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भिलाई में बन रहे 4.93 करोड़ के स्विमिंग पूल पर विवाद, गलत दिशा में निर्माण से खिलाड़ियों को होगी परेशानी

भिलाई नगर निगम द्वारा प्रियदर्शिनी परिसर (पश्चिम) में लगभग 4.93 करोड़ रुपये की लागत से नया स्विमिंग पूल बनाया जा रहा है, लेकिन इसके निर्माण को लेकर अब तकनीकी सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि पूल की खुदाई करीब 5 फीट तक हो चुकी है, जबकि इसकी दिशा और लोकेशन को लेकर विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई है। स्विमिंग विशेषज्ञों के अनुसार, खुले स्विमिंग पूल सामान्यतः उत्तर-दक्षिण दिशा में बनाए जाते हैं, ताकि सुबह और शाम की धूप सीधे तैराकों की आंखों में न पड़े। लेकिन यहां पूल पूर्व-पश्चिम दिशा में बनाया जा रहा है, जिससे अभ्यास के दौरान खिलाड़ियों को गंभीर दिक्कत हो सकती है। उनका कहना है कि इस तरह की दिशा में बने पूल में न तो सही प्रशिक्षण हो पाएगा और न ही राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकेंगी। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मानकों की अनदेखी भविष्य में खिलाड़ियों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है और करोड़ों रुपये की लागत से बना यह पूल केवल सामान्य उपयोग तक सीमित रह सकता है। डूब क्षेत्र में निर्माण से बढ़ी चिंता स्थानीय लोगों ने निर्माण स्थल को लेकर भी चिंता जताई है। बताया जा रहा है कि प्रियदर्शिनी परिसर का यह हिस्सा सुपेला के कोसा नाला के पास स्थित डूब क्षेत्र में आता है, जहां बारिश के मौसम में पानी भरने की समस्या रहती है। लोगों का कहना है कि जमीन की ऊंचाई बढ़ाए बिना सीधे खुदाई शुरू कर दी गई, जिससे बरसात में पूरा इलाका जलभराव की चपेट में आ सकता है। विपक्ष ने लगाए अनियमितता के आरोप नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा ने निर्माण कार्य में लापरवाही और अनियमितताओं का आरोप लगाया है। कोचों के साथ निरीक्षण के बाद उन्होंने कहा कि पूल की डिजाइन तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं है। यदि इसी तरह निर्माण जारी रहा, तो यह स्विमिंग पूल की बजाय एक साधारण तालाब जैसा बन सकता है और बड़े आयोजनों की मेजबानी का मौका भी हाथ से निकल जाएगा। मानकों के अनुसार क्या होना चाहिए एनआईएस कोच तामेश्वर घंघोरी के मुताबिक, प्रतियोगिता स्तर के स्विमिंग पूल की लंबाई 50 मीटर और चौड़ाई लगभग 25–26 मीटर होती है, जिसमें 10 लेन बनाई जा सकती हैं। इसकी सामान्य गहराई करीब 2 मीटर रखी जाती है। खुले क्षेत्र में बने पूल की दिशा उत्तर-दक्षिण होना जरूरी माना जाता है, ताकि सूर्य की रोशनी तैराकों के प्रदर्शन में बाधा न बने। निगम ने दी सफाई भिलाई नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी तिलेश्वर साहू ने कहा कि इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि हर स्थल की भौगोलिक स्थिति अलग होती है, इसलिए दिशा का निर्धारण उसी के अनुसार किया जाता है। निगम का दावा है कि निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन और तय प्रक्रिया के अनुसार किया जा रहा है तथा सभी तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

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बिलासपुर में बर्ड फ्लू का खतरा: 22,808 पक्षी और 25,896 अंडे नष्ट

