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फाइल दबाने पर गिरी गाज: बिलासपुर में 2 अधिकारी मुख्यालय अटैच, युवक के ‘बादाम विरोध’ के बाद कार्रवाई

बिलासपुर में फ्लैट के नामांतरण की फाइल लंबे समय तक लंबित रखने के मामले में दो अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। वीडियो वायरल होने के बाद जांच में लापरवाही सामने आने पर दोनों को तत्काल प्रभाव से मुख्यालय, नवा रायपुर अटैच कर दिया गया है। मामले के अनुसार, आवेदक तरुण साहू ने 17 मार्च 2025 को नाम ट्रांसफर के लिए आवेदन किया था। 11 नवंबर 2025 तक सभी प्रक्रियाएं पूरी कर पत्र भी जारी कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद फाइल आवेदक को नहीं सौंपी गई और दफ्तर में ही पड़ी रही। इस वजह से उसे करीब एक साल तक दफ्तर के चक्कर लगाने पड़े। फाइल नहीं मिलने से नाराज होकर युवक ने अनोखे तरीके से विरोध जताया। वह हाउसिंग बोर्ड कार्यालय आधा किलो बादाम लेकर पहुंचा और अधिकारियों से कहा कि “इसे खाइए, याददाश्त बढ़ेगी, जब फाइल याद आ जाए तो बता दीजिए।” इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। जांच के बाद विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संपदा अधिकारी-कार्यपालन अभियंता एलपी बंजारे और एक अन्य संपदा प्रबंधक को मुख्यालय अटैच कर दिया। विभाग के आयुक्त ने कहा है कि आम लोगों के काम में देरी और लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इधर, वीडियो वायरल होने के बाद हाउसिंग बोर्ड कार्यालय की एक महिला अधिकारी समेत अन्य कर्मचारियों ने भी एसपी कार्यालय पहुंचकर युवक पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने जातिगत टिप्पणी और अन्य आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। हालांकि फिलहाल इस शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। एक ओर विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी ओर युवक ने भी अपना पक्ष रखते हुए वीडियो जारी किया है।

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दुर्ग में बिना हेलमेट चालकों पर कड़ा एक्शन, 4 महीनों में 23 हजार चालान

दुर्ग में सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए यातायात पुलिस ने बिना हेलमेट दोपहिया चलाने वालों के खिलाफ सख्त अभियान चला रखा है। साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही 23,088 वाहन चालकों पर कार्रवाई की गई है। पुलिस के मुताबिक, इन चालानों से अब तक कुल 1 करोड़ 15 लाख 44 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया है। यह आंकड़ा बताता है कि नियमों के उल्लंघन पर इस बार कार्रवाई पहले के मुकाबले काफी तेज हुई है। पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2023 में 1653 मामलों में 8.26 लाख रुपए, 2024 में 3961 मामलों में 19.80 लाख रुपए और 2025 में 2328 मामलों में 11.64 लाख रुपए का जुर्माना वसूला गया था। इससे साफ है कि 2026 में अभियान और ज्यादा सख्ती के साथ चलाया जा रहा है। हादसों के आंकड़े भी चिंताजनक हैं। साल 2025 में बिना हेलमेट सड़क हादसों में 230 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2026 के पहले चार महीनों में ही 26 लोगों की जान जा चुकी है। पुलिस का कहना है कि हेलमेट पहनने से इनमें से कई जानें बचाई जा सकती थीं। यातायात विभाग का दावा है कि लगातार सख्ती के कारण लोगों में जागरूकता बढ़ी है और अब पहले की तुलना में ज्यादा लोग हेलमेट पहन रहे हैं। इसके बावजूद अभी भी कई लोग नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, जिस पर पुलिस नजर बनाए हुए है। अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। शहर के विभिन्न हिस्सों में रोजाना चेकिंग की जा रही है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पिता की हत्या के मामले में बेटे की सजा उम्रकैद से घटाकर 10 साल

