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बिरगांव (रायपुर) में LPG गैस महंगाई के खिलाफ आम आदमी पार्टी का अनोखा विरोध, सिलेंडर की निकाली शवयात्रा

छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur से लगे Birgaon क्षेत्र में आज Aam Aadmi Party (AAP) ने बढ़ती LPG गैस कीमतों, सिलेंडर की कमी और कथित कालाबाजारी के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने गैस सिलेंडर की प्रतीकात्मक “शवयात्रा” निकालकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि लगातार बढ़ती रसोई गैस कीमतों से आम आदमी का घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है। गरीब और मध्यम वर्ग पर महंगाई का सीधा असर पड़ रहा है, जिससे परिवारों का मासिक बजट बिगड़ गया है। AAP नेताओं का आरोप है कि कई जगहों पर LPG सिलेंडर की उपलब्धता भी समस्या बनी हुई है और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी के विरोध में यह प्रतीकात्मक शवयात्रा निकालकर सरकार का ध्यान आम जनता की परेशानियों की ओर आकर्षित करने की कोशिश की गई। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए। रैली के दौरान “महंगाई वापस लो” और “सस्ती गैस दो” जैसे नारे लगाए गए। 🚩 राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती महंगाई देशभर में एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है और विभिन्न राजनीतिक दल इस पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन या सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।

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धर्मांतरण पर सख्त कानून: छत्तीसगढ़ में आजीवन कारावास तक की सजा, शादी के लिए धर्म बदलना भी अवैध

छत्तीसगढ़ विधानसभा ने “धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026” को पास कर दिया है, जिसके तहत अवैध धर्मांतरण कराने पर कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया गया है। \ नए कानून के अनुसार, अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर दोषी व्यक्ति को 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना होगा। यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 साल तक और न्यूनतम जुर्माना 10 लाख रुपये होगा। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और भी कठोर है—10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की जेल और कम से कम 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति पहले भी ऐसे मामले में दोषी ठहराया जा चुका है और दोबारा अपराध करता है, तो उसे सीधे उम्रकैद हो सकती है। कानून में यह भी प्रावधान है कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को 60 दिन पहले जिला कलेक्टर को आवेदन देना होगा। धार्मिक अनुष्ठान कराने वाले पादरी, मौलवी या पुजारी को भी पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति धर्मांतरण कराना अवैध माना जाएगा और तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है। शादी के लिए धर्म बदलने पर भी सख्ती की गई है। यदि विवाह केवल धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से किया गया पाया गया, तो अदालत उसे शून्य घोषित कर सकती है। सरकार ने विदेशी फंडिंग और संस्थाओं की भूमिका पर भी निगरानी कड़ी कर दी है। दोषी पाए जाने पर संस्था का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। मामलों की सुनवाई के लिए प्रत्येक जिले में विशेष अदालतें बनाई जाएंगी, ताकि छह महीने के भीतर फैसला हो सके।

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छत्तीसगढ़ में RSS का महा अभियान: 30 लाख से ज्यादा परिवारों तक पहुंचा संघ, संगठन में भी होगा बड़ा बदलाव

Rashtriya Swayamsevak Sangh ने अपने शताब्दी वर्ष के मौके पर Chhattisgarh में अब तक का सबसे बड़ा ‘गृह संपर्क अभियान’ पूरा करने का दावा किया है। इस अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने करीब 30.55 लाख परिवारों तक पहुंच बनाकर सीधे संवाद किया, जिससे संगठन की जमीनी पकड़ और मजबूत हुई है। संघ के अनुसार, प्रदेश भर में 2,034 बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 9 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। उल्लेखनीय बात यह रही कि इन कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा रही। संपर्क अभियान के तहत 13 हजार से अधिक गांवों और 600 से ज्यादा शहरी बस्तियों को कवर किया गया। संगठन ने भविष्य में निर्णय प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए अपने ढांचे में बदलाव की भी घोषणा की है। मार्च 2027 से मौजूदा प्रांत व्यवस्था की जगह संभाग आधारित संरचना लागू की जाएगी, जिसके तहत देश को 9 क्षेत्रों और 85 संभागों में विभाजित किया जाएगा। संघ के कार्य विस्तार की बात करें तो प्रदेश के सभी 34 जिलों में 2,000 से अधिक शाखाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। इनमें बड़ी संख्या विद्यार्थी और महाविद्यालयीन शाखाओं की है, जो युवाओं के बढ़ते जुड़ाव को दर्शाती है। राजधानी Raipur में भी संघ की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं, जहां सैकड़ों बस्तियों में शाखाएं सक्रिय बताई जा रही हैं। युवा वर्ग को जोड़ने के लिए ‘युवा संगम’ कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनमें 23 हजार से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। इन कार्यक्रमों में राष्ट्र निर्माण, उद्यमिता और सामाजिक विषयों पर चर्चा की गई। शताब्दी वर्ष के दौरान संघ ने ‘पंच परिवर्तन’—कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य और सामाजिक समरसता—को समाज में व्यवहारिक रूप से अपनाने का लक्ष्य रखा है।

