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रायपुर में GST रेड: कारोबारियों के 4 ठिकानों पर छापा, फर्जी बिलिंग के सुराग

रायपुर में GST की बड़ी कार्रवाई राजधानी रायपुर में गुरुवार सुबह राज्य GST विभाग ने भैंसथान स्थित अन्नपूर्णा कॉम्प्लेक्स में छापेमारी की। अधिकारियों की टीम लक्ष्मी कमर्शियल और एसआरएस ट्रेडर्स नाम की फर्मों से जुड़े चार अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि करीब 10 अधिकारियों ने समन्वित तरीके से दबिश देकर दस्तावेजों और कारोबारी रिकॉर्ड की जांच शुरू की। फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी की शिकायत सूत्रों के अनुसार, इन फर्मों के खिलाफ फर्जी बिलिंग और GST चोरी की शिकायत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई। छापे के दौरान बड़ी मात्रा में कागजात, बिल, कंप्यूटर डेटा और लेनदेन से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में संदिग्ध बिलिंग और भारी टैक्स चोरी के संकेत मिलने की बात सामने आ रही है। संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जांच जारी अधिकारियों को कई संदिग्ध लेनदेन एंट्री भी मिली हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जा रही है। फिलहाल विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। दस्तावेजों के विश्लेषण और जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले का पूरा खुलासा होने की संभावना है।

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छात्रों के स्क्रीन टाइम पर सख्ती: Karnataka सरकार का ड्राफ्ट—मनोरंजन के लिए रोज 1 घंटा, शाम 7 बजे बाद इंटरनेट बंद

Karnataka सरकार ने 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के डिजिटल उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नई ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की है। इसमें पढ़ाई के अलावा मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम प्रतिदिन अधिकतम 1 घंटा रखने की सिफारिश की गई है। साथ ही शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट बंद करने का सुझाव भी दिया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि बच्चों को सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल या स्क्रीन से दूर रखा जाए। मोबाइल में ‘चाइल्ड प्लान’ लागू करने की सलाह दी गई है, जिसमें सीमित इंटरनेट और ऑडियो-ओनली जैसे विकल्प शामिल होंगे। उम्र के अनुसार सुरक्षित डिवाइस और ऑपरेटिंग सिस्टम विकसित करने की भी बात कही गई है। सरकार का कहना है कि लगभग 25 प्रतिशत किशोर इंटरनेट की लत से प्रभावित हैं, जिससे नींद की कमी, चिंता और एकाग्रता में गिरावट जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसी को देखते हुए यह पहल की गई है। ड्राफ्ट के अनुसार स्कूलों में डिजिटल वेल-बीइंग, ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर बुलिंग और प्राइवेसी जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। टेक-फ्री पीरियड, डिजिटल डिटॉक्स डे और व्हाट्सऐप की जगह डायरी के माध्यम से संवाद जैसे कदम भी सुझाए गए हैं। इसके अलावा स्कूलों में काउंसलिंग व्यवस्था मजबूत करने, शिक्षकों को डिजिटल लत के संकेत पहचानने की ट्रेनिंग देने और अभिभावकों की सक्रिय भूमिका तय करने पर भी जोर दिया गया है। AI के उपयोग पर भी अलग दिशा-निर्देश बनाने की बात कही गई है। यह ड्राफ्ट स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और National Institute of Mental Health and Neurosciences सहित कई संस्थानों के सहयोग से तैयार किया गया है।

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जश्न के शोर से रुकी कोर्ट की कार्यवाही, वकील और जज के बीच तीखी बहस; Bhavnagar का मामला

Gujarat के Bhavnagar जिला कोर्ट परिसर में बार एसोसिएशन चुनाव जीतने के बाद निकाले जा रहे जुलूस ने कोर्ट की कार्यवाही बाधित कर दी। इस दौरान विजयी वकील और जिला जज के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। बताया गया कि अधिवक्ता अनिरुद्धसिंह झाला तीसरी बार चुनाव जीतने के बाद समर्थकों के साथ ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मना रहे थे। तेज शोर के कारण अदालत की सुनवाई प्रभावित हुई तो जिला जज एच.एस. मूलिया कोर्ट रूम से बाहर आ गए और शोर कम करने को कहा। जज की आपत्ति पर वकील भड़क उठे और उनसे उलझ गए। कथित तौर पर उन्होंने जज से कहा कि आप अपनी कुर्सी संभालिए और हमें जश्न मनाने दीजिए। स्थिति बिगड़ती देख अन्य वकीलों ने बीच-बचाव कर जज को वापस अंदर ले जाया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। बताया जा रहा है कि जश्न का माहौल होने के कारण बातचीत तीखी हो गई। इस मामले को लेकर गुजरात न्यायिक सेवा संघ ने अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संघ ने हाईकोर्ट और बार काउंसिल को पत्र लिखकर इसे न्यायालय की गरिमा के खिलाफ बताते हुए अवमानना की कार्यवाही करने की अपील की है।

