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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हरिनाम संकीर्तन नामयज्ञ में हुए शामिल

रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित हरिनाम संकीर्तन नामयज्ञ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिनाम संकीर्तन जैसी परंपराएं भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन समाज में भाईचारे, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देते हैं। कार्यक्रम में विधायक Purandar Mishra समेत कई जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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रायपुर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन ठप, वेतन नहीं मिलने पर कर्मचारियों ने किया काम बंद

रायपुर में रविवार को डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही। कचरा उठाने वाली गाड़ियों के कर्मचारियों ने वेतन भुगतान नहीं होने के विरोध में काम बंद कर दिया, जिसके कारण शहर के कई इलाकों में घरों से कचरा नहीं उठ सका। कचरा कलेक्शन का जिम्मा संभाल रही रामकी ग्रुप के कर्मचारियों ने सुबह से ही गाड़ियां खड़ी कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। दलदल सिवनी क्षेत्र में बड़ी संख्या में कचरा गाड़ियां खड़ी नजर आईं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें हर महीने 7 तारीख तक वेतन मिल जाता था, लेकिन इस बार अब तक भुगतान नहीं किया गया है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वेतन में देरी की समस्या लगातार बनी हुई है। उनका कहना है कि पहले भी कई बार भुगतान समय पर नहीं मिला, जिससे आर्थिक परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। इसी वजह से मजबूर होकर काम बंद करना पड़ा। यह पहला मौका नहीं है जब सफाई व्यवस्था को लेकर रामकी ग्रुप और नगर निगम के बीच विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई थी। उस समय नगर निगम ने कंपनी पर करीब 18 लाख रुपए की कटौती और 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाने के निर्देश दिए थे। पूर्व समीक्षा बैठक में महापौर मीनल चौबे ने कंपनी अधिकारियों को बुलाकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि शहर की सफाई व्यवस्था से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में इस तरह की स्थिति बनने पर अनुबंध की शर्तों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम पहले ही यह साफ कर चुका है कि कंपनी को भुगतान कार्य की गुणवत्ता और संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर ही किया जाएगा। अधिकारियों को सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति में अनुबंध की समीक्षा के निर्देश भी दिए गए थे।

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10 साल बाद रायपुर में IPL का रोमांच, MI-RCB मुकाबले में टॉस निभा सकता है अहम भूमिका

करीब एक दशक बाद रायपुर एक बार फिर आईपीएल मुकाबलों की मेजबानी के लिए तैयार है। शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम में IPL 2026 का पहला मैच मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच खेला जाएगा। मैच को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और शनिवार शाम दोनों टीमों ने जमकर अभ्यास किया। हालांकि प्रैक्टिस के दौरान बारिश ने थोड़ी देर के लिए व्यवधान डाला। मौसम विभाग के अनुसार मैच के दिन शाम के समय बादल छाए रह सकते हैं और हल्की धूलभरी हवा चलने की संभावना है, लेकिन भारी बारिश के आसार नहीं हैं। ऐसे में मैच रद्द होने जैसी स्थिति बनने की संभावना कम मानी जा रही है। रायपुर के आईपीएल रिकॉर्ड पर नजर डालें तो यहां अब तक कुल 6 मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें 4 बार लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम ने जीत दर्ज की है। वहीं पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम केवल 2 मैच जीत सकी है। इससे साफ है कि यहां की पिच दूसरी पारी में बल्लेबाजों को ज्यादा मदद देती रही है। बारिश के बाद पिच और आउटफील्ड में हल्की नमी रहने की संभावना है। ऐसे में शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को सीम और स्विंग मिल सकती है। नई गेंद कुछ समय तक रुककर आने की भी संभावना है, जिससे बल्लेबाजों को शुरुआत में सतर्क रहना पड़ सकता है। क्रिकेट विशेषज्ञों के मुताबिक टॉस इस मुकाबले में अहम साबित हो सकता है। नमी को देखते हुए कप्तान पहले गेंदबाजी का फैसला कर सकते हैं ताकि शुरुआती मूवमेंट का फायदा उठाया जा सके। हालांकि मैच आगे बढ़ने के साथ बल्लेबाजी आसान हो सकती है। अगर पिच में नमी बरकरार रही तो स्पिन गेंदबाजों को भी मिडिल ओवर्स में टर्न और ग्रिप मिल सकती है। इससे बल्लेबाजों के लिए बड़े शॉट खेलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। रायपुर इससे पहले दिल्ली डेयरडेविल्स का सेकेंड होम वेन्यू रह चुका है। 2013, 2015 और 2016 में यहां कुल 6 आईपीएल मैच खेले गए थे। दिल्ली ने इनमें सबसे ज्यादा 4 मुकाबले जीते थे, जबकि सनराइजर्स हैदराबाद और RCB को एक-एक जीत मिली थी। मैच से पहले मुंबई इंडियंस के बल्लेबाज रोहित शर्मा ने नेट्स में लंबे समय तक बल्लेबाजी अभ्यास किया। वहीं जसप्रीत बुमराह ने गेंदबाजी और फिटनेस पर विशेष फोकस किया। दूसरी ओर RCB के ऑलराउंडर जेकब बेथेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि टीम रायपुर की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने पर ध्यान दे रही है और खिलाड़ी आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेंगे। 10 मई को MI और RCB के बीच मुकाबला खेला जाएगा, जबकि 13 मई को RCB का सामना कोलकाता नाइट राइडर्स से होगा। दोनों मैच शाम 7:30 बजे शुरू होंगे। मैच के मद्देनजर ट्रैफिक और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। दर्शकों को वैध टिकट या पास के साथ समय से पहले स्टेडियम पहुंचने की सलाह दी गई है। स्टेडियम में कई प्रतिबंधित वस्तुओं के साथ प्रवेश पर रोक रहेगी और पूरे परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जाएगी।