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19 लाख वोटर नाम कटने के आरोप पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट

Chhattisgarh विधानसभा के सत्र में SIR से जुड़े मुद्दे पर भारी हंगामा देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष Charandas Mahant ने आरोप लगाया कि प्रदेश में लगभग 19 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं और इस गंभीर मामले पर तत्काल चर्चा कराई जाए। उन्होंने इसे प्रदेश के नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया। इस पर भाजपा विधायक Ajay Chandrakar ने कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह जनहित या राज्यहित का विषय नहीं, बल्कि निर्वाचन से संबंधित मामला है और इसे सदन में नहीं उठाया जाना चाहिए। इस बयान के बाद पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई और माहौल गरमा गया। विपक्ष के अन्य विधायकों ने आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इसकी जांच जरूरी है। वहीं सत्ता पक्ष ने कहा कि प्रदेश में सब कुछ सामान्य है और विपक्ष के पास मुद्दों की कमी है। आखिरकार आसंदी ने यह कहते हुए स्थगन प्रस्ताव खारिज कर दिया कि यह मामला भारत निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। निर्णय से नाराज विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर निकल गए और वॉकआउट कर दिया। इससे पहले सदन में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को प्रमुख विधायी कार्य के रूप में पेश करने की तैयारी की गई। इसके अलावा वीरता पदक प्राप्तकर्ताओं को मिलने वाली सुविधाओं, आयुष्मान योजना में कथित अनियमितता और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी जैसे मुद्दों पर भी सवाल-जवाब हुए।

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Narendra Modi का बयान: अविश्वास प्रस्ताव निजी स्वार्थ से प्रेरित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Om Birla के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को निजी स्वार्थ से प्रेरित बताया है। उन्होंने स्पीकर को लिखे पत्र में कहा कि कुछ लोग लोकतांत्रिक संस्थाओं को संकीर्ण दायरे में सीमित करना चाहते हैं। यह पत्र विपक्ष द्वारा स्पीकर को पद से हटाने के प्रस्ताव के खारिज होने के कुछ दिन बाद लिखा गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रस्ताव गिरने के बाद स्पीकर का वक्तव्य लोकतांत्रिक मर्यादा की परिपक्व व्याख्या था और इससे यह स्पष्ट हुआ कि प्रस्ताव के पीछे अहंकार और निजी हित काम कर रहे थे। प्रस्ताव 11 मार्च को खारिज कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने लोकसभा में स्पीकर को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया था, जिसे 11 मार्च को ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। विपक्ष के 119 सांसदों ने आरोप लगाया था कि स्पीकर सदन की कार्यवाही चलाने में पक्षपात कर रहे हैं और विपक्ष को पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा। स्पीकर का सांसदों को पत्र Om Birla ने भी सभी सांसदों को पत्र लिखकर संसद की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद में उठने वाली हर आवाज देश के 140 करोड़ लोगों की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने चिंता जताई कि कुछ सदस्य संसद के भीतर और बाहर उसके सम्मान को ठेस पहुंचा रहे हैं। बिरला ने सभी दलों से उच्च नैतिक आचरण बनाए रखने और आत्ममंथन करने की अपील की। प्रस्ताव लंबित रहने तक नहीं की अध्यक्षता अविश्वास प्रस्ताव लंबित रहने के दौरान ओम बिरला ने संसदीय परंपरा का हवाला देते हुए सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता से स्वयं को अलग रखा था। इस दौरान कार्यवाही पैनल ऑफ चेयरपर्सन के सदस्य संचालित कर रहे थे। प्रस्ताव खारिज होने के बाद उन्होंने फिर से सदन की अध्यक्षता संभाल ली। सरकार का जवाब Amit Shah ने प्रस्ताव पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि 18वीं लोकसभा में कांग्रेस सांसदों को भाजपा की तुलना में लगभग दोगुना समय मिला। इसके बावजूद विपक्ष द्वारा बोलने का मौका न मिलने का आरोप लगाया जा रहा है।

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रायपुर के औद्योगिक इलाकों में छापा: 7 नाबालिग बाल श्रमिक मुक्त, चार संस्थानों पर मामला दर्ज