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GUJARAT, Political, State, Top News

शादी के बाद पत्नी वंशिका संग वृंदावन पहुंचे Kuldeep Yadav, Banke Bihari Temple में गुपचुप किए दर्शन

Vrindavan में मंगलवार शाम दोनों ने शांत और गोपनीय तरीके से भगवान के दर्शन किए। उन्होंने मंदिर की चौखट पर इत्र चढ़ाकर सेवा की और ठाकुरजी को छप्पन भोग अर्पित किया। उनके आगमन की जानकारी पहले से सार्वजनिक नहीं की गई थी, इसलिए किसी को इसकी भनक नहीं लगी। फोटो और वीडियो सामने आने के बाद ही लोगों को इस बारे में पता चला। मंदिर में करीब 25 मिनट तक पूजा-अर्चना करने के बाद दोनों वहां से रवाना हो गए। बता दें कि कुलदीप और वंशिका की शादी 14 मार्च को मसूरी में हुई थी। इसके बाद लखनऊ के The Centrum में भव्य रिसेप्शन आयोजित किया गया, जिसमें Yogi Adityanath और Akhilesh Yadav समेत कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। कुलदीप और वंशिका बचपन के दोस्त हैं और लंबे समय की दोस्ती बाद में रिश्ते में बदल गई।

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महिला सहकारिता सम्मेलन में जुटीं 800 से अधिक प्रतिनिधि, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने मातृशक्ति की भूमिका बताई अहम

Sahakar Bharati छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय महिला सहकारिता सम्मेलन Prajapita Brahma Kumaris Ishwariya Vishwa Vidyalaya के सेक्टर-7 स्थित परिसर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आईं 800 से ज्यादा महिला प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिससे महिला-आधारित सहकारिता गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी का संकेत मिला। मुख्य अतिथि मंत्री Lakshmi Rajwade ने कहा कि मातृशक्ति आज हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही है। उन्होंने महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण में सहकारिता की अहम भूमिका बताते हुए कहा कि शासन की योजनाएं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक बन रही हैं। पंच परिवर्तन पर दिया गया जोर सम्मेलन में राष्ट्रीय महिला प्रमुख Revati Tai Shendurnikar ने सहकारिता से जुड़े विभिन्न कार्यों की जानकारी दी और “पंच परिवर्तन” — स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, परिवार जागरण और नागरिक कर्तव्य — के महत्व को रेखांकित किया। दो सत्रों में आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से सहकारिता आंदोलन को और मजबूत करने के लिए विचार-विमर्श किया गया तथा भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई। कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद इस अवसर पर Asha Didi, विधायक Rikesh Sen, समाजसेवी Rajni Vijay Baghel सहित अनेक पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। संगठन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रादेशिक दायित्वों की घोषणा भी की गई। इनमें महिला प्रकोष्ठ प्रदेश संयोजक के रूप में स्मिता दोड़के, सह-संयोजक पूजा पांडे, एफपीओ प्रदेश संयोजक डॉ. अनुज नारद, दुर्ग संभाग संयोजक दीपक मिश्रा तथा मत्स्य प्रकोष्ठ महिला संयोजक अंजू मटियारा को जिम्मेदारी सौंपी गई।

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बिलासपुर में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बीच लापरवाही, कॉलोनी के पास फेंके गए मरे मुर्गे; संक्रमण का खतरा बढ़ा

