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सीनियर IPS रतन लाल डांगी निलंबित: SI की पत्नी ने लगाए यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप

छत्तीसगढ़ सरकार ने सीनियर IPS रतन लाल डांगी को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई SI की पत्नी द्वारा डांगी पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने के बाद की गई। गृह (पुलिस) विभाग ने स्पष्ट किया कि विभागीय जांच लंबित होने के कारण यह निर्णय लिया गया है। बताया गया है कि पांच महीने पहले ही डांगी को IG के पद से हटा दिया गया था। निलंबन के बाद उन्हें मुख्यालय, नया रायपुर PHQ पर तैनात किया गया है। आदेश के अनुसार, डांगी बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकते। शिकायत की पृष्ठभूमि पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस मुख्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 2017 में उनकी पहली मुलाकात डांगी से कोरबा में हुई थी, जब डांगी वहां SP के पद पर तैनात थे। प्रारंभिक बातचीत सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी, जो आगे बढ़ती गई। इसके बाद डांगी ने दंतेवाड़ा में पदस्थापना के दौरान वीडियो कॉल के जरिए उन्हें योग सिखाने का प्रस्ताव दिया। राजनांदगांव और सरगुजा में IG बनने के बाद पीड़िता ने बताया कि डांगी ने उन्हें कथित रूप से परेशान करना शुरू कर दिया। बिलासपुर IG के पद पर रहते हुए उत्पीड़न की घटनाएँ और बढ़ गईं। खाली बंगले में बुलाने और धमकी देने का आरोप शिकायत में महिला ने कहा कि IPS डांगी अक्सर उन्हें अपनी पत्नी की गैरमौजूदगी में खाली बंगले में बुलाते थे। अगर वह नहीं जातीं, तो उन्हें तबादले की धमकी दी जाती थी। चंद्रखुरी पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में तबादले के बाद भी डांगी वीडियो कॉल के माध्यम से सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक संपर्क बनाए रखने का दबाव डालते थे। महिला ने यह भी दावा किया कि उनके पास कई आपत्तिजनक डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाते हैं। जांच और नियमावली जारी आदेश के अनुसार, रतन लाल डांगी के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच जारी है। इस दौरान उनके आचरण को अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 और अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के तहत प्रथम दृष्टया संदिग्ध माना गया है। पुलिस और प्रशासन इस मामले में पूरी गंभीरता से जांच कर रहे हैं। निलंबन का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाए रखना है। इस मामले ने छत्तीसगढ़ पुलिस के भीतर वरिष्ठ अधिकारियों के आचरण और महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार और गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में कोई ढील नहीं बरती जाएगी और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी।

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अहमदाबाद के ठगों का कॉल सेंटर सिंडिकेट फूटा, मास्टरमाइंड की तलाश में रायपुर पुलिस

