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रायपुर में नशे में ड्राइव कर रहे युवक ने पुलिस को दी धमकी, खुद को प्रदेश पदाधिकारी बताया

Raipur में नशे की हालत में कार चला रहे एक प्रभावशाली युवक का पुलिस से विवाद का मामला सामने आया है। 28 मार्च की रात तेलीबांधा थाना क्षेत्र में चेकिंग के दौरान पुलिस ने राजू मित्रा को रोककर जांच की, जिसमें उसके शराब सेवन की पुष्टि हुई। जांच के दौरान जब पुलिस ने गाड़ी की चाबी मांगी, तो युवक ने खुद को एक राजनीतिक संगठन का प्रदेश पदाधिकारी बताते हुए पुलिसकर्मियों को धमकाना शुरू कर दिया। उसने कहा कि मामूली चालान कर छोड़ देना चाहिए था और चेतावनी दी कि इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि मौके पर निरीक्षक स्तर के अधिकारी मौजूद थे और कमिश्नरेट के निर्देश पर शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा था। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए युवक की कार जब्त कर ली। सोशल मीडिया पर आरोपी की कई तस्वीरें राजनीतिक नेताओं के साथ भी वायरल हो रही हैं। उसकी प्रोफाइल में खुद को हिंदू जागरण मंच दुर्ग का जिलाध्यक्ष बताया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इसी अभियान के तहत एक ही रात में 137 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। वहीं जनवरी 2026 से अब तक करीब 1400 नशे में वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई की जा चुकी है।

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विष्णु देव साय का सख्त निर्देश: सिलेंडर की कमी की अफवाह फैलाने वालों पर केस, साइबर सेल रखेगा नजर

प्रदेश में गैस सिलेंडर और पेट्रोल की कमी को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस तरह की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए। इस काम के लिए नवा रायपुर स्थित साइबर मुख्यालय को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पेट्रोल, डीजल और गैस से जुड़े सभी मैसेज पर नजर रखी जाएगी और गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सीधे केस दर्ज होगा। इसी के साथ प्रशासन ने गैस सिलेंडरों की जमाखोरी पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है। अलग-अलग जगहों पर छापेमारी के दौरान होटल, ढाबों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से 3800 से ज्यादा सिलेंडर जब्त किए गए हैं, जिनका उपयोग घरेलू गैस के रूप में किया जा रहा था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें। साथ ही अधिकारियों को जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति सुचारू बनाए रखने और सही जानकारी जनता तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर भी कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियों की नियमित निगरानी की जाएगी, जबकि अस्पताल, छात्रावास और रेलवे जैसे संस्थानों में गैस सप्लाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके अलावा, आम जनता की शिकायतों के लिए 1800-233-3663 टोल फ्री नंबर जारी किया गया है, जहां गैस सप्लाई में दिक्कत या अधिक कीमत वसूली की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

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दीपक बैज का आरोप: राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर, भुगतान में देरी से विकास कार्य प्रभावित

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार की आर्थिक हालत कमजोर हो गई है, जिसके चलते विकास कार्यों की गति धीमी पड़ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छोटे-छोटे भुगतान भी समय पर नहीं कर पा रही है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के एक ठेकेदार ने भुगतान नहीं मिलने से परेशान होकर 30 मार्च को विभागीय कार्यालय के सामने आत्मदाह की चेतावनी दी है। बैज ने कहा कि यह समस्या केवल एक विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि कई विभागों में इसी तरह की स्थिति बनी हुई है। फंड की कमी के कारण कई निर्माण और विकास कार्य अधूरे हैं, जिससे आम लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भुगतान में देरी से ठेकेदारों में नाराजगी बढ़ रही है और कई प्रोजेक्ट रुकने की कगार पर हैं। सरगुजा जिले में जल जीवन मिशन के तहत काम करने वाले ठेकेदार रजनी कांत अग्रवाल ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर बताया कि उन्होंने अंबिकापुर सब-डिविजन में काम एक साल पहले पूरा कर लिया था, लेकिन अब तक पूरा भुगतान नहीं हुआ है। ठेकेदार ने आरोप लगाया कि करीब 65 लाख रुपए के काम के बदले अब तक केवल 22 लाख रुपए ही मिले हैं। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि विभाग के एक अधिकारी द्वारा कमीशन की मांग की जा रही है और कमीशन नहीं देने पर बिल पास नहीं किया जा रहा। ठेकेदार ने 30 मार्च को दोपहर 1 बजे पीएचई कार्यालय के सामने आत्मदाह करने की चेतावनी दी है।