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) का खतरा बढ़ गया है। कोनी स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में वायरस की पुष्टि होने के बाद बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई। यहां 5 हजार से अधिक मुर्गियों की मौत के बाद कुल 22,808 पक्षियों और 25,896 अंडों को नष्ट कर दिया गया। 17 मार्च से हो रही थी मौतें, सप्लाई जारी रही जानकारी के मुताबिक, 17 मार्च से पहले ही फार्म में मुर्गे-मुर्गियों की मौत शुरू हो गई थी। इसके बावजूद पूरे संभाग में मुर्गे, मुर्गियां और चूजों की सप्लाई लगातार जारी रही। जब बड़ी संख्या में मौतें हुईं, तब करीब 6 दिन बाद सैंपल जांच के लिए भेजे गए। रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। जू बंद, डोर-टू-डोर सर्वे शुरू संक्रमण रोकने के लिए एहतियातन कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क को 7 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की 14 सदस्यीय टीमें देवनंदन नगर क्षेत्र में घर-घर सर्वे कर रही हैं। प्रशासन का दावा है कि संक्रमण नियंत्रण में है और सभी जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं। खुले में फेंके गए मरे पक्षियों से बढ़ी चिंता मामले के बाद अलग-अलग इलाकों में मरे हुए पक्षियों को खुले में फेंके जाने की खबरें भी सामने आई हैं। खमतराई क्षेत्र की ड्रीम सिटी कॉलोनी के पास बोरियों में भरी मृत मुर्गियों को नाली में फेंकने का आरोप है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षित दफनाने के दावे के बावजूद लापरवाही बरती गई, जिससे बदबू और संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। दो दिन में बड़े पैमाने पर नष्ट किए गए पक्षी संक्रमण फैलने से रोकने के लिए व्यापक कार्रवाई में हजारों पक्षियों को दफनाया या नष्ट किया गया। इनमें लगभग 5 हजार मुर्गियां, 5 हजार बटेर, 600 बतख, 17 हजार चूजे और 20 हजार अंडे शामिल हैं। इसके अलावा हैचरी की दवाइयों समेत करीब 13 लाख रुपए की सामग्री भी नष्ट की गई। मंगलवार और बुधवार तक कुल 22,808 पक्षी, 25,896 अंडे और 79 क्विंटल दाना नष्ट किया जा चुका है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।

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पद्मश्री वेटलिफ्टर मीराबाई चानू की प्रेरक कहानी: लकड़ियों का गट्ठा उठाने से शुरू हुआ सफर

पद्मश्री विजेता और ओलंपिक पदक विजेता वेटलिफ्टर साइखोम मीराबाई चानू ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि उनकी ताकत और जिद की शुरुआत बचपन की एक घटना से हुई थी। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के उद्घाटन के लिए रायपुर पहुंचीं चानू ने कहा कि जब वह हार मानने लगी थीं, तब उनकी मां के शब्दों ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। भाई की चुनौती बनी टर्निंग पॉइंट चानू ने बताया कि जब वह 13–14 साल की थीं, तब हर सप्ताह पहाड़ों पर जाकर लकड़ियां इकट्ठा करती थीं। एक बार भारी गट्ठा उठाना मुश्किल हो रहा था तो उनके भाई ने कहा कि यह तुमसे नहीं होगा। लेकिन जिद के कारण उन्होंने वह गट्ठा खुद उठाकर घर तक पहुंचाया। उसी क्षण उन्होंने तय कर लिया कि वह वेटलिफ्टर बनेंगी। एशियन गेम्स पर नजर, चोटों से मिली सीख उन्होंने बताया कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान आगामी एशियन गेम्स की तैयारी पर है। पिछले वर्षों में चोटों के कारण कई बार लक्ष्य से चूकना पड़ा, लेकिन अब वह पूरी तरह फिट हैं और रोजाना कड़ी ट्रेनिंग कर रही हैं ताकि इस बार देश के लिए बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकें। वेटलिफ्टिंग में आया बड़ा बदलाव चानू के अनुसार, पहले राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक जीतना जरूरी लक्ष्य था ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया जा सके। 2015 के बाद वेटलिफ्टिंग में डाइट, फिटनेस और स्पोर्ट्स साइंस पर काफी ध्यान बढ़ा है, जिससे खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। फिल्म बने तो दिखेगा संघर्ष उन्होंने कहा कि अगर उनकी जिंदगी पर फिल्म बनती है तो उसमें सफलता से ज्यादा संघर्ष को दिखाया जाना चाहिए, क्योंकि लोग पदक देखते हैं, लेकिन उसके पीछे की मेहनत और मुश्किलों को नहीं जानते। 25 किमी दूर ट्रेनिंग के लिए ट्रकों से लेती थीं लिफ्ट चानू ने शुरुआती दिनों की कठिनाइयों को याद करते हुए बताया कि उनके घर के पास प्रशिक्षण की सुविधा नहीं थी। उन्हें रोजाना 25 किलोमीटर दूर ट्रेनिंग के लिए जाना पड़ता था। आने-जाने के लिए कोई साधन नहीं होने पर वह ट्रकों से लिफ्ट लेकर पहुंचती थीं। कई साल तक सीमित साधनों में केवल दाल-चावल खाकर ही ट्रेनिंग जारी रखी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