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में पिता की हत्या के आरोप में सजा काट रहे बेटे को राहत देते हुए उसकी सजा कम कर दी है। अदालत ने उम्रकैद की सजा को घटाकर 10 साल कठोर कारावास में बदल दिया है। यह निर्णय छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल शामिल थे, ने सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, बल्कि अचानक हुए विवाद और गुस्से में अंजाम दी गई। ऐसे मामलों में हत्या का स्पष्ट इरादा साबित नहीं होता, इसलिए इसे हत्या (IPC 302) के बजाय गैर-इरादतन हत्या (IPC 304 भाग-1) के तहत माना जाना चाहिए। दरअसल, यह मामला वर्ष 2020 का है, जो बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के रामचंद्रपुर थाना क्षेत्र के हरिहरपुर गांव का है। यहां लकड़ी रखने को लेकर पिता और बेटे के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान बेटे महात्मा यादव ने गुस्से में आकर अपने पिता जंगली यादव को पिकअप वाहन से कुचल दिया था। इस घटना में पिता गंभीर रूप से घायल हो गए थे और इलाज के दौरान करीब 9 दिन बाद उनकी मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी बेटे के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट पेश की गई और निचली अदालत ने ट्रायल के बाद आरोपी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, आरोपी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों का विश्लेषण किया। कोर्ट ने पाया कि घटना अचानक हुई थी और इसमें पूर्व योजना का कोई प्रमाण नहीं है। हालांकि, आरोपी को यह पता था कि उसका कृत्य जानलेवा हो सकता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सजा में संशोधन करते हुए हत्या की धारा को बदल दिया और उम्रकैद की सजा को घटाकर 10 साल कर दिया। अदालत ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि आरोपी को अब शेष सजा जेल में ही पूरी करनी होगी।

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बिलासपुर में दो ट्रेलरों की भिड़ंत के बाद आग, ड्राइवर की जिंदा जलकर मौत

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है, जहां दो ट्रेलरों की टक्कर के बाद एक वाहन में भीषण आग लग गई। इस हादसे में ट्रेलर चालक की जिंदा जलकर मौत हो गई। घटना सकरी थाना क्षेत्र के संबलपुरी ओवरब्रिज पर दोपहर करीब 12:15 बजे हुई। जानकारी के अनुसार, कोयले से लदा एक ट्रेलर बिलासपुर से रायपुर की ओर जा रहा था। इसी दौरान ओवरब्रिज पर सामने चल रहे दूसरे ट्रेलर से उसकी जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि एक ट्रेलर में तुरंत आग लग गई और कुछ ही मिनटों में पूरा वाहन आग की लपटों में घिर गया। हादसे के समय ट्रेलर चालक अरविंद भारद्वाज, जो झारखंड का रहने वाला था, केबिन में फंस गया और बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। दमकलकर्मियों ने काफी प्रयास के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक चालक की जान जा चुकी थी। पुलिस ने शव को बाहर निकालकर पंचनामा किया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सकरी थाना प्रभारी विजय चौधरी के अनुसार, ट्रेलर क्रमांक सीजी 10 बीएम 5007 के चालक ने आगे चल रहे ट्रेलर क्रमांक सीजी 02 7715 को पीछे से टक्कर मार दी, जिससे यह हादसा हुआ। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीछे से टक्कर लगने के कारण ही आग भड़की। पुलिस अब दूसरे ट्रेलर के चालक और वाहन मालिक की तलाश में जुटी है। वाहन के नंबर के आधार पर संबंधित लोगों की पहचान की जा रही है। मामले में दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच जारी है। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की लापरवाही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने लोगों से सतर्कता बरतने और यातायात नियमों का पालन करने की अपील की है।

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बिलासपुर में युवक ने खुद पर पेट्रोल डालकर लगाई आग, CCTV में कैद घटना

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक युवक द्वारा बीच सड़क पर खुद को आग लगाने की घटना सामने आई है। इस हादसे में युवक करीब 80 प्रतिशत तक झुलस गया है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। उसे बर्न और ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। घटना का वीडियो पास के CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हुआ है। यह मामला बिल्हा थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि युवक पहले पेट्रोल पंप से एक डिब्बे में पेट्रोल खरीदता है और फिर बाइक पर रखकर कुछ दूरी तक जाता है। इसके बाद वह सड़क किनारे रुकता है और अचानक खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा लेता है। आग की लपटों में घिरा युवक चीखते हुए करीब 20 मीटर तक भागता है और फिर सड़क पर गिरकर तड़पने लगता है। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पहुंचकर किसी तरह आग बुझाई और पुलिस व एंबुलेंस को सूचना दी। जानकारी के अनुसार, युवक बिलासपुर जिले के एक गांव का निवासी है और दोपहर के समय पेट्रोल खरीदने के बाद यह घटना हुई। पुलिस की मदद से उसे पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर बर्न और ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। प्रारंभिक बयान में युवक ने इसे दुर्घटना बताया है, लेकिन सामने आए वीडियो में वह खुद आग लगाते नजर आ रहा है। इसी वजह से पुलिस पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। फिलहाल घटना के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। युवक की हालत गंभीर बनी हुई है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

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बिलासपुर में म्यूल अकाउंट का खुलासा, बिल्डिंग सप्लायर के खाते से 10 राज्यों की ठगी का पैसा ट्रांसफर

