Chhattisgarh विधानसभा के सत्र में SIR से जुड़े मुद्दे पर भारी हंगामा देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष Charandas Mahant ने आरोप लगाया कि प्रदेश में लगभग 19 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं और इस गंभीर मामले पर तत्काल चर्चा कराई जाए। उन्होंने इसे प्रदेश के नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया।

इस पर भाजपा विधायक Ajay Chandrakar ने कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह जनहित या राज्यहित का विषय नहीं, बल्कि निर्वाचन से संबंधित मामला है और इसे सदन में नहीं उठाया जाना चाहिए। इस बयान के बाद पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई और माहौल गरमा गया।
विपक्ष के अन्य विधायकों ने आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इसकी जांच जरूरी है। वहीं सत्ता पक्ष ने कहा कि प्रदेश में सब कुछ सामान्य है और विपक्ष के पास मुद्दों की कमी है।

आखिरकार आसंदी ने यह कहते हुए स्थगन प्रस्ताव खारिज कर दिया कि यह मामला भारत निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। निर्णय से नाराज विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर निकल गए और वॉकआउट कर दिया।
इससे पहले सदन में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को प्रमुख विधायी कार्य के रूप में पेश करने की तैयारी की गई। इसके अलावा वीरता पदक प्राप्तकर्ताओं को मिलने वाली सुविधाओं, आयुष्मान योजना में कथित अनियमितता और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी जैसे मुद्दों पर भी सवाल-जवाब हुए।

