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बस्तर में आवारा कुत्तों का आतंक, रोज 25 लोग हो रहे डॉग बाइट का शिकार

बस्तर। जिले में बढ़ती गर्मी के साथ आवारा कुत्तों का आतंक भी तेजी से बढ़ रहा है। गली-मोहल्लों में झुंड बनाकर घूम रहे कुत्ते राहगीरों पर हमला कर रहे हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। महारानी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में रोजाना 20 से 25 डॉग बाइट के मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक गर्मी के मौसम में जानवरों का व्यवहार अधिक आक्रामक हो जाता है। शरीर से पसीना बाहर नहीं निकल पाने की वजह से वे चिड़चिड़े हो जाते हैं और लोगों पर हमला कर देते हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पालतू जानवरों को समय-समय पर वैक्सीन लग जाती है, लेकिन सड़कों पर घूमने वाले आवारा कुत्ते ज्यादा खतरा पैदा कर रहे हैं। शहर के 48 वार्डों में खासकर रात के समय लोगों में डर का माहौल है। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि कुत्ते के काटने पर तुरंत घाव को साबुन और पानी से साफ करें और बिना देरी किए एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाएं।

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पोलियो वैक्सीन की 8500 शीशियां टूटीं, बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा, लाखों का नुकसान | बस्तर-रायपुर

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के सरकारी अस्पतालों में ओरल पोलियो वैक्सीन की बड़ी खेप में गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। सप्लाई के दौरान करीब 8500 से अधिक वैक्सीन वायल्स टूटी और चटकी हुई हालत में पाई गईं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। यह वैक्सीन नवजात और छोटे बच्चों को पोलियो से सुरक्षा देने के लिए भेजी गई थी, जिससे लगभग 1.71 लाख बच्चों को लाभ मिल सकता था, लेकिन खराब स्थिति के कारण पूरी खेप को इस्तेमाल से रोक दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सभी क्षतिग्रस्त वायल्स को बायो-मेडिकल वेस्ट गाइडलाइंस के तहत तुरंत नष्ट किया जाए। प्रारंभिक जांच में इस नुकसान के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं, जिनमें अत्यधिक ठंड के कारण फ्रीजिंग स्ट्रेस, ट्रांसपोर्टेशन के दौरान खराब सड़कों पर झटकों से कांच का टूटना और निर्माण स्तर पर ग्लास क्वालिटी में संभावित तकनीकी खराबी शामिल हैं। बस्तर क्षेत्र में जर्जर सड़कों और डिलीवरी के दौरान सुरक्षा पैकेजिंग की कमी को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान बस्तर संभाग में दर्ज किया गया है, जहां करीब 40,000 खुराक की खेप में से लगभग 7000 वायल टूटी हुई पाई गईं। दंतेवाड़ा जिले में भेजी गई 5000 खुराक में से 1500 वायल खराब मिलीं, जबकि सुकमा में केवल 50 वायल क्षतिग्रस्त पाई गईं जिन्हें नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकारी अनुमान के अनुसार एक वायल की कीमत लगभग 220 से 250 रुपये है, ऐसे में हजारों वायल के नष्ट होने से सरकार को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। ओरल पोलियो वैक्सीन का उत्पादन देश की प्रमुख राष्ट्रीय लैब्स जैसे हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक और अन्य केंद्रों में किया जाता है। इसके बाद इसे कोल्ड-चेन सिस्टम के तहत विशेष रेफ्रिजरेटेड वाहनों से रायपुर स्टेट वैक्सीन स्टोर और फिर अलग-अलग जिलों तक पहुंचाया जाता है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और स्वास्थ्य विभाग ने सप्लाई और स्टोरेज सिस्टम की समीक्षा के निर्देश दिए हैं।

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अमित शाह का बड़ा ऐलान: बस्तर बनेगा देश का सबसे विकसित संभाग, डेयरी नेटवर्क से लेकर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल तक की तैयारी

