छत्तीसगढ़ में बढ़ते सड़क हादसों को नियंत्रित करने के लिए परिवहन विभाग ने पहली बार लेडार तकनीक से चलने वाले स्पीड कैमरों की शुरुआत की है। अब निर्धारित गति सीमा से अधिक तेज वाहन चलाने पर सीधे वाहन मालिक के घर ई-चालान भेजा जाएगा।

पायलट प्रोजेक्ट के तहत लगभग 1 करोड़ 90 लाख रुपए की लागत से 7 आधुनिक कैमरे लगाए गए हैं। इन्हें रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर और धमतरी जिलों के प्रमुख और व्यस्त मार्गों पर स्थापित किया गया है। रायपुर में मरीन ड्राइव, वीआईपी रोड और मंदिर हसौद क्षेत्र में कैमरे लगाए गए हैं। वहीं अन्य जिलों में भी ऐसे स्थान चुने गए हैं जहां ट्रैफिक का दबाव ज्यादा है और दुर्घटनाएं अधिक होती हैं।
ये कैमरे वाई-फाई से जुड़े हुए हैं और परिवहन विभाग के सॉफ्टवेयर से सीधे कनेक्ट रहते हैं। करीब 100 मीटर की दूरी तक ये वाहनों की गति को सटीक रूप से माप सकते हैं। दो लेन की सड़कों पर भी ये एक साथ कई वाहनों की निगरानी कर सकते हैं और उनकी जानकारी रिकॉर्ड कर लेते हैं।
लेडार आधारित यह तकनीक प्रकाश किरणों के माध्यम से वाहन की स्पीड और दूरी का आकलन करती है। यदि कोई वाहन तय सीमा से तेज चलता है, तो कैमरा उसकी नंबर प्लेट की फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर लेता है। इसके बाद स्वतः ई-चालान तैयार होकर वाहन मालिक को व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए भेज दिया जाता है।
इन कैमरों में नाइट विजन की सुविधा भी दी गई है, जिससे रात के समय भी साफ निगरानी संभव है। खराब मौसम में भी ये कैमरे प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं।
फिलहाल इन कैमरों की टेस्टिंग चल रही है। परिवहन विभाग और पुलिस की संयुक्त निगरानी में जल्द ही इन्हें पूरी तरह से लागू किया जाएगा। शुरुआती चरण में लोगों को जागरूक किया जाएगा, उसके बाद नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और ट्रैफिक नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। आने वाले समय में इस व्यवस्था को राज्य के अन्य जिलों में भी लागू करने की योजना है।



