रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू हुए एक माह पूरा हो गया है। इस दौरान 200 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं और 800 से ज्यादा बदमाशों की गिरफ्तारी की गई है। नई व्यवस्था के तहत शहर को तीन जोन—सेंट्रल, वेस्ट और नॉर्थ—में विभाजित किया गया है, जिनमें 21 थानों को शामिल किया गया है।
प्रशासन का दावा है कि कमिश्नरी सिस्टम से पुलिसिंग मजबूत होगी और अपराधों पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा। हालांकि, पिछले एक वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि जिले के 33 थानों में कुल 15,836 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें शहरी क्षेत्र के 21 थानों में दुष्कर्म, चोरी और जालसाजी के मामले अधिक रहे, जबकि ग्रामीण क्षेत्र के 12 थानों में हत्या, मारपीट, दहेज मृत्यु और सड़क हादसों में मौत के मामले ज्यादा सामने आए।

वेस्ट जोन-2 सबसे संवेदनशील
आंकड़ों के अनुसार कमिश्नरेट क्षेत्र में वेस्ट जोन-2 को सबसे संवेदनशील माना जा रहा है। यहां के 9 थाना क्षेत्रों में पिछले एक साल में 4,072 अपराध दर्ज हुए, जो अन्य जोनों की तुलना में अधिक हैं।

“शुरुआत में आंकड़ों से घबराने की जरूरत नहीं”
रिटायर्ड डीजी अन्वेष मंगलम का कहना है कि कमिश्नरी लागू होने के बाद थानों का पुनर्गठन हुआ है, इसलिए शुरुआत में अपराध के आंकड़े ज्यादा दिखाई दे सकते हैं। उनका मानना है कि अधिकारी-आधारित पुलिसिंग, नियमित पेट्रोलिंग और बेहतर मॉनिटरिंग से आने वाले समय में अपराध में कमी आएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि हर शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज करना जरूरी है, ताकि अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।

हर दिन 43 अपराध, रोज 5 से ज्यादा चोरी
रायपुर जिले में औसतन प्रतिदिन 43 अपराध दर्ज हो रहे हैं। चोरी की घटनाएं सबसे ज्यादा हैं। पिछले साल 1,921 चोरी के मामले दर्ज हुए, जिनमें 1,442 वाहन चोरी और 479 मकान चोरी के मामले शामिल हैं। इसके अलावा, औसतन हर दिन एक अपहरण का मामला भी सामने आ रहा है।
बेसिक और विजिबल पुलिसिंग पर जोर
पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के अनुसार, फिलहाल बेसिक और विजिबल पुलिसिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नशे के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। जोनवार अपराधों की समीक्षा कर यह तय किया जाएगा कि किस इलाके में किस प्रकार की घटनाएं अधिक हो रही हैं और उसी आधार पर रणनीति बनाई जाएगी।
कमिश्नरी सिस्टम की शुरुआत को लेकर प्रशासन आश्वस्त है कि सख्त कार्रवाई और बेहतर मॉनिटरिंग से आने वाले महीनों में अपराध दर में गिरावट देखने को मिलेगी।