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े एक म्यूल अकाउंट का पर्दाफाश किया है। मामले में एक बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर पर आरोप है कि वह पिछले कुछ महीनों से अपने बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम के लेनदेन के लिए कर रहा था। उसके खाते से देश के कई राज्यों से आए लाखों रुपये ट्रांसफर किए गए। यह कार्रवाई कोनी थाना क्षेत्र में की गई। केंद्र सरकार के पुलिस पोर्टल के जरिए संदिग्ध खाते की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस की तकनीकी टीम ने जांच शुरू की। जांच में आईडीबीआई बैंक के एक खाते पर संदेह हुआ, जिसके ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड खंगाले गए। जांच के दौरान पता चला कि इस खाते से जुड़े 10 से ज्यादा साइबर फ्रॉड की शिकायतें देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज हैं। खाते में ठगी की रकम जमा कर उसे तुरंत आगे ट्रांसफर किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार आरोपी ने 20 जनवरी 2026 को यह बैंक खाता खुलवाया था। इसके बाद से ही इसमें लगातार संदिग्ध लेनदेन हो रहे थे। आशंका है कि आरोपी ने साइबर ठगों के साथ मिलकर यह अकाउंट उपलब्ध कराया और इसके बदले कमीशन लेता था। तफ्तीश में यह भी सामने आया कि खाते में पैसा आते ही उसे यूपीआई और एटीएम के जरिए निकालकर अन्य खातों में भेज दिया जाता था, जिससे ट्रेस करना मुश्किल हो सके। पुलिस का कहना है कि म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल ठगी की रकम को छिपाने और पीड़ितों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया। आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है।

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बिलासपुर के मजदूरों को पुणे में बंधक बनाकर पीटा, इलाज के पैसे मांगने पर ठेकेदार ने की मारपीट

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के एक मजदूर परिवार के साथ महाराष्ट्र के पुणे में मारपीट और बंधक बनाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि लेबर ठेकेदार ने अपने साथियों के साथ मिलकर मजदूरों को बुरी तरह पीटा, जिसमें कई लोगों के सिर फट गए। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जानकारी के अनुसार, पुणे निवासी ठेकेदार भुवनेश्वर राय और सुरेंद्र राय नवंबर 2025 में बिलासपुर पहुंचे थे। उन्होंने पचपेड़ी थाना क्षेत्र के सुकुलकारी गांव के संतोष महिलांगे, उनकी पत्नी और अन्य रिश्तेदारों को काम दिलाने का झांसा दिया। कुछ एडवांस पैसे देकर सभी को अपने साथ पुणे के चांदे गांव ले गए, जहां उनसे मजदूरी कराई जा रही थी। परिवार के अनुसार, जब एक गर्भवती महिला के इलाज के लिए पैसों की जरूरत पड़ी और उन्होंने ठेकेदार से रकम मांगी, तो उसने गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर ठेकेदार और उसके साथियों ने मजदूरों के साथ बेरहमी से मारपीट की। पीड़ितों का कहना है कि इस दौरान संतोष महिलांगे को जबरन बंधक बना लिया गया। डर के माहौल में परिवार के कुछ सदस्य वहां से भागकर बिलासपुर पहुंचे और एसएसपी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने अपने परिजन को सुरक्षित वापस लाने की गुहार लगाई है। पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस में शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब बिलासपुर पुलिस और प्रशासन महाराष्ट्र पुलिस के संपर्क में हैं और बंधक बनाए गए मजदूर को सुरक्षित वापस लाने की कोशिश की जा रही है। वायरल वीडियो में ठेकेदार और उसके सहयोगी मजदूरों के साथ मारपीट करते और उन्हें धमकाते नजर आ रहे हैं। इसी वीडियो के आधार पर पुलिस आरोपियों की पहचान और लोकेशन ट्रेस करने में जुटी है। पुलिस की सलाह पर पीड़ित परिवार ने श्रम विभाग को भी मामले की जानकारी दे दी है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है।

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बिलासपुर में 12 फरार आरोपियों पर इनाम घोषित, सूचना देने पर मिलेगा 5-5 हजार रुपए