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धरसीवां में 31 मार्च से कुंवरगढ़ महोत्सव: मुख्यमंत्री करेंगे 133 करोड़ के विकास कार्यों का शुभारंभ

रायपुर जिले के धरसीवां क्षेत्र में 31 मार्च 2026 को कुंवरगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम का शुभारंभ विष्णुदेव साय करेंगे। इस मौके पर क्षेत्र को लगभग 133 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी जाएगी। अनुज शर्मा ने बताया कि यह आयोजन क्षेत्र के विकास के साथ-साथ इसकी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कुंरा नगर अपनी ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए जाना जाता है, जहां राजा कुँवर सिंह गोंड की परंपरा आज भी जीवंत है। महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे, जिनमें नव निर्मित तहसील कार्यालय का उद्घाटन भी शामिल है। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। कार्यक्रम में स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन और कुटीर उद्योगों के स्टॉल लगाए जाएंगे, जिससे स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों को आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही लोक कलाकारों के अलावा राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। आयोजन को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था की है, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्रवासियों से इस आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।

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छत्तीसगढ़ में IPS प्रमोशन में देरी: 23 साल बाद मिल रहा पद, देश में 19वें स्थान पर राज्य

छत्तीसगढ़ में पुलिस अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा में प्रमोशन मिलने में काफी देरी हो रही है। स्थिति यह है कि वर्ष 2002 बैच के अधिकारियों को लगभग 23 साल की सेवा के बाद अब जाकर IPS पदोन्नति दी गई है, जिससे राज्य इस मामले में देश में 19वें स्थान पर पहुंच गया है। दूसरी ओर, कर्नाटक, गुजरात, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और सिक्किम जैसे राज्यों में बाद के बैच के अधिकारियों को भी पहले ही IPS प्रमोशन मिल चुका है। इससे साफ है कि अन्य राज्यों में प्रमोशन प्रक्रिया ज्यादा तेज है। इस देरी को लेकर राज्य के पुलिस अधिकारियों में नाराजगी है। उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर कैडर रिव्यू कराने और IPS पदों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में कम से कम 60 नए IPS पद बढ़ाए जाने चाहिए ताकि प्रमोशन प्रक्रिया तेज हो सके। राज्य में कई अहम पद अब भी स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं। रायपुर में कमिश्नर और पांच DCP पद मंजूर नहीं हुए हैं। वहीं नए जिले मोहला-मानपुर और सारंगढ़-बिलाईगढ़ में भी IPS स्तर के SP पद स्वीकृत नहीं किए गए हैं। कैडर रिव्यू की प्रक्रिया भी समय पर पूरी नहीं हो पा रही है। नियम के अनुसार हर पांच साल में यह प्रक्रिया होनी चाहिए, लेकिन पिछले 25 साल में केवल चार बार ही कैडर रिव्यू हुआ है। वर्ष 2017 में 22 पदों के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें से सिर्फ 11 पदों को ही मंजूरी मिली। जहां पुलिस विभाग में प्रमोशन की गति धीमी है, वहीं अन्य सेवाओं में स्थिति बेहतर है। भारतीय प्रशासनिक सेवा में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को करीब 13 साल में ही प्रमोशन मिल रहा है। प्रमोशन में देरी के पीछे विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक का देर से होना, पदों की कमी और कैडर रिव्यू में देरी जैसे कारण सामने आ रहे हैं। अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह अक्सर जनवरी-फरवरी तक खिंच जाती है।

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5 करोड़ की स्मार्ट वायरिंग फेल: 2 साल में सड़क पर आई केबल, खुले बॉक्स बने खतरा