राजधानी रायपुर के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस और एनजीओ की संयुक्त टीम ने सात नाबालिग बच्चों को काम से मुक्त कराया है। उरला, सिलतरा और खमतराई स्थित कारखानों में छापेमारी कर इन बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जहां उनसे उम्र से कहीं अधिक कठिन और जोखिम भरे काम कराए जा रहे थे। जांच के दौरान सामने आया कि बच्चों से भारी मशीनों और रसायनों के बीच वेल्डिंग, लोडिंग और पैकिंग जैसे काम कराए जा रहे थे। जिन संस्थानों पर कार्रवाई हुई, उनमें सोनी प्लाईवुड इंडस्ट्री, शैमरॉक ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड, इंद्राक्षी पाली प्लास्टर एलएलपी प्लांट तथा सन लॉजिस्टिक एंड डिस्ट्रीब्यूटर शामिल हैं। पुलिस ने कंपनी संचालकों के साथ एक ठेकेदार के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है। शिकायतों के बाद हुई कार्रवाई एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन छत्तीसगढ़ (AVA) के अनुसार इन इलाकों में नाबालिगों से काम कराए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। सूचना मिलने के बाद पुलिस के साथ संयुक्त टीम ने चार अलग-अलग स्थानों पर छापा मारा। कार्रवाई में उरला से तीन और खमतराई से चार बच्चों को मुक्त कराया गया। कुछ बच्चों से उद्योगों के अलावा बेकरी में भी काम कराया जा रहा था। मेडिकल जांच के बाद बाल गृह भेजे गए रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और फिर उन्हें बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। फिलहाल बच्चों को सुरक्षित बाल गृह में रखा गया है, जहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक बच्चों के परिवारों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है और आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। पहले भी सामने आ चुका है बड़ा मामला रायपुर में बाल मजदूरी का यह पहला मामला नहीं है। करीब पांच महीने पहले खरोरा स्थित मोजो मशरूम फैक्ट्री से 109 नाबालिगों को मुक्त कराया गया था। उस कार्रवाई में 68 लड़कियां और 41 लड़के शामिल थे। हालांकि उस मामले में अब तक ठोस कार्रवाई न होने की बात सामने आ रही है। प्रशासन का कहना है कि शहर को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए निगरानी और छापेमारी अभियान लगातार जारी रहेंगे।

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गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने पर रायपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन, घड़ी चौक पर किया विरोध

रसोई गैस की कीमतों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी के विरोध में सोमवार को रायपुर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। राजधानी के घड़ी चौक पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में कई कांग्रेसी नेता हाथों में गैस सिलेंडर लेकर सड़क पर उतरे और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ता जा रहा है। पार्टी के अनुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए और व्यावसायिक सिलेंडर में 110 रुपए प्रति सिलेंडर की वृद्धि की गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है। तेल कंपनियों के कार्यालयों के घेराव की चेतावनी कांग्रेस ने इस मूल्य वृद्धि के विरोध में सरकारी तेल कंपनियों के कार्यालयों का घेराव करने का भी ऐलान किया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि अगर सरकार जल्द ही यह फैसला वापस नहीं लेती है तो पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन तेज किया जाएगा। बड़ी संख्या में शामिल हुए पार्टी नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से पार्टी के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को घड़ी चौक पहुंचने का आह्वान किया गया था। इसके बाद प्रदेश और शहर स्तर के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य, वरिष्ठ नेता, सांसद और पूर्व सांसद, विधायक और पूर्व विधायक, पार्षद और पूर्व पार्षद, नेता प्रतिपक्ष तथा पूर्व नेता प्रतिपक्ष सहित पार्टी के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि भी हुए शामिल इस प्रदर्शन में महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, सेवादल, किसान कांग्रेस, अल्पसंख्यक विभाग, विधि विभाग, अनुसूचित जाति-जनजाति विभाग, पिछड़ा वर्ग विभाग और झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ समेत कई संगठनों के पदाधिकारी भी शामिल हुए। इसके अलावा मंडल अध्यक्ष, बूथ अध्यक्ष, सेक्टर और जोन अध्यक्ष समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता घड़ी चौक पर एकत्रित हुए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी वापस नहीं ली गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

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बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बढ़ाने की पहल, हर थाने में बाल कल्याण अधिकारी की जानकारी होगी प्रदर्शित

