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‘शून्य दुर्घटना’ और ‘जीरो क्राइम’ के साथ राजनांदगांव पुलिस की सफल ड्यूटी

छत्तीसगढ़ के Rajnandgaon में पुलिस ने चैत्र नवरात्रि और रामनवमी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का सफल संचालन करते हुए ‘शून्य दुर्घटना’ और ‘ज़ीरो क्रिमिनल इंसिडेंट’ का रिकॉर्ड कायम किया। ड्यूटी के सफल समापन के बाद पुलिस बल ने Maa Bamleshwari Temple पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और जवानों ने पहाड़ी पर स्थित मंदिर में विधि-विधान से आरती की और क्षेत्र की शांति व समृद्धि के लिए प्रार्थना की। पुलिस बैंड द्वारा प्रस्तुत भजनों से मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूब गया। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के नेतृत्व में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर और पूरी टीम ने मेले के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली। बेहतर प्लानिंग और कड़े सुरक्षा इंतजामों के चलते पदयात्रियों के मार्गों पर एक भी दुर्घटना नहीं हुई और पूरे मेला क्षेत्र में कोई आपराधिक घटना दर्ज नहीं की गई। भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सहायता में पुलिस की सक्रियता और व्यवहार की व्यापक सराहना हो रही है। पुलिस प्रशासन ने इस सफलता का श्रेय टीम वर्क और आम लोगों के सहयोग को दिया है, साथ ही भविष्य में भी इसी तरह जनसेवा और सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

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छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल Chhattisgarh Board of Secondary Education ने 12वीं कक्षा की हिंदी विषय की परीक्षा को रद्द कर दिया है।

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल Chhattisgarh Board of Secondary Education ने 12वीं कक्षा की हिंदी विषय की परीक्षा को रद्द कर दिया है। सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र वायरल होने के बाद यह फैसला लिया गया है। अब इस विषय की पुनः परीक्षा 10 अप्रैल को आयोजित की जाएगी, जिसके लिए बोर्ड ने नई तैयारियां शुरू कर दी हैं। जांच में यह सामने आया है कि वायरल हुआ प्रश्नपत्र मुख्य परीक्षा के सेट-बी से काफी हद तक मेल खाता था। गोपनीयता भंग होने की पुष्टि के बाद बोर्ड ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई है और साइबर सेल को जांच सौंपी गई है। बोर्ड का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इसे रद्द करना जरूरी था। इस फैसले का असर सबसे ज्यादा उन छात्रों पर पड़ा है, जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी थी और आगे की तैयारी में जुट गए थे। अब उन्हें दोबारा उसी विषय की तैयारी करनी होगी, जिससे मानसिक दबाव बढ़ गया है। खासकर JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। कई छात्र कोचिंग के लिए दूसरे शहरों में जा चुके थे, जिन्हें अब दोबारा परीक्षा देने के लिए वापस लौटना पड़ रहा है। इससे उनके समय और पढ़ाई दोनों पर असर पड़ रहा है। वहीं, परीक्षा दोबारा होने के कारण मूल्यांकन प्रक्रिया में देरी होना तय है, जिसका सीधा असर रिजल्ट और आगामी कॉलेज एडमिशन प्रक्रिया पर पड़ सकता है। रायगढ़ जिले में इस परीक्षा के लिए पहले 109 केंद्र बनाए गए थे, लेकिन अब हाई स्कूलों को परीक्षा केंद्र से बाहर कर दिया गया है और केवल 100 केंद्रों पर ही परीक्षा आयोजित की जाएगी। केंद्राध्यक्ष पहले की तरह ही रहेंगे और गोपनीय सामग्री का वितरण सख्त निगरानी में किया जाएगा। यह घटना साल 2006 की याद दिलाती है, जब 12वीं हिंदी का पेपर लीक हुआ था और परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करना पड़ा था। करीब 19 साल बाद भी ऐसी घटनाएं सामने आना परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। फिलहाल साइबर टीम लीक के स्रोत की जांच कर रही है और विभाग ने इस बार कड़े सुरक्षा इंतजाम करने का दावा किया है।

