रायपुर की छात्रा महिमा राजपूत अंतरराष्ट्रीय स्पेस मिशन ShaktiSAT के लिए चयनित, बनाएंगी सैटेलाइट

रायपुर के तिलक नगर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल की कक्षा 10वीं की छात्रा महिमा राजपूत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनका चयन वैश्विक स्पेस मिशन ‘ShaktiSAT’ के लिए हुआ है। कई चरणों वाली ऑनलाइन चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पार करने के बाद महिमा नेशनल फाइनलिस्ट बनी हैं और अब भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

महिमा का चयन देशभर से आए हजारों आवेदनों के बीच लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर किया गया। इस मिशन में दुनिया के 108 देशों की छात्राएं भाग लेंगी और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विशेष प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगी।

अगस्त 2026 में नई दिल्ली में आयोजित होने वाली आठ दिवसीय ShaktiSAT वर्कशॉप में महिमा हिस्सा लेंगी। इस दौरान उन्हें सैटेलाइट डिजाइन, स्पेस टेक्नोलॉजी और मिशन प्लानिंग की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में छात्राएं वास्तविक स्पेस प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अनुभव प्राप्त करेंगी।

23 अगस्त से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों की छात्राएं मिलकर दो सैटेलाइट तैयार करेंगी। इनमें से एक सैटेलाइट को चंद्रमा की कक्षा में भेजने की योजना है, जबकि दूसरा चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए विकसित किया जाएगा।

मिशन के तहत तैयार किए गए सैटेलाइट्स को अक्टूबर 2026 में श्रीहरिकोटा स्थित ISRO के लॉन्च पैड से अंतरिक्ष में भेजने का लक्ष्य रखा गया है। यह अवसर विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

महिमा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों, विद्यालय प्रबंधन और जिला प्रशासन को दिया है। उन्होंने विशेष रूप से अपनी शिक्षिका योगेश्वरी लहरी और विद्यालय की प्राचार्य जॉली साहू के मार्गदर्शन को महत्वपूर्ण बताया।

महिमा की रुचि पेंटिंग और कहानी लेखन में है, जबकि भविष्य में वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाना चाहती हैं। उनका मानना है कि यदि विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।

ShaktiSAT मिशन का उद्देश्य दुनिया भर की छात्राओं को स्पेस साइंस, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ना है। यह पहल विशेष रूप से STEM शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने और भविष्य के वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं को तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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