छत्तीसगढ़ में ड्राइवर महासंगठन ने अपनी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। राज्य के लगभग 3 लाख ड्राइवरों ने वाहन स्टेयरिंग छोड़ दिया है, जिससे ट्रक, बस, टैक्सी और ऑटो सड़कों पर खड़े हैं। कई हाईवे और मुख्य मार्गों पर लंबा जाम लग गया है, जिससे माल ढुलाई और यात्री परिवहन दोनों प्रभावित हुए हैं।
संगठन ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर उनकी मांगें 25 अक्टूबर तक पूरी नहीं की गईं, तो व्यापक हड़ताल और चक्काजाम किया जाएगा। अब यह चेतावनी सड़कों पर दिख रही है। महासंघ का कहना है कि वर्षों से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया।
शराबबंदी मुख्य मांग
ड्राइवर महासंघ की सबसे अहम मांग राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू करना है। उनका दावा है कि सड़क हादसों में अक्सर ड्राइवरों पर गलत आरोप लगाए जाते हैं, जबकि असली वजह शराब और सड़क सुरक्षा की कमी होती है। संगठन का कहना है कि शराबबंदी से सड़क हादसे घटेंगे और ड्राइवरों की प्रतिष्ठा भी सुधरेगी।
अन्य प्रमुख मांगें
संगठन की अन्य मांगों में शामिल हैं:
- हिट-एंड-रन कानून में बदलाव, ताकि ड्राइवरों को बेवजह सजा न मिले।
- ड्राइवरों की सैलरी बढ़ाई जाए और काम के घंटे तय हों।
- दुर्घटना बीमा राशि में वृद्धि।
- अवैध वसूली पर रोक।
- ईंधन पर सब्सिडी।
- लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया आसान की जाए।
- रोड टैक्स में छूट।
- महिला और बाल सुरक्षा के लिए कड़े कानून।
सड़कों पर जाम, व्यापार प्रभावित
रायपुर के रायपुरा और भाठागांव बस स्टैंड के पास ड्राइवरों का प्रदर्शन जारी है। राजधानी के साथ ही राजनांदगांव, खैरागढ़ और कबीरधाम जिलों में भी व्यावसायिक वाहन सड़कों पर खड़े कर दिए गए हैं, जिससे व्यापार और आम लोगों को परेशानी हो रही है।
पुलिस और प्रशासन ने जाम को नियंत्रित करने के लिए मौके पर निगरानी बढ़ा दी है।