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रामनवमी के अवसर पर प्रशासन की संयुक्त टीम ने समय रहते एक बाल विवाह को रुकवाकर बड़ी कार्रवाई की।

रामनवमी के अवसर पर प्रशासन की संयुक्त टीम ने समय रहते एक बाल विवाह को रुकवाकर बड़ी कार्रवाई की। सूचना मिली थी कि एक घर में नाबालिग लड़की की शादी की तैयारियां चल रही हैं और बारात निकलने वाली है, जिसके बाद संबंधित विभाग तुरंत सक्रिय हो गए। सूचना मिलते ही Women and Child Development Department, Chhattisgarh Police और Childline India की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। उस समय घर में जश्न का माहौल था और शादी की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। टीम ने जब परिजनों से लड़की की उम्र से जुड़े दस्तावेज मांगे, तो शुरुआत में उन्होंने टालमटोल की। सख्ती के बाद आधार कार्ड और अन्य प्रमाण पत्रों की जांच की गई, जिसमें लड़की की उम्र 16 वर्ष 5 माह 13 दिन पाई गई, जो कि कानूनी रूप से विवाह के लिए निर्धारित उम्र से कम है। अधिकारियों ने मौके पर ही परिजनों को कड़ी फटकार लगाई और उन्हें बाल विवाह के कानूनी प्रावधानों तथा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से समझाया। इसके बाद शादी को तुरंत रुकवा दिया गया। प्रशासन ने परिजनों से एक लिखित शपथ पत्र भी भरवाया, जिसमें यह आश्वासन लिया गया कि लड़की के 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले उसका विवाह नहीं किया जाएगा। साथ ही, जिस सामुदायिक भवन में कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था, उसके संचालक को भी सख्त चेतावनी दी गई कि भविष्य में बिना आयु सत्यापन के भवन किराए पर न दिया जाए, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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छत्तीसगढ़ के Bilaspur में जिला न्यायालय को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी

छत्तीसगढ़ के Bilaspur में जिला न्यायालय को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। ई-मेल के जरिए भेजी गई इस धमकी के बाद पुलिस तुरंत अलर्ट मोड पर आ गई और कोर्ट परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई। डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ते की टीम ने पूरे परिसर में सघन तलाशी अभियान चलाया, लेकिन जांच के दौरान कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। घटना के समय कोर्ट में नियमित कार्यवाही चल रही थी और जज, वकील तथा पक्षकार मौजूद थे। इसी बीच ई-मेल के जरिए धमकी मिलने की सूचना सामने आई, जिसके बाद तत्काल पुलिस अधिकारियों को जानकारी दी गई। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोर्ट रूम, गलियारों और आसपास के क्षेत्रों में गहन सर्च ऑपरेशन किया गया। यह पिछले तीन महीनों में तीसरी बार है जब जिला कोर्ट को इस तरह की धमकी मिली है। इससे पहले भी जिला न्यायालय और Bilaspur High Court को बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। हालांकि हर बार जांच में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला, लेकिन लगातार मिल रही धमकियों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। धमकी के बाद कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। एहतियात के तौर पर प्रवेश द्वारों पर निगरानी बढ़ा दी गई और आने-जाने वाले लोगों की सख्ती से जांच की जा रही है। कोर्ट परिसर की संवेदनशीलता को देखते हुए यह मामला और भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि यहां रोजाना हजारों लोग पहुंचते हैं, जिनमें न्यायाधीश, करीब एक हजार वकील और बड़ी संख्या में पक्षकार शामिल होते हैं। लगातार मिल रही इन धमकियों के बावजूद पुलिस अब तक आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी है। फिलहाल पुलिस ई-मेल के तकनीकी विश्लेषण और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

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बिलासपुर डाकघरों से विदेश पार्सल भेजना हुआ आसान, फ्री पिक-अप और ट्रैकिंग सुविधा शुरू