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पुलिस ने फरार आरोपियों के खिलाफ सख्ती बढ़ा दी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों से फरार 12 आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित किया है। इन आरोपियों के बारे में पुख्ता सूचना देने वाले को 5-5 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। पुलिस के अनुसार ये आरोपी विभिन्न गंभीर अपराधों में शामिल हैं और लंबे समय से फरार चल रहे हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए जिले के सकरी, तोरवा, कोटा, तखतपुर और बिल्हा थाना क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सकरी थाना क्षेत्र के आरोपी प्रशांत तिवारी (काठाकोनी) और रौनक धुर्वे (आसमा सिटी) भी सूची में शामिल हैं। वहीं तोरवा थाना क्षेत्र से मोनिस हटकेश्वर, वासू हटकेश्वर, हनी हटकेश्वर (बापूनगर निवासी), पवन कुमार यादव (जांजगीर-चांपा) और हिम बहादुर सोनार (सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल) पर भी इनाम घोषित किया गया है। कोटा थाना क्षेत्र के आरोपी धार्मिक भाई सवन्नी (सूरत, गुजरात) और संतोष कुमार पोर्ते (कोरबा) भी फरार हैं। इसके अलावा तखतपुर थाना क्षेत्र के परमेश्वर वैष्णव और बिल्हा थाना क्षेत्र के गुरुजी उर्फ मेवालाल टंडन (मुंगेली) की जानकारी देने वालों को भी इनाम दिया जाएगा। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि इन आरोपियों के बारे में कोई भी जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। जानकारी देने के लिए पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं, जिनमें बिलासपुर एसएसपी कार्यालय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस कंट्रोल रूम और संबंधित थाना प्रभारियों के नंबर शामिल हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर 07752-223330; अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, शहर बिलासपुर 9479193002; पुलिस नियंत्रण कक्ष, बिलासपुर 07758-228504 और 9479193099। इसके अतिरिक्त, थाना प्रभारी सकरी 9479191721, तोरवा 9479193021, कोटा 9479193028, तखतपुर 9479193027 और बिल्हा 9479193038 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

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बिलासपुर में तालाब में डूबने से युवक की मौत, पिकनिक के दौरान नहाते समय हादसा

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पिकनिक मनाने गए एक युवक की तालाब में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने रातभर युवक की तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में गुरुवार को गोताखोरों की मदद से युवक का शव बरामद किया गया। यह घटना सकरी थाना क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार तिफरा निवासी 25 वर्षीय मोनू ध्रुव अपने दोस्तों के साथ बुधवार सुबह ललहीखार पिकनिक मनाने गया था। दोपहर में सभी ने मिलकर खाना बनाया और वहां शराब पार्टी भी की। शाम के समय खाना खाने के बाद सभी दोस्त सलमपुरी स्थित गोविंदा तालाब में बर्तन धोने पहुंचे। इसी दौरान मोनू नहाने के लिए तालाब में उतर गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वह अचानक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। दोस्तों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन तालाब की अधिक गहराई के कारण वे सफल नहीं हो सके। घटना से घबराकर उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर सकरी पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और रात तक युवक की तलाश जारी रखी गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अगले दिन सुबह फिर से सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। घंटों की खोजबीन के बाद गोताखोरों ने युवक का शव बरामद कर लिया। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मर्ग कायम कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

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छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 हाईकोर्ट में चुनौती, उम्रकैद के प्रावधान पर मसीही समाज ने उठाए सवाल

छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ को लेकर विवाद अब न्यायालय तक पहुंच गया है। मसीही समाज के प्रतिनिधि क्रिस्टोफर पॉल ने इस कानून के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इसके कई प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त करने की मांग की है। राज्य सरकार द्वारा लाए गए इस विधेयक में जबरन, लालच या धोखे से धर्मांतरण कराने पर सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। कानून के अनुसार अवैध धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा दी जा सकती है। साथ ही बड़े पैमाने पर या संगठित तरीके से धर्म परिवर्तन कराने पर और कठोर दंड का उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता क्रिस्टोफर पॉल का कहना है कि यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने विशेष रूप से उम्रकैद जैसी सजा को अनुचित और असंवैधानिक बताया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि विधेयक में इस्तेमाल की गई कई परिभाषाएं स्पष्ट नहीं हैं, जिससे कानून के दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा यह व्यक्तिगत निजता और आस्था की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करता है। मसीही समाज की ओर से यह आशंका भी जताई गई है कि इस कानून का उपयोग किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। उनके अनुसार, कठोर सजा और अस्पष्ट शब्दावली के कारण उत्पीड़न का खतरा बढ़ सकता है। फिलहाल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हो चुकी है, लेकिन सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है। राज्य सरकार का पक्ष है कि यह कानून धर्मांतरण को रोकने के लिए नहीं, बल्कि गैरकानूनी तरीकों जैसे दबाव, प्रलोभन और धोखाधड़ी के जरिए कराए जा रहे धर्म परिवर्तन पर नियंत्रण के उद्देश्य से लाया गया है। आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की जनसंख्या 3 करोड़ से अधिक है, जिसमें विभिन्न धर्मों के लोग निवास करते हैं। राज्य में ईसाई समुदाय की भी उल्लेखनीय उपस्थिति है और यहां लगभग 900 चर्च बताए जाते हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।

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