राजधानी रायपुर में स्मार्ट सिटी के तहत की गई अंडरग्राउंड वायरिंग अब सवालों के घेरे में है।जयस्तंभ चौक से फाफाडीह चौक तक किए गए इस प्रोजेक्ट में महज दो साल के भीतर ही बड़ी खामियां सामने आ गई हैं। सड़क के नीचे डाली गई बिजली केबल कई जगहों पर बाहर निकल आई हैं।जहां-जहां पाइपलाइन, नल कनेक्शन या सड़क मरम्मत के लिए खुदाई हुई, वहां केबल उखड़ गईं और दोबारा सुरक्षित नहीं की गईं। करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से तैयार यह सिस्टम मेंटेनेंस की कमी के कारण अब असुरक्षित हो चुका है।खुले बॉक्स से बड़ा खतरा सबसे ज्यादा खतरा केबल बॉक्स से है। ये हालात किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। लोगों की शिकायतों पर नहीं हुई कार्रवाई मौदहापारा और सदर बाजार के रहवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।लोगों का कहना है कि अब तो शिकायत करना भी बंद कर दिया है, क्योंकि सुनवाई नहीं होती। अन्य इलाकों में भी खराब हालात सिर्फ जयस्तंभ-फाफाडीह रोड ही नहीं, बल्कि कई जगहों पर यही समस्या देखने को मिल रही है। पूरे प्रोजेक्ट पर 40 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किया गया था। लापरवाही के मुख्य कारण मेंटेनेंस की कमीकाम पूरा होने के बाद नियमित जांच नहीं की गई। बार-बार खुदाईअन्य विभागों द्वारा सड़क खोदने से केबल क्षतिग्रस्त हुई। समन्वय की कमीरायपुर नगर निगम, जल विभाग और बिजली कंपनी के बीच तालमेल नहीं रहा। बॉक्स की अनदेखीकेबल बॉक्स के ढक्कन गायब होने के बाद भी उन्हें बदला नहीं गया। अधिकारियों का बयान नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने कहा कि शिकायत के बाद जांच कराई जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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25 मीटर के पूल में तैयारी, 50 मीटर में मुकाबला: सपना कोरसा ने हारकर भी जीता सबका दिल

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में 12 साल की सबसे छोटी तैराक, बड़े खिलाड़ियों से मुकाबले के बावजूद दिखाई जबरदस्त हिम्मत छत्तीसगढ़ को पहले दिन 2 मेडल खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पहले दिन छत्तीसगढ़ ने शानदार शुरुआत करते हुए 2 मेडल अपने नाम किए। 12 साल की सपना बनी चर्चा का केंद्र मेडल भले ही न जीत सकीं, लेकिन 200 मीटर फ्री-स्टाइल में हिस्सा लेने वाली सपना कोरसा ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।सिर्फ 12 साल की सपना इस प्रतियोगिता की सबसे कम उम्र की तैराक रहीं और बीजापुर की रहने वाली हैं। जब सभी फिनिश कर चुके थे, सपना अकेली तैर रही थीं रेस की शुरुआत में सपना ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन जल्द ही पीछे रह गईं। करीब डेढ़ से ढाई मिनट तक सपना अकेले पूल में तैरती रहीं। दर्शकों को लगा कि वह बीच में रेस छोड़ सकती हैं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और फिनिश लाइन तक पहुंचीं। उनके इस जज्बे को देखकर पूरा स्टेडियम खड़ा हो गया और तालियों से उनका स्वागत किया गया। सपना का जज्बा: खुद से मुकाबला सपना ने कहा कि पीछे रह जाने के बाद उनका मुकाबला किसी और से नहीं, बल्कि खुद से था।अगर वह बीच में रुक जातीं, तो खुद से हार जातीं। उनका मानना है कि बेहतर तैयारी मिलती तो वह मेडल भी जीत सकती थीं। सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी उपलब्धि सपना के पिता किसान हैं, जिससे आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है। आधे आकार के पूल में की प्रैक्टिस सपना जिस पूल में अभ्यास करती हैं, वह सिर्फ 25 मीटर लंबा है, जबकि नेशनल और इंटरनेशनल प्रतियोगिताएं 50 मीटर के पूल में होती हैं। रायपुर के इंटरनेशनल पूल में उन्हें ज्यादा प्रैक्टिस का मौका भी नहीं मिला। सिर्फ एक बार ही वह वहां अभ्यास कर सकीं। कोच और सुविधाओं की चुनौती कोच दीप्ती वर्मा के मार्गदर्शन में सपना ने सीमित संसाधनों के बावजूद नेशनल स्तर तक का सफर तय किया।डाइट, ट्रेनिंग और सुविधाओं की कमी के बावजूद उनका प्रदर्शन प्रेरणादायक रहा। निष्कर्ष सपना कोरसा ने भले ही मेडल नहीं जीता, लेकिन अपने जज्बे, संघर्ष और हिम्मत से यह साबित कर दिया कि असली जीत हार में भी छिपी होती है।