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मैग्नेटो मॉल पार्किंग में विवाद, इंफ्लूएंसर के भाई पर शिक्षक परिवार से बदसलूकी का आरोप

रायपुर के मैग्नेटो मॉल की पार्किंग में गाड़ी निकालने को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मामला पुलिस थाने तक पहुंच गया। सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर सोमा देवांगन के भाई रॉकी पर शिक्षक परिवार के साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और हॉकी स्टिक दिखाकर धमकाने के आरोप लगे हैं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पीड़िता धनिशा धीवर ने तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि वे 9 मई की रात अपने परिवार के साथ मैग्नेटो मॉल घूमने गई थीं। लौटते समय उनके परिवार की बोलेरो गाड़ी पार्किंग से निकल रही थी, तभी दूसरी कार में सवार रोहन, सोमा और गरिमा वहां पहुंचे। शिकायत के अनुसार, कार चालक रोहन ने गाड़ी से उतरते ही गोपेश साहू को “गांव का गंवार” कहते हुए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। आरोप है कि उसने यह भी कहा कि “ऐसे लोगों को मॉल में एंट्री कौन देता है।” पीड़ित परिवार का कहना है कि रोहन ने खुद को एक मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़ा बताते हुए रौब दिखाया। परिवार ने आरोप लगाया कि विवाद बढ़ने पर रोहन ने अपनी गाड़ी से हॉकी स्टिक निकाली और मारपीट की धमकी देने लगा। इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई, जिसमें गोपेश साहू और अरमान धीवर को चोट आई। घटना की सूचना मिलने पर तेलीबांधा पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराया। बाद में दोनों पक्षों ने थाने में एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस वायरल वीडियो और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच कर रही है। वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर सोमा देवांगन ने भी दूसरे पक्ष के खिलाफ शिकायत दी है। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद देर रात बजरंग दल के कार्यकर्ता भी तेलीबांधा थाने पहुंचे और शिक्षक परिवार के समर्थन में आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। इस बीच आरोपी रोहन की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें वह कथित तौर पर सटोरी बाबू खेमानी के साथ नजर आ रहा है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और वायरल वीडियो की सत्यता भी परखी जा रही है।

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गौ-तस्करी का ‘ट्रायंगल कॉरिडोर’ उजागर, छत्तीसगढ़ से ओडिशा होते हुए आंध्र तक पहुंच रहे मवेशी

