प्रमुख बदलाव और प्रभाव:

- बिजली दरों में वृद्धि: न्यूनतम दर ₹4.75 से बढ़कर ₹6 प्रति यूनिट हो सकती है
- नया अधिभार: ₹1 प्रति यूनिट का रेगुलेटरी अधिभार लगाया जाएगा, जिससे डिस्कॉम को ₹53,000 करोड़ की बकाया राशि वसूलने में मदद मिलेगी
- समय-आधारित टैरिफ (ToD) का विस्तार: 10 kW से अधिक लोड वाले घरेलू/वाणिज्यिक उपभोक्ताओं (कृषि को छोड़कर) पर लागू होगा
उपभोक्ताओं पर प्रभाव:
घरेलू उपभोक्ता:
- स्लैब सरलीकरण: 50-150 यूनिट की खपत पर ₹6/यूनिट की एकल दर
- निर्धारित शुल्क घटेगा (अधिकतम ₹250 से ₹150), लेकिन ऊर्जा शुल्क बढ़ेगा
- 1.04 करोड़ सब्सिडी प्राप्त उपभोक्ताओं (कुल का 77%) को कम प्रभाव पड़ेगा
उद्योगों के लिए बड़े बदलाव:
- बड़े उद्योगों (>50% लोड फैक्टर) को मिलने वाली ₹1/यूनिट की छूट समाप्त
- नए उद्योगों की छूट ₹0.55-0.85 से घटकर ₹0.20-0.30/यूनिट होगी
- छोटे/मध्यम/बड़े उद्योगों के लिए एकीकृत दरें
कृषि उपभोक्ता:
- प्रस्तावित दर ₹5.55 से घटकर ₹5.25/यूनिट
पीक आवर्स प्राइसिंग:
10 kW से अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं के लिए:
- 10% अधिभार: सुबह 6-10 बजे व शाम 6-10 बजे (पीक आवर्स)
- 10% छूट: दोपहर 12-4 बजे (ऑफ-पीक)
- 5% अधिभार: सुबह 6-8 बजे
आगे की प्रक्रिया:
SERC ने जनता से आपत्तियां/सुझाव आमंत्रित किए हैं। डिस्कॉम का दावा है कि यह बदलाव अंततः अधिकांश उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी होगा, क्योंकि:
- पहली बार ऊर्जा शुल्क में कमी का प्रस्ताव
- सरलीकृत स्लैब संरचना
- BPL/आस्था कार्डधारकों को सब्सिडी जारी
यह प्रस्ताव डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति सुधारने और समय-आधारित टैरिफ के माध्यम से बिजली की खपत को नियंत्रित करने का प्रयास है। वाणिज्यिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं को सबसे अधिक प्रभावित होने की संभावना है।

