Bilaspur

बिलासपुर में 20 से ज्यादा नकाबपोशों का परिवार पर हमला, घर के सामने विवाद के बाद लाठी-डंडों से पिटाई, 4 महिलाएं घायल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में देर रात एक गंभीर हिंसक घटना सामने आई, जहां 20 से अधिक नकाबपोश बदमाशों ने एक परिवार पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में एक युवक और चार महिलाएं घायल हो गईं, जिनमें से गंभीर रूप से घायल युवक को रायपुर रेफर किया गया है। यह घटना सरकंडा थाना क्षेत्र के चिंगराजपारा इलाके की है। पीड़ित सनत सारथी के अनुसार, वह रात करीब 12 बजे खाना खाने के बाद घर के बाहर टहल रहा था, तभी विक्की अहिरवार अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा और गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद सभी ने मिलकर अचानक हमला कर दिया। हमले में सनत सारथी के सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आईं। बीच-बचाव करने पहुंचीं उनकी पत्नी रेखा सारथी भी घायल हो गईं। इसके अलावा बेदू विश्वकर्मा, सोनी सिंह ठाकुर और तिलक दास मानिकपुरी को भी चोटें आई हैं। आरोप है कि हमलावरों ने महिलाओं के साथ भी मारपीट की, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, दो दिन पहले इसी इलाके में एक विवाद हुआ था, जब आरोपियों ने पीड़ित परिवार के घर के सामने पेशाब किया था। इसका विरोध करने पर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई थी। इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से हमला किया। पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है, जिसमें 20 से ज्यादा नकाबपोश युवक लाठी-डंडों के साथ आते और हमला करते दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जा सके।

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बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को गर्मी से राहत, 43 डिग्री में शरबत वितरण और प्लेटफॉर्म-1 पर लगाया गया मिस्टिंग सिस्टम

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर भीषण गर्मी से यात्रियों को राहत देने के लिए रेलवे प्रशासन ने विशेष पहल की है। यहां यात्रियों को शरबत और ठंडा पेयजल वितरित किया गया, जिससे तेज गर्मी में उन्हें राहत मिल सके। जानकारी के अनुसार, यह व्यवस्था 43 डिग्री से अधिक तापमान को देखते हुए की गई। रेलवे के वाणिज्य विभाग के कर्मचारियों, विशेष टीम और स्काउट-गाइड के बच्चों ने मिलकर प्लेटफॉर्म नंबर 2 और 3 पर यात्रियों को शरबत और ठंडा पानी उपलब्ध कराया। इसके अलावा प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर आधुनिक मिस्टिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे लगातार ठंडी फुहारें गिरती रहीं और यात्रियों को गर्मी से राहत मिली। जरूरतमंद यात्रियों के लिए ओआरएस सैशे भी वितरित किए गए। यह पूरी व्यवस्था वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अनुराग कुमार सिंह के मार्गदर्शन में की गई। रेलवे प्रशासन ने बताया कि इस तरह की जनसेवा और मानवीय पहल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर की जा रही है। रेलवे ने यह भी कहा कि भविष्य में भी यात्रियों के लिए इसी तरह की सुविधाएं और राहत उपाय लगातार जारी रहेंगे, ताकि गर्मी के मौसम में सफर को अधिक आरामदायक बनाया जा सके।

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महिला आरक्षण को लेकर भाजपा-कांग्रेस में सियासी जंग तेज, भाजपा चलाएगी अभियान और निंदा प्रस्ताव, कांग्रेस ने लगाया भ्रम फैलाने का आरोप

महिला आरक्षण के मुद्दे पर देश और प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी इस विषय को लेकर देशभर में अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर राजनीतिक भ्रम फैला रही है और असल में परिसीमन से जुड़े संशोधन को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने इसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की रणनीति बताया है। रायपुर में कांग्रेस भवन में मीडिया से बातचीत के दौरान पूर्व महापौर और महिला कांग्रेस नेता हेमा देशमुख सहित अन्य नेताओं ने कहा कि वर्ष 2023 में पारित 106वां संविधान संशोधन, जिसे महिला आरक्षण बिल कहा जाता है, पहले ही संसद से पास होकर कानून बन चुका है और इसे लागू किया जाना चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाया गया 131वां संविधान संशोधन बिल महिला आरक्षण से सीधे जुड़ा नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े कानूनों में बदलाव का प्रयास किया जा रहा है। पार्टी ने इसे “महिला आरक्षण का मुखौटा” बताया है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि यदि कानून बन चुका है तो बिना परिसीमन का इंतजार किए वर्तमान सीटों पर ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। उनका दावा है कि विपक्षी दल इसके लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार जानबूझकर देरी कर रही है। कांग्रेस ने अपने पुराने प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि राजीव गांधी के समय पंचायत स्तर पर महिला आरक्षण की शुरुआत हुई थी, जिसे बाद में 1993 में कानून का रूप मिला। साथ ही मनमोहन सिंह सरकार में भी संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण का प्रयास किया गया था। उधर भाजपा इस मुद्दे को लेकर सक्रिय है और 30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। इसके साथ ही राज्य के नगर निगमों और निकायों में भी सामान्य सभाएं आयोजित कर महिला आरक्षण पर चर्चा और विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की योजना है।