Bilaspur जिले में हजारों मुर्गियों की मौत के बाद बर्ड फ्लू की पुष्टि होने से हड़कंप मच गया है। इस बीच प्रशासनिक लापरवाही का मामला भी सामने आया है। Khamtarai क्षेत्र की ड्रीम सिटी कॉलोनी के पास 30–35 मरे हुए मुर्गे फेंके हुए मिले, जिससे आसपास के लोग बदबू और संभावित संक्रमण को लेकर परेशान हैं। प्रशासन ने दावा किया था कि मृत पक्षियों को सुरक्षित तरीके से दफनाया गया है, लेकिन कॉलोनी के पास बोरियों में बंद मुर्गियां मिलने से सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने तुरंत इन्हें हटाने और क्षेत्र को सैनिटाइज करने की मांग की है। सरकारी पोल्ट्री फार्म में हुई थी हजारों पक्षियों की मौत जानकारी के अनुसार, Koni स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में पिछले पांच दिनों के भीतर 5 हजार से अधिक मुर्गे-मुर्गियों की मौत हो गई थी। जांच के लिए भेजे गए नमूनों में संक्रमण की पुष्टि हुई, जिसके बाद पूरे फार्म को एहतियातन बंद कर दिया गया। संभावित खतरे को देखते हुए आसपास के जिलों, विशेषकर Raigarh में भी अलर्ट जारी किया गया है। सरकार संचालित है पोल्ट्री परिसर कोनी स्थित कुक्कुट पालन परिसर का संचालन सरकार द्वारा किया जाता है। यहां अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसानों को मुर्गी पालन के लिए चूजे उपलब्ध कराए जाते हैं। परिसर में लगभग 6 हजार से अधिक पक्षियों का पालन और प्रजनन किया जाता है। 18 मार्च से शुरू हुई मौतें बताया गया है कि 18 मार्च से पोल्ट्री शेड में पक्षियों की मौत शुरू हुई थी। शुरुआती दिनों में संख्या कम थी, लेकिन कुछ ही दिनों में यह तेजी से बढ़ गई और पांच दिनों में हजारों पक्षी मर गए। पहले इसे सामान्य बीमारी माना गया, लेकिन मौतें बढ़ने पर वरिष्ठ अधिकारियों और जिला प्रशासन को सूचना दी गई। संवेदनशील क्षेत्र घोषित, फिर भी लापरवाही घटना के बाद फार्म के आसपास 5 किलोमीटर के दायरे को संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया और हजारों अंडों सहित मृत पक्षियों को नष्ट किया गया। इसके बावजूद कॉलोनी के पास नाली में बोरियों में भरे मुर्गे मिलने से लोगों में डर का माहौल है। पहले भी सामने आ चुका है मामला फरवरी 2025 में भी Raigarh जिले के एक सरकारी पोल्ट्री फार्म में एच5एन1 बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। उस समय एहतियात के तौर पर हजारों मुर्गियां, चूजे और अंडे नष्ट किए गए थे तथा प्रभावित क्षेत्र में पोल्ट्री उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई गई थी।

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Bilaspur, Chhattisgarh, Health, Political, State, Top News

रामावतार जग्गी हत्याकांड फिर खुला, हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई शुरू; 1 अप्रैल को अंतिम बहस

छत्तीसगढ़ के चर्चित Ramavatar Jaggi murder case की सुनवाई एक बार फिर शुरू हो गई है। Supreme Court of India के निर्देश पर Chhattisgarh High Court में मामले को दोबारा खोला गया है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई, जिसमें मृतक के पुत्र सतीश जग्गी भी मौजूद रहे। अदालत ने अंतिम सुनवाई के लिए 1 अप्रैल की तारीख तय की है। इससे पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दो वर्ष पूर्व दोषियों की अपील खारिज करते हुए आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। बाद में सीबीआई की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दोबारा हाईकोर्ट भेजते हुए कहा कि केस की मेरिट पर विस्तार से सुनवाई की जाए। हत्या के बाद जांच CBI को सौंपी गई थी हत्या के बाद शुरुआती पुलिस जांच पर पक्षपात के आरोप लगे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच Central Bureau of Investigation को सौंप दी। सीबीआई ने अपनी जांच में पूर्व मुख्यमंत्री Ajit Jogi के पुत्र Amit Jogi सहित कई लोगों पर हत्या और साजिश का आरोप लगाया था। 2003 में हुई थी गोली मारकर हत्या 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए, जबकि Amit Jogi को छोड़कर शेष आरोपियों को सजा सुनाई गई। हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ मृतक के पुत्र सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। बाद में सर्वोच्च अदालत ने मामले को पुनः हाईकोर्ट भेज दिया। सतीश जग्गी का आरोप — राजनीतिक साजिश हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सतीश जग्गी की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि हत्या एक प्रायोजित साजिश थी और जांच के दौरान सबूतों से छेड़छाड़ की गई। उनका कहना था कि इस मामले में केवल प्रत्यक्ष सबूत ही नहीं, बल्कि साजिश की पूरी पृष्ठभूमि पर विचार करना जरूरी है। कौन थे रामावतार जग्गी व्यवसाय से जुड़े रामावतार जग्गी पूर्व केंद्रीय मंत्री Vidyacharan Shukla के करीबी सहयोगी थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर Nationalist Congress Party में शामिल हुए, तब जग्गी भी उनके साथ चले गए और उन्हें छत्तीसगढ़ में पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया। सियासी पृष्ठभूमि भी रही अहम छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव हो रहे थे। उस समय मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में खींचतान चल रही थी। बाद में Ajit Jogi के मुख्यमंत्री बनने से नाराज होकर Vidyacharan Shukla ने पार्टी छोड़ दी और एनसीपी में शामिल हो गए। बताया जाता है कि 2003 विधानसभा चुनाव से पहले एनसीपी का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा था और एक बड़ी रैली की तैयारी चल रही थी, जिसमें Sharad Pawar समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल होने वाले थे। इसी राजनीतिक माहौल के बीच रामावतार जग्गी की हत्या ने प्रदेश की राजनीति को हिला दिया था।

