हनुमान कथा के मंच से अयोध्या के महंत का भूपेश बघेल पर तीखा हमला
कथावाचकों पर दिए गए बयानों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और धार्मिक टकराव का रूप लेता दिख रहा है। इसी कड़ी में अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर कड़ा प्रहार किया है। भिलाई में आयोजित हनुमान कथा के दौरान महंत ने भूपेश बघेल की तुलना रावण से करते हुए उन्हें “रावण का दूसरा अवतार” बताया।
महंत राजू दास ने भूपेश बघेल के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने खुद को संतों के परिवार से जुड़ा बताया था। महंत ने कहा कि रावण भी एक संत का पुत्र था, विद्वान ब्राह्मण था और भगवान शिव का उपासक था, लेकिन उसके कर्म सनातन संस्कृति के विरुद्ध थे। इसी उदाहरण के माध्यम से उन्होंने भूपेश बघेल की भाषा और कार्यशैली पर निशाना साधा।
“सनातन के खिलाफ है भूपेश की सोच”
महंत ने आरोप लगाया कि भूपेश बघेल की सोच, शब्द और आचरण सनातन परंपरा के विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री से इस तरह की मर्यादाहीन टिप्पणी की उम्मीद नहीं की जा सकती, खासकर तब जब वह खुद को महात्मा गांधी की विचारधारा से जुड़ी पार्टी का प्रतिनिधि बताते हों।
संतों पर टिप्पणी से आस्था को ठेस
महंत राजू दास ने कहा कि संतों और धार्मिक कथावाचकों को लेकर की गई टिप्पणियां केवल साधु-संतों का अपमान नहीं हैं, बल्कि करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की आस्था पर सीधा हमला हैं। उन्होंने बाबा बागेश्वर धाम और पंडित प्रदीप मिश्रा को राजनीतिक एजेंट बताए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।
महंत ने कहा कि संतों का कार्य किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि समाज के दुखी, पीड़ित और जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि लोगों के जीवन की समस्याएं दूर करना क्या किसी राजनीतिक पार्टी का काम है?
गांधी और रामराज्य का हवाला
अपने बयान में महंत ने महात्मा गांधी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने रामराज्य की कल्पना की थी। यदि कांग्रेस वास्तव में गांधी के विचारों को मानती है, तो फिर सनातन परंपराओं और संतों के खिलाफ इस तरह की बयानबाज़ी कैसे उचित ठहराई जा सकती है। महंत का दावा है कि कांग्रेस के पतन की एक बड़ी वजह ऐसे ही विवादित बयान हैं।