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से संचालित हो रहे कथित गौ-तस्करी नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। देवभोग क्षेत्र से ओडिशा सीमा के रास्ते गाय-बैलों को बड़े पैमाने पर बाहर भेजे जाने का मामला सामने आया है। जांच और स्थानीय जानकारी के मुताबिक यह नेटवर्क छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्रप्रदेश को जोड़ते हुए संगठित तरीके से काम कर रहा है। देवभोग से करीब 8 किलोमीटर दूर ओडिशा सीमा शुरू होती है। यहां बीजू एक्सप्रेस-वे के आसपास रात के समय बड़ी संख्या में गाय-बछड़ों के साथ संदिग्ध लोग देखे गए। पूछताछ में उन्होंने खुद को किसान बताया और मवेशियों को धरमगढ़ बाजार ले जाने की बात कही। स्थानीय लोगों के अनुसार ओडिशा के कालाहांडी जिले के धरमगढ़ में हर शुक्रवार बड़ा मवेशी बाजार लगता है, जहां हजारों की संख्या में गाय-बैल खरीदे और बेचे जाते हैं। आरोप है कि यहां से अधिकांश मवेशियों को आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के कसाईघरों तक पहुंचाया जाता है। जानकारी के मुताबिक तस्करी का नेटवर्क गांव स्तर तक फैला हुआ है। एजेंट सीमावर्ती गांवों में घूमकर बूढ़े और कमजोर मवेशियों को 1000 से 1500 रुपए में खरीदते हैं। बाद में इन्हें समूह बनाकर बाजार पहुंचाया जाता है। आरोप है कि एक एजेंट हर सप्ताह दर्जनों मवेशियों की खरीद-बिक्री करता है। धरमगढ़ मवेशी मंडी के बाहर लग्जरी वाहनों की मौजूदगी ने भी संदेह बढ़ाया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि बाजार में किसान कम और बड़े सप्लायर व दलाल ज्यादा सक्रिय रहते हैं। यही लोग मवेशियों को आगे ट्रकों और जंगल के रास्तों से आंध्रप्रदेश तक पहुंचाते हैं। बताया जा रहा है कि मवेशियों को सीधे वाहनों में नहीं ले जाया जाता, बल्कि चरणबद्ध तरीके से पैदल सीमा पार कराई जाती है। इसके लिए अलग-अलग टीमों में मजदूर लगाए जाते हैं, जो जंगल और घाटी वाले रास्तों से मवेशियों को आगे बढ़ाते हैं ताकि पुलिस कार्रवाई से बचा जा सके। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 1500 रुपए में खरीदे गए मवेशियों को आंध्र सीमा तक पहुंचाकर 4000 रुपए तक में बेचा जाता है। बूढ़े और कमजोर पशुओं को छोटे वाहनों से भी ले जाया जाता है। पुलिस को शक है कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरतों के लिए ओडिशा पर निर्भरता का फायदा अब तस्करी नेटवर्क उठा रहा है। उनका आरोप है कि सीमा पर प्रभावी निगरानी और संयुक्त कार्रवाई नहीं होने से यह अवैध कारोबार लगातार बढ़ रहा है। गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने कहा कि उन्हें फिलहाल मवेशी तस्करी की जानकारी नहीं है। यदि ऐसे मामले सामने आते हैं तो जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं गरियाबंद एसपी नीरज चंद्राकर ने दावा किया कि पुलिस लगातार निगरानी कर रही है और सीमावर्ती इलाकों में चौकसी बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर कार्रवाई भी की जा रही है।

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महासमुंद गैस घोटाले में बड़ा खुलासा, खाद्य अधिकारी निकला सिंडिकेट का मास्टरमाइंड