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उद्घाटन से पहले ही तैयारियों पर सवाल: मंत्री के सामने पनीर, जाते ही खिलाड़ियों को मिला आलू

देश के पहले ट्राइबल गेम्स की मेजबानी कर रहे छत्तीसगढ़ में उद्घाटन से पहले व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ उपमुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री Arun Sao मीडिया के सामने तैयारियों को संतोषजनक बता रहे थे, वहीं दूसरी ओर अंदर खिलाड़ियों को पूरा भोजन तक नहीं मिल पाया। जानकारी के अनुसार, जब मंत्री डोम में लगे कैटरिंग की जांच कर रहे थे, तब खिलाड़ियों को पनीर की सब्जी परोसी जा रही थी। लेकिन उनके जाते ही मेन्यू बदल गया और पनीर की जगह आलू की सब्जी दी जाने लगी। कई खिलाड़ियों ने अधूरा भोजन मिलने की शिकायत की। महाराष्ट्र से आए खिलाड़ियों ने व्यवस्थाओं को ठीक बताया, लेकिन भोजन की मात्रा कम होने की बात कही। रोटी के लिए भी खिलाड़ियों को इंतजार करना पड़ा। इस आयोजन में देशभर से तीन हजार से अधिक खिलाड़ी और अधिकारी शामिल हो रहे हैं, लेकिन मैदान में बुनियादी सुविधाओं को लेकर अव्यवस्था दिखाई दी। ड्यूटी चार्ट नहीं, भोजन के लिए भी भटकते कर्मचारी आयोजन से एक दिन पहले तक मीडिया के एक्रेडिटेशन कार्ड तैयार नहीं हो सके थे। कई विभागों के बीच समन्वय की कमी साफ नजर आई। स्कूल शिक्षा विभाग से तैनात 50 से अधिक पीटीआई बिना ड्यूटी चार्ट के काम करते दिखे। कुछ कर्मचारियों को भोजन तक नहीं मिला, जबकि खाने के लिए भी पहले मैनेजर से अनुमति लेने को कहा जा रहा था। पीने के पानी की व्यवस्था में भी असमानता की शिकायतें सामने आईं। सरकार का दावा — तैयारियां पूरी खेल मंत्री Arun Sao ने कहा कि नेशनल ट्राइबल गेम्स का उद्घाटन बुधवार शाम Raipur में होगा और तैयारियां अंतिम चरण में हैं। देश के 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से खिलाड़ी इसमें भाग लेंगे। कुश्ती और मलखंब प्रतियोगिताएं Ambikapur में, जबकि एथलेटिक्स स्पर्धाएं Jagdalpur में आयोजित होंगी। अधिकारियों के अनुसार खिलाड़ियों के ठहरने, भोजन और परिवहन की व्यवस्था पूरी कर ली गई है। अब तक 500 से अधिक खिलाड़ी रायपुर पहुंच चुके हैं और Sports Authority of India के अधिकारी भी व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के लगभग 180 स्थानीय खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

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चुंगी क्षतिपूर्ति के सहारे चल रहे निकाय, 125 करोड़ मिलने के बाद भी आत्मनिर्भरता दूर

