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रायपुर में पुलिस का सख्त एक्शन: अड्डेबाजों, वारंटियों और अवैध हथियार रखने वालों पर बड़ी कार्रवाई, 10 आरोपी जेल भेजे

Raipur में पुलिस ने गुरुवार शाम से देर रात तक बड़ा चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान कोतवाली डिवीजन के अंतर्गत कोतवाली, गोलबाजार, मौदहापारा और गंज थाना क्षेत्रों में पुलिस ने सड़कों पर उतरकर संदिग्ध लोगों की जांच की। पुलिस ने अड्डेबाजी करने वाले, नशा करने वाले, वारंटियों और अवैध हथियार रखने वालों पर सख्त कार्रवाई की। कई जगहों पर शराब दुकानों के आसपास और सुनसान इलाकों में जांच की गई। इस अभियान में अड्डेबाजी और नशाखोरी में शामिल 8 लोगों पर कार्रवाई की गई। सभी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से 7 लोगों को जेल भेज दिया गया। इसके अलावा पुलिस ने 2 फरार वारंटियों को भी गिरफ्तार किया। साथ ही 8 जमानती वारंट और 7 गिरफ्तारी वारंट भी पूरे किए गए। चेकिंग के दौरान गंज थाना पुलिस ने तेलघानी नाका चौक के पास एक युवक को पकड़ा, जिसके पास से एक अवैध चाकू मिला। आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने ई-रिक्शा और अन्य वाहनों की भी जांच की। अधिकारियों ने कहा कि शहर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी

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छत्तीसगढ़ में रजिस्ट्री का नया रिकॉर्ड: 4 महीने में 3 लाख लोगों को 650 करोड़ की छूट, अब हर साल नहीं बदलेगी गाइडलाइन

Chhattisgarh में पंजीयन विभाग ने इस बार नया रिकॉर्ड बनाया है। राज्य गठन के बाद पहली बार किसी एक वित्तीय वर्ष में रजिस्ट्री से मिलने वाला राजस्व 3000 करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर गया है। खास बात यह है कि कलेक्टर गाइडलाइन में 30 प्रतिशत तक की छूट देने के बावजूद यह उपलब्धि हासिल हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग को कुल 3036.85 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 5 प्रतिशत अधिक है। दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच लागू छूट का सीधा फायदा आम लोगों को मिला। इस दौरान करीब 3 लाख लोगों ने रजिस्ट्री कराई, जिससे उन्हें लगभग 650 करोड़ रुपए की राहत मिली। सरकार को छूट देने के बावजूद आय में वृद्धि दर्ज की गई है। अधिकारियों का अनुमान है कि आने वाले वित्तीय वर्ष 2026-27 में यह आंकड़ा 5000 करोड़ रुपए के पार जा सकता है। नई व्यवस्था के तहत अब कलेक्टर गाइडलाइन हर साल जारी नहीं की जाएगी। इसे फ्लोटिंग सिस्टम में बदल दिया गया है, जिससे जमीन की कीमतों में समय-समय पर बदलाव संभव होगा। अब किसी क्षेत्र में विकास होने पर वहां के राजस्व अधिकारी और पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम, कलेक्टर को जमीन की कीमत बढ़ाने का प्रस्ताव भेज सकते हैं। पहले हर साल 1 अप्रैल को ही नई गाइडलाइन जारी होती थी, लेकिन अब साल के किसी भी समय सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जमीन की कीमतों में संशोधन किया जा सकेगा। राज्यभर में अलग-अलग सेक्टर में दी गई छूट का भी बड़ा असर देखने को मिला है। हेक्टेयर दर से रजिस्ट्री कराने पर करीब 300 करोड़ रुपए, सरकारी दर और बाजार मूल्य के अंतर पर 160 करोड़ रुपए और वसीयत व अन्य शुल्कों में लगभग 190 करोड़ रुपए की राहत दी गई है। सरकार के अनुसार, आने वाले समय में महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री कराने पर 50 प्रतिशत छूट और सेस खत्म करने जैसे फैसलों से लोगों को और अधिक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही रजिस्ट्री प्रक्रिया में मौजूद कई खामियों को भी दूर किया गया है।