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गैंग्स ऑफ रायपुर: पुलिस की नई सूची में 19 सक्रिय गिरोह, पहले थे सिर्फ 10

रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने शहर में सक्रिय अपराधी गिरोहों का नए सिरे से डिजिटल डोजियर तैयार करना शुरू किया है। इस “डिजिटल कुंडली” में पिछले 10 वर्षों से लगातार अपराध में शामिल गैंग्स को शामिल किया गया है। कमिश्नरेट के 21 थानों से मिली जानकारी के आधार पर अब 19 सक्रिय गिरोहों की पहचान की गई है, जबकि कमिश्नरेट बनने से पहले यही संख्या केवल 10 थी। इस डोजियर में आरोपियों के नाम, पते, फोन नंबर, सक्रिय क्षेत्र, गैंग के सदस्यों की संख्या और उन पर दर्ज मामलों का पूरा विवरण दर्ज किया जा रहा है। जो गिरोह अब निष्क्रिय हो चुके हैं, उन्हें सूची से हटा दिया गया है। चाकूबाज, लुटेरे और ड्रग्स तस्करों पर खास नजर पुलिस चाकूबाजी, लूट, चोरी और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल बदमाशों की भी अलग से कुंडली तैयार कर रही है। डोजियर तैयार होने के बाद इन गैंग्स की सख्त निगरानी की जाएगी, जिसमें स्थानीय थानों के साथ क्राइम ब्रांच की टीम भी शामिल रहेगी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक हर थाने की अपनी निगरानी सूची होती है, जो दर्ज एफआईआर के आधार पर बनाई जाती है। अब पहली बार जिला स्तर पर समेकित डोजियर तैयार किया जा रहा है, ताकि अपराधियों की गतिविधियों पर केंद्रीकृत नजर रखी जा सके। शहर के प्रमुख सक्रिय गैंग रक्सेल गैंग में संजय रक्सेल और उसके सहयोगियों समेत कई सदस्य शामिल हैं, जिन पर हत्या, चाकूबाजी और मारपीट के 30 से अधिक मामले दर्ज हैं।तंजीर गैंग सुमित हत्याकांड के बाद चर्चा में आया और इसमें हिस्ट्रीशीटर आरोपियों समेत करीब 17 सदस्य बताए जाते हैं।बबलू गैंग का संचालन आबिद डॉन उर्फ आबिद हसन करता है और इसके सदस्यों पर मारपीट सहित कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।यासिन अली गैंग पर गांजा तस्करी, रंगदारी, चाकूबाजी और हत्या जैसे गंभीर आरोप हैं, जिसमें कुछ नाबालिग भी शामिल बताए जाते हैं। ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क भी सक्रिय मनमोहन गिरोह दिल्ली से ड्रग्स लाकर सप्लाई करता था और इसके कई सदस्य फिलहाल जेल में बंद हैं।नव्या मलिक और विधि अग्रवाल से जुड़ा गिरोह कथित तौर पर ड्रग्स पार्टियों का आयोजन करता था और देश के कई राज्यों से नशीले पदार्थ मंगाता था। निगरानी के लिए तैयार हो रही विस्तृत सूची इसके अलावा शहर में मोनू-ग्यास गैंग, रवि साहू गैंग, मुकेश बनिया गैंग, आसिफ गैंग, अज्जू सिंधी-हटेला गैंग, डीएम गैंग, उदय गैंग, बादशाह गैंग, सचदेव ग्रुप, भीम महानंद ग्रुप, बादल रक्सेल ग्रुप, राठी ग्रुप, बेहरा गैंग, गवली गैंग, ईरानी गैंग और रवि साठे गैंग समेत कई गिरोह सक्रिय बताए गए हैं। रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के अनुसार कमिश्नरेट बनने के बाद यह नया डोजियर तैयार किया गया है, जिससे इन गिरोहों की गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जा सके और अपराध पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।

