खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा घोषित पुरस्कार राशि का इंतजार अब भी खिलाड़ियों को है। घोषणा हुए दो महीने से अधिक समय बीत चुके हैं, लेकिन पदक विजेताओं के खातों में अब तक राशि नहीं पहुंची है। इससे खिलाड़ियों में निराशा बढ़ रही है।
25 मार्च से 3 अप्रैल तक छत्तीसगढ़ में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में प्रदेश के करीब 81 खिलाड़ियों ने विभिन्न व्यक्तिगत और टीम स्पर्धाओं में पदक जीते थे। समापन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत स्पर्धाओं में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक विजेताओं के लिए क्रमशः 2 लाख, 1.5 लाख और 1 लाख रुपये की पुरस्कार राशि देने की घोषणा की थी। वहीं टीम स्पर्धाओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए भी अलग-अलग प्रोत्साहन राशि घोषित की गई थी।

हालांकि, पुरस्कार वितरण की प्रक्रिया प्रशासनिक और वित्तीय नियमों के कारण अटक गई है। खेल विभाग ने राशि जारी करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर संबंधित विभागों को भेजा, लेकिन वित्त विभाग ने नियमों और बजट प्रावधानों का हवाला देते हुए फाइल वापस लौटा दी।
वित्त विभाग का कहना है कि मौजूदा बजट में इस पुरस्कार राशि के लिए अलग से प्रावधान नहीं है। साथ ही वर्तमान अधिसूचित योजनाओं में ट्राइबल गेम्स के पदक विजेताओं को इस प्रकार की राशि देने का उल्लेख भी नहीं किया गया है। ऐसे में स्पष्ट नियमों और वित्तीय स्वीकृति के बिना भुगतान संभव नहीं है।
जानकारी के अनुसार, खेल एवं युवा कल्याण विभाग अब नियमों में संशोधन की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि संशोधित प्रस्ताव जल्द ही दोबारा वित्त विभाग को भेजा जाएगा, जिसके बाद भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
मौजूदा क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना और मुख्यमंत्री की घोषणा के बीच कई विसंगतियां सामने आई हैं। वर्तमान योजना के तहत राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को निर्धारित और अपेक्षाकृत कम राशि दी जाती है, जबकि ट्राइबल गेम्स के लिए घोषित पुरस्कार राशि इससे कहीं अधिक है। इसके अलावा वर्तमान नियम आयु वर्ग और खिलाड़ी आधारित पात्रता पर केंद्रित हैं, जबकि ट्राइबल गेम्स में कई स्पर्धाएं ओपन कैटेगरी और टीम आधारित स्वरूप में आयोजित की गई थीं।
पुरस्कार राशि में देरी से खिलाड़ियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ट्राइबल गेम्स में कई पदक जीतने वाले खिलाड़ियों का कहना है कि कोचिंग, डाइट, उपकरण और प्रतियोगिताओं की तैयारी पर लगातार खर्च होता है। समय पर राशि मिल जाती तो उनकी तैयारियों को काफी मदद मिल सकती थी।
कुछ खिलाड़ियों ने बताया कि आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए उन्हें अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है, लेकिन पुरस्कार राशि नहीं मिलने के कारण वे आर्थिक दबाव में हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि देर से मिलने वाली सहायता कई बार अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाती।
अब सभी की नजरें नियम संशोधन और वित्त विभाग की मंजूरी पर टिकी हैं। खिलाड़ियों को उम्मीद है कि लंबित प्रक्रिया जल्द पूरी होगी और उन्हें घोषित पुरस्कार राशि प्राप्त हो सकेगी।