रायपुर पुलिस ने मंगलवार-रविवार की रात को बड़े इंटरस्टेट ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया। दो प्रमुख कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में छापेमारी कर पुलिस ने कुल 41 आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में यह खुलासा हुआ कि पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड अहमदाबाद के शातिर ठग हैं, जिनके नाम विकास शुक्ला और संजय शर्मा हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है और जल्द ही उन्हें पकड़ने के लिए सक्रिय कार्रवाई कर रही है। किराए पर लिए गए ऑफिस और फ्लैट अभियुक्तों ने रायपुर के पिथालिया कॉम्प्लेक्स और अंजनी टावर में कॉल सेंटर चलाने के लिए ऑफिस किराए पर लिया था। इसके अलावा ‘पाम बेलागियो’ में एक लग्जरी फ्लैट भी किराए पर लिया गया था। मास्टरमाइंड खुद रायपुर में स्थायी रूप से नहीं रहते थे। वे कुछ दिनों के अंतराल पर आते, मैनेजरों को निर्देश देते और फिर वापस अहमदाबाद लौट जाते थे। फिलहाल पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए पूरी तैयारी में है। अंतरराष्ट्रीय ठगी का तरीका पूरी योजना अमेरिका के समय के अनुसार तैयार की गई थी। कॉल सेंटर के कर्मचारी रात 8 बजे से सुबह 7 बजे तक सक्रिय रहते थे, क्योंकि उस समय अमेरिका में दिन होता है। आरोपियों के पास व्हाट्सऐप के जरिए अमेरिकी नागरिकों का डेटा आता था, जिनके पास अमेरिका के चार बड़े बैंकों से लोन थे। कॉल करने के बाद उन्हें डराया जाता था कि उनका CIBIL स्कोर खराब हो गया है या किस्त जमा नहीं हुई। इसके बाद खाते की जानकारी लेकर चाइनीज ऐप के जरिए ऑनलाइन चेक जनरेट कर लाखों डॉलर की ठगी की जाती थी। कॉल सेंटर प्रभारियों और वेतन संरचना पुलिस ने कॉल सेंटर के तीन मुख्य प्रभारियों को भी गिरफ्तार किया है। इसमें रोहित यादव, सौरभ सिंह और गौरव यादव शामिल हैं। रोहित यादव और सौरभ सिंह पिथालिया कॉम्प्लेक्स के मैनेजर थे, जबकि गौरव यादव अंजनी टावर में संचालित कॉल सेंटर का प्रभारी था।जांच में यह भी सामने आया कि इन प्रभारियों को लगभग 30,000 रुपये मासिक वेतन मिलता था। कॉल करने वाले युवाओं को 15 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान किया जाता था। हिंदी स्क्रिप्ट से अंग्रेजी कॉलिंग जांच में यह भी पता चला कि कॉल सेंटर में काम करने वाले अधिकांश कर्मचारी केवल 12वीं पास थे और उन्हें अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान नहीं था। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें कागज पर हिंदी में लिखी अंग्रेजी स्क्रिप्ट दी जाती थी। कर्मचारी उसी स्क्रिप्ट को पढ़कर अमेरिकी नागरिकों से बातचीत करते थे। यदि कोई ग्राहक कठिन या तकनीकी सवाल पूछता, तो कॉल तुरंत सीनियर को ट्रांसफर कर दी जाती थी। युवाओं को इस ठगी के लिए दो महीने की विशेष ट्रेनिंग दी गई थी। पुलिस का कहना है कि यह अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय ठगी का नेटवर्क बहुत संगठित था, और इसके मास्टरमाइंड को पकड़ना प्राथमिकता है। मकान-मालिकों और अन्य सहयोगियों से भी पूछताछ की जाएगी ताकि पूरी साजिश का पर्दाफाश हो सके।

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छत्तीसगढ़ में एलपीजी सुरक्षा और वितरण व्यवस्था में कड़ा कदम: पुलिस और होमगार्ड करेंगे निगरानी

छत्तीसगढ़ सरकार ने रसोई गैस (एलपीजी) की उपलब्धता और वितरण प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए अहम निर्णय लिया है। राज्य के खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की सचिव रीना बाबा साहब कंगाले ने गुरुवार को ऑयल कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधकों के साथ समीक्षा बैठक कर इस दिशा में कई महत्वपूर्ण फैसले किए। अब एलपीजी वितरण केंद्रों और गोदामों की निगरानी पुलिस और होमगार्ड के जवान करेंगे, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या हंगामा न हो। बैठक में बढ़ती मांग और संभावित संकट को देखते हुए बड़ी घोषणा की गई। अब कमर्शियल एलपीजी उपभोक्ताओं जैसे होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को पिछले महीने की उनकी कुल खपत का केवल 20 प्रतिशत ही एलपीजी उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उद्देश्य घरेलू उपयोगकर्ताओं और अनिवार्य सेवाओं के लिए पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करना है। डिलीवरी प्रणाली में समय-सीमा तय खाद्य सचिव ने वितरण प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की है। शहरी क्षेत्र में उपभोक्ताओं को 25 दिन के भीतर ऑनलाइन रिफिल बुकिंग की सुविधा मिलेगी। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र में यह समय-सीमा 45 दिन रखी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी नागरिक समय पर रिफिल प्राप्त कर सकें और किसी को भी गैस की कमी का सामना न करना पड़े। प्राथमिकता सूची गैस की किल्लत की स्थिति में शासन ने प्राथमिकता वाले संस्थानों की सूची भी जारी की है। सबसे पहले स्टॉक निम्नलिखित संस्थानों को उपलब्ध कराया जाएगा: हर दिन स्टॉक की जानकारी भेजनी होगी भीड़ और हंगामा रोकने के लिए जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि सभी एलपीजी वितरकों के कार्यालय और गोदामों में पुलिस और होमगार्ड तैनात की जाए। इसके अलावा, ऑयल कंपनियों को हर दिन स्टॉक और वितरण की जानकारी विभाग को भेजने का निर्देश दिया गया है। वितरकों को यह भी सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपने हेल्पलाइन नंबर सक्रिय रखें और किसी भी शिकायत का तुरंत समाधान करें। इस अवसर पर खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की संचालक डॉ. फरिहा आलम, छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग के सदस्य सचिव राजीव कुमार जायसवाल, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के मंडल एलजी प्रमुख श्रीपाद बक्षी, भारत पेट्रोलियम के प्रादेशिक प्रबंधक दिलीप मीणा, और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के क्षेत्रीय प्रबंधक मंगेश डोंगरे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यह कदम राज्य में एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और नागरिकों को परेशानी से बचाने के लिए उठाया गया है।

