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रायगढ़ में वर्दी में नशे में मिला आरक्षक, VIDEO वायरल होने के बाद सस्पेंड

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक पुलिस आरक्षक का नशे की हालत में वर्दी पहनकर बेसुध पड़े होने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामला सामने आते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरक्षक को निलंबित कर दिया। जानकारी के अनुसार, धर्मजयगढ़ थाना में पदस्थ आरक्षक दिलेश चंद्रा का वीडियो बुधवार शाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आया। वीडियो में वह क्लब ग्राउंड में वर्दी पहने हुए नशे की हालत में पड़ा हुआ दिखाई दे रहा था। किसी व्यक्ति ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। मामले की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए। प्रारंभिक जांच में आरक्षक का आचरण उसके पद की गरिमा के विपरीत पाया गया, जिसके चलते उसे तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन के दौरान आरक्षक का मुख्यालय रक्षित केंद्र रायगढ़ तय किया गया है और इस अवधि में उसे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। एसएसपी ने स्पष्ट कहा कि पुलिस विभाग में अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है और वर्दी की गरिमा के खिलाफ किसी भी तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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दुर्ग के गांवों में पानी का संकट गहराया, ग्रामीण बोले—शराब सस्ती, पानी महंगा

दुर्ग जिले के कई गांव इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर नगपुरा के पास अंजोरा (ढाबा) गांव में हालात बेहद गंभीर हैं। यहां ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि दूसरी ओर गांव में अवैध शराब की बिक्री खुलेआम जारी है। करीब 3 हजार की आबादी वाले इस गांव में पानी का एकमात्र सहारा एक बोरवेल है, जिसकी क्षमता बेहद कम है। हालात ऐसे हैं कि सुबह 4 बजे से ही पानी भरने के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं, जो देर रात तक जारी रहती हैं। इस समस्या का असर बच्चों की पढ़ाई और लोगों के रोजगार पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं गांव में अवैध शराब आसानी से उपलब्ध है। पूर्व सरपंच सुमरन साहू ने बताया कि इस मुद्दे को कई बार प्रशासन के सामने उठाया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि अवैध शराब ने गांव का माहौल बिगाड़ दिया है। पिछले साल कलेक्ट्रेट घेराव के बाद शिवनाथ नदी से पानी लाने के लिए करीब 31 लाख रुपये की योजना बनाई गई थी, लेकिन समय पर काम शुरू नहीं होने से इसका लाभ नहीं मिल सका। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का पैसा खर्च हो गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। गांव के लोगों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे भूख हड़ताल और आंदोलन करेंगे। साथ ही पाइपलाइन निर्माण में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की जांच की मांग भी की गई है। सिर्फ अंजोरा ही नहीं, बल्कि पाटन क्षेत्र के औरी, उतई थाना इलाके के मुड़पार, मर्रा, चुनकट्टा, अचानकपुर, सेलूद और छाटा जैसे कई गांवों में भी पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। वहीं, पुलिस प्रशासन का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और ऐसे आरोप निराधार हैं। अधिकारियों के अनुसार, जिले में रोजाना अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। दुर्ग सांसद विजय बघेल ने कहा कि अवैध शराब की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने जल संरक्षण और वाटर हार्वेस्टिंग को जरूरी बताते हुए संबंधित योजनाओं में देरी को लेकर अधिकारियों से चर्चा करने की बात कही

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डंगनिया टंकी में लापरवाही से 34 लाख लीटर पानी बर्बाद, डेढ़ लाख आबादी की सप्लाई ठप