महासमुंद जिले में जब्त एलपीजी गैस कैप्सूल ट्रकों से करोड़ों रुपए की गैस गायब होने के मामले में पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव इस पूरे गैस सिंडिकेट का मुख्य संचालक था। पुलिस का दावा है कि अधिकारियों, गैस एजेंसी संचालकों और कारोबारियों की मिलीभगत से करीब 92 टन एलपीजी गैस का गबन किया गया। पुलिस के अनुसार खाद्य अधिकारी अजय यादव ने गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर, रायपुर निवासी मनीष चौधरी और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर करीब डेढ़ करोड़ रुपए कीमत की गैस का अवैध कारोबार किया। मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर समेत अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। जांच में सामने आया कि दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। सुरक्षा कारणों से इन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग को दी गई थी। इसी दौरान गैस निकालने की योजना तैयार की गई। पुलिस के मुताबिक 23 मार्च 2026 को आरंग के एक ढाबे में आरोपियों की बैठक हुई, जहां गैस बेचने की डील तय की गई। इसके बाद 26 मार्च को ट्रकों में मौजूद गैस का आकलन किया गया। ट्रकों में करीब 102 से 105 मीट्रिक टन एलपीजी होने की जानकारी सामने आई थी। जांच में पता चला कि ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के साथ करीब 80 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। 30 मार्च को खाद्य विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में छह गैस कैप्सूल ट्रकों को सुपुर्दनामा पर लेकर अभनपुर स्थित प्लांट पहुंचाया गया। पुलिस का कहना है कि इसके बाद सुनियोजित तरीके से ट्रकों से गैस निकाली गई। 31 मार्च, 1 अप्रैल और 5 अप्रैल की रात अलग-अलग कैप्सूलों से गैस खाली की गई और तीन दिनों में करीब 92 टन एलपीजी गायब कर दी गई। यह गैस निजी टैंकरों, बुलेट टैंकों और विभिन्न एजेंसियों में सप्लाई की गई। जांच में यह भी सामने आया कि ट्रकों का वजन जानबूझकर देर से कराया गया ताकि गैस पहले ही निकाली जा सके। पांच ट्रकों का वजन 6 अप्रैल और आखिरी ट्रक का वजन 8 अप्रैल को कराया गया, तब तक अधिकांश कैप्सूल खाली हो चुके थे। दस्तावेजों की जांच में पुलिस को कालाबाजारी के सबूत भी मिले हैं। रिकॉर्ड के अनुसार ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स ने अप्रैल में केवल 47 टन गैस खरीदी, जबकि बिक्री 107 टन दिखाई गई। इससे साफ हुआ कि बड़ी मात्रा में बिना वैध खरीदी के गैस बेची गई। पुलिस ने यह भी दावा किया कि आरोपियों ने जांच को गुमराह करने और पूरे मामले का ठीकरा पुलिस पर फोड़ने की योजना बनाई थी। अप्रैल महीने के रिकॉर्ड और एंट्री रजिस्टर गायब पाए गए, जिससे साक्ष्य मिटाने की कोशिश की पुष्टि हुई। महासमुंद पुलिस की 40 सदस्यीय टीम ने 15 दिनों तक तकनीकी जांच, कॉल डिटेल, दस्तावेज विश्लेषण और पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। फिलहाल मामले में बीएनएस और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई जारी है।

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प्रति एकड़ एक बोरी यूरिया-डीएपी देने के फैसले पर भड़का किसान संगठन, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

खरीफ सीजन 2026-27 से पहले छत्तीसगढ़ में खाद वितरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन ने राज्य सरकार की नई व्यवस्था का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पाएगी और उन्हें निजी दुकानों पर निर्भर होना पड़ेगा। यूनियन के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि सरकार ने सहकारी समितियों में खाद और नगद वितरण का अनुपात बदल दिया है। पहले किसानों को 40 प्रतिशत उर्वरक और 60 प्रतिशत नगद राशि दी जाती थी, जबकि अब इसे 30 प्रतिशत उर्वरक और 70 प्रतिशत नगद कर दिया गया है। उनका कहना है कि इस बदलाव से समितियों में खाद की उपलब्धता कम हो जाएगी। किसान संगठन का आरोप है कि खाद की कमी होने पर किसानों को निजी दुकानों से ज्यादा कीमत पर यूरिया और डीएपी खरीदनी पड़ेगी। साथ ही निजी विक्रेता किसानों पर अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव भी बनाते हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता है। तेजराम विद्रोही ने सरकार के प्रति एकड़ एक बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी देने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल समय पर खाद नहीं मिलने की वजह से धान उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत तक गिरावट आई थी और इस बार स्थिति और गंभीर हो सकती है। किसान यूनियन ने सरकार की नीति को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि सीमित खाद वितरण से उत्पादन घटेगा, जिससे समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का दबाव भी कम हो जाएगा। संगठन ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

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रायगढ़ में कुत्तों के हमले से कोटरी की मौत: पानी की तलाश में गांव पहुंचा था वन्यप्राणी

Raigarh जिले में पानी की तलाश में जंगल से बस्ती की ओर पहुंचे एक कोटरी (हिरण प्रजाति) की कुत्तों के हमले के बाद मौत हो गई। घायल हालत में वन विभाग ने उसे जंगल में छोड़ा था, लेकिन बाद में वह मृत मिला। मामला रायगढ़ वन परिक्षेत्र के चिराईपानी इलाके का है। जानकारी के अनुसार जंगल में पानी की कमी के कारण कोटरी भटकते हुए गांव तक पहुंच गया था। इसी दौरान कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। जान बचाने के लिए वह ग्रामीण Manoj Dansena के घर के आंगन में घुस गया, लेकिन कुत्ते लगातार उसका पीछा करते रहे। ग्रामीणों ने लाठी-डंडों की मदद से कुत्तों को वहां से भगाया। बताया जा रहा है कि हमले में कोटरी के पिछले पैरों में गंभीर चोटें आई थीं और वह बेहद डरा हुआ था। घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वन अमले ने घायल वन्यप्राणी का पशु चिकित्सक से प्राथमिक उपचार कराया और बाद में उसे देलारी जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया। विभाग की टीम उसकी निगरानी भी कर रही थी, लेकिन शाम के समय निरीक्षण के दौरान वह मृत अवस्था में मिला। इसके बाद शव को सुरक्षित स्थान पर रखा गया और अगले दिन पशु चिकित्सकों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया। नियमानुसार वन विभाग द्वारा अंतिम प्रक्रिया पूरी की गई। रायगढ़ रेंजर Sanjay Lakda ने बताया कि कोटरी काफी संवेदनशील वन्यप्राणी होता है। हमले और डर की वजह से उसकी हालत बिगड़ गई थी, जिसके चलते उसकी मौत हो गई।