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फर्जी MBBS डिग्री बनाने वाली युवती गिरफ्तार, 2.34 करोड़ ठगी केस में पांचवीं गिरफ्तारी

रायपुर में पोस्ट ऑफिस में नौकरी दिलाने और फर्जी डिग्री बनवाने के नाम पर 2 करोड़ 34 लाख रुपए की ठगी मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस बार सिविल लाइन थाना पुलिस ने साक्षी सिंह को पकड़ा है, जो कथित तौर पर फर्जी MBBS और BAMS डिग्री तैयार करने का काम करती थी। पुलिस के अनुसार, पहले से गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर साक्षी सिंह का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस टीम ने दिल्ली में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुणे की यूनिवर्सिटी के नाम पर बनती थीं फर्जी डिग्रियां पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह अपने एक साथी के साथ मिलकर पुणे की डी.वाई. पाटिल यूनिवर्सिटी के नाम से नकली MBBS और BAMS डिग्रियां तैयार कर गिरोह को उपलब्ध कराती थी। पुलिस ने उसके पास से 3 मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी इस मामले की शिकायत 17 फरवरी 2026 को संजय निराला ने दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पोस्ट ऑफिस में नौकरी दिलाने और फर्जी सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने के नाम पर उनसे और उनके रिश्तेदारों से कुल 2.34 करोड़ रुपए ठग लिए गए। अब तक 5 आरोपी गिरफ्तार, नेटवर्क की जांच जारी इस केस में पहले ही चार आरोपी — भुनेश्वर बंजारे, नरेश मनहर, हीरा दिवाकर और राकेश रात्रे — गिरफ्तार किए जा चुके हैं। साक्षी सिंह की गिरफ्तारी के बाद कुल आरोपियों की संख्या पांच हो गई है। पुलिस अब पूरे गिरोह के नेटवर्क की जांच कर रही है और अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

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दुबई में सौरभ चंद्राकर की 1700 करोड़ की संपत्ति जब्त, बुर्ज खलीफा में भी अपार्टमेंट