रायपुर में पहले से जारी पानी संकट के बीच नगर निगम की बड़ी लापरवाही सामने आई है। डंगनिया स्थित पानी टंकी से बुधवार सुबह सप्लाई पूरी तरह प्रभावित रही, जिससे शहर के 10 से अधिक इलाकों में करीब 1.5 लाख लोगों को पानी नहीं मिल सका। जानकारी के मुताबिक, मंगलवार शाम सप्लाई के बाद टंकी का वॉल्व बंद किया गया था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण वह पूरी तरह बंद नहीं हो पाया। इसके चलते ओवरहेड टैंक भरने के बाद रातभर पानी बहता रहा और करीब 34 लाख लीटर पानी बर्बाद हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही जल कार्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और वॉल्व की समस्या को ठीक किया गया। इसके बाद टंकी को दोबारा भरा गया और शाम तक पानी सप्लाई बहाल की गई। बताया जा रहा है कि डंगनिया टंकी शहर के कई घनी आबादी वाले इलाकों जैसे समता कॉलोनी, चौबे कॉलोनी, रोहिणीपुरम, कुशालपुर, सुंदरनगर, पुरानी बस्ती, कंकालीपारा, खो-खो पारा, अमरपुरी और भीमनगर में पानी सप्लाई का मुख्य स्रोत है। इससे पहले भाठागांव में भी मेन राइजिंग लाइन का वॉल्व खराब होने से पानी का फव्वारा फूट पड़ा था, जिसे करीब दो घंटे बाद ठीक किया गया था। जोन-5 के आयुक्त खीरसागर नायक ने कहा कि तकनीकी खराबी के कारण यह समस्या हुई, जिसे तुरंत सुधार लिया गया है। साथ ही वॉल्व की नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं। इधर, पानी संकट को लेकर शहर में असमानता की तस्वीर भी सामने आई है। जहां वीवीआईपी इलाकों में टैंकर से पर्याप्त पानी पहुंच रहा है, वहीं आम लोग पानी के लिए जूझ रहे हैं। महापौर मीनल चौबे ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों की बैठक की और स्पष्ट कहा कि पेयजल आपूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दो दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने के निर्देश भी दिए हैं। वहीं, नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने शहर में पानी के अवैध कारोबार का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि कुछ इलाकों में बोर से पानी निकालकर बेचा जा रहा है, जिस पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

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रायपुर में पानी संकट पर महापौर सख्त, 2 दिन में व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम

गर्मी के बढ़ते असर के बीच रायपुर में पानी की किल्लत को लेकर नगर निगम ने सख्त रुख अपनाया है। महापौर मीनल चौबे ने जल विभाग और जल बोर्ड के अधिकारियों की बैठक लेकर पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि सप्लाई में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। महापौर ने अधिकारियों को दो दिन के भीतर शहर की पानी सप्लाई व्यवस्था सुधारने का निर्देश दिया है। खासतौर पर तालाबों और अन्य जल स्रोतों के आसपास अधिक संख्या में हाइड्रेंट लगाने पर जोर दिया गया है, ताकि पानी की उपलब्धता बेहतर हो सके। उन्होंने अधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड में उतरकर वार्डों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। टंकियों वाले क्षेत्रों में जाकर स्थिति का आकलन करने और मौके पर ही समस्याओं का समाधान करने को कहा गया है। महापौर ने यह भी निर्देश दिए कि पानी से जुड़ी शिकायतों का तुरंत समाधान किया जाए। जोन स्तर की टीमें मिलकर तेजी से काम करें, जिससे नागरिकों को राहत मिल सके। साथ ही, शहरवासियों से भी पानी का समझदारी से उपयोग करने और बर्बादी रोकने की अपील की गई है। बढ़ती गर्मी के कारण पानी की मांग में इजाफा हो रहा है, ऐसे में निगम व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय हो गया है।

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सूदखोरी और हथियार केस में वीरेंद्र तोमर का पलटवार, LIVE आकर लगाए साजिश के आरोप