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GGU में लॉ स्टूडेंट्स के बीच हिंसक झड़प: आपत्तिजनक चैट्स वायरल, 4 छात्रों पर FIR

गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (GGU) में लॉ विभाग के छात्रों के बीच विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद मामला इतना बढ़ गया कि छात्रों के बीच मारपीट हो गई। यह घटना बिलासपुर के कोनी थाना क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार, कुछ छात्रों के बीच इंस्टाग्राम पर हुई बातचीत में भगवान भगवान राम, परशुराम और डॉ. भीमराव अंबेडकर को लेकर विवादित टिप्पणियां की गईं। इसके बाद कैंपस में तनाव बढ़ गया। शुक्रवार रात जैसे ही ये चैट्स सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, बड़ी संख्या में छात्र स्वामी विवेकानंद हॉस्टल के सामने इकट्ठा हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति बिगड़ गई और छात्रों के बीच हाथापाई होने लगी। घटना के दौरान यूनिवर्सिटी के सुरक्षा कर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक झड़प हो चुकी थी। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें छात्र आपस में मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। मामले में चार छात्रों—प्रियांशु सिंह, कौस्तुभ मणि पांडेय, अंशुमान सिंह और तूफान चंद्रनायक—के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने भी इस मामले में थाने में शिकायत दी है। साथ ही सभी आरोपित छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है। इस घटना के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी परिसर का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बताया कि अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए जांच समिति गठित कर दी गई है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि हाल के समय में कैंपस में कई विवाद सामने आ चुके हैं, जिससे व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।

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रेरा कोर्ट नहीं, नियामक संस्था है: हाईकोर्ट ने कहा—शिकायत पर समय सीमा लागू नहीं

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) को अदालत की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, बल्कि यह एक विशेष नियामक संस्था है। कोर्ट ने यह भी कहा कि रेरा में शिकायत दर्ज कराने के लिए कोई तय समय सीमा नहीं है, इसलिए देरी के आधार पर शिकायत को खारिज करना उचित नहीं है। यह मामला जगदलपुर निवासी निधि साव से जुड़ा है, जिन्होंने दुर्ग जिले के अमलेश्वर स्थित ग्रीन अर्थ सिटी परियोजना में एक फ्लैट बुक किया था। उन्होंने बिल्डर पर समय पर कब्जा नहीं देने और निर्माण की गुणवत्ता खराब होने का आरोप लगाया था। निधि साव ने पहले स्थानीय प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने रेरा में याचिका दायर की। रेरा ने बिल्डर को दो महीने के भीतर निर्माण पूरा कर कब्जा देने का निर्देश दिया और साथ ही खरीदार को बकाया राशि जमा करने के लिए कहा। इस आदेश से असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ता ने रेरा अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील की, लेकिन ट्रिब्यूनल ने सुनवाई करने के बजाय यह कहते हुए मामला खारिज कर दिया कि शिकायत देर से की गई है। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां जस्टिस बीडी गुरु की बेंच ने ट्रिब्यूनल के फैसले को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रेरा कानून की धारा 31 में शिकायत दर्ज करने के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है, इसलिए केवल देरी के आधार पर केस खारिज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने मामले को वापस ट्रिब्यूनल को भेजते हुए निर्देश दिया कि अब इस पर नए सिरे से गुण-दोष के आधार पर सुनवाई की जाए, न कि तकनीकी आधार पर।

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छत्तीसगढ़ से 18 समर स्पेशल ट्रेनें शुरू, यात्रियों को बड़ी राहत

