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​नागपुर में हाल ही में हुई हिंसा के दौरान, ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की गंभीर घटनाएं सामने आई हैं।

​नागपुर में हाल ही में हुई हिंसा के दौरान, ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। एफआईआर के अनुसार, उपद्रवियों ने महिला पुलिसकर्मियों के साथ अश्लील हरकतें कीं, उनकी वर्दी खींचने की कोशिश की और अभद्र इशारे एवं टिप्पणियां कीं। ​ यह हिंसा 17 मार्च को उस समय भड़की जब छत्रपति संभाजीनगर जिले में औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान औरंगजेब का प्रतीकात्मक पुतला जलाया गया, जिससे तनाव बढ़ गया। इसके बाद, नागपुर के महल क्षेत्र में 500 से अधिक लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई, जिन्होंने पुलिस पर पथराव किया, पेट्रोल बम फेंके और वाहनों एवं संपत्तियों में तोड़फोड़ की। ​ हिंसा के दौरान 32 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें तीन डीसीपी रैंक के अधिकारी शामिल हैं। पुलिस ने अब तक 51 लोगों को गिरफ्तार किया है और उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की 57 धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नागपुर के 11 पुलिस थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया गया है। पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में दो हजार से अधिक सशस्त्र पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है, और त्वरित प्रतिक्रिया दल एवं दंगा नियंत्रण पुलिस द्वारा गश्त की जा रही है। ​ महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कहा कि महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिंसा अफवाहों के आधार पर भड़की थी, और समाज में शांति एवं सौहार्द बनाए रखने की अपील की। ​ इस घटना ने कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा के प्रति गंभीर चिंताएं उत्पन्न की हैं। पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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31 मार्च की डेडलाइन… 30 नक्सली ढेर, 500 जवानों ने सात घंटे तक ऐसे चलाया ये मुश्किल ऑपरेशन

छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर जिलों में 20 मार्च 2025 को सुरक्षाबलों द्वारा नक्सलियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण अभियान चलाया गया, जिसमें कुल 22 नक्सली मारे गए। इस ऑपरेशन में बीजापुर जिले में 18 और कांकेर जिले में 4 नक्सलियों को ढेर किया गया, जबकि जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) का एक जवान शहीद हो गया। ​ बीजापुर जिले में मुठभेड़: बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के अंतर्गत, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों की सीमा पर स्थित अंड्री के जंगलों में सुबह 7 बजे से सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई। यह क्षेत्र नक्सलियों के कोर इलाकों में से एक माना जाता है। सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के बड़े कैडर्स को घेर लिया, जिससे मुठभेड़ में 18 नक्सली मारे गए। दुर्भाग्यवश, इस कार्रवाई में डीआरजी का एक जवान शहीद हो गया। ​ कांकेर जिले में मुठभेड़: कांकेर और नारायणपुर जिलों की सीमा पर स्थित जंगलों में, डीआरजी और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की संयुक्त टीम नक्सल विरोधी अभियान पर थी। इस दौरान सुबह मुठभेड़ हुई, जिसमें 4 नक्सली मारे गए। मुठभेड़ स्थल से स्वचालित हथियार और अन्य नक्सल सामग्री बरामद की गई। ​ केंद्रीय गृह मंत्री की प्रतिक्रिया: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह नक्सल मुक्त भारत अभियान की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार नक्सलियों के विरुद्ध कठोर रुख अपना रही है और आत्मसमर्पण न करने वाले नक्सलियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि अगले साल 31 मार्च से पहले देश नक्सल मुक्त होने वाला है। ​ नक्सल विरोधी अभियानों की प्रगति: इस वर्ष अब तक, सुरक्षाबलों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कई सफल अभियानों को अंजाम दिया है। इन अभियानों में बड़ी संख्या में नक्सलियों को मार गिराया गया है, जिससे इन क्षेत्रों में सुरक्षा की स्थिति में सुधार हुआ है। सरकार की नक्सल विरोधी नीति और सुरक्षाबलों की सतर्कता के परिणामस्वरूप, नक्सल गतिविधियों में कमी देखी जा रही है।​ सुरक्षाबलों की भूमिका: सुरक्षाबलों, विशेषकर डीआरजी और बीएसएफ के जवानों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपनी जान की परवाह किए बिना अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। उनकी बहादुरी और समर्पण के कारण ही नक्सलियों के खिलाफ यह महत्वपूर्ण सफलता संभव हो पाई है। शहीद जवानों का बलिदान देश हमेशा याद रखेगा।​ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास: सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ा रही है। सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि इन क्षेत्रों के लोग मुख्यधारा से जुड़ सकें और नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हो सकें। साथ ही, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए भी विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे वे समाज में पुनः स्थापित हो सकें।​

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Raipur News: जिला पंचायत रायपुर अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव आज, सदस्यों को पहचान पत्र ले जाना अनिवार्य