सूदखोरी और अवैध हथियार रखने के मामले में जेल से बाहर आने के बाद आरोपी वीरेंद्र सिंह तोमर ने पहली बार सोशल मीडिया पर लाइव आकर अपनी सफाई दी। राजस्थान से किए गए इस LIVE में उन्होंने पूरे मामले को साजिश बताते हुए पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक हस्तक्षेप पर गंभीर सवाल उठाए। LIVE के दौरान तोमर करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखावत के साथ दिखाई दिए। इस दौरान उन्होंने सीधे तौर पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने खुद उनके घर में दस्तावेज और हथियार रखे, ताकि उन्हें फंसाया जा सके। तोमर ने दावा किया कि वे खारुन गंगा आरती का आयोजन करवा रहे थे, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ रही थी और यही बात कुछ नेताओं और लोगों को पसंद नहीं आई। उन्होंने कहा कि इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके घर से बरामद बताए जा रहे हथियार और कागजात पूरी तरह से झूठे हैं और यह सब पहले से योजना बनाकर किया गया। उनके अनुसार, उन्हें बदनाम करने और खत्म करने की साजिश रची गई थी, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। तोमर ने यह भी दावा किया कि जेल में रहते हुए उनकी जान को खतरा था। उन्होंने कहा कि अगर सच सामने नहीं आता तो उनकी हत्या तक हो सकती थी। इस LIVE वीडियो के सामने आने के बाद मामला फिर से चर्चा में आ गया है और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है और पक्ष-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। वीरेंद्र तोमर ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि हाल ही में उन्हें हत्या के एक मामले में अदालत से राहत मिली है और अब वे सूदखोरी और हथियार मामले में कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के नाम सार्वजनिक कर कानूनी कदम उठाएंगे।

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रायपुर में ‘ज्ञान भारतम्’ सर्वे की समीक्षा, 31 मई तक पूरा करने का लक्ष्य

रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में ‘ज्ञान भारतम्’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के कलेक्टर जुड़े और सर्वे की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यह अभियान 31 मई तक हर स्थिति में पूरा किया जाए। उन्होंने इसे राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। पांडुलिपियों की पहचान, उनका दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण और संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही सभी जिलों में समितियों का गठन, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और सर्वे टीमों को प्रशिक्षण देने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे शासकीय संस्थानों, मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों, कॉलेजों और निजी संस्थानों में संरक्षित पांडुलिपियों की सक्रिय रूप से खोज करें। मुख्य सचिव ने पारंपरिक समुदायों और पुरातात्विक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की बात भी कही, जहां महत्वपूर्ण पांडुलिपियां मिलने की संभावना अधिक है। जनभागीदारी बढ़ाने के लिए बैठक में “पांडुलिपि ट्रेजर हंट” जैसे नवाचारों पर भी चर्चा हुई, जिससे आम लोगों को इस अभियान से जोड़ा जा सके। प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देने और पत्रकारों, साहित्यकारों, इतिहासकारों तथा जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अपने सुझाव भी साझा किए।

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छत्तीसगढ़ में BJP का जनआक्रोश महिला सम्मेलन शुरू, आरक्षण बिल को लेकर प्रदेशभर में विरोध

महिला आरक्षण बिल पारित न होने के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ में चरणबद्ध कार्यक्रम शुरू किए हैं। रायपुर में जनआक्रोश रैली के बाद अब 23 और 24 अप्रैल को प्रदेशभर में जनआक्रोश महिला सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इसके बाद 26 और 27 अप्रैल को मंडल स्तर पर पुतला दहन कार्यक्रम भी किए जाएंगे। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष विभा अवस्थी के अनुसार, नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रदेश की महिलाओं में नाराजगी है। इसी वजह से अलग-अलग चरणों में इन कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। महिला सम्मेलन के जरिए इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा। इससे पहले राजधानी रायपुर में भी भाजपा ने जनआक्रोश रैली निकाली थी, जो बलबीर जुनेजा इंडोर स्टेडियम से सुभाष स्टेडियम तक पहुंची। इस दौरान एक सभा का आयोजन भी किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत कई नेता शामिल हुए। इसी बीच 27 अप्रैल को छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है। इस सत्र में राज्य सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक के पास नहीं होने के विरोध में निंदा प्रस्ताव पेश कर सकती है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का सपना विपक्ष के रवैये के कारण पूरा नहीं हो सका, जिसे लेकर वे दुख व्यक्त करते हैं। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो पाया था। इसके पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया। बिल को पारित करने के लिए आवश्यक समर्थन नहीं मिल सका। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर देश से माफी मांगते हुए कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने का प्रयास सफल नहीं हो पाया। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ पार्टियों ने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी, जिसका असर महिलाओं के अधिकारों पर पड़ा।

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छत्तीसगढ़ से 18 समर स्पेशल ट्रेनें शुरू, यात्रियों को बड़ी राहत