छत्तीसगढ़ के बस्तर में पहली बार आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने बस्तर के विकास और नक्सलवाद को लेकर कई बड़े ऐलान किए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने दावा किया कि 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। गृहमंत्री ने कहा कि बस्तर अब तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा और आने वाले समय में इसे देश का सबसे विकसित संभाग बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित इलाकों में बनाए गए करीब 70 सुरक्षा कैंपों में से एक-तिहाई कैंपों को “वीर शहीद गुंडाधर सेवा डेरा” के रूप में विकसित किया जाएगा। Amit Shah ने कहा कि बस्तर में आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पशुपालन से जोड़ने की योजना तैयार की गई है। इसके तहत हर आदिवासी परिवार को एक गाय और एक भैंस उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही अगले छह महीनों में पूरे बस्तर क्षेत्र में बड़ा डेयरी नेटवर्क तैयार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, मॉडल स्कूल और अन्य जरूरी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा ताकि क्षेत्र के लोगों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। वहीं नक्सल उन्मूलन में सहयोग नहीं मिलने को लेकर कांग्रेस सरकार पर लगाए गए आरोपों पर पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि “अमित शाह से बड़ा झूठा कोई नहीं है। नक्सलवाद के खिलाफ जो काम हुआ, वह हमारी सरकार के समय हुआ और अब उसका श्रेय लिया जा रहा है।”

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जगदलपुर में अमित शाह की बड़ी बैठक: 4 राज्यों के मुख्यमंत्रियों संग नक्सलवाद, विकास और कनेक्टिविटी पर मंथन

बस्तर के जगदलपुर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक आयोजित की जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की अध्यक्षता में हो रही इस अहम बैठक में Chhattisgarh, Madhya Pradesh, Uttarakhand और Uttar Pradesh के मुख्यमंत्री शामिल हुए हैं। बैठक में नक्सल उन्मूलन, राज्यों के बीच बेहतर इंटेलिजेंस साझा करने, आदिवासी कल्याण, डिजिटल प्रशासन और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। इसके साथ ही रेल और सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को देश के अन्य हिस्सों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके। बस्तर की नई पहचान दिखाने की कोशिश कभी नक्सल हिंसा के कारण सुर्खियों में रहने वाला बस्तर अब विकास और प्रशासनिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में पेश किया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा यहां इतनी बड़ी बैठक आयोजित करना केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक रणनीतिक और राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। जिस क्षेत्र में पहले सुरक्षा कारणों से बड़े नेताओं के दौरे सीमित रहते थे, वहां अब एक साथ कई राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मौजूद हैं। इसे सरकार नक्सल विरोधी अभियानों की सफलता और बदलते हालात के संकेत के रूप में देख रही है। नक्सलवाद पर सख्त रुख गृह मंत्री अमित शाह पहले भी कई बार कह चुके हैं कि केंद्र सरकार नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही है। हाल के महीनों में बस्तर संभाग में सुरक्षाबलों ने कई बड़े अभियान चलाए, जिनमें कई नक्सली कमांडर मारे गए या गिरफ्तार किए गए। सरकार का दावा है कि 31 मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सलवाद मुक्त घोषित कर दिया गया है। अब फोकस विकास योजनाओं और स्थायी शांति स्थापित करने पर रखा जा रहा है। विकास और राज्यों के समन्वय पर चर्चा बैठक में राज्यों के बीच कानून व्यवस्था, सीमा विवाद, बिजली, जल संसाधन, परिवहन और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हो रहा है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित इलाकों में संयुक्त रणनीति और बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है। बस्तर को पर्यटन और निवेश केंद्र बनाने की तैयारी सरकार अब बस्तर को केवल संघर्ष वाले क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि पर्यटन, निवेश और विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहती है। माना जा रहा है कि बैठक के बाद गृह मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बस्तर को लेकर केंद्र सरकार का आगे का विजन भी सामने आ सकता है। गुंडाधुर की धरती को मिलेगा नया स्वरूप बस्तर दौरे के दौरान अमित शाह ने कहा कि पिछले 50 वर्षों में बस्तर को जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई आने वाले कुछ वर्षों में की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक बस्तर पूरी तरह विकसित नहीं होगा, तब तक सरकार का संकल्प अधूरा रहेगा। उन्होंने अमर शहीद Gunda Dhur को याद करते हुए कहा कि इसी धरती से अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष की शुरुआत हुई थी। शाह ने कहा कि पहले यहां हिंसा, स्कूलों पर हमले और आम लोगों में डर का माहौल था, लेकिन अब सरकार ने कड़े कदम उठाकर हालात बदल दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर की इस ऐतिहासिक धरती को भविष्य में एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। कांग्रेस ने उठाए खर्च पर सवाल इस बैठक को लेकर Deepak Baij ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है, तब इस बैठक को वर्चुअल तरीके से भी आयोजित किया जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग विशेष विमानों से नेताओं के आने-जाने में लाखों रुपए खर्च होंगे और ईंधन की भी खपत बढ़ेगी। उनके अनुसार, यह बैठक ऑनलाइन माध्यम से भी की जा सकती थी।

