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रायपुर में अप्रैल में ही पेयजल संकट, बोरवेल सूखने और लो प्रेशर से लोगों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है

रायपुर शहर में अप्रैल की तेज गर्मी के साथ ही पेयजल संकट गंभीर रूप ले रहा है। कई बोरवेल सूख चुके हैं और अधिकांश वार्डों में नलों का पानी लो प्रेशर से आ रहा है, जिससे टेल एंड तक सप्लाई पहुंच नहीं पा रही है। जोन-9 के वार्ड सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां रोजाना टैंकरों से पानी सप्लाई करनी पड़ रही है और लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं। लाभांडी, खम्हारडीह, कचना, दलदल सिवनी, सड्डू, हीरापुर, मोवा और जोरा सहित कई इलाकों में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। शहर के आउटर क्षेत्रों की सोसायटियों और मोहल्लों में टैंकरों के फेरे लगातार बढ़ रहे हैं। अधिकांश वार्डों में पानी लो प्रेशर से आ रहा है, जबकि कुछ बड़े इलाकों में पानी की टंकी बनने के बावजूद पाइपलाइन अधूरी है। पुरानी टंकियों से ही सप्लाई होने के कारण प्रेशर और कम हो रहा है। चंगोराभाठा के करन नगर, ब्रह्मदेव नगर (लाभांडी), कचना के स्वास्तिक नगर, पं. रविशंकर शुक्ल वार्ड के यादवपारा, धोबीपारा और अर्जुन चौक समेत कई क्षेत्रों में पानी बेहद कम प्रेशर से मिल रहा है। लाभांडी के ब्रह्मदेव नगर में लोग सार्वजनिक बोर से छोटे टैंकों में पानी भरकर अपनी जरूरत पूरी कर रहे हैं। कई सालों से भूजल स्तर गिरने के कारण बोरवेल का पानी भी कम हो गया है। टैंकर पहुंचते ही भीड़ लग जाती है और कई बार विवाद की स्थिति भी बनती है। भूजल स्तर में गिरावट और पाइपलाइन नेटवर्क अधूरा होना मुख्य वजह बताई जा रही है। टेल एंड इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं और वहां नियमित सप्लाई नहीं पहुँच पा रही। गर्मियों में हर साल दोहराई जाने वाली यह समस्या स्थायी समाधान के अभाव में बनी रहती है। टैंकर पर बढ़ती निर्भरता से लागत और विवाद भी बढ़ रहे हैं। शहर में किन वार्डों में पानी की समस्या है, इसकी रिपोर्ट रोज ली जा रही है। एमआईसी सदस्यों के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम बनाई गई है। जरूरत के अनुसार पाइपलाइन बिछाने के साथ ही टैंकरों से पानी सप्लाई की जा रही है। जोन-9 क्षेत्र में सबसे ज्यादा टैंकर भेजे जा रहे हैं। जोन-3 और जोन-7 के वार्डों में भी पानी की कमी है। वर्तमान में टैंकर सप्लाई के लिए नया टेंडर नहीं हुआ है और पुराने टेंडर से ही सप्लाई जारी है। नवा रायपुर में बढ़ती आबादी के साथ पानी की मांग तीन गुना बढ़ गई है। गर्मियों में कटौती से राहत के लिए कोडापार एनीकट से 33 एमएलडी अतिरिक्त पानी लाने की योजना पर काम तेजी से चल रहा है। पिछले 10 साल में सप्लाई 11 एमएलडी से बढ़कर 33 एमएलडी तक पहुंच गई है, लेकिन गर्मियों में महानदी का जलस्तर घटने से नियमित सप्लाई प्रभावित होती है। स्थायी समाधान के लिए एनआरडीए अभनपुर के कोडापार एनीकट से नई पाइपलाइन के जरिए पानी लाएगा। करीब 10 किमी पाइपलाइन बिछ चुकी है और 5 किमी का काम बाकी है, जिसे अगस्त 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल टीला एनीकट से पानी पचेड़ा फिल्टर प्लांट तक लाया जाता है। जलस्तर घटने पर सुबह-शाम तीन-तीन घंटे कटौती करनी पड़ती है। नई योजना के पूरा होने के बाद वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध होगा। वर्तमान में 52 एमएलडी क्षमता का प्लांट संचालित है और लेयर-वन के 10 हजार घरों को 24 घंटे पानी मिल रहा है। हर साल पानी संकट की मुख्य वजह महानदी पर निर्भरता, गर्मियों में गंगरेल से कम पानी छोड़ना, तेजी से बढ़ती आबादी और खपत, और वैकल्पिक स्रोत की कमी बताई जा रही है।