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राजनांदगांव में ग्रामीणों की शराब दुकान खोलने की मांग, प्रशासन को सौंपा आवेदन

राजनांदगांव जिले के रंगीटोला गांव में शराब दुकान खोलने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर आवेदन दिया है। ग्रामीणों ने कलेक्टर जितेंद्र यादव और जिला आबकारी अधिकारी अभिषेक तिवारी को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया कि प्रस्तावित शराब दुकान को लेकर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। ग्राम पंचायत चिचोला के अंतर्गत आने वाले रंगीटोला के लोगों ने अनापत्ति पत्र में बताया कि निविदा प्रक्रिया के तहत खुलने वाली मदिरा दुकान का गांव में कोई विरोध नहीं है। इस पत्र पर ग्राम पटेल पूनाराम पटेल सहित पंचगण और कई ग्रामीणों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान भी दर्ज हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ समय से यह अफवाह फैलाई जा रही थी कि गांव के लोग इस दुकान का विरोध कर रहे हैं। इसी भ्रम को दूर करने के लिए बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी स्थिति स्पष्ट की। ग्रामीणों के अनुसार, शराब दुकान खुलने से क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। ज्ञापन मिलने के बाद प्रशासन और आबकारी विभाग के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि नियमों और प्रक्रिया के तहत इस प्रस्ताव पर विचार कर उचित निर्णय लिया जाएगा।

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बर्ड फ्लू पर सख्ती: केंद्रीय टीम अलर्ट, रिपोर्ट के बाद शुरू हो सकती है चिकन-अंडे की बिक्री

बिलासपुर में बर्ड फ्लू के संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासन और केंद्र सरकार की टीम पूरी तरह सतर्क है। केंद्रीय टीम लगातार तीन दिनों से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा ले रही है। बुधवार को टीम ने विभिन्न इलाकों में पहुंचकर संक्रमण की स्थिति, रोकथाम के उपायों और मानव स्वास्थ्य पर इसके संभावित प्रभाव का विस्तृत निरीक्षण किया। 8 अप्रैल को टीम वेटनरी कॉलेज भी पहुंची, जहां संक्रमण के बाद 1895 मुर्गियों को दफनाया गया था। यहां सैनिटाइजेशन और डिसइंफेक्शन की व्यवस्था की गहन जांच की गई। इसके बाद टीम कोनी के देवनगर सहित आसपास के गांवों में पहुंची, जहां ग्रामीणों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली गई। लोगों को सतर्क रहने और किसी भी लक्षण पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी गई। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध मामलों को नजरअंदाज न किया जाए। लक्षण मिलने पर तुरंत सैंपल लेकर जरूरत पड़ने पर आरटी-पीसीआर जांच कराई जाए। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी और सैनिटाइजेशन जारी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। केंद्रीय टीम अपने निरीक्षण के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर और केंद्र सरकार को सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी, जिसमें चिकन और अंडों की बिक्री पर लगे प्रतिबंध को हटाने का निर्णय भी शामिल हो सकता है। प्रशासन ने पोल्ट्री फार्म के आसपास 10 किलोमीटर के दायरे को निगरानी क्षेत्र घोषित किया है। विशेषज्ञों की टीम लगातार निरीक्षण कर रही है और उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही आगे के फैसले लिए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है और जल्द राहत मिल सकती है।

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12 अप्रैल को फार्मासिस्ट ग्रेड-2 भर्ती परीक्षा, रायपुर के 17 केंद्रों पर 5577 अभ्यर्थी देंगे परीक्षा

छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा फार्मासिस्ट ग्रेड-2 के रिक्त पदों के लिए भर्ती परीक्षा 12 अप्रैल को आयोजित की जाएगी। यह लिखित परीक्षा (HSP-25) सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:15 बजे तक रायपुर जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों में होगी। परीक्षा के लिए जिले में कुल 17 केंद्र निर्धारित किए गए हैं, जहां 5577 अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा से संबंधित गोपनीय सामग्री का वितरण 12 अप्रैल को सुबह 7:00 बजे से कलेक्टर परिसर स्थित जिला कोषालय से किया जाएगा। परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए डिप्टी कलेक्टर उपेन्द्र किण्डो को नोडल अधिकारी और विशेष रोजगार कार्यालय रायपुर के अधिकारी केदारनाथ पटेल को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रशासन ने परीक्षा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं।

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पीजी पढ़ाई के लिए डॉक्टरों को 3 साल का अवकाश, पुराने बैच को भी लाभ देने की मांग

छत्तीसगढ़ सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने सेवारत डॉक्टरों के लिए एक अहम फैसला लिया है। अब पीजी (पोस्ट ग्रेजुएशन) कोर्स करने वाले चिकित्सकों को अध्ययन अवकाश 2 साल की बजाय 3 साल तक दिया जाएगा। इस निर्णय से राज्य के कई डॉक्टरों को सीधा फायदा मिलेगा। इस मांग को लेकर छत्तीसगढ़ डॉक्टर फेडरेशन लंबे समय से प्रयास कर रहा था। फेडरेशन का मानना है कि उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त समय मिलना जरूरी है, ताकि डॉक्टर बेहतर तरीके से अपनी पढ़ाई पूरी कर विशेषज्ञ बन सकें और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर सकें। इस फैसले से मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह लोधी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह संगठन के लगातार प्रयासों और संवाद का परिणाम है। उन्होंने बताया कि यह मुद्दा लंबे समय से सरकार के सामने उठाया जा रहा था। हालांकि, फेडरेशन ने यह भी कहा है कि वर्ष 2025 से पहले पीजी अध्ययन अवकाश पर गए डॉक्टरों को इस नई व्यवस्था का लाभ नहीं मिल रहा है। संघ के उपाध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह ने सरकार से मांग की है कि 2021 से 2023 बैच के डॉक्टरों के लिए भी स्पष्ट निर्देश जारी कर उन्हें समान लाभ दिया जाए, ताकि किसी प्रकार की असमानता न रहे।

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100 किलो से ज्यादा कचरा पर नया नियम: कॉलोनियों को खुद करनी होगी प्रोसेसिंग, नहीं तो लगेगा शुल्क

राजधानी रायपुर में अब कचरा प्रबंधन को लेकर सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं। यदि किसी कॉलोनी, सोसायटी या संस्थान से प्रतिदिन 100 किलो या उससे अधिक कचरा निकलता है, तो उसे वहीं पर प्रोसेस करना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर नगर निगम कचरे के निपटान के लिए अलग से शुल्क वसूलेगा। यह व्यवस्था नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2026 के तहत लागू की गई है, जो अप्रैल 2026 से देशभर में प्रभावी हो चुके हैं। हालांकि, अभी नगर निकायों में इस नियम को लागू करने के लिए पूरी व्यवस्था तैयार नहीं है, लेकिन सर्वे और बैठकों की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नए नियमों के अनुसार अब कचरे को चार श्रेणियों में अलग-अलग एकत्र किया जाएगा—गीला, सूखा, सैनेटरी और खतरनाक कचरा। नियम लागू होने से पहले सभी कॉलोनियों, अपार्टमेंट्स, अस्पतालों, मॉल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ईपीआर (एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी) पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। इसमें कचरे की मात्रा, प्रोसेसिंग की विधि और नियमों के पालन की जानकारी देनी होगी, जिसे नगर निगम सत्यापित कर प्रमाण पत्र जारी करेगा। आने वाले समय में कॉलोनियों को अपने स्तर पर कचरा प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करनी होगी। गीले कचरे को कंपोस्ट या बायोगैस में बदला जा सकता है, जबकि सूखे कचरे को रिसाइक्लिंग के लिए भेजना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार एक व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 500 ग्राम कचरा उत्पन्न करता है। इस हिसाब से 5 लोगों के एक परिवार से रोजाना करीब 3 किलो कचरा निकलता है। यदि किसी कॉलोनी में 50 परिवार हैं, तो वहां प्रतिदिन लगभग 150 किलो कचरा उत्पन्न होगा, जिससे वह ‘बल्क वेस्ट प्रोड्यूसर’ की श्रेणी में आ जाएगी। ऐसी स्थिति में यदि कॉलोनी खुद कचरा प्रोसेस नहीं करती है, तो नगर निगम प्रति टन के हिसाब से शुल्क वसूलेगा। राजधानी में लगभग 1500 कॉलोनियां, अपार्टमेंट और कवर्ड कैंपस इस नियम के दायरे में आएंगे, साथ ही कई होटल और व्यावसायिक संस्थान भी प्रभावित होंगे। नियमों को लागू करने के लिए नगर निगम द्वारा वार्डवार सूची तैयार की जा रही है, ताकि बड़े कचरा उत्पादकों की पहचान कर उन्हें कचरा प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जा सके।