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बस्तर में आकाशीय बिजली का कहर, बीजापुर और जगदलपुर में 21 मवेशियों की मौत

Jagdalpur और Bijapur जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से बड़ा नुकसान हुआ है। अलग-अलग घटनाओं में कुल 21 मवेशियों की मौत हो गई, जिससे ग्रामीण पशुपालकों को भारी आर्थिक क्षति हुई है। जगदलपुर शहर से लगे चिलकुटी गांव के सुरंगियापारा में शनिवार रात बारिश के दौरान 11 मवेशी पेड़ के नीचे बैठे थे। इसी दौरान अचानक बिजली गिरने से सभी मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पशुपालकों में नुकसान को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी तरह बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक के पोन्दुम गांव में भी आकाशीय बिजली गिरने की घटना हुई, जहां 10 मवेशियों की मौत हो गई। यह घटना शनिवार शाम करीब साढ़े 7 बजे की बताई जा रही है। उस समय मवेशी खुले मैदान में थे और मौसम खराब होने के बाद बिजली गिर गई। ग्रामीणों के अनुसार, पशुपालन ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है, ऐसे में मवेशियों की मौत से कई परिवारों पर आर्थिक संकट गहरा गया है। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की है।

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का 3 दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा आज से शुरू, पूरे प्रदेश में डायल-112 और फॉरेंसिक यूनिट्स का विस्तार

केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah 17 से 19 मई तक छत्तीसगढ़ दौरे पर रहेंगे। इस दौरान उनका फोकस बस्तर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था, विकास कार्यों की समीक्षा, जनसुविधाओं के विस्तार और मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक पर रहेगा। दौरे के तहत रायपुर और बस्तर संभाग में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अमित शाह रविवार शाम रायपुर पहुंचेंगे और मेफेयर रिसॉर्ट में रात्रि विश्राम करेंगे। उनके दौरे को लेकर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थलों तक पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर हैं। 18 मई को गृह मंत्री रायपुर के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में डायल-112 सेवा के लिए 400 नए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। राज्य सरकार इस सेवा का विस्तार अब पूरे छत्तीसगढ़ में करने जा रही है। अब तक यह सुविधा 16 जिलों तक सीमित थी, लेकिन नई व्यवस्था के बाद प्रदेश के सभी थानों को इससे जोड़ा जाएगा, जिससे आपातकालीन स्थिति में पुलिस सहायता और तेज हो सकेगी। इसके साथ ही राज्य के सभी 33 जिलों के लिए आधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट्स भी शुरू की जाएंगी। इन वाहनों में अत्याधुनिक जांच उपकरण लगाए गए हैं, जिनकी मदद से घटनास्थल पर ही शुरुआती वैज्ञानिक जांच संभव होगी। इससे अपराध जांच प्रक्रिया को और मजबूत बनाने की तैयारी की गई है। रायपुर कार्यक्रम के बाद अमित शाह विशेष विमान से जगदलपुर पहुंचेंगे और वहां से बीएसएफ हेलीकॉप्टर के जरिए नेतानार जाएंगे। नेतानार में वे जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन करेंगे। माना जा रहा है कि यह केंद्र ग्रामीणों को सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद करेगा। इसके बाद वे जगदलपुर स्थित अमर वाटिका में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों में शहीद हुए जवानों की स्मृति में यह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जगदलपुर में बादल अकादमी में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर वे सुरक्षा, विकास और जनकल्याण योजनाओं की समीक्षा करेंगे। इस दौरान सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, कनेक्टिविटी और पुनर्वास से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है। शाम को अमित शाह भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे और ‘बस्तर के संग’ नामक लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम में बस्तर की पारंपरिक संस्कृति और लोक कला की प्रस्तुति दी जाएगी। 19 मई को जगदलपुर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक आयोजित होगी। इस बैठक की अध्यक्षता अमित शाह करेंगे, जिसमें चार राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में अंतरराज्यीय समन्वय, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बैठक के बाद अमित शाह प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और फिर दिल्ली के लिए रवाना होंगे। सुरक्षा और विकास के एजेंडे के साथ हो रहा यह दौरा छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर क्षेत्र के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