छत्तीसगढ़ के Bilaspur संभाग में अब डाकघरों के माध्यम से विदेश पार्सल भेजना पहले से अधिक आसान हो गया है। India Post ने अंतर्राष्ट्रीय पार्सल सेवा को और सुविधाजनक बनाते हुए फ्री पिक-अप और ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं शुरू की हैं, जिससे आम नागरिकों और व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी। इस नई व्यवस्था के तहत अब लोग स्थानीय डाकघरों से ही अपने पार्सल और जरूरी दस्तावेज विदेश भेज सकेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि खर्च भी कम आएगा और प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल हो जाएगी। इस सुविधा के लागू होने से लोगों को महंगी निजी कूरियर सेवाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। संभाग के प्रमुख और उप डाकघरों में यह सेवा शुरू कर दी गई है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी इसका लाभ उठा सकेंगे। डाक विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पार्सल बुकिंग के समय ग्राहकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे ताकि सामग्री सुरक्षित तरीके से गंतव्य तक पहुंच सके। इसके साथ ही हर पार्सल के लिए ट्रैकिंग सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे ग्राहक ऑनलाइन उसकी स्थिति आसानी से देख सकेंगे। इस सेवा की एक खास बात बड़े और भारी पार्सल के लिए निःशुल्क पिक-अप सुविधा है, जिससे लोगों को डाकघर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे घर बैठे ही पार्सल भेज सकेंगे। पार्सल भेजने के लिए ग्राहकों को प्राप्तकर्ता का पूरा पता, वैध पहचान पत्र, निर्धारित शुल्क और बुकिंग के बाद ट्रैकिंग रसीद जैसी आवश्यक जानकारी देनी होगी।

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धरसीवां में 31 मार्च से कुंवरगढ़ महोत्सव: मुख्यमंत्री करेंगे 133 करोड़ के विकास कार्यों का शुभारंभ

रायपुर जिले के धरसीवां क्षेत्र में 31 मार्च 2026 को कुंवरगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम का शुभारंभ विष्णुदेव साय करेंगे। इस मौके पर क्षेत्र को लगभग 133 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी जाएगी। अनुज शर्मा ने बताया कि यह आयोजन क्षेत्र के विकास के साथ-साथ इसकी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कुंरा नगर अपनी ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए जाना जाता है, जहां राजा कुँवर सिंह गोंड की परंपरा आज भी जीवंत है। महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे, जिनमें नव निर्मित तहसील कार्यालय का उद्घाटन भी शामिल है। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। कार्यक्रम में स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन और कुटीर उद्योगों के स्टॉल लगाए जाएंगे, जिससे स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों को आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही लोक कलाकारों के अलावा राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। आयोजन को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था की है, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्रवासियों से इस आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।

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रायपुर में अग्निवीर भर्ती शुरू: 1 अप्रैल 2026 तक भरें ऑनलाइन फॉर्म

भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक अभ्यर्थी 13 फरवरी 2026 से आवेदन कर सकते हैं, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 1 अप्रैल 2026 तय की गई है। ऐसे में युवाओं को सलाह दी गई है कि वे अंतिम समय का इंतजार न करते हुए जल्द से जल्द अपना फॉर्म भर लें। इस भर्ती के लिए 17 वर्ष 6 माह से 21 वर्ष तक के युवा पात्र हैं। शैक्षणिक योग्यता के रूप में 8वीं पास से लेकर स्नातक और डिप्लोमा धारक उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को सेना में शामिल होने का अवसर मिल रहा है। रायपुर जिले में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए विशेष हेल्प डेस्क बनाए गए हैं। ये हेल्प डेस्क रोजगार कार्यालय, नगरीय निकाय, पॉलिटेक्निक कॉलेज, शासकीय महाविद्यालय, आईटीआई, जनपद पंचायत और नगर पंचायतों में संचालित किए जा रहे हैं, जहां आवेदन से जुड़ी जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध है। यदि किसी अभ्यर्थी को ऑनलाइन आवेदन में किसी प्रकार की समस्या आती है, तो वह रोजगार कार्यालय रायपुर में स्थापित हेल्प डेस्क से संपर्क कर सकता है। यहां सेना भर्ती से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी और तकनीकी सहायता दी जा रही है।