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खरीफ से पहले किसानों की मांग: पर्याप्त खाद, कालाबाजारी रोक और श्वेतपत्र जारी करे सरकार

अंतरराष्ट्रीय तनाव और ईरान-इज़राइल हालात के बीच किसानों ने खरीफ सीजन से पहले पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। किसान नेता तेजराम विद्रोही ने कहा कि सरकार को पहले से पता होता है कि कितनी खेती होगी, इसलिए खाद का स्टॉक पहले से तैयार रखना चाहिए। पिछले खरीफ में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारी कमी के कारण किसानों को यूरिया, डीएपी और पोटाश के लिए भटकना पड़ा था। इस बार कांग्रेस ने भी सरकार से श्वेतपत्र जारी कर खाद की उपलब्धता और कालाबाजारी रोकने की अपील की है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि शुरुआती दो महीनों में 4.5 लाख मीट्रिक टन की जरूरत के मुकाबले केवल 80 हजार मीट्रिक टन ही उपलब्ध कराया गया। इससे बिचौलियों ने फायदा उठाया और किसानों को तीन से चार गुना ज्यादा कीमत पर खाद खरीदनी पड़ी। कांग्रेस ने कृषि मंत्री रामविचार नेताम से सवाल किया है कि इस साल कुल कितनी मांग है और अब तक कितना स्टॉक तैयार किया गया। पार्टी ने कहा कि सरकार को पारदर्शिता दिखाते हुए श्वेतपत्र जारी करना चाहिए, बजाय विपक्ष पर आरोप लगाने के।

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INS तारागिरी नौसेना में शामिल, ब्रह्मोस से लैस बढ़ी भारत की ताकत

INS Taragiri को शुक्रवार को Visakhapatnam में आधिकारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। इस मौके पर रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने कहा कि इस आधुनिक युद्धपोत के शामिल होने से नौसेना की ताकत और क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। INS तारागिरी को Mazagon Dock Shipbuilders Limited ने प्रोजेक्ट 17-A के तहत तैयार किया है। यह अत्याधुनिक युद्धपोत BrahMos missile, एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम और एमएफ-स्टार रडार से लैस है। इसके अलावा इसमें 76 मिमी गन, 30 मिमी और 12.7 मिमी क्लोज-इन वेपन सिस्टम, एंटी-सबमरीन रॉकेट और टॉरपीडो जैसी क्षमताएं भी मौजूद हैं। यह युद्धपोत नीलगिरि क्लास (Project 17A) का चौथा स्टेल्थ फ्रिगेट है। इस क्लास के कुल 7 आधुनिक युद्धपोत तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें भविष्य की समुद्री चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। नई INS तारागिरी, पुराने ‘तारागिरी’ का उन्नत संस्करण है, जिसने 1980 से 2013 तक करीब 33 साल तक सेवा दी थी। नए वर्जन में स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, बेहतर मारक क्षमता और अत्याधुनिक ऑटोमेशन सिस्टम शामिल किए गए हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस प्रोजेक्ट में करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया गया है और 200 से अधिक एमएसएमई इससे जुड़े हैं। प्रोजेक्ट के बाकी तीन युद्धपोत अगस्त 2026 तक चरणबद्ध तरीके से नौसेना को सौंपे जाएंगे।

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छत्तीसगढ़ में पेट्रोल महंगा, कीमत 100 रुपए के पार

छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा सेस बढ़ाए जाने के बाद 2 अप्रैल सुबह 6 बजे से पेट्रोल की कीमत में 1 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो गई है। अब Raipur समेत प्रदेश के कई शहरों में पेट्रोल 100 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच गया है, जबकि डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार पहले पेट्रोल पर 24 प्रतिशत वैट और 1 रुपए सेस वसूल रही थी, जिसे अब बढ़ाकर 2 रुपए कर दिया गया है। इसी कारण पेट्रोल की कीमत में यह बढ़ोतरी हुई है। डीजल पर अभी भी 23 प्रतिशत वैट और 1 रुपए सेस ही लागू है, जिससे उसकी कीमत स्थिर बनी हुई है। रायपुर में पहले पेट्रोल की कीमत करीब 99.44 से 99.47 रुपए प्रति लीटर थी, जो अब बढ़कर 100.44 से 100.47 रुपए प्रति लीटर हो गई है। वहीं डीजल की कीमत लगभग 93.41 रुपए प्रति लीटर बनी हुई है। पेट्रोल पंप संचालकों के अनुसार प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और कहीं भी किसी तरह की किल्लत नहीं है। राज्य सरकार को पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट और सेस से हर साल 7000 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व मिलता है, जो सेस बढ़ने के बाद और बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई भी अब सामान्य हो रही है। पेट्रोलियम कंपनियों के अनुसार एजेंसियों को मांग के अनुसार सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, हालांकि ओटीपी आधारित डिलीवरी सिस्टम के कारण थोड़ी देरी हो सकती है।

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महासमुंद विवाद पर सख्त कांग्रेस, बागी कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट तलब

छत्तीसगढ़ के Mahasamund में कांग्रेस नेताओं के बीच हुए विवाद और मारपीट के बाद पार्टी हाईकमान सख्त हो गया है। घटना को गंभीरता से लेते हुए सभी जिलाध्यक्षों से नाराज और बागी कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट मांगी गई है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान ऐसी स्थिति न बने। अनुशासनहीनता पर कड़ी कार्रवाई के संकेत प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष Sushil Anand Shukla ने स्पष्ट कहा है कि घटना में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है और इसे तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। नाराज कार्यकर्ताओं की जानकारी जुटाई जा रही पार्टी संगठन स्तर पर जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों से उन कार्यकर्ताओं की सूची मांगी गई है जो नाराज हैं या बागी रुख अपना सकते हैं। हाल ही में हुए संगठनात्मक नियुक्तियों के बाद कई जगहों पर असंतोष सामने आया है, जिसे समय रहते नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बढ़ा विवाद गुरुवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में महंगाई के मुद्दे पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद विवाद शुरू हुआ। जिलाध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव द्वारा कार्यक्रम किए जाने के बाद जिला उपाध्यक्ष विजय साव ने उन्हें सूचना न मिलने पर आपत्ति जताई। नोकझोंक से मारपीट तक पहुंचा मामला बहस धीरे-धीरे बढ़कर मारपीट में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद के दौरान कुर्सियां और ग्लास फेंके गए और जमकर हंगामा हुआ। आरोप है कि विजय साव ने पूर्व कोषाध्यक्ष निर्मल जैन के साथ मारपीट की। पुलिस हस्तक्षेप और FIR दर्ज स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को बुलाना पड़ा, जिसके बाद मामला शांत हुआ। घटना के बाद विजय साव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पार्टी अब इस पूरे मामले को अनुशासन से जोड़कर देख रही है और भविष्य में सख्त कार्रवाई के संकेत दे रही है।

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रायगढ़ में सरकारी जमीन पर अवैध फ्लाई ऐश डंपिंग, पर्यावरण और खेतों को नुकसान

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में सरकारी जमीन पर उद्योगों से निकलने वाली फ्लाई ऐश की अवैध डंपिंग के आरोप सामने आए हैं। खरसिया ब्लॉक के नवापारा क्षेत्र में खसरा क्रमांक 311/1 की शासकीय भूमि पर सरडा एनर्जी कंपनी बिना अनुमति के नियमों का उल्लंघन करते हुए फ्लाई ऐश डंप कर रही है। इस अवैध गतिविधि से आसपास के खेत प्रभावित हो रहे हैं और क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा है। भाजपा युवा मंडल अध्यक्ष भोलू उरांव ने नायब तहसीलदार को लिखित शिकायत सौंपकर मामले में कार्रवाई की मांग की। आवेदन में यह भी कहा गया कि ट्रांसपोर्टर, उद्योग प्रबंधन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत की आशंका है और उच्च अधिकारियों को गुमराह करने के लिए गलत जानकारी दी जा रही है। भोलू उरांव ने मांग की कि सरकारी जमीन पर हो रही अवैध फ्लाई ऐश डंपिंग तुरंत रोकी जाए और आसपास की अन्य भूमि पर भी रोक लगाई जाए। साथ ही, संलिप्त उद्योग प्रबंधन, ट्रांसपोर्टर और अधिकारियों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि अवैध फ्लाई ऐश के परिवहन और खुले में डंपिंग से आवागमन में परेशानी हो रही है और सटी कृषि भूमि भी प्रभावित हो रही है। पहले भी शिकायत के बाद डंपिंग रोकी गई थी, लेकिन कुछ समय बाद यह गतिविधि फिर से शुरू हो गई।

