
टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट एक बार फिर छंटनी की तैयारी में है, और इस बार कंपनी का फोकस मिडिल मैनेजमेंट पर हो सकता है। बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम कंपनी में इंजीनियर्स और नॉन-टेक्निकल कर्मचारियों के अनुपात को संतुलित करने के लिए उठाया जा रहा है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:
- “पीएम अनुपात” में कटौती: माइक्रोसॉफ्ट अपने प्रोडक्ट/प्रोग्राम मैनेजर्स (पीएम) और इंजीनियर्स के अनुपात को घटाना चाहता है। फिलहाल यह अनुपात ~5.5:1 है, जिसे 10:1 तक ले जाने का लक्ष्य है।
- अमेज़न से प्रेरणा: यह रणनीति माइक्रोसॉफ्ट के सिक्योरिटी प्रमुख चार्ली बेल ने पेश की, जो पहले अमेज़न में काम कर चुके हैं। अमेज़न में इसे “बिल्डर अनुपात” (इंजीनियर्स बनाम नॉन-बिल्डर्स) कहा जाता है।
- टेक इंडस्ट्री का ट्रेंड: गूगल ने भी पिछले साल दिसंबर में अपने 10% वीपी और मैनेजर पदों में कटौती की थी।
- परफॉर्मेंस आधारित छंटनी: माइक्रोसॉफ्ट उन कर्मचारियों को भी निकाल सकता है, जिन्होंने लगातार दो साल तक “इम्पैक्ट 80” या उससे कम स्कोर किया हो। कंपनी का परफॉर्मेंस रिव्यू सिस्टम 0-200 के “मैनेजरिवार्ड्स स्लाइडर” पर आधारित है।
- पिछली छंटनियाँ: इससे पहले भी माइक्रोसॉफ्ट ने 2000 कर्मचारियों को निकाला था, जिन्हें लो-परफॉर्मर माना गया था।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
माइक्रोसॉफ्ट का यह कदम टेक इंडस्ट्री में चल रहे बदलावों को दर्शाता है, जहां कंपनियां फ्लैटर हायरार्की और अधिक इंजीनियरिंग दक्षता की ओर बढ़ रही हैं। हालांकि, इससे मिडिल मैनेजर्स और कम प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
HT इस रिपोर्ट की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं कर सकता, लेकिन अगर यह सच साबित होता है, तो यह माइक्रोसॉफ्ट की लागत कम करने की रणनीति का एक और हिस्सा होगा।