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अमित शाह के बस्तर दौरे की तैयारियों का उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने लिया जायजा

छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री Vijay Sharma ने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के प्रस्तावित बस्तर दौरे को लेकर तैयारियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जगदलपुर से कार्यक्रम स्थल तक निजी वाहन के बजाय बस से सफर किया। उनके साथ बस्तर सांसद Mahesh Kashyap, जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी मौजूद रहे। इसे प्रधानमंत्री Narendra Modi के साझा परिवहन के आह्वान से जोड़कर देखा जा रहा है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा जगदलपुर विकासखंड के नेतानार स्थित शहीद गुण्डाधुर सेवा डेरा पहुंचे, जहां उन्होंने कार्यक्रम स्थल और विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए गए। उन्होंने सेवा डेरा परिसर में संचालित सेवा सेतु केंद्र, बैंक सखी केंद्र और महिला स्व सहायता समूहों की गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान समूह से जुड़ी महिलाओं से चर्चा कर उनके कार्यों और स्वरोजगार से जुड़े प्रयासों की जानकारी ली। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की महिलाएं स्व सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में बेहतर काम कर रही हैं और शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सेवा सेतु केंद्र अहम भूमिका निभा रहे हैं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने शहीद गुंडाधुर की प्रतिमा स्थल का भी दौरा किया। अधिकारियों को साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, रंग-रोगन और सजावट बेहतर तरीके से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। विजय शर्मा ने कहा कि शहीद गुंडाधुर से जुड़ा यह स्थल बस्तर के गौरव और इतिहास का प्रतीक है, इसलिए यहां सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित और बेहतर होनी चाहिए।

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अबूझमाड़ में बदलाव की शुरुआत: नक्सल प्रभाव खत्म होने के बाद 239 गांवों में पहली बार पहुंचा प्रशासन

बस्तर का Abujhmad क्षेत्र, जो कभी नक्सल गतिविधियों का गढ़ माना जाता था, अब धीरे-धीरे मुख्यधारा से जुड़ रहा है। केंद्र सरकार द्वारा इस क्षेत्र को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किए जाने के बाद यहां प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पहली बार यहां के 239 गांवों में सरकारी सर्वे शुरू किया गया है। इस सर्वे के जरिए गांवों में रहने वाले परिवारों की संख्या, सदस्यों का विवरण, खेती करने वाले लोगों की जानकारी और जमीन के उपयोग का आकलन किया जा रहा है। राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम इस काम में जुटी हुई है। सर्वे को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए Indian Institute of Technology Roorkee की मदद से पूरे क्षेत्र का सैटेलाइट मैप तैयार किया जा रहा है। सैटेलाइट इमेज के आधार पर गांवों और आबादी का प्रारंभिक नक्शा बनाया जा रहा है, जिसके बाद फील्ड टीम मौके पर जाकर हर घर और जमीन का सत्यापन करेगी। सर्वे पूरा होने के बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके आधार पर जो परिवार जहां निवास कर रहा है और जिस जमीन पर खेती कर रहा है, उसे उसी के अनुसार मालिकाना हक प्रदान किया जाएगा। इससे लंबे समय से बिना अधिकार के रह रहे वनवासियों को कानूनी पहचान और जमीन का अधिकार मिल सकेगा। नारायणपुर जिले का ओरछा ब्लॉक, जिसे अबूझमाड़ के नाम से जाना जाता है, दशकों तक प्रशासन की पहुंच से बाहर रहा। आजादी के बाद भी यहां कई गांव सड़क और संचार सुविधाओं से कटे हुए थे। जैसे ही सड़क निर्माण शुरू हुआ, नक्सली गतिविधियां बढ़ गईं, जिससे यह इलाका उनका सुरक्षित ठिकाना बन गया। इसी वजह से यहां गांवों, आबादी और जमीन का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार नहीं हो पाया था। अब सुरक्षा बलों की मौजूदगी और सड़क विस्तार के बाद हालात बदल रहे हैं और प्रशासन पहली बार गांवों तक पहुंच पा रहा है। करीब 3 लाख हेक्टेयर में फैले इस घने जंगल क्षेत्र में वन विभाग की गतिविधियां भी दोबारा शुरू की जा रही हैं। जिन इलाकों में वर्षों पहले नक्सलियों द्वारा वन विभाग के भवनों को नष्ट कर दिया गया था, वहां फिर से काम शुरू हो रहा है। प्रशासन के अनुसार, सर्वे के साथ-साथ ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा। नक्शा और खसरा तैयार होने के बाद जमीन के अधिकार देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह पहल न केवल विकास को गति देगी, बल्कि क्षेत्र के लोगों को स्थायी पहचान और अधिकार भी दिलाएगी।