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों से संबंधित मामलों के निपटारे में पुलिस की प्रक्रिया को अधिक संवेदनशील और पारदर्शी बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने राज्य के सभी थानों में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रभारी और बच्चों की आपातकालीन हेल्पलाइन 1098 की जानकारी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने की अनुशंसा की है। इस संबंध में रायपुर पुलिस कमिश्नर सहित प्रदेश के सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश भेजे गए हैं। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बताया कि आयोग में लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कई थानों में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं होती। कई बार तो स्वयं पुलिसकर्मियों को भी यह जानकारी नहीं रहती। उन्होंने बताया कि थाना प्रभारियों के स्थानांतरण के बाद कई बार नए बाल कल्याण अधिकारी की जानकारी लंबे समय तक अपडेट नहीं हो पाती। इसके अलावा कुछ मामलों में जिला स्तर पर गठित विशेष किशोर पुलिस इकाई की जानकारी भी थानों में स्पष्ट नहीं रहती। बच्चों से जुड़े मामलों में नहीं हो पाता उचित व्यवहार आयोग के अनुसार इन कमियों के कारण बच्चों से जुड़े मामलों की जांच के दौरान कई बार बाल-सुलभ प्रक्रिया का पालन नहीं हो पाता। इसी को ध्यान में रखते हुए थानों में स्पष्ट और स्थायी डिस्प्ले व्यवस्था लागू करने की अनुशंसा की गई है, ताकि पुलिसकर्मी और आम नागरिक दोनों को आवश्यक जानकारी आसानी से मिल सके। कानून में भी है स्पष्ट प्रावधान आयोग ने अपनी अनुशंसा में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 का उल्लेख करते हुए बताया कि इस कानून के तहत हर थाने में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी और विशेष किशोर पुलिस इकाई का गठन अनिवार्य है। साथ ही बच्चों से जुड़े कानूनों के बारे में जनजागरूकता फैलाना भी संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है। इस तरह बनाया जाएगा डिस्प्ले बोर्ड आयोग के निर्देश के अनुसार प्रत्येक थाने में प्रमुख दीवार के साथ दो अन्य स्थानों पर आयताकार डिस्प्ले बोर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए दीवार पर काले रंग से पुताई की जाएगी और बॉर्डर स्लेट की तरह बनाई जाएगी ताकि यह बच्चों के लिए भी सहज और आकर्षक दिखाई दे। बोर्ड के अंदर सफेद रंग से जिले की विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रभारी का पदनाम, थाने के बाल कल्याण पुलिस अधिकारी का पदनाम और बच्चों की हेल्पलाइन नंबर 1098 लिखा जाएगा। संबंधित अधिकारियों के नाम चॉक से लिखे जाएंगे, ताकि उनके स्थानांतरण होने पर आसानी से बदला जा सके। 31 मार्च तक पूरी करनी होगी व्यवस्था आयोग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि यह व्यवस्था 31 मार्च 2026 तक हर हाल में लागू कर दी जाए। साथ ही डिस्प्ले बोर्ड की तस्वीरों के साथ पालन प्रतिवेदन आयोग को भेजने को भी कहा गया है।

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रायपुर में महिला सुरक्षा के लिए ‘पिंक पेट्रोलिंग यूनिट’ शुरू, दो शिफ्ट में करेगी गश्त

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रायपुर पुलिस ने महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के नेतृत्व में शहर में “पिंक पेट्रोल यूनिट” की शुरुआत की गई। अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर अमित कांबले ने इस विशेष टीम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पहल के तहत रायपुर पुलिस ने तीन पिंक पेट्रोलिंग टीमों का गठन किया है। इन टीमों में कुल 27 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं, जो कॉल ट्रैकिंग और नियमित पेट्रोलिंग के माध्यम से महिलाओं को त्वरित सहायता प्रदान करेंगे। पिंक पेट्रोलिंग टीम दो शिफ्ट में कार्य करेगी। पहली शिफ्ट सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक रहेगी। ये टीमें शहर के संवेदनशील इलाकों में नियमित और सरप्राइज पेट्रोलिंग करेंगी। इस दौरान पुलिस टीम महिलाओं को सुरक्षा से जुड़े कानूनों और हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी देगी। खासतौर पर कॉलेज जाने वाली छात्राओं, कामकाजी महिलाओं और हॉस्टल या पीजी में रहने वाली महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। किसी भी स्थिति में मौके पर ही सहायता और काउंसलिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। महिलाओं की सुरक्षा के लिए रायपुर पुलिस ने एक व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर 94792-10932 भी जारी किया है। पुलिस ने महिलाओं से अपील की है कि यदि उन्हें किसी प्रकार की छेड़छाड़, स्टॉकिंग, उत्पीड़न या किसी अन्य आपात स्थिति का सामना करना पड़े, तो वे तुरंत इस हेल्पलाइन नंबर या नजदीकी पुलिस से संपर्क करें। रायपुर पुलिस का कहना है कि इस पहल से शहर में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा। महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस कार्यक्रम के दौरान अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त डॉ. अर्चना झा, डीसीपी सेंट्रल तारकेश्वर पटेल, सहायक पुलिस आयुक्त रुचि वर्मा और निलेश द्विवेदी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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रायपुर में नशे के खिलाफ सख्ती: 60 दिनों में 102 तस्कर गिरफ्तार, तीन की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी

