छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग: नक्सलगढ़ से विकासगढ़ तक की प्रेरक यात्रा

छत्तीसगढ़ के दक्षिणी सीमावर्ती क्षेत्रों में एक ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। जहां कभी बस्तर संभाग को ‘नक्सलगढ़’ के नाम से जाना जाता था, वहां आज विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चलाए गए समन्वित विकास और सुरक्षा अभियान ने इस क्षेत्र का कायाकल्प कर दिया है।

प्रमुख उपलब्धियां:

  1. सुरक्षा और विकास का समन्वय:
    • पिछले 15 महीनों में 46 नए सुरक्षा कैंप स्थापित
    • 145 गांवों में ‘नियद नेल्ला नार’ विशेष विकास योजना लागू
    • 124 गांवों को सड़क मार्ग से जोड़ा गया
  2. बुनियादी ढांचे में क्रांति:
    • 1302 विकास योजनाएं स्वीकृत, जिनमें से 308 पूर्ण
    • 144 स्कूल संचालित (मार्च 2024 तक 122)
    • 202 आंगनबाड़ी केंद्र सक्रिय (पहले 193)
  3. जनकल्याण योजनाओं का व्यापक प्रभाव:
    • 1 लाख से अधिक पीएम आवास स्वीकृत (लक्ष्य का 107%)
    • 21.05 लाख आयुष्मान कार्ड धारक
    • 3.61 लाख उज्ज्वला योजना लाभार्थी
    • 29,000 नए मनरेगा जॉब कार्ड जारी

विशेष पहल:

  • 220 करोड़ रुपये की विशेष केंद्रीय सहायता योजना
  • 200 करोड़ रुपये का पूर्ण उपयोग
  • सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि क्षेत्र में व्यापक निवेश

जनसंपर्क विभाग के उप संचालक नसीम अहमद खान के अनुसार, “यह परिवर्तन सरकार की संवेदनशीलता और जनकेंद्रित दृष्टिकोण का परिणाम है।” आज बस्तर संभाग न केवल नक्सलवाद के विरुद्ध जीत का प्रतीक है, बल्कि समावेशी विकास का एक जीवंत उदाहरण भी बन गया है।

Scroll to Top