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रायगढ़ में नाबालिग से छेड़छाड़: आरोपी को 5 साल की जेल, जुर्माना भी

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक शराबी युवक द्वारा नाबालिग बच्ची से गलत हरकत करने का मामला सामने आया है। रात के समय आरोपी ने सुनसान जगह का फायदा उठाकर बच्ची को जबरदस्ती पकड़ लिया, लेकिन बच्ची ने हिम्मत दिखाते हुए उसे धक्का दिया और वहां से भागकर घर पहुंच गई। घर पहुंचकर उसने अपने परिजनों को पूरी घटना बताई। इसके बाद परिजनों ने महिला थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और कोर्ट में पेश किया। जानकारी के अनुसार, 8 जुलाई 2025 की रात गांव का 23 वर्षीय युवक चैतराम पाव शराब के नशे में बच्ची के घर पहुंचा था। उसकी हालत देखकर बच्ची की मां ने बेटी से उसे घर तक छोड़ आने को कहा। रास्ते में निर्माणाधीन पानी टंकी के पास आरोपी ने बच्ची को पास की झोपड़ी में ले जाकर गलत हरकत करने की कोशिश की। बच्ची ने विरोध किया, आरोपी को धक्का दिया और भागकर अपने घर पहुंच गई। अगले दिन मां ने महिला थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले की सुनवाई के बाद पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 6,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

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भिलाई में बन रहे 4.93 करोड़ के स्विमिंग पूल पर विवाद, गलत दिशा में निर्माण से खिलाड़ियों को होगी परेशानी

भिलाई नगर निगम द्वारा प्रियदर्शिनी परिसर (पश्चिम) में लगभग 4.93 करोड़ रुपये की लागत से नया स्विमिंग पूल बनाया जा रहा है, लेकिन इसके निर्माण को लेकर अब तकनीकी सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि पूल की खुदाई करीब 5 फीट तक हो चुकी है, जबकि इसकी दिशा और लोकेशन को लेकर विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई है। स्विमिंग विशेषज्ञों के अनुसार, खुले स्विमिंग पूल सामान्यतः उत्तर-दक्षिण दिशा में बनाए जाते हैं, ताकि सुबह और शाम की धूप सीधे तैराकों की आंखों में न पड़े। लेकिन यहां पूल पूर्व-पश्चिम दिशा में बनाया जा रहा है, जिससे अभ्यास के दौरान खिलाड़ियों को गंभीर दिक्कत हो सकती है। उनका कहना है कि इस तरह की दिशा में बने पूल में न तो सही प्रशिक्षण हो पाएगा और न ही राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकेंगी। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मानकों की अनदेखी भविष्य में खिलाड़ियों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है और करोड़ों रुपये की लागत से बना यह पूल केवल सामान्य उपयोग तक सीमित रह सकता है। डूब क्षेत्र में निर्माण से बढ़ी चिंता स्थानीय लोगों ने निर्माण स्थल को लेकर भी चिंता जताई है। बताया जा रहा है कि प्रियदर्शिनी परिसर का यह हिस्सा सुपेला के कोसा नाला के पास स्थित डूब क्षेत्र में आता है, जहां बारिश के मौसम में पानी भरने की समस्या रहती है। लोगों का कहना है कि जमीन की ऊंचाई बढ़ाए बिना सीधे खुदाई शुरू कर दी गई, जिससे बरसात में पूरा इलाका जलभराव की चपेट में आ सकता है। विपक्ष ने लगाए अनियमितता के आरोप नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा ने निर्माण कार्य में लापरवाही और अनियमितताओं का आरोप लगाया है। कोचों के साथ निरीक्षण के बाद उन्होंने कहा कि पूल की डिजाइन तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं है। यदि इसी तरह निर्माण जारी रहा, तो यह स्विमिंग पूल की बजाय एक साधारण तालाब जैसा बन सकता है और बड़े आयोजनों की मेजबानी का मौका भी हाथ से निकल जाएगा। मानकों के अनुसार क्या होना चाहिए एनआईएस कोच तामेश्वर घंघोरी के मुताबिक, प्रतियोगिता स्तर के स्विमिंग पूल की लंबाई 50 मीटर और चौड़ाई लगभग 25–26 मीटर होती है, जिसमें 10 लेन बनाई जा सकती हैं। इसकी सामान्य गहराई करीब 2 मीटर रखी जाती है। खुले क्षेत्र में बने पूल की दिशा उत्तर-दक्षिण होना जरूरी माना जाता है, ताकि सूर्य की रोशनी तैराकों के प्रदर्शन में बाधा न बने। निगम ने दी सफाई भिलाई नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी तिलेश्वर साहू ने कहा कि इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि हर स्थल की भौगोलिक स्थिति अलग होती है, इसलिए दिशा का निर्धारण उसी के अनुसार किया जाता है। निगम का दावा है कि निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन और तय प्रक्रिया के अनुसार किया जा रहा है तथा सभी तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