गर्मी के मौसम में यात्रियों की बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए रेलवे ने खास इंतजाम किए हैं। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर जोन से 18 समर स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इन ट्रेनों का संचालन 15 अप्रैल से शुरू होकर 15 जुलाई तक जारी रहेगा और इस दौरान ये कुल 88 फेरे लगाएंगी। देशभर में भी रेलवे ने बड़ा फैसला लेते हुए 908 समर स्पेशल ट्रेनों को मंजूरी दी है, जो मिलकर 18,262 फेरे संचालित करेंगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बिलासपुर जोन की 18 ट्रेनों में से 13 पहले ही शुरू हो चुकी हैं, जबकि बाकी ट्रेनों को जल्द चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा। ये स्पेशल ट्रेनें बिलासपुर-रायपुर, दुर्ग-गोंदिया, इतवारी-रायगढ़ और शहडोल जैसे प्रमुख रूट्स पर चलाई जाएंगी, जिससे लंबी दूरी के यात्रियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। गर्मी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने प्रमुख स्टेशनों जैसे बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, गोंदिया, इतवारी, रायगढ़ और शहडोल में अतिरिक्त सुविधाएं बढ़ाई हैं। इनमें अतिरिक्त टिकट काउंटर, पीने के पानी की बेहतर व्यवस्था, वेटिंग हॉल में सुधार, सफाई और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। रेलवे का कहना है कि इन ट्रेनों के शुरू होने से यात्रियों की भीड़ कम होगी, वेटिंग लिस्ट घटेगी और कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे यात्रियों का सफर ज्यादा आसान और आरामदायक होगा।

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छत्तीसगढ़ में आचरण नियमों पर सरकार का यू-टर्न, 24 घंटे में ही आदेश पर लगी रोक

छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय कर्मचारियों के लिए हाल ही में जारी किए गए सख्त आचरण नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने पहले सभी विभागों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को इन नियमों को लागू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब इस आदेश को अगले निर्देश तक स्थगित कर दिया गया है। 21 अप्रैल को जारी आदेश में कहा गया था कि कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल या संगठन से नहीं जुड़ेगा और न ही किसी तरह की राजनीतिक गतिविधि में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग ले सकेगा। इसके अलावा, बिना अनुमति किसी संस्था, समिति या संगठन में पद लेने पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया था कि कर्मचारी ऐसा कोई पद या जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करेंगे, जिससे उनके काम की निष्पक्षता प्रभावित हो। नियमों के उल्लंघन पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। हालांकि, 22 अप्रैल 2026 को सामान्य प्रशासन विभाग ने नया आदेश जारी कर इन सभी निर्देशों को फिलहाल के लिए रोक दिया। उप सचिव अंशिका पांडेय द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि 21 अप्रैल के निर्देश अभी लागू नहीं होंगे और इन पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई भी अगले आदेश तक स्थगित रहेगी। बताया जा रहा है कि कर्मचारी संगठनों के विरोध के बाद यह फैसला लिया गया। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि कर्मचारी संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखते हैं और यह आदेश उस व्यवस्था के खिलाफ था। उन्होंने बताया कि विभाग के अधिकारियों के सामने विरोध दर्ज कराया गया, जिसके बाद सरकार ने आदेश पर रोक लगा दी।

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रायगढ़ में बिजली कटौती पर NSUI का विरोध, सुधार नहीं होने तक जारी रहेगा प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में बढ़ती गर्मी के बीच लगातार हो रही बिजली कटौती से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। इस मुद्दे को लेकर NSUI ने बिजली विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। NSUI के जिलाध्यक्ष आरीफ हुसैन के अनुसार, सर्दियों के अंत में मेंटेनेंस के नाम पर कई घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित की गई थी। उस दौरान अलग-अलग फीडरों पर काम होने के बावजूद व्यवस्था में कोई खास सुधार नहीं हुआ। अब गर्मी बढ़ने के साथ ही स्थिति और खराब हो गई है। जिले के जोन-1 और जोन-2 दोनों क्षेत्रों में लगातार बिजली कटौती हो रही है, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली संकट के विरोध में NSUI ने बुधवार दोपहर 12 बजे बिजली विभाग के कार्यालय का घेराव करने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि जब तक बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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