गर्मी के मौसम में यात्रियों की बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए रेलवे ने खास इंतजाम किए हैं। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर जोन से 18 समर स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इन ट्रेनों का संचालन 15 अप्रैल से शुरू होकर 15 जुलाई तक जारी रहेगा और इस दौरान ये कुल 88 फेरे लगाएंगी। देशभर में भी रेलवे ने बड़ा फैसला लेते हुए 908 समर स्पेशल ट्रेनों को मंजूरी दी है, जो मिलकर 18,262 फेरे संचालित करेंगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बिलासपुर जोन की 18 ट्रेनों में से 13 पहले ही शुरू हो चुकी हैं, जबकि बाकी ट्रेनों को जल्द चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा। ये स्पेशल ट्रेनें बिलासपुर-रायपुर, दुर्ग-गोंदिया, इतवारी-रायगढ़ और शहडोल जैसे प्रमुख रूट्स पर चलाई जाएंगी, जिससे लंबी दूरी के यात्रियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। गर्मी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने प्रमुख स्टेशनों जैसे बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, गोंदिया, इतवारी, रायगढ़ और शहडोल में अतिरिक्त सुविधाएं बढ़ाई हैं। इनमें अतिरिक्त टिकट काउंटर, पीने के पानी की बेहतर व्यवस्था, वेटिंग हॉल में सुधार, सफाई और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। रेलवे का कहना है कि इन ट्रेनों के शुरू होने से यात्रियों की भीड़ कम होगी, वेटिंग लिस्ट घटेगी और कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे यात्रियों का सफर ज्यादा आसान और आरामदायक होगा।

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हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, अनुकंपा नियुक्ति विरासत नहीं; सास का ख्याल न रखने पर बहू की नौकरी जा सकती है

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए साफ किया है कि यह कोई व्यक्तिगत लाभ, उपहार या विरासत नहीं है, बल्कि परिवार को आर्थिक संकट से उबारने के उद्देश्य से दी जाने वाली व्यवस्था है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस ए.के. प्रसाद ने कहा कि जिस व्यक्ति को अनुकंपा नियुक्ति दी जाती है, उस पर परिवार के आश्रितों की जिम्मेदारी भी उतनी ही लागू होती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि नियुक्त व्यक्ति अपने दायित्वों से पीछे हटता है, तो उसकी नौकरी समाप्त की जा सकती है। यह मामला अंबिकापुर की रहने वाली एक महिला से जुड़ा है, जिनके पति पुलिस विभाग में कार्यरत थे और वर्ष 2001 में उनका निधन हो गया। इसके बाद उनके बेटे को अनुकंपा नियुक्ति मिली। बाद में बेटे की भी मृत्यु हो गई, जिसके बाद उसकी पत्नी को नौकरी दी गई। आरोप है कि नौकरी मिलने के बाद बहू ने अपनी सास की देखभाल करना बंद कर दिया और उनके साथ दुर्व्यवहार करने लगी। आर्थिक रूप से कमजोर हो चुकी सास ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका में यह भी बताया गया कि बहू को नौकरी इस शर्त पर दी गई थी कि वह सास का भरण-पोषण करेगी। लेकिन उसने इस जिम्मेदारी को निभाने से इनकार कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि नियुक्ति के समय बहू ने शपथ-पत्र देकर सास की देखभाल करने की बात स्वीकार की थी। ऐसे में यह जिम्मेदारी निभाना उसके लिए अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य केवल एक व्यक्ति को नौकरी देना नहीं, बल्कि पूरे परिवार को सहारा देना है। इसलिए नियुक्त व्यक्ति अपने कर्तव्यों से मुंह नहीं मोड़ सकता। कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि शर्तों का पालन नहीं किया गया, तो नियुक्ति रद्द की जा सकती है।

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कोपरा जलाशय के पास प्रस्तावित स्टील-पावर प्लांट रद्द, कंपनी ने पर्यावरणीय कारणों से आवेदन वापस लिया

