नीतीश, चिराग, नायडू की इफ्तार का बहिष्कार करने का ऐलान

नई दिल्ली, 22 मार्च: वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर केंद्र सरकार और एनडीए सहयोगी दलों के रुख पर नाराजगी जाहिर करते हुए प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने शुक्रवार को बड़ा ऐलान किया। संगठन ने कहा कि वह नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड), चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी और चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सभी कार्यक्रमों का बहिष्कार करेगा।
एनडीए सहयोगियों पर लगाया मुसलमानों के खिलाफ राजनीति करने का आरोप
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि जो राजनीतिक दल खुद को धर्मनिरपेक्ष बताते हैं और एनडीए सरकार के हिस्से हैं, वे मुसलमानों पर हो रहे “अत्याचार और अन्याय” पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह संगठन अब केवल प्रतीकात्मक विरोध तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इन नेताओं के इफ्तार, ईद मिलन और अन्य आयोजनों में भी भाग नहीं लेगा।
वक्फ संशोधन विधेयक पर विरोध
मौलाना मदनी ने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर केंद्र सरकार जो संशोधन ला रही है, वह मुसलमानों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संशोधन वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण और मुस्लिम समुदाय को कमजोर करने की एक साजिश का हिस्सा है।
क्या है वक्फ (संशोधन) विधेयक?
इस विधेयक के तहत वक्फ बोर्डों के अधिकारों में संभावित कटौती और सरकारी दखल बढ़ाने की बातें कही जा रही हैं। विपक्ष और कई मुस्लिम संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है।
राजनीतिक हलचल तेज
जमीयत के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। बिहार और आंध्र प्रदेश में सत्ताधारी जेडी (यू) और टीडीपी के लिए यह एक संवेदनशील मुद्दा बन सकता है, खासकर मुस्लिम मतदाताओं के बीच।
नज़र बनी रहेगी कि एनडीए सहयोगी दल इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या कोई राजनीतिक समीकरण बदलते हैं या नहीं।