प्रदेश के नगरीय निकायों को मार्च माह के लिए राज्य सरकार ने चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि जारी कर दी है, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश निकाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो पाए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी शहरी निकायों को कुल 9.48 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। इसमें 14 नगर निगमों को 6.23 करोड़ रुपये मिले, जबकि Raipur नगर निगम को अकेले 3.36 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसके अलावा 56 नगर पालिकाओं को 1.83 करोड़ और नगर पंचायतों को 1.41 करोड़ रुपये दिए गए हैं। यह राशि निकायों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसी से कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन भुगतान होता है। हर साल मिलती है भारी सहायता अधिकारियों के अनुसार राज्य सरकार हर वर्ष लगभग 252 करोड़ रुपये चुंगी क्षतिपूर्ति के रूप में देती है। हालांकि पेंशन अंशदान, परिवार कल्याण और अन्य मदों में कटौती के बाद निकायों को करीब 125 करोड़ रुपये ही वास्तविक रूप से मिल पाते हैं। कटौती के बाद हर महीने औसतन लगभग 10 करोड़ रुपये निकायों में बांटे जाते हैं। आय बढ़ाने के प्रयास कमजोर चुंगी (ऑक्ट्रॉय) समाप्त होने के बाद निकायों को नुकसान से बचाने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई थी, ताकि वे अपने खर्च पूरे कर सकें और धीरे-धीरे खुद के आय स्रोत विकसित करें। लेकिन अधिकांश निकाय आज भी सरकार से मिलने वाली राशि पर ही निर्भर हैं। इनकी आय मुख्य रूप से संपत्ति कर, दुकान किराया और जुर्माने तक सीमित है। नए राजस्व स्रोत विकसित न होने के कारण कई निकायों को कर्मचारियों की तनख्वाह देने के लिए भी सरकारी सहायता का इंतजार करना पड़ता है। कुछ ही निगम आर्थिक रूप से मजबूत प्रदेश के 14 नगर निगमों में से केवल Raipur और Bilaspur नगर निगम ही अपने स्थापना खर्च का बड़ा हिस्सा स्वयं के राजस्व से पूरा कर पा रहे हैं। रायपुर नगर निगम ने पिछले वर्ष लगभग 300 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जबकि उसका वार्षिक खर्च करीब 250 करोड़ रुपये है। इस खर्च में कर्मचारियों का वेतन, प्लेसमेंट स्टाफ का भुगतान, सफाई व्यवस्था और वाहन संचालन शामिल है। इसी तरह बिलासपुर नगर निगम ने करीब 90 करोड़ रुपये की आय जुटाई, जबकि उसका खर्च लगभग 80 करोड़ रुपये रहा। ग्रीन बॉण्ड जारी करने की तैयारी रायपुर नगर निगम जल्द ही लगभग 100 करोड़ रुपये का ग्रीन बॉण्ड जारी करने की तैयारी में है। नगरीय प्रशासन विभाग के अनुसार अन्य नगर निगमों को भी शामिल कर संयुक्त बॉण्ड जारी करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है, ताकि विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाए जा सकें।

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31 मार्च से पहले प्रॉपर्टी टैक्स जमा करें, नहीं तो होगी सीलिंग और कुर्की — 17% अतिरिक्त शुल्क भी लगेगा

Raipur Municipal Corporation ने प्रॉपर्टी टैक्स बकायेदारों को सख्त चेतावनी दी है कि 31 मार्च 2026 से पहले अपना पूरा बकाया जमा कर दें। तय समय सीमा के बाद निगम द्वारा सीलबंदी, कुर्की और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बकाया राशि पर 17 प्रतिशत अतिरिक्त अधिभार भी वसूला जाएगा। नगर निगम के राजस्व विभाग ने बड़े बकायेदारों से तुरंत भुगतान करने की अपील की है, ताकि कार्रवाई से बचा जा सके। आम नागरिकों से भी समय पर टैक्स जमा करने को कहा गया है, जिससे अतिरिक्त शुल्क न देना पड़े। नागरिकों की सुविधा के लिए निगम के सभी 10 जोन कार्यालयों के राजस्व विभाग 31 मार्च तक छुट्टियों में भी खुले रहेंगे। 26 मार्च (रामनवमी), 28 और 29 मार्च (शनिवार-रविवार) तथा 31 मार्च (महावीर जयंती) के दिन भी टैक्स जमा किया जा सकेगा। ऑनलाइन भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध है। नागरिक Mor Raipur ऐप या नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से घर बैठे संपत्ति कर जमा कर सकते हैं। निगम ने लोगों से ऑनलाइन सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की है।

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