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बस्तर में 108 नक्सलियों का सामूहिक आत्मसमर्पण, डंप से 3.61 करोड़ नकद और 1 किलो सोना बरामद

छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान के बीच एक बड़ी सफलता सामने आई है। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े 108 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इन नक्सलियों पर कुल 3.29 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था। जानकारी के मुताबिक आत्मसमर्पण के बाद नक्सलियों ने पुलिस को अलग-अलग स्थानों पर छिपाए गए डंप की जानकारी दी। इसके बाद सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए 3.61 करोड़ रुपए नकद, करीब 1 किलो सोना (लगभग 1.64 करोड़ रुपए कीमत) और 101 हथियारों का जखीरा बरामद किया। बताया जा रहा है कि नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और सोना बरामद हुआ है। 101 हथियारों का बड़ा जखीरा मिला बरामद हथियारों में 7 AK-47, 10 इंसास राइफल, 1 कार्बाइन, 5 SLR, 4 LMG, 20 .303 राइफल, 25 बारह बोर राइफल, 11 BGL लॉन्चर, 1 मोर्टार, 3 .315 बोर राइफल, 13 भरमार बंदूक और 1 मेगा BGL शामिल हैं। कई बड़े कैडर ने भी छोड़ा नक्सलवाद आत्मसमर्पण करने वालों में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के कई अहम सदस्य शामिल हैं। इनमें पश्चिम बस्तर डिवीजन के राहुल तेलाम, पंडरू कोवासी, झितरु ओयाम, पूर्व बस्तर डिवीजन के रामधर उर्फ बीरु, उत्तर बस्तर डिवीजन के मल्लेश, पीएलजीए बटालियन नंबर-1 के कमांडर मुचाकी और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर के कोसा मंडावी जैसे कैडर शामिल हैं। 26 महीनों में 2714 नक्सलियों ने किया सरेंडर पुलिस महानिदेशक अरुणदेव गौतम ने बताया कि बस्तर क्षेत्र में चलाए जा रहे “पूना मारगेम” अभियान के तहत पिछले 26 महीनों में अब तक 2714 नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। सरकार ने बताया शांति की ओर बड़ा कदम मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस सामूहिक आत्मसमर्पण को बस्तर में शांति और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों तथा सुरक्षा बलों के प्रयासों से नक्सलवाद खत्म करने की दिशा में लगातार सफलता मिल रही है।

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छत्तीसगढ़ में रविवार को ही क्यों बढ़ते हैं हिंदू-ईसाई टकराव?