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गर्भवती महिला ने ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना का लगाया आरोप, पति-सास-ससुर के खिलाफ FIR दर्ज

Durg जिले के नंदिनी माइंस अहिवारा क्षेत्र की रहने वाली Shilpa Goswami ने अपने पति, सास और ससुर पर दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता चार महीने की गर्भवती है और उसका आरोप है कि पति उसे किराए के मकान में अकेला छोड़कर चला गया। महिला थाना भिलाई नगर में दर्ज शिकायत के अनुसार, शादी के शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य था, लेकिन कुछ समय बाद ससुराल पक्ष का व्यवहार बदल गया। महिला ने आरोप लगाया कि पति Siddharth Giri, ससुर Ishwar Giri और सास Rekha Goswami दहेज को लेकर लगातार ताने देते थे। पीड़िता का कहना है कि उस पर सोने का ब्रेसलेट, कूलर और बड़ा टीवी नहीं लाने को लेकर दबाव बनाया जाता था। उसने शिकायत में बताया कि ससुराल वाले अक्सर कहते थे कि कहीं और शादी होती तो ज्यादा दहेज मिलता। महिला ने आरोप लगाया कि समय के साथ मानसिक प्रताड़ना बढ़कर शारीरिक और भावनात्मक उत्पीड़न में बदल गई। गर्भावस्था के दौरान भी उसका ध्यान नहीं रखा गया और न ही दवाइयों की व्यवस्था की गई। उसने यह भी आरोप लगाया कि पति कई बार तलाक देने और दूसरी शादी कर ज्यादा दहेज लाने की धमकी देता था। शिकायत के मुताबिक विवाद बढ़ने पर पहले महिला परामर्श केंद्र में दोनों पक्षों की काउंसलिंग भी हुई थी। समझौते के बाद दंपति खपरी इलाके में किराए के मकान में रहने लगे, लेकिन वहां भी विवाद जारी रहा। आरोप है कि 27 अप्रैल की रात पति ने फिर विवाद किया और गर्भवती पत्नी को अकेला छोड़कर चला गया। इसके बाद महिला अपने भाई के साथ Dhamtari जिले के ग्राम जुगदेही स्थित रिश्तेदारों के घर चली गई। पीड़िता का कहना है कि लगातार प्रताड़ना के कारण वह मानसिक रूप से टूट चुकी थी। Chhattisgarh Police ने शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर पति, सास और ससुर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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बिलासपुर के पचपेड़ी इलाके में दिखा भालू, VIDEO वायरल: ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग अलर्ट

Bilaspur जिले के पचपेड़ी परिक्षेत्र में भालू दिखाई देने से ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया है। शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे पचपेड़ी और ध्रुवाकारी गांव के बीच नहर किनारे घूम रहे लोगों ने अचानक जंगली भालू को देखा, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने सतर्कता दिखाते हुए भालू को आबादी वाले क्षेत्र की ओर आने से रोकने की कोशिश की। इसके बाद भालू केवंतरा और सुकुलकारी गांव की तरफ बढ़ते हुए भरारी जंगल की दिशा में चला गया। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इलाके में लगातार निगरानी की जा रही है। डिप्टी रेंजर Baghel ने बताया कि भालू की लोकेशन ट्रैक करने के लिए टीम जंगल और आसपास के क्षेत्रों में सर्च अभियान चला रही है। भालू के मिलने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। खेतों में काम करने वाले किसानों और सुबह-शाम बाहर निकलने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। विभाग ने साफ कहा है कि किसी भी स्थिति में भालू के पास जाने या उसे उकसाने की कोशिश न करें और तुरंत वन अमले को सूचना दें।

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