राजधानी रायपुर में अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस ने सख्त अभियान शुरू कर दिया है। पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद गांजा, अफीम, ड्रग्स और नशीली दवाओं की तस्करी करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के अनुसार पिछले 60 दिनों में रायपुर में 102 से अधिक तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। इस दौरान करीब 2.10 करोड़ रुपये कीमत के मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। इसके साथ ही पुलिस अब इन तस्करों की संपत्तियों की जांच भी कर रही है। तीन बड़े तस्करों की संपत्ति की जानकारी जुटाई जा रही है, जिन्हें तस्कर और विदेशी मुद्रा हेरफेरकर्ता संपत्ति जब्ती अधिनियम (SAFEMA) के तहत कुर्क किया जाएगा। पुलिस कमिश्नर ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे तस्करों की सूची तैयार की जाए, जिन्होंने नशे के अवैध कारोबार से संपत्ति अर्जित की है। इन मामलों में सफेमा के तहत कार्रवाई कर उनकी संपत्तियां जब्त की जाएंगी। पिछले वर्ष भी रायपुर में चार तस्करों की करीब ढाई करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की गई थी। इस वर्ष एक दर्जन से अधिक तस्करों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की तैयारी चल रही है। तीन हिस्ट्रीशीटरों की संपत्ति पर नजर कोतवाली थाना क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर रवि साहू, मुकेश गुप्ता उर्फ बनिया और ईरानी डेरा क्षेत्र से जुड़े तस्करों की संपत्तियों की जांच की जा रही है। इन आरोपियों के खिलाफ विभिन्न थानों में 30 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं और वे कई बार जेल भी जा चुके हैं। पुलिस का कहना है कि नशे के कारोबार से कमाए गए पैसों से इन लोगों ने राज्य के अलग-अलग इलाकों में संपत्तियां खरीदी हैं। इनमें से कई संपत्तियां रिश्तेदारों के नाम पर होने की भी जानकारी मिली है। पूरी जानकारी एकत्र करने के बाद मामला मुंबई स्थित अदालत में सफेमा के तहत कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा। पुलिस के मुताबिक रवि साहू के पास करीब 4 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति होने की जानकारी सामने आई है, जबकि मुकेश गुप्ता की संपत्ति लगभग 1.25 करोड़ रुपये आंकी गई है। राज्य में भी बढ़ी कार्रवाई प्रदेश में पिछले साल 16 तस्करों की करीब 14 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति कुर्क की गई थी। इनमें सबसे ज्यादा कार्रवाई बिलासपुर में हुई, जहां करीब 6 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई। इसके अलावा रायपुर के खरोरा क्षेत्र में तस्कर राकेश वर्मा और उसके साथियों की 1.05 करोड़ रुपये मूल्य की 13 संपत्तियों को सफेमा के तहत कुर्क किया गया था। वहीं गांजा तस्कर सुशंकर सरकार की करीब 70 लाख रुपये की संपत्ति भी जब्त की गई। एक अन्य तस्कर की 50 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति भी कुर्क की गई थी। पिछले साल 445 तस्कर गिरफ्तार रायपुर में पिछले वर्ष चलाए गए अभियान के दौरान 445 तस्करों को गिरफ्तार किया गया था और उनसे 2.81 करोड़ रुपये का मादक पदार्थ बरामद किया गया। वर्ष 2024 में 413 तस्करों से 5.08 करोड़ रुपये और 2023 में 303 तस्करों से 1.76 करोड़ रुपये कीमत के नशीले पदार्थ जब्त किए गए थे। पिट एनडीपीएस के तहत भी कार्रवाई राज्य में नशे के कारोबार पर रोक लगाने के लिए पिट एनडीपीएस एक्ट के तहत भी कार्रवाई तेज की गई है। पिछले साल इस कानून के तहत 101 मामलों में कार्रवाई करते हुए आरोपियों को एक साल के लिए जेल भेजा गया। वर्ष 2024 में 41 तस्करों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई थी। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश में नशे के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जा रहा है। सभी रेंज आईजी को निर्देश दिए गए हैं कि सफेमा के तहत कार्रवाई बढ़ाई जाए और तस्करों की संपत्तियों को कुर्क कर उनके अवैध कारोबार पर रोक लगाई जाए।

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