बिलासपुर के श्रीराम केयर अस्पताल में पथरी के इलाज के दौरान आरक्षक सत्यकुमार पाटले की मौत के मामले में अब राजनीतिक विवाद भी गहराने लगा है। मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने और मृतक के परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की चेतावनी भी दी है।

मामले में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और नायब तहसीलदार आकाश गुप्ता ने मृतक के परिजनों के बयान दर्ज किए हैं। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण सत्यकुमार की हालत बिगड़ती चली गई।
परिजनों के मुताबिक, शुरुआत में डॉक्टरों ने किडनी में इंफेक्शन होने की बात कही थी, लेकिन बाद में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया। वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। इसके बाद सिम्स के चार डॉक्टरों की टीम ने बिसरा जांच कराने की सलाह दी है।
परिवार ने मामले को दबाने की कोशिश का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
बुधवार को विधायक दिलीप लहरिया मृतक आरक्षक के पिता और अन्य परिजनों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर संजय अग्रवाल को शिकायत सौंपी। विधायक ने कहा कि श्रीराम केयर अस्पताल में इलाज में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अस्पताल के खिलाफ शिकायतें और मुद्दे उठते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सत्यकुमार केवल सामान्य पथरी का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन गलत इलाज और लापरवाही के चलते उनकी मौत हो गई। विधायक ने कहा कि अस्पताल में हुई अन्य मौतों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है और पूरे मामले को विधानसभा में उठाया जाएगा।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जांच रिपोर्ट आने के बाद वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। विधायक ने कहा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कदम उठाना जरूरी है। कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
मस्तूरी थाना क्षेत्र के ग्राम एरमशाही निवासी 36 वर्षीय सत्यकुमार पाटले पुलिस विभाग में आरक्षक थे और उनकी पोस्टिंग सरकंडा थाने में थी। 26 अप्रैल को पेट दर्द की शिकायत के बाद वे नेहरू नगर स्थित श्रीराम केयर अस्पताल पहुंचे थे। जांच के बाद डॉक्टरों ने पथरी बताकर ऑपरेशन की सलाह दी।
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद अगले दिन तक सत्यकुमार सामान्य थे, लेकिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। इस दौरान करीब चार घंटे तक कोई विशेषज्ञ डॉक्टर उन्हें देखने नहीं पहुंचा। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी हालत गंभीर हुई और बाद में उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने जमकर हंगामा किया था। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