महादेव सट्टा एप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 1700 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच कर दी हैं। रायपुर जोनल कार्यालय ने 25 मार्च को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के तहत यह कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने कुल 20 अचल संपत्तियां जब्त की हैं, जिनमें 18 संपत्तियां दुबई और 2 नई दिल्ली में स्थित हैं। इनकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 1700 करोड़ रुपए बताई गई है। अटैच की गई संपत्तियों में बुर्ज खलीफा स्थित एक लग्जरी अपार्टमेंट भी शामिल है। सट्टे की कमाई से खरीदी गई लग्जरी संपत्तियां ED की जांच में सामने आया है कि इन प्रॉपर्टियों को अवैध सट्टेबाजी से कमाए गए पैसों से खरीदा गया था। दुबई के प्राइम इलाकों — Dubai Hills Estate (Hills View, Fairway Residency, Sidra), Business Bay और SLS Hotel & Residences — में स्थित कई लग्जरी विला और हाई-एंड अपार्टमेंट इस सूची में शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार, ये संपत्तियां सौरभ चंद्राकर और उनके सहयोगियों के नाम पर या उनके नियंत्रण में थीं। जिन सहयोगियों के नाम सामने आए हैं उनमें विकास छपारिया, रोहित गुलाटी, अतुल अरोड़ा, नितिन तिब्रेवाला और सुरेंद्र बागड़ी शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी नेटवर्क का खुलासा जांच में यह भी सामने आया कि महादेव ऑनलाइन बुक ऐप एक अंतरराष्ट्रीय बेटिंग सिंडिकेट की तरह संचालित होता था। यह नेटवर्क Tiger Exchange, Gold365 और Laser247 जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए चलाया जा रहा था। फ्रेंचाइजी मॉडल के माध्यम से देशभर में “पैनल” बनाकर इसका विस्तार किया गया था। ED के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दुबई से पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। हवाला और क्रिप्टो के जरिए विदेश भेजा गया पैसा जांच एजेंसी ने पाया कि हजारों फर्जी या डमी बैंक खाते खोले गए और आम लोगों के KYC का दुरुपयोग किया गया। इसके बाद अवैध रकम को हवाला, क्रिप्टो ट्रांजेक्शन और लेयरिंग के जरिए विदेश भेजा गया, जिसे बाद में UAE और भारत में महंगी संपत्तियों में निवेश किया गया। अब तक 4336 करोड़ की संपत्ति अटैच ED ने इस मामले में अब तक 175 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की है। 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 74 लोगों को आरोपी बनाया गया है। रायपुर की विशेष PMLA अदालत में 5 अभियोजन शिकायतें भी दाखिल की गई हैं। एजेंसी के अनुसार, इस केस में अब तक कुल 4336 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियां अटैच, सीज या फ्रीज की जा चुकी हैं। भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया जारी ED ने सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, अनिल अग्रवाल और शुभम सोनी के खिलाफ Fugitive Economic Offenders Act 2018 के तहत आवेदन दायर किया है। एजेंसी का कहना है कि विदेश में छिपे आरोपियों को पकड़ने और अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क को खत्म करने के लिए कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

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रायपुर में GST रेड: कारोबारियों के 4 ठिकानों पर छापा, फर्जी बिलिंग के सुराग

रायपुर में GST की बड़ी कार्रवाई राजधानी रायपुर में गुरुवार सुबह राज्य GST विभाग ने भैंसथान स्थित अन्नपूर्णा कॉम्प्लेक्स में छापेमारी की। अधिकारियों की टीम लक्ष्मी कमर्शियल और एसआरएस ट्रेडर्स नाम की फर्मों से जुड़े चार अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि करीब 10 अधिकारियों ने समन्वित तरीके से दबिश देकर दस्तावेजों और कारोबारी रिकॉर्ड की जांच शुरू की। फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी की शिकायत सूत्रों के अनुसार, इन फर्मों के खिलाफ फर्जी बिलिंग और GST चोरी की शिकायत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई। छापे के दौरान बड़ी मात्रा में कागजात, बिल, कंप्यूटर डेटा और लेनदेन से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में संदिग्ध बिलिंग और भारी टैक्स चोरी के संकेत मिलने की बात सामने आ रही है। संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जांच जारी अधिकारियों को कई संदिग्ध लेनदेन एंट्री भी मिली हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जा रही है। फिलहाल विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। दस्तावेजों के विश्लेषण और जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले का पूरा खुलासा होने की संभावना है।

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48 साल बाद खुला Jagannath Temple का रत्न भंडार, कीमती गहनों की गिनती और डिजिटल रिकॉर्डिंग शुरू

Puri स्थित Jagannath Temple के रत्न भंडार में रखे बहुमूल्य आभूषणों और रत्नों की गिनती करीब 48 वर्षों बाद फिर से शुरू कर दी गई है। यह खजाना भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के उपयोग में आने वाले गहनों से जुड़ा है। मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रक्रिया शुभ मुहूर्त में शुरू की गई और केवल अधिकृत लोगों को ही अंदर जाने की अनुमति दी गई। श्रद्धालुओं के दर्शन पर पूरी तरह रोक नहीं है, लेकिन भीतरी हिस्से में प्रवेश अस्थायी रूप से बंद रखा गया है। निर्धारित योजना के तहत पहले रोजाना उपयोग होने वाले आभूषणों की सूची बनाई जा रही है, इसके बाद बाहरी कक्ष और अंत में अंदरूनी कक्ष की जांच की जाएगी। इस बार आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञ रत्नों की पहचान कर रहे हैं और हर वस्तु की डिजिटल फोटोग्राफी की जा रही है। सोने, चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं को अलग-अलग कपड़ों में लपेटकर सुरक्षित बक्सों में रखा जा रहा है। इस प्रक्रिया में मंदिर सेवक, सरकारी बैंक अधिकारी, रत्न विशेषज्ञ और भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि शामिल हैं। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी की जा रही है। गौरतलब है कि इससे पहले 1978 में गिनती के दौरान बड़ी मात्रा में सोने-चांदी और रत्नों का रिकॉर्ड बनाया गया था।