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रायगढ़ में प्रशासन ने बाल विवाह रोका, दूल्हा निकला नाबालिग

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में नाबालिग लड़के की शादी रोक दी गई। शुक्रवार को बारात निकलने वाली थी, लेकिन प्रशासन की टीम समय रहते गांव पहुंच गई। दस्तावेजों की जांच में पता चला कि दूल्हा नाबालिग है। इसके बाद संयुक्त टीम ने विवाह रोक दिया और परिजनों ने बालक के बालिग होने तक शादी टालने का संकल्प लिया। यह आठ दिनों में बाल विवाह रोकने की दूसरी कार्रवाई है। रायगढ़ विकासखंड के एक गांव में नाबालिग बालक की शादी की तैयारी चल रही थी। बालक की आयु 20 साल 5 माह थी, जबकि विवाह के लिए कानूनी न्यूनतम आयु 21 साल है। टीम ने बालक और बालिका पक्ष दोनों के परिजनों को बाल विवाह के कानूनी दुष्परिणाम और कानून की जानकारी दी। मौके पर औपचारिक घोषणा पत्र और राजीनामा पत्र भरवाए गए। इस कार्रवाई में जिला बाल संरक्षण अधिकारी, परियोजना अधिकारी, पुलिसकर्मी, संरक्षण अधिकारी, विधिक सह परिवीक्षा अधिकारी, सेक्टर पर्यवेक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ग्राम के सरपंच शामिल थे। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि बाल विवाह सामाजिक बुराई और कानूनी अपराध दोनों है। यदि कहीं बाल विवाह की जानकारी मिले, तो संबंधित विभाग या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर तुरंत सूचना दें।

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रायपुर में ऑनलाइन जमीन डायवर्सन सिस्टम ठप, आवेदनकर्ता परेशान

राज्य सरकार ने दिसंबर 2025 में कृषि जमीन का लैंड यूज बदलने के लिए ऑनलाइन डायवर्सन पोर्टल लॉन्च किया था। राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में इस सिस्टम को लागू किया गया। इसके तहत ऑफलाइन आवेदन पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं और सभी आवेदन पोर्टल के माध्यम से ही किए जाने हैं। लेकिन तीन महीनों में रायपुर में सिर्फ 16 आवेदन ही ऑनलाइन जमा हो पाए हैं, और इनमें से किसी को भी मंजूरी नहीं मिली है। इस वजह से जमीन मालिकों और खरीदारों में भारी परेशानी है। 2200 वर्गफीट से कम और बड़ी कृषि जमीन के डायवर्सन के लिए आवेदन जमा नहीं हो पा रहे हैं। तकनीकी खामियों और पोर्टल की खराब कार्यप्रणाली के कारण लोग लगातार असफल हो रहे हैं। तहसीलदार राममूर्ति दीवान के अनुसार, ऑफलाइन आवेदन अब स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। भुईंया वाट्सएप बोट से भी जानकारी नहीं मिल रही, जिससे लोग तहसीलों में बार-बार भटक रहे हैं। नए सिस्टम के नियमों के मुताबिक, एसडीएम को 15 दिन में आवेदन पर फैसला करना होता है, अन्यथा 16वें दिन ऑटोमेटिक मंजूरी मिलनी चाहिए। रायपुर में यह भी काम नहीं कर रहा है। द्वारका साहू लगातार एक माह से ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं लेकिन सफल नहीं हो पाए। कुशालपुर के प्रशांत दुबे ने ऑनलाइन और तहसील दोनों जगह कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। बोरियाखुर्द की तस्मीन बानो भी जमीन खरीदने के बाद ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पाई। राज्य सरकार और तहसील प्रशासन को जल्द तकनीकी खामियों को दूर कर ऑनलाइन डायवर्सन प्रक्रिया को सुचारू रूप से लागू करने की आवश्यकता है, ताकि जमीन मालिकों को राहत मिल सके।

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छत्तीसगढ़ के चार IPS अधिकारी हैंद्राबाद में इंडक्शन ट्रेनिंग के लिए जाएंगे

