN और बैंकिंग जानकारी किसी को न दें।
- संदिग्ध कॉल, SMS या ईमेल से सतर्क रहें।
- निवेश और डिजिटल लेनदेन केवल भरोसेमंद प्लेटफॉर्म पर करें।
- धोखाधड़ी की आशंका होने पर तुरंत साइबर सेल को सूचित करें।
त्योहारों के मौसम में खतरा बढ़ा
त्योहारी सीजन में ऑनलाइन टिकट, होटल और कार्यक्रमों की बुकिंग बढ़ने के कारण साइबर अपराधियों के सक्रिय होने की संभावना ज्यादा रहती है। वे नकली पोर्टल, फर्जी ऑफर और मालवेयर लिंक के जरिए बैंकिंग जानकारी चुरा सकते हैं।

