चांदनी रात, शांत जंगल और दबे पांव बढ़ते गए 600 जवानों के कदम… सूरज उगते ही नक्सलियों पर कहर बन टूट पड़े

चांदनी रात में घिरे जंगल, दबे पांव जवानों की रणनीति, और नक्सलियों पर कहर

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। जवानों ने पूरी तैयारी और सावधानी के साथ नक्सलियों के गढ़ में घुसपैठ की और उनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया। ऑपरेशन में 600 जवान शामिल थे, जिन्होंने चांदनी रात का फायदा उठाते हुए रणनीतिक रूप से जंगल में प्रवेश किया।

चांदनी रात और रणनीतिक बढ़त

जंगल में ऑपरेशन के दौरान चांदनी रात ने जवानों का काम आसान कर दिया। घने पेड़ों और पतझड़ के मौसम के कारण जंगल अपेक्षाकृत साफ दिखाई दे रहा था। बिना टॉर्च की रोशनी का उपयोग किए जवान अपने कदम बढ़ाते गए और नक्सलियों को भनक तक नहीं लगने दी। रातभर जवान जंगल में पैदल चलते रहे और सुबह होते ही नक्सलियों पर हमला बोल दिया।

नक्सलियों पर चारों ओर से धावा

जवानों ने नक्सलियों की गतिविधियों के पुख्ता इनपुट के आधार पर जंगल में अलग-अलग दिशाओं से प्रवेश किया। सूरज उगते ही जवानों को नक्सली नजर आने लगे। उन्होंने घात लगाकर फायरिंग शुरू कर दी। नक्सलियों ने भी जवाबी हमला किया, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया।

भारी संख्या में नक्सलियों का सफाया

इस ऑपरेशन में जवानों ने अकेले बीजापुर में 26 नक्सलियों को मार गिराया, जबकि कांकेर में 4 नक्सली ढेर हुए। बताया जा रहा है कि इस दौरान कुछ नक्सली भागने में कामयाब रहे। पुलिस सूत्रों ने जानकारी दी कि नक्सलियों के बड़े नेता पापा राव की उपस्थिति के बारे में सूचना थी, लेकिन उन्हें निकालने में नक्सली सफल हो गए।

सुरक्षा बलों को मिली बड़ी मात्रा में हथियार

ऑपरेशन के दौरान जवानों ने भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए। इनमें AK-47, SLR, INSAS राइफल, .303 राइफल, रॉकेट लॉन्चर, बीजीएल लॉन्चर, और अन्य खतरनाक हथियार शामिल हैं।

सर्च ऑपरेशन जारी

हालांकि, जंगल में अभी भी सर्च ऑपरेशन चल रहा है। कुछ नक्सलियों के घायल होने की भी संभावना जताई जा रही है। जवानों की इस कार्रवाई से नक्सली तंत्र को बड़ा झटका लगा है और क्षेत्र में सुरक्षा बलों का मनोबल और बढ़ गया है।

निष्कर्ष
यह ऑपरेशन सुरक्षा बलों के धैर्य, साहस, और रणनीति का उत्कृष्ट उदाहरण है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा बहाल करने के लिए यह एक अहम कदम साबित हो सकता है।

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