रायपुर जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए चुनाव आज, गुरुवार, 20 मार्च 2025 को आयोजित किया जाएगा। यह चुनाव रेड क्रॉस सभाकक्ष, कलेक्ट्रेट परिसर में सुबह 11 बजे से प्रारंभ होगा। सभी जिला पंचायत सदस्यों को सूचित किया गया है कि वे अपने निर्वाचन प्रमाण पत्र या पहचान पत्र साथ लेकर आएं, क्योंकि सभाकक्ष में प्रवेश के लिए यह अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, सभाकक्ष में मोबाइल फोन, पेन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लाने पर प्रतिबंध रहेगा।​ उल्लेखनीय है कि यह चुनाव प्रक्रिया पूर्व में दो बार स्थगित हो चुकी है। पहले, 5 मार्च को निर्धारित चुनाव को 12 मार्च तक के लिए टाला गया था, और फिर 12 मार्च को नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से मात्र 10 मिनट पहले चुनाव को पुनः स्थगित कर 20 मार्च की नई तिथि घोषित की गई थी。 ​ चुनाव की तिथियों में इस बदलाव के कारण राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखी गईं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में विरोध प्रदर्शन किया, आरोप लगाते हुए कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बहुमत न होने के कारण चुनाव को बार-बार स्थगित कर रही है। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तिथियों में परिवर्तन किया गया है। राज्य के मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि अधिकांश जिला पंचायतों में भाजपा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बने हैं, और कांग्रेस के आरोप निराधार हैं छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, दीपक बैज, ने चेतावनी दी है कि यदि 20 मार्च के बाद भी चुनाव की तिथि आगे बढ़ाई गई, तो कांग्रेस अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार को किस बात का डर है, जो लगातार चुनाव की तिथि आगे बढ़ा रही है, और यदि ऐसा पुनः होता है, तो आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी आज के चुनाव के सुचारू संचालन के लिए प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। सभी सदस्यों से अनुरोध है कि वे समय पर उपस्थित होकर चुनाव प्रक्रिया में भाग लें और निर्धारित नियमों का पालन करें।​ रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव स्थगित: नामांकन के 10 मिनट पहले टला चुनाव, अब 20 मार्च को होगी वोटिंग

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​राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 24 मार्च को छत्तीसगढ़ विधानसभा के रजत जयंती समारोह में विधायकों को संबोधित करेंगी

छत्तीसगढ़ विधानसभा अपने रजत जयंती वर्ष का उत्सव मना रही है, और इस महत्वपूर्ण अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 24 मार्च 2025 को रायपुर का दौरा करेंगी। इस दौरान, वे विधानसभा के विशेष सत्र में विधायकों को संबोधित करेंगी, जो राज्य के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा। ​ राष्ट्रपति के इस दौरे की आधिकारिक घोषणा राज्य के संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने विधानसभा में की, जहां राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए सभा भवन के उपयोग की अनुमति मांगते हुए प्रस्ताव पेश किया गया। यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया, जिससे राष्ट्रपति के संबोधन का मार्ग प्रशस्त हुआ। ​ उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने राष्ट्रपति के इस दौरे को लेकर विधायकों में उत्साह व्यक्त किया और कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू का मार्गदर्शन उन्हें प्रेरित करेगा। राष्ट्रपति के आगमन को ध्यान में रखते हुए, रायपुर प्रशासन ने व्यापक तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने विधानसभा परिसर का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियंत्रण, पार्किंग और आपातकालीन सेवाओं सहित सभी आवश्यक प्रबंधों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और सभी व्यवस्थाएँ तय मानकों के अनुसार पूरी की जाएँ।​ राष्ट्रपति के आगमन और प्रस्थान के लिए विशेष प्रवेश और निकास द्वार तय किए गए हैं, ताकि कार्यक्रम में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। साथ ही, राष्ट्रपति के साथ आने वाले विशिष्ट अतिथियों के लिए उचित बैठक व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।​ प्रशासन इस ऐतिहासिक अवसर को भव्य बनाने के लिए पूरी तरह सतर्क है और सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि राष्ट्रपति का दौरा सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।​ छत्तीसगढ़ विधानसभा के रजत जयंती समारोह के तहत आयोजित इस विशेष सत्र में राष्ट्रपति का संबोधन राज्य के विधायकों के लिए प्रेरणादायक होगा और यह राज्य के संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में अंकित होगा।

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औरंगजेब की कब्र पर गरमाई सियासत: महाराष्ट्र सरकार के रुख के बाद कब्र हटाने की मांग तेज

सीएम फडणवीस बोले: कांग्रेस के कार्यकाल में मिला संरक्षण, हम भी कब्र हटाना चाहते हैं महाराष्ट्र के संभाजीनगर में स्थित मुगल शासक औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर सियासत तेज हो गई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में औरंगजेब की कब्र को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से संरक्षण मिला था, जबकि मौजूदा सरकार इसे हटाने के पक्ष में है। फडणवीस के इस बयान पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने पलटवार करते हुए कहा कि देवेंद्र फडणवीस हर बार कांग्रेस को ही टारगेट करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए, न कि बार-बार कांग्रेस पर आरोप लगाना। भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अफजल खान की कब्र से अतिक्रमण हटाने के बाद अब औरंगजेब की कब्र को हटाने का समय आ गया है। उन्होंने औरंगजेब को रावण के बाद दूसरा सबसे बड़ा दुष्ट बताते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार का यह कदम सही होगा। शिवसेना नेता शंभूराजे देसाई ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इस मामले को लेकर केंद्र सरकार से बातचीत करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को बनाए रखने की कोई जरूरत नहीं है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता बाला नांदगांवकर ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि शिवाजी महाराज को तकलीफ देने वाले और संभाजी महाराज की हत्या करने वाले औरंगजेब की कब्र का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने मांग की कि इसे जल्द से जल्द हटा देना चाहिए। राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मामला अब केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। देखना होगा कि सरकार इस पर क्या निर्णय लेती है।

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