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छत्तीसगढ़ में IPS प्रमोशन में देरी: 23 साल बाद मिल रहा पद, देश में 19वें स्थान पर राज्य

छत्तीसगढ़ में पुलिस अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा में प्रमोशन मिलने में काफी देरी हो रही है। स्थिति यह है कि वर्ष 2002 बैच के अधिकारियों को लगभग 23 साल की सेवा के बाद अब जाकर IPS पदोन्नति दी गई है, जिससे राज्य इस मामले में देश में 19वें स्थान पर पहुंच गया है। दूसरी ओर, कर्नाटक, गुजरात, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और सिक्किम जैसे राज्यों में बाद के बैच के अधिकारियों को भी पहले ही IPS प्रमोशन मिल चुका है। इससे साफ है कि अन्य राज्यों में प्रमोशन प्रक्रिया ज्यादा तेज है। इस देरी को लेकर राज्य के पुलिस अधिकारियों में नाराजगी है। उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर कैडर रिव्यू कराने और IPS पदों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में कम से कम 60 नए IPS पद बढ़ाए जाने चाहिए ताकि प्रमोशन प्रक्रिया तेज हो सके। राज्य में कई अहम पद अब भी स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं। रायपुर में कमिश्नर और पांच DCP पद मंजूर नहीं हुए हैं। वहीं नए जिले मोहला-मानपुर और सारंगढ़-बिलाईगढ़ में भी IPS स्तर के SP पद स्वीकृत नहीं किए गए हैं। कैडर रिव्यू की प्रक्रिया भी समय पर पूरी नहीं हो पा रही है। नियम के अनुसार हर पांच साल में यह प्रक्रिया होनी चाहिए, लेकिन पिछले 25 साल में केवल चार बार ही कैडर रिव्यू हुआ है। वर्ष 2017 में 22 पदों के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें से सिर्फ 11 पदों को ही मंजूरी मिली। जहां पुलिस विभाग में प्रमोशन की गति धीमी है, वहीं अन्य सेवाओं में स्थिति बेहतर है। भारतीय प्रशासनिक सेवा में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को करीब 13 साल में ही प्रमोशन मिल रहा है। प्रमोशन में देरी के पीछे विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक का देर से होना, पदों की कमी और कैडर रिव्यू में देरी जैसे कारण सामने आ रहे हैं। अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह अक्सर जनवरी-फरवरी तक खिंच जाती है।

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5 करोड़ की स्मार्ट वायरिंग फेल: 2 साल में सड़क पर आई केबल, खुले बॉक्स बने खतरा

राजधानी रायपुर में स्मार्ट सिटी के तहत की गई अंडरग्राउंड वायरिंग अब सवालों के घेरे में है।जयस्तंभ चौक से फाफाडीह चौक तक किए गए इस प्रोजेक्ट में महज दो साल के भीतर ही बड़ी खामियां सामने आ गई हैं। सड़क के नीचे डाली गई बिजली केबल कई जगहों पर बाहर निकल आई हैं।जहां-जहां पाइपलाइन, नल कनेक्शन या सड़क मरम्मत के लिए खुदाई हुई, वहां केबल उखड़ गईं और दोबारा सुरक्षित नहीं की गईं। करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से तैयार यह सिस्टम मेंटेनेंस की कमी के कारण अब असुरक्षित हो चुका है।खुले बॉक्स से बड़ा खतरा सबसे ज्यादा खतरा केबल बॉक्स से है। ये हालात किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। लोगों की शिकायतों पर नहीं हुई कार्रवाई मौदहापारा और सदर बाजार के रहवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।लोगों का कहना है कि अब तो शिकायत करना भी बंद कर दिया है, क्योंकि सुनवाई नहीं होती। अन्य इलाकों में भी खराब हालात सिर्फ जयस्तंभ-फाफाडीह रोड ही नहीं, बल्कि कई जगहों पर यही समस्या देखने को मिल रही है। पूरे प्रोजेक्ट पर 40 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किया गया था। लापरवाही के मुख्य कारण मेंटेनेंस की कमीकाम पूरा होने के बाद नियमित जांच नहीं की गई। बार-बार खुदाईअन्य विभागों द्वारा सड़क खोदने से केबल क्षतिग्रस्त हुई। समन्वय की कमीरायपुर नगर निगम, जल विभाग और बिजली कंपनी के बीच तालमेल नहीं रहा। बॉक्स की अनदेखीकेबल बॉक्स के ढक्कन गायब होने के बाद भी उन्हें बदला नहीं गया। अधिकारियों का बयान नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने कहा कि शिकायत के बाद जांच कराई जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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अबूझमाड़ बदल रहा है: जहां कभी था नक्सलियों का खौफ, अब बन रही सड़क और लौट रहे लोग