बिलासपुर जिले के कोपरा जलाशय के पास प्रस्तावित स्टील और पावर प्लांट परियोजना को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। IMAEC स्टील एंड पावर लिमिटेड ने इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने के लिए दिया गया अपना आवेदन वापस ले लिया है। यह निर्णय पर्यावरणीय कारणों और वन्यजीव प्रेमियों की आपत्तियों के बाद लिया गया। दरअसल, इस परियोजना की पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट को लेकर सवाल उठाए गए थे। अधिवक्ता संदीप तिवारी और वाइल्डलाइफ फोटो जर्नलिस्ट सत्यप्रकाश पांडेय ने रिपोर्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद संबंधित प्राधिकरण ने मामले की जांच के निर्देश दिए थे। कंपनी ने 20 अप्रैल 2026 को औपचारिक पत्र भेजकर छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैंड प्राधिकरण से अपने आवेदन को निरस्त करने का अनुरोध किया। यह परियोजना बिलासपुर जिले के सकरी क्षेत्र में प्रस्तावित थी, जिसके लिए 24 मार्च 2026 को आवेदन किया गया था। कंपनी ने अपने पत्र में स्वीकार किया कि प्रस्तावित स्थल के पास स्थित कोपरा जलाशय एक संवेदनशील वेटलैंड क्षेत्र है, जिसका पर्यावरणीय महत्व अत्यधिक है। यहां समृद्ध जैव विविधता पाई जाती है और बड़ी संख्या में पक्षियों का आवागमन होता है। वन विभाग और अन्य एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि इस क्षेत्र में किसी भी औद्योगिक गतिविधि से पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने परियोजना को स्वेच्छा से वापस लेने का निर्णय लिया। कंपनी ने यह भी बताया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के PARIVESH पोर्टल पर जमा किया गया आवेदन भी वापस ले लिया गया है और इस मामले में आगे कोई कार्रवाई न करने का अनुरोध किया गया है। कोपरा जलाशय छत्तीसगढ़ की पहली रामसर साइट के रूप में जाना जाता है, जहां 161 प्रजातियों के पक्षियों का आवास है। इनमें 58 प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं, जो हर साल सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के जरिए यहां पहुंचती हैं। इस फैसले को पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता बचाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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बिलासपुर में पत्नी की कुल्हाड़ी से हत्या, शक के चलते वारदात; आरोपी खुद थाने पहुंचा

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने पत्नी पर शक के चलते कुल्हाड़ी से हमला कर उसकी जान ले ली। घटना के बाद आरोपी खुद थाने पहुंचा और पुलिस को पूरी जानकारी दी। यह मामला मस्तूरी थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार आरोपी जीवन नोरगे (65) अपनी पत्नी सरस्वती नोरगे के चरित्र पर संदेह करता था। इसी बात को लेकर मंगलवार को दोनों के बीच विवाद हुआ, जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। गुस्से में आकर आरोपी ने कुल्हाड़ी से पत्नी के सिर पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद वह सीधे थाने पहुंचा और घटना की जानकारी पुलिस को दी। सूचना मिलने पर पुलिस टीम आरोपी को लेकर घटनास्थल पहुंची, जहां महिला का शव मुंह के बल पड़ा मिला। सिर पर गंभीर चोट के निशान थे और कमरे में खून फैला हुआ था। मौके से खून से सनी कुल्हाड़ी और टूटी चूड़ियां भी बरामद की गईं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और आरोपी को हिरासत में ले लिया। बुधवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। आरोपी के खिलाफ धारा 103(1) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है।

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बिलासपुर में 43°C तापमान, स्टेशन पर मिस्टिंग से राहत; रायपुर में 44°C पार होने के आसार

छत्तीसगढ़ में गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। बिलासपुर में अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। तेज गर्मी से राहत देने के लिए बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर मिस्टिंग सिस्टम लगाया गया है। प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर ठंडे पानी की हल्की फुहारें छोड़ी जा रही हैं, जिससे यात्रियों को कुछ राहत मिल रही है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों में मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हो सकती है, लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी। इसके बाद प्रदेश में तापमान फिर 2 से 3 डिग्री तक बढ़ने की संभावना है। पिछले 24 घंटों में तापमान में हल्की गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन आने वाले दिनों में गर्मी फिर तेज होने के संकेत हैं। खासकर मध्य छत्तीसगढ़ के इलाकों में अगले चार दिनों तक लू चलने की स्थिति बन सकती है। इसके साथ ही कई स्थानों पर रात के समय भी गर्मी बनी रह सकती है, जिससे लोगों को रात में भी राहत नहीं मिलेगी। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, उत्तर छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय है, जिसका असर दक्षिण भारत तक फैला हुआ है। इस कारण मौसम में बदलाव की स्थिति बनी हुई है, लेकिन फिलहाल बारिश के आसार नहीं हैं। अगले तीन दिनों तक प्रदेश का मौसम शुष्क रहने की संभावना है। इस दौरान अलग-अलग इलाकों में हीट वेव की स्थिति बन सकती है। राजधानी रायपुर में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान करीब 30 डिग्री रहने का अनुमान है। ऐसे में लोगों को आने वाले दिनों में भीषण गर्मी के लिए तैयार रहना होगा।

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