छत्तीसगढ़ में पुलिस अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा में प्रमोशन मिलने में काफी देरी हो रही है। स्थिति यह है कि वर्ष 2002 बैच के अधिकारियों को लगभग 23 साल की सेवा के बाद अब जाकर IPS पदोन्नति दी गई है, जिससे राज्य इस मामले में देश में 19वें स्थान पर पहुंच गया है।
दूसरी ओर, कर्नाटक, गुजरात, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और सिक्किम जैसे राज्यों में बाद के बैच के अधिकारियों को भी पहले ही IPS प्रमोशन मिल चुका है। इससे साफ है कि अन्य राज्यों में प्रमोशन प्रक्रिया ज्यादा तेज है।
इस देरी को लेकर राज्य के पुलिस अधिकारियों में नाराजगी है। उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर कैडर रिव्यू कराने और IPS पदों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में कम से कम 60 नए IPS पद बढ़ाए जाने चाहिए ताकि प्रमोशन प्रक्रिया तेज हो सके।
राज्य में कई अहम पद अब भी स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं। रायपुर में कमिश्नर और पांच DCP पद मंजूर नहीं हुए हैं। वहीं नए जिले मोहला-मानपुर और सारंगढ़-बिलाईगढ़ में भी IPS स्तर के SP पद स्वीकृत नहीं किए गए हैं।
कैडर रिव्यू की प्रक्रिया भी समय पर पूरी नहीं हो पा रही है। नियम के अनुसार हर पांच साल में यह प्रक्रिया होनी चाहिए, लेकिन पिछले 25 साल में केवल चार बार ही कैडर रिव्यू हुआ है। वर्ष 2017 में 22 पदों के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें से सिर्फ 11 पदों को ही मंजूरी मिली।
जहां पुलिस विभाग में प्रमोशन की गति धीमी है, वहीं अन्य सेवाओं में स्थिति बेहतर है। भारतीय प्रशासनिक सेवा में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को करीब 13 साल में ही प्रमोशन मिल रहा है।
प्रमोशन में देरी के पीछे विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक का देर से होना, पदों की कमी और कैडर रिव्यू में देरी जैसे कारण सामने आ रहे हैं। अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह अक्सर जनवरी-फरवरी तक खिंच जाती है।

