बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हाईकोर्ट के अधिवक्ता राहुल अग्रवाल की संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस इसे आत्महत्या या हादसा बता रही है, लेकिन परिजन और वकील साथी इसे संदिग्ध मृत्यु मान रहे हैं। सोमवार को अधिवक्ताओं ने कलेक्टर और एसएसपी से मिलकर विशेष जांच टीम (Special Investigation Team) बनाने की मांग की।
वकीलों ने कहा कि राहुल अग्रवाल एक होनहार अधिवक्ता थे। घटना की रात करीब 1 बजे वे अपने सहयोगी वकील के घर से निकले थे, लेकिन घर नहीं पहुंचे। कुछ घंटे बाद उनकी बाइक पुराने अरपा पुल के पास खड़ी मिली, जबकि राहुल लापता थे।
22 घंटे बाद मिला शव, शरीर पर चोट के निशान
करीब 22 घंटे बाद राहुल का शव अरपा नदी में मिला। शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए, जिससे यह मामला और अधिक संदिग्ध हो गया। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह सामान्य दुर्घटना नहीं हो सकती — संभव है कि राहुल की मौत किसी अप्राकृतिक या आपराधिक कारण से हुई हो।
निष्पक्ष जांच और साक्ष्यों की पड़ताल की मांग
अधिवक्ताओं ने कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह से मुलाकात के दौरान कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्पेशल टीम गठित की जाए। उन्होंने मांग की कि सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स और घटनास्थल से मिले सभी साक्ष्यों की गहराई से जांच हो।
वकीलों ने यह भी कहा कि जांच में लापरवाही से न केवल मृतक के परिवार को न्याय नहीं मिलेगा, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठेंगे।
जानिए पूरा घटनाक्रम
भाटापारा निवासी राहुल अग्रवाल (30) पिता सुरेश अग्रवाल, पिछले 7-8 साल से मंगला के ग्रीन गार्डन कॉलोनी में रह रहे थे। गुरुवार को वे रोज की तरह हाईकोर्ट में पेशी के बाद अपने दोस्तों मुकेश राठिया और अभिषेक आचार्य से मिले। तीनों ने पहले ट्रांसपोर्ट नगर में पार्टी की, फिर मुकेश के मोपका स्थित घर पहुंचे। देर रात तक सब साथ थे, लेकिन अगले दिन सुबह तक राहुल अपने घर नहीं लौटे।
अगले दिन उनकी बाइक पुल के पास मिली और 22 घंटे बाद उनका शव नदी से बरामद किया गया। अब अधिवक्ताओं और परिवार का कहना है कि घटना के पीछे साजिश की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