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बिलासपुर में बर्ड फ्लू का खतरा: 22,808 पक्षी और 25,896 अंडे नष्ट

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) का खतरा बढ़ गया है। कोनी स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में वायरस की पुष्टि होने के बाद बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई। यहां 5 हजार से अधिक मुर्गियों की मौत के बाद कुल 22,808 पक्षियों और 25,896 अंडों को नष्ट कर दिया गया। 17 मार्च से हो रही थी मौतें, सप्लाई जारी रही जानकारी के मुताबिक, 17 मार्च से पहले ही फार्म में मुर्गे-मुर्गियों की मौत शुरू हो गई थी। इसके बावजूद पूरे संभाग में मुर्गे, मुर्गियां और चूजों की सप्लाई लगातार जारी रही। जब बड़ी संख्या में मौतें हुईं, तब करीब 6 दिन बाद सैंपल जांच के लिए भेजे गए। रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। जू बंद, डोर-टू-डोर सर्वे शुरू संक्रमण रोकने के लिए एहतियातन कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क को 7 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की 14 सदस्यीय टीमें देवनंदन नगर क्षेत्र में घर-घर सर्वे कर रही हैं। प्रशासन का दावा है कि संक्रमण नियंत्रण में है और सभी जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं। खुले में फेंके गए मरे पक्षियों से बढ़ी चिंता मामले के बाद अलग-अलग इलाकों में मरे हुए पक्षियों को खुले में फेंके जाने की खबरें भी सामने आई हैं। खमतराई क्षेत्र की ड्रीम सिटी कॉलोनी के पास बोरियों में भरी मृत मुर्गियों को नाली में फेंकने का आरोप है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षित दफनाने के दावे के बावजूद लापरवाही बरती गई, जिससे बदबू और संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। दो दिन में बड़े पैमाने पर नष्ट किए गए पक्षी संक्रमण फैलने से रोकने के लिए व्यापक कार्रवाई में हजारों पक्षियों को दफनाया या नष्ट किया गया। इनमें लगभग 5 हजार मुर्गियां, 5 हजार बटेर, 600 बतख, 17 हजार चूजे और 20 हजार अंडे शामिल हैं। इसके अलावा हैचरी की दवाइयों समेत करीब 13 लाख रुपए की सामग्री भी नष्ट की गई। मंगलवार और बुधवार तक कुल 22,808 पक्षी, 25,896 अंडे और 79 क्विंटल दाना नष्ट किया जा चुका है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।

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गैंग्स ऑफ रायपुर: पुलिस की नई सूची में 19 सक्रिय गिरोह, पहले थे सिर्फ 10

रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने शहर में सक्रिय अपराधी गिरोहों का नए सिरे से डिजिटल डोजियर तैयार करना शुरू किया है। इस “डिजिटल कुंडली” में पिछले 10 वर्षों से लगातार अपराध में शामिल गैंग्स को शामिल किया गया है। कमिश्नरेट के 21 थानों से मिली जानकारी के आधार पर अब 19 सक्रिय गिरोहों की पहचान की गई है, जबकि कमिश्नरेट बनने से पहले यही संख्या केवल 10 थी। इस डोजियर में आरोपियों के नाम, पते, फोन नंबर, सक्रिय क्षेत्र, गैंग के सदस्यों की संख्या और उन पर दर्ज मामलों का पूरा विवरण दर्ज किया जा रहा है। जो गिरोह अब निष्क्रिय हो चुके हैं, उन्हें सूची से हटा दिया गया है। चाकूबाज, लुटेरे और ड्रग्स तस्करों पर खास नजर पुलिस चाकूबाजी, लूट, चोरी और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल बदमाशों की भी अलग से कुंडली तैयार कर रही है। डोजियर तैयार होने के बाद इन गैंग्स की सख्त निगरानी की जाएगी, जिसमें स्थानीय थानों के साथ क्राइम ब्रांच की टीम भी शामिल रहेगी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक हर थाने की अपनी निगरानी सूची होती है, जो दर्ज एफआईआर के आधार पर बनाई जाती है। अब पहली बार जिला स्तर पर समेकित डोजियर तैयार किया जा रहा है, ताकि अपराधियों की गतिविधियों पर केंद्रीकृत नजर रखी जा सके। शहर के प्रमुख सक्रिय गैंग रक्सेल गैंग में संजय रक्सेल और उसके सहयोगियों समेत कई सदस्य शामिल हैं, जिन पर हत्या, चाकूबाजी और मारपीट के 30 से अधिक मामले दर्ज हैं।तंजीर गैंग सुमित हत्याकांड के बाद चर्चा में आया और इसमें हिस्ट्रीशीटर आरोपियों समेत करीब 17 सदस्य बताए जाते हैं।बबलू गैंग का संचालन आबिद डॉन उर्फ आबिद हसन करता है और इसके सदस्यों पर मारपीट सहित कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।यासिन अली गैंग पर गांजा तस्करी, रंगदारी, चाकूबाजी और हत्या जैसे गंभीर आरोप हैं, जिसमें कुछ नाबालिग भी शामिल बताए जाते हैं। ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क भी सक्रिय मनमोहन गिरोह दिल्ली से ड्रग्स लाकर सप्लाई करता था और इसके कई सदस्य फिलहाल जेल में बंद हैं।नव्या मलिक और विधि अग्रवाल से जुड़ा गिरोह कथित तौर पर ड्रग्स पार्टियों का आयोजन करता था और देश के कई राज्यों से नशीले पदार्थ मंगाता था। निगरानी के लिए तैयार हो रही विस्तृत सूची इसके अलावा शहर में मोनू-ग्यास गैंग, रवि साहू गैंग, मुकेश बनिया गैंग, आसिफ गैंग, अज्जू सिंधी-हटेला गैंग, डीएम गैंग, उदय गैंग, बादशाह गैंग, सचदेव ग्रुप, भीम महानंद ग्रुप, बादल रक्सेल ग्रुप, राठी ग्रुप, बेहरा गैंग, गवली गैंग, ईरानी गैंग और रवि साठे गैंग समेत कई गिरोह सक्रिय बताए गए हैं। रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के अनुसार कमिश्नरेट बनने के बाद यह नया डोजियर तैयार किया गया है, जिससे इन गिरोहों की गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जा सके और अपराध पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।

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रायपुर में GST रेड: कारोबारियों के 4 ठिकानों पर छापा, फर्जी बिलिंग के सुराग

रायपुर में GST की बड़ी कार्रवाई राजधानी रायपुर में गुरुवार सुबह राज्य GST विभाग ने भैंसथान स्थित अन्नपूर्णा कॉम्प्लेक्स में छापेमारी की। अधिकारियों की टीम लक्ष्मी कमर्शियल और एसआरएस ट्रेडर्स नाम की फर्मों से जुड़े चार अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि करीब 10 अधिकारियों ने समन्वित तरीके से दबिश देकर दस्तावेजों और कारोबारी रिकॉर्ड की जांच शुरू की। फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी की शिकायत सूत्रों के अनुसार, इन फर्मों के खिलाफ फर्जी बिलिंग और GST चोरी की शिकायत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई। छापे के दौरान बड़ी मात्रा में कागजात, बिल, कंप्यूटर डेटा और लेनदेन से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में संदिग्ध बिलिंग और भारी टैक्स चोरी के संकेत मिलने की बात सामने आ रही है। संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जांच जारी अधिकारियों को कई संदिग्ध लेनदेन एंट्री भी मिली हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जा रही है। फिलहाल विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। दस्तावेजों के विश्लेषण और जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले का पूरा खुलासा होने की संभावना है।

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