त्तीसगढ़ डीजीपी ने चार जिलों में प्रभारी एसपी नियुक्त किए हैं, क्योंकि इन जिलों के कप्तान 6 अप्रैल से हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी (NPA) में इंडक्शन ट्रेनिंग में भाग लेंगे। इन अधिकारियों को उनके मूल कप्तानों की ट्रेनिंग समाप्त होने तक जिलों का लॉ एंड आर्डर संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। इंडक्शन ट्रेनिंग की जानकारी: यह उच्च स्तरीय ट्रेनिंग पूरे देश के चुने हुए IPS अधिकारियों के लिए आयोजित की जाती है और उनके पेशेवर कौशल और नेतृत्व क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करती है।

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ट्रांसजेंडर समुदाय में आक्रोश: नए संशोधन बिल से पहचान और भविष्य पर संकट

Transgender Persons (Protection of Rights) Amendment Bill, 2026 के पास होने के बाद देशभर में ट्रांसजेंडर समुदाय में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। Raipur सहित कई जगहों पर लोग इस कानून के खिलाफ विरोध जता रहे हैं। समुदाय का कहना है कि यह बिल उनकी पहचान, शिक्षा, रोजगार और रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डाल सकता है। “पहचान ही खत्म हो रही है” रायपुर में रहने वाले अभिनव कुमार (बदला हुआ नाम) का कहना है कि इस नए कानून से उनकी पहचान पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। उनका कहना है कि अगर उनकी पहचान को ही मान्यता नहीं मिलेगी, तो वे खुद को समाज में कैसे साबित करेंगे। उनका दर्द यह है कि वे न पूरी तरह पुरुष माने जा रहे हैं, न महिला — ऐसे में उनकी स्थिति क्या होगी, इसका कोई जवाब नहीं है। मेडिकल जांच और सख्त नियमों का विरोध समुदाय के लोगों का कहना है कि पहले जहां स्व-पहचान (self-identification) को मान्यता थी, अब इस संशोधन में मेडिकल जांच और सख्त प्रक्रिया को अनिवार्य बनाया जा रहा है। उनका मानना है कि यह उनकी गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है। पढ़ाई और नौकरी पर खतरा अभिनव बताते हैं कि उनके दस्तावेजों में जेंडर मिसमैच होने के कारण उन्हें कई कॉलेजों में एडमिशन नहीं मिला। बड़ी मुश्किल से NALSA Judgment 2014 का हवाला देने के बाद उन्हें दाखिला मिला। अब उन्हें डर है कि नए कानून के लागू होने पर उनकी पढ़ाई भी खतरे में पड़ सकती है। नौकरी के क्षेत्र में भी उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। पहचान स्पष्ट न होने के कारण न निजी क्षेत्र में अवसर मिल रहे हैं, न सरकारी नौकरी में। सर्जरी के बाद भी असुरक्षा अभिनव ने अपनी पहचान के लिए काफी संघर्ष किया और करीब एक लाख रुपए खर्च कर सर्जरी करवाई। उनका कहना है कि सर्जरी के बाद उन्हें लगा था कि अब वे अपनी असली पहचान के साथ जी पाएंगे, लेकिन नए कानून के बाद फिर से सब कुछ अनिश्चित हो गया है। दस्तावेज रद्द होने का डर रायपुर की चांद किन्नर का कहना है कि इस बिल के कारण आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज भी रद्द होने का खतरा है। उनका सवाल है कि अगर ऐसा हुआ, तो वे जीवनयापन कैसे करेंगी। “सालों की मेहनत पलभर में खत्म” बॉबी फारिकार का कहना है कि उन्होंने सालों की मेहनत से अपनी पहचान और जीवन बनाया है, लेकिन अब उन्हें डर है कि यह सब कुछ एक झटके में खत्म हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर यह बिल वापस नहीं लिया गया, तो वे इसके खिलाफ आंदोलन जारी रखेंगे। सरकार का पक्ष इस मामले में छत्तीसगढ़ कॉलेज, रायपुर के विधि विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र करवंदे का कहना है कि सरकार का उद्देश्य वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करना है, ताकि जरूरतमंद लोगों तक सही लाभ पहुंच सके। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि मेडिकल सर्टिफिकेट को अनिवार्य करना स्व-पहचान के अधिकार को प्रभावित कर सकता है, जो 2014 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत है।

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