रायपुर में बनेगी स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, 1000 करोड़ की योजना से खिलाड़ियों को मिलेगा नया मंच

छत्तीसगढ़ अब केवल धान उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि खेल प्रतिभाओं के केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य के खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने राजधानी रायपुर में ‘छत्तीसगढ़ स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी’ स्थापित करने के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए लगभग 1000 करोड़ रुपए का प्रारंभिक बजट निर्धारित किया गया है।

इस यूनिवर्सिटी के संचालन पर हर साल करीब 155 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसके लिए वित्तीय संसाधन केंद्र सरकार की ‘खेलो इंडिया’ योजना, यूजीसी तथा सेल और एनटीपीसी जैसी कंपनियों के सीएसआर फंड से जुटाने की योजना बनाई गई है। शुरुआत में इसे मणिपुर स्थित नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी से संबद्ध करने का भी प्रस्ताव है।

हाल ही में आयोजित खेलो इंडिया कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने इस प्रोजेक्ट को जल्द मंजूरी देने का आश्वासन दिया था। इसके बाद खेल संचालनालय ने प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है, जिसे जल्द ही केंद्र सरकार को अग्रेषित किया जाएगा।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचान दिलाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है। प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि राज्य में प्राकृतिक खेल क्षमता का बड़ा भंडार मौजूद है।

यह यूनिवर्सिटी न केवल खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करेगी, बल्कि राज्य के विभिन्न जिलों में प्रस्तावित खेल कॉलेजों के लिए एक संबद्ध संस्था के रूप में भी कार्य करेगी। इससे स्पोर्ट्स टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और खेल क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

यूनिवर्सिटी का मॉडल देश के प्रमुख संस्थानों से प्रेरित होगा, जिसमें गुजरात की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के आधुनिक रिसर्च सिस्टम, मणिपुर की नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का शैक्षणिक ढांचा और दिल्ली के एकीकृत स्कूल-यूनिवर्सिटी मॉडल को शामिल किया जाएगा, ताकि कम उम्र से ही खिलाड़ियों को तैयार किया जा सके।

राज्य के खेल मंत्री अरुण साव ने बताया कि प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी, जिससे छत्तीसगढ़ खेल, पर्यटन और रोजगार का एक बड़ा केंद्र बन सके।

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