कभी ‘नो-गो एरिया’, अब खुल रहा रास्ता अबूझमाड़, जो कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, अब तेजी से बदल रहा है। नारायणपुर से करीब 50 किमी दूर इस इलाके में अब पहली बार सड़क निर्माण का काम शुरू हुआ है। जहां पहले नक्सलियों के बैरिकेड लगे होते थे और दिन में भी लोगों का आना-जाना मुश्किल था, अब वहां सुरक्षा बलों की मौजूदगी में विकास कार्य जारी हैं। सड़क के साथ बदलती जिंदगी अबूझमाड़ के अंदर क्रूसनार, बासिंघ, सोनपुर, ढोढ़रीबेड़ा, मसपुर और होरादी जैसे गांवों को जोड़ते हुए सड़क बनाई जा रही है। यह सड़क आगे महाराष्ट्र तक कनेक्ट करेगी। रास्ते में कई पुलिस कैंप बनाए गए हैं और सड़क किनारे अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं का निर्माण भी शुरू हो चुका है। लोगों की जुबानी पुराने हालात स्थानीय महिला सुकमती मेटामी बताती हैं कि पहले यहां हालात बेहद डरावने थे। अब गांव में अस्पताल बन रहा है और बस सेवा भी शुरू हो चुकी है, जिससे लोगों को राहत मिल रही है। अनाज तक छीन लेते थे नक्सली गांव के निवासी बताते हैं कि नक्सली पहले से सूचना देकर अनाज इकट्ठा करने को कहते थे।चाहे फसल हो या न हो, गांववालों को अपना पेट काटकर भी उन्हें अनाज देना पड़ता था। अगर कोई शहर चला जाता, तो उसे सजा दी जाती थी। कई लोग डर के कारण गांव छोड़कर चले गए थे। आत्मसमर्पण कर बदल रहे हालात गांव में सुरक्षा बलों के साथ मौजूद अनथ कवची जैसे लोग भी हैं, जो पहले नक्सली थे और अब आत्मसमर्पण कर चुके हैं।वे अब सुरक्षा बलों की मदद कर रहे हैं और बचे हुए नक्सलियों के खिलाफ अभियान में शामिल हैं। बस्तर में तेजी से घट रहा नक्सल प्रभाव बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान ने बड़ी सफलता हासिल की है। विजय शर्मा के अनुसार: विकास बना सबसे बड़ा हथियार सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय लोग अब मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।लगातार ऑपरेशन, आत्मसमर्पण और विकास कार्यों ने मिलकर हालात बदले हैं। एक तस्वीर, बड़ा संदेश हाल ही में विजय शर्मा की अबूझमाड़ में मॉर्निंग वॉक की तस्वीर सामने आई।यह सिर्फ एक फोटो नहीं, बल्कि यह संकेत है कि जहां कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी, वहां अब शांति और सामान्य जीवन लौट रहा है।

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