अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस संबंध में व्यक्तिगत शपथपत्र (पर्सनल एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही संबंधित स्कूल को भी मामले में पक्षकार बनाकर नोटिस जारी किया गया है।
यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha और न्यायमूर्ति Ravindra Kumar Agrawal की डिवीजन बेंच में हुई। मामला जनहित याचिका (WPPIL No. 22/2016) से जुड़ा है, जिसमें इंटरवीनर विकास तिवारी द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सुनवाई की गई।
शिकायतों पर कार्रवाई न होने पर नाराजगी 📄
सुनवाई के दौरान बताया गया कि 5 फरवरी 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय ने दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारियों को शिकायतों पर एक सप्ताह में कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस पर कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई तक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
बिना मान्यता के एडमिशन प्रक्रिया पर सवाल 🎓
अदालत के सामने एक पत्रिका में प्रकाशित प्रवेश विज्ञापन भी पेश किया गया, जिसमें सत्र 2026–27 के लिए कई निजी स्कूलों में एडमिशन शुरू होने की जानकारी दी गई थी। याचिका में दावा किया गया कि ये स्कूल आवश्यक मान्यता के बिना ही संचालित हो रहे हैं और फिर भी प्रवेश प्रक्रिया चला रहे हैं, जो अदालत के पूर्व आदेशों का उल्लंघन हो सकता है।
किन स्कूलों का हुआ उल्लेख 🏫
विज्ञापन में तुलसी कृष्णा किड्स एकेडमी (मोवा) और कृष्णा किड्स एकेडमी की शंकर नगर, न्यू राजेंद्र नगर, सुंदर नगर और शैलेंद्र नगर स्थित शाखाओं का नाम सामने आया। अदालत ने Krishna Public School, Tulsi को भी मामले में पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
शिक्षा सचिव से मांगा जवाब ⏳
डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि बिना मान्यता के स्कूलों द्वारा प्रवेश विज्ञापन देना अदालत के आदेशों की अवमानना की श्रेणी में आ सकता है। इसलिए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 तय की है, जिसमें विभाग को अब तक की कार्रवाई और अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा।