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छत्तीसगढ़ में गैस सिलेंडर को लेकर हंगामा: भूपेश बघेल और बीजेपी आमने-सामने, सोशल मीडिया पर मीम्स और शिकायतों की बाढ़

सिलेंडर की कमी के दावों के बीच राजनीति तेज, लोगों ने शेयर किए लंबी कतारों और देरी के वीडियो छत्तीसगढ़ के कई बड़े शहरों जैसे रायपुर, भिलाई, दुर्ग और बिलासपुर में गैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर लोगों की परेशानी लगातार सामने आ रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें, खाली सिलेंडर और इंतजार करते उपभोक्ता नजर आ रहे हैं।सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा और मीम्स फेसबुक, इंस्टाग्राम और X जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजर्स लगातार अपनी समस्याएं साझा कर रहे हैं। कई लोग मीम्स और वीडियो के जरिए सिस्टम पर तंज कस रहे हैं। मीम्स में सिलेंडर को ‘कीमती सामान’ बताया जा रहा है कुछ पोस्ट में दिखाया गया कि लोग कई दिनों तक लाइन में खड़े हैं एआई वीडियो में सिलेंडर और इंडक्शन चूल्हे की बातचीत दिखाई गई कुछ यूजर्स ने लकड़ी और कंडों से खाना बनाने की बात कही भूपेश बघेल बनाम बीजेपी: सोशल मीडिया पर वार-पलटवार भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि लोगों को गैस सिलेंडर मिल रहा है या नहीं। उनके इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने जवाब दिया कि उन्हें सिलेंडर मिल रहा है। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ ने बघेल के पोस्ट को शेयर करते हुए दावा किया कि जनता ने खुद सच्चाई बता दी है। जवाब में बघेल ने एक वीडियो पोस्ट कर ऐसे कमेंट्स दिखाए जिनमें लोगों ने सिलेंडर नहीं मिलने की शिकायत की। वायरल वीडियो और जमीनी हालात तिल्दा-नेवरा का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लोग अपने सिलेंडर कार्ड जमीन पर रखकर नंबर लगाते हुए छांव में इंतजार करते दिखे। भिलाई और दुर्ग से भी कई पोस्ट सामने आए हैं, जिनमें यूजर्स ने बताया कि बुकिंग के 8–10 दिन बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहा और एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। एआई कंटेंट के जरिए विरोध इस पूरे मुद्दे में एआई से बनाए गए वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। ये कंटेंट लोगों के गुस्से और व्यंग्य दोनों को दर्शा रहे हैं। प्रशासन का दावा: स्थिति सामान्य जहां एक तरफ लोग परेशानी बता रहे हैं, वहीं प्रशासन और केंद्र सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि गैस की सप्लाई सामान्य है और किसी तरह की कमी नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सभी उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर मिल जाएगा। निष्कर्ष गैस सिलेंडर को लेकर छत्तीसगढ़ में बनी स्थिति अब सिर्फ सप्लाई का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक बहस और सोशल मीडिया ट्रेंड का बड़ा विषय बन चुकी है। एक ओर लोग अपनी परेशानी जाहिर कर रहे हैं, तो दूसरी ओर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

