
नई दिल्ली: दुनिया भर में कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) मृत्यु और बीमारी के प्रमुख कारणों में से एक बनी हुई है। लैंसेट कमीशन की नई रिपोर्ट में हृदय रोग के इलाज में बड़े बदलाव की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, धमनियों में प्लाक जमा होने के पहले संकेत मिलते ही तुरंत कार्रवाई शुरू कर देनी चाहिए, न कि “वेट एंड वॉच” का रुख अपनाना चाहिए।
मुख्य सिफारिशें:
- नया नामकरण: पारंपरिक “कोरोनरी आर्टरी डिजीज” के बजाय अब इसे “एथेरोस्क्लेरोटिक कोरोनरी आर्टरी डिजीज (ACAD)” कहा जाना चाहिए।
- रोकथाम पर जोर: इस्कीमिया (हृदय में रक्त प्रवाह की कमी) या हार्ट अटैक आने तक इंतजार करने के बजाय शुरुआती चरण में ही प्लाक जमाव को रोकने पर ध्यान देना चाहिए।
- जीवनशैली में बदलाव: धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और खराब आहार जैसे जोखिम कारकों को नियंत्रित करके 2050 तक ACAD से होने वाली 82.1% मौतों को रोका जा सकता है।
भारत के लिए महत्व:
- भारत में हृदय रोग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और अक्सर मरीजों को वैश्विक मानकों से 10 साल पहले ही दिल का दौरा पड़ रहा है।
- डॉ. उपेंद्र कौल (बत्रा हॉस्पिटल) के अनुसार, “एडवांस्ड स्टेज के इलाज पर भारी खर्च करने के बजाय प्लाक बनने से रोकने पर जोर देना चाहिए।”
- डॉ. अशोक सेठ (फोर्टिस एस्कॉर्ट्स) का कहना है कि यह दृष्टिकोण एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां CAD का बोझ बहुत अधिक है।
भविष्य की रणनीति:
- बचपन से ही स्वस्थ आदतों को अपनाकर उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को रोका जा सकता है।
- शुरुआती चरण में ही एथेरोस्क्लेरोसिस का पता लगाकर जीवनशैली में बदलाव और दवाओं से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
निष्कर्ष: इस नए दृष्टिकोण से न केवल लाखों जानें बचाई जा सकती हैं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को भी कम किया जा सकता है।