पिछले 5 साल में 200 से ज्यादा विवाद, 19 जिले प्रभावित, बस्तर बना हॉटस्पॉट छत्तीसगढ़ में हिंदू और ईसाई समुदाय के बीच टकराव की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इन घटनाओं में एक समान पैटर्न देखने को मिलता है—धर्मांतरण, मतांतरण और प्रार्थना सभाएं। खास बात यह है कि अधिकांश विवाद रविवार के दिन ही होते हैं। इसी आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन शुक्रवार व शनिवार से ही हाई अलर्ट पर रहता है। भास्कर डिजिटल की पड़ताल में सामने आया कि बीते 5 वर्षों में प्रदेश में हिंदू-ईसाई समुदायों के बीच 200 से अधिक विवाद दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 60 से ज्यादा FIR हुई हैं। सबसे ज्यादा टकराव बस्तर संभाग सहित 19 जिलों में देखने को मिला है। इन घटनाओं में कांकेर में शव दफनाने को लेकर हिंसा, दुर्ग रेलवे स्टेशन से मिशनरी सिस्टर्स की गिरफ्तारी, रायपुर में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप, बिलासपुर में प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण जैसे कई मामले शामिल हैं। किन जिलों में सबसे ज्यादा विवाद छत्तीसगढ़ में ईसाई समाज की गतिविधियां 19 जिलों में अधिक सक्रिय बताई जाती हैं। इन इलाकों में चर्च और प्रार्थना सभाएं संचालित होती हैं, जिनमें कुछ पंजीकृत हैं तो कई घरों से संचालित हो रही हैं। इसी को लेकर धर्मांतरण और मतांतरण के आरोपों पर विवाद की स्थिति बनती है। सबसे ज्यादा तनाव बस्तर संभाग में देखने को मिला है। बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर और सुकमा जिले धर्मांतरण और अंतिम संस्कार (दफनाने) से जुड़े विवादों के प्रमुख केंद्र रहे हैं। इसके अलावा कोरबा, बलरामपुर, महासमुंद, दुर्ग और बिलासपुर में भी बार-बार टकराव हुआ है। वहीं सरगुजा और सूरजपुर में अपेक्षाकृत कम विवाद सामने आए हैं। रविवार को ही क्यों होती हैं घटनाएं दरअसल, रविवार को ईसाई समुदाय की प्रार्थना सभाएं आयोजित होती हैं। इनमें यीशु मसीह की आराधना, धार्मिक उपदेश और कथाएं सुनाई जाती हैं। इन सभाओं में कई बार हिंदू समुदाय के लोगों को भी आमंत्रित किया जाता है। अनेक मामलों में जब हिंदू संगठनों को इन सभाओं में धर्मांतरण की आशंका होती है, तो वे विरोध दर्ज कराने पहुंचते हैं। इसी दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ जाते हैं और तनाव की स्थिति बन जाती है। कई बार पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात कर हालात संभालने पड़ते हैं। वरिष्ठ पत्रकार की राय वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार का कहना है कि हर रविवार को स्वतः दो समुदायों के बीच टकराव होना कहना सही नहीं है। उनके अनुसार, कुछ आक्रामक समूहों द्वारा दूसरे समुदायों की प्रार्थना सभाओं पर हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को स्वयं कानून के तहत कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि हालात न बिगड़ें। पिछले वर्षों की प्रमुख घटनाएं पिछले कुछ वर्षों में दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, बालोद और कांकेर जैसे जिलों में धर्मांतरण, प्रार्थना सभा, अवैध चर्च और अंतिम संस्कार को लेकर कई बड़े विवाद हुए। कई मामलों में पुलिस ने गिरफ्तारी की, FIR दर्ज हुई और प्रशासनिक कार्रवाई भी की गई। धर्मांतरण और मतांतरण क्या है धर्मांतरण का अर्थ है एक धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाना। छत्तीसगढ़ में इसके लिए जिला प्रशासन को पूर्व सूचना देना अनिवार्य है।मतांतरण में व्यक्ति अपने विश्वास और आस्था में बदलाव करता है, लेकिन इसका सरकारी रिकॉर्ड आवश्यक नहीं होता। छत्तीसगढ़ का धार्मिक स्वतंत्रता कानून प्रदेश में छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है। इसके तहत जबरन, प्रलोभन या धोखे से धर्मांतरण कराना अपराध है। राज्य सरकार इसे और सख्त करने के लिए नया मसौदा तैयार कर रही है, जिसमें धर्म परिवर्तन से पहले और बाद में घोषणा और सत्यापन की प्रक्रिया को अनिवार्य किया जाएगा। राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से 19 सीटों पर ईसाई मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। जशपुर जैसे जिलों में चुनावी परिणामों पर ईसाई मतदाताओं का प्रभाव निर्णायक माना जाता है।

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