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ईरान तनाव पर पीएम मोदी की आज अहम बैठक, वीडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़ेंगे CM विष्णुदेव साय

अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (27 मार्च) देश के कई मुख्यमंत्रियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी, जिसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी वर्चुअली शामिल होंगे। माना जा रहा है कि ईरान से जुड़े हालिया संघर्ष और वैश्विक तनाव के भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा होगी। खासकर पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता, बढ़ती महंगाई, सप्लाई चेन और जरूरी सेवाओं को बनाए रखने को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय पर जोर रहेगा। इस बैठक में केवल गैर-चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। प्रधानमंत्री पहले ही संकेत दे चुके हैं कि यदि पश्चिम एशिया का संकट लंबा चलता है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ सकता है। छत्तीसगढ़ के लिए यह बैठक खास मानी जा रही है। राज्य सरकार को ईंधन आपूर्ति, कीमतों और परिवहन व्यवस्था को लेकर सतर्क रहना होगा। मुख्यमंत्री साय बैठक में राज्य की वर्तमान स्थिति और तैयारियों की जानकारी भी साझा कर सकते हैं। बैठक से पहले मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने और अनावश्यक खरीदारी से बचने की अपील की है। साथ ही अधिकारियों को जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। केंद्र सरकार का मानना है कि संभावित संकट से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से आज की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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पूर्व मंत्री के फॉलो वाहन ने बाइक को टक्कर मारी, 2 युवकों की मौत | VIDEO

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर-रायपुर NH-30 पर एक भयानक सड़क हादसा हुआ, जिसमें पूर्व मंत्री महेश गागड़ा के काफिले की फॉलो वाहन ने बाइक सवार दो युवकों को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे का लाइव वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दोनों युवक टक्कर लगते ही करीब 50 मीटर दूर तक उछलते नजर आए। घटना इतनी भयानक थी कि दोनों की जान चली गई। जानकारी के मुताबिक, यह हादसा बुधवार, 25 मार्च को बालेंगा पेट्रोल पंप के पास हुआ। बताया जा रहा है कि फॉलो वाहन की रफ्तार लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटा थी। बोलेरो वाहन के चालक हिमांशु चक्रवर्ती को पूर्व मंत्री के काफिले में शामिल होना था, लेकिन समय पर नहीं पहुँच पाए। काफिले को कवर करने की जल्दी में उन्होंने वाहन की रफ्तार बढ़ा दी। इसी दौरान सामने से बाइक पर कमलेश उइके (40) और राम प्रसाद चिरम (30) आ रहे थे। दोनों मिस्त्री अपने निर्माण कार्य के लिए जा रहे थे। अचानक बाइक को मोड़ते ही तेज रफ्तार बोलेरो ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और दोनों युवक सड़क पर बिखर गए। हादसे के तुरंत बाद ग्रामीणों ने गुस्से में वाहन चालक को घेर लिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में किया। एक युवक की मौत मौके पर ही हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। पुलिस ने बताया कि मृतक दुबेगांव, जगदलपुर के रहने वाले थे। प्राथमिक जांच में पुलिस ने तेज रफ्तार और वाहन का संतुलन बिगड़ने को हादसे की मुख्य वजह बताया है। बालेंगा इलाके में निर्माण कार्य और सड़क पर बढ़ी भीड़ भी हादसे को और गंभीर बना रही थी। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और मामले में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के वीडियो और तस्वीरों से यह साफ नजर आ रहा है कि सड़क पर तेज रफ्तार वाहन कितनी जानलेवा हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि काफिले में वाहन तेज चलाने से जान का जोखिम बढ़ जाता है। इस हादसे ने इलाके में सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद परिवार और स्थानीय लोग शोक में हैं। मृतकों के परिजनों को नुकसान की भरपाई और न्याय दिलाने की मांग की जा रही है। प्रशासन और पुलिस इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह सक्रिय हैं। यह दुखद हादसा यह याद दिलाता है कि सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहन नियंत्रित करना कितना महत्वपूर्ण है। काफिले और बड़े वाहन चालक को सड़क नियमों का पालन करना चाहिए ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं से बचा जा सके।

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