छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के विश्रामपुर में चल रहे कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel और पूर्व उपमुख्यमंत्री T. S. Singh Deo एक साथ नजर आए। धरना स्थल से शिवनंदपुर में आयोजित चुनावी सभा तक दोनों नेता एक ही कार में पहुंचे। खास बात यह रही कि गाड़ी खुद टीएस सिंहदेव चला रहे थे, जबकि भूपेश बघेल उनके बगल वाली सीट पर बैठे थे।
मीडिया से बातचीत में टीएस सिंहदेव ने कहा कि वे और भूपेश बघेल हमेशा साथ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारियों और परिस्थितियों के कारण हर समय साथ दिखाई देना संभव नहीं होता, लेकिन दोनों नेताओं के बीच लगातार बातचीत होती रहती है।
दरअसल, विश्रामपुर थाना क्षेत्र में कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र जैन के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर कांग्रेस लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही थी। भाजपा जिलाध्यक्ष मुरली मनोहर सोनी की शिकायत पर पुलिस ने नरेंद्र जैन पर धमकी, गाली-गलौज और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। इसी कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस नेताओं ने धरना शुरू किया था।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पुलिस प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता दबाव में आने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए और राजनीतिक दबाव में कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।
दो दिन से चल रहे आंदोलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Deepak Baij भूख हड़ताल पर बैठे थे, जबकि टीएस सिंहदेव भी अनशन में शामिल हुए। बुधवार को एसडीएम और एएसपी धरना स्थल पहुंचे और कांग्रेस नेताओं से चर्चा की। अधिकारियों ने कांग्रेस की मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया।
टीएस सिंहदेव ने कहा कि यदि आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है तो पुलिस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि हथियार कहां मिला और क्या बरामद किया गया। उनका आरोप था कि चुनावी माहौल में कांग्रेस नेताओं को परेशान करने के लिए यह कार्रवाई की गई।
वहीं दीपक बैज ने पुलिस पर सत्ता के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बिना निष्पक्ष जांच के गंभीर धाराएं लगाना गलत है और कांग्रेस इस तरह की कार्रवाई से डरने वाली नहीं है।
धरने में कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, पूर्व विधायक भानू प्रताप सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कांग्रेस कार्यकर्ता देर रात तक थाने के सामने धरने पर डटे रहे।
मामले की जांच के लिए कांग्रेस ने 7 सदस्यीय समिति भी गठित की है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ताओं और कांग्रेस नेताओं के बीच हुए विवाद के बाद राजनीतिक दबाव में एफआईआर दर्ज की गई।