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छात्रों के स्क्रीन टाइम पर सख्ती: Karnataka सरकार का ड्राफ्ट—मनोरंजन के लिए रोज 1 घंटा, शाम 7 बजे बाद इंटरनेट बंद

Karnataka सरकार ने 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के डिजिटल उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नई ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की है। इसमें पढ़ाई के अलावा मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम प्रतिदिन अधिकतम 1 घंटा रखने की सिफारिश की गई है। साथ ही शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट बंद करने का सुझाव भी दिया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि बच्चों को सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल या स्क्रीन से दूर रखा जाए। मोबाइल में ‘चाइल्ड प्लान’ लागू करने की सलाह दी गई है, जिसमें सीमित इंटरनेट और ऑडियो-ओनली जैसे विकल्प शामिल होंगे। उम्र के अनुसार सुरक्षित डिवाइस और ऑपरेटिंग सिस्टम विकसित करने की भी बात कही गई है। सरकार का कहना है कि लगभग 25 प्रतिशत किशोर इंटरनेट की लत से प्रभावित हैं, जिससे नींद की कमी, चिंता और एकाग्रता में गिरावट जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसी को देखते हुए यह पहल की गई है। ड्राफ्ट के अनुसार स्कूलों में डिजिटल वेल-बीइंग, ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर बुलिंग और प्राइवेसी जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। टेक-फ्री पीरियड, डिजिटल डिटॉक्स डे और व्हाट्सऐप की जगह डायरी के माध्यम से संवाद जैसे कदम भी सुझाए गए हैं। इसके अलावा स्कूलों में काउंसलिंग व्यवस्था मजबूत करने, शिक्षकों को डिजिटल लत के संकेत पहचानने की ट्रेनिंग देने और अभिभावकों की सक्रिय भूमिका तय करने पर भी जोर दिया गया है। AI के उपयोग पर भी अलग दिशा-निर्देश बनाने की बात कही गई है। यह ड्राफ्ट स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और National Institute of Mental Health and Neurosciences सहित कई संस्थानों के सहयोग से तैयार किया गया है।

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जश्न के शोर से रुकी कोर्ट की कार्यवाही, वकील और जज के बीच तीखी बहस; Bhavnagar का मामला

Gujarat के Bhavnagar जिला कोर्ट परिसर में बार एसोसिएशन चुनाव जीतने के बाद निकाले जा रहे जुलूस ने कोर्ट की कार्यवाही बाधित कर दी। इस दौरान विजयी वकील और जिला जज के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। बताया गया कि अधिवक्ता अनिरुद्धसिंह झाला तीसरी बार चुनाव जीतने के बाद समर्थकों के साथ ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मना रहे थे। तेज शोर के कारण अदालत की सुनवाई प्रभावित हुई तो जिला जज एच.एस. मूलिया कोर्ट रूम से बाहर आ गए और शोर कम करने को कहा। जज की आपत्ति पर वकील भड़क उठे और उनसे उलझ गए। कथित तौर पर उन्होंने जज से कहा कि आप अपनी कुर्सी संभालिए और हमें जश्न मनाने दीजिए। स्थिति बिगड़ती देख अन्य वकीलों ने बीच-बचाव कर जज को वापस अंदर ले जाया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। बताया जा रहा है कि जश्न का माहौल होने के कारण बातचीत तीखी हो गई। इस मामले को लेकर गुजरात न्यायिक सेवा संघ ने अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संघ ने हाईकोर्ट और बार काउंसिल को पत्र लिखकर इसे न्यायालय की गरिमा के खिलाफ बताते हुए अवमानना की कार्यवाही करने की अपील की है।

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