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रायपुर में बनेगी स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, 1000 करोड़ की योजना से खिलाड़ियों को मिलेगा नया मंच

छत्तीसगढ़ अब केवल धान उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि खेल प्रतिभाओं के केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य के खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने राजधानी रायपुर में ‘छत्तीसगढ़ स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी’ स्थापित करने के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए लगभग 1000 करोड़ रुपए का प्रारंभिक बजट निर्धारित किया गया है। इस यूनिवर्सिटी के संचालन पर हर साल करीब 155 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसके लिए वित्तीय संसाधन केंद्र सरकार की ‘खेलो इंडिया’ योजना, यूजीसी तथा सेल और एनटीपीसी जैसी कंपनियों के सीएसआर फंड से जुटाने की योजना बनाई गई है। शुरुआत में इसे मणिपुर स्थित नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी से संबद्ध करने का भी प्रस्ताव है। हाल ही में आयोजित खेलो इंडिया कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने इस प्रोजेक्ट को जल्द मंजूरी देने का आश्वासन दिया था। इसके बाद खेल संचालनालय ने प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है, जिसे जल्द ही केंद्र सरकार को अग्रेषित किया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचान दिलाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है। प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि राज्य में प्राकृतिक खेल क्षमता का बड़ा भंडार मौजूद है। यह यूनिवर्सिटी न केवल खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करेगी, बल्कि राज्य के विभिन्न जिलों में प्रस्तावित खेल कॉलेजों के लिए एक संबद्ध संस्था के रूप में भी कार्य करेगी। इससे स्पोर्ट्स टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और खेल क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यूनिवर्सिटी का मॉडल देश के प्रमुख संस्थानों से प्रेरित होगा, जिसमें गुजरात की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के आधुनिक रिसर्च सिस्टम, मणिपुर की नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का शैक्षणिक ढांचा और दिल्ली के एकीकृत स्कूल-यूनिवर्सिटी मॉडल को शामिल किया जाएगा, ताकि कम उम्र से ही खिलाड़ियों को तैयार किया जा सके। राज्य के खेल मंत्री अरुण साव ने बताया कि प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी, जिससे छत्तीसगढ़ खेल, पर्यटन और रोजगार का एक बड़ा केंद्र बन सके।

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महिला एवं बाल विकास विभाग में साड़ी घोटाला: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिली छोटी और घटिया साड़ियां

महिला एवं बाल विकास विभाग में साड़ी वितरण को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। ठेकेदारों द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को निर्धारित माप से छोटी और खराब गुणवत्ता की साड़ियां दी गई हैं। वर्ष 2024-25 के लिए प्रदेश की लगभग 1.94 लाख महिलाओं के लिए साड़ियों की खरीदी की गई थी। इस खरीद की जिम्मेदारी खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को दी गई थी। करीब 9.7 करोड़ रुपए खर्च कर प्रत्येक साड़ी 500 रुपए में खरीदी गई। कार्यादेश के अनुसार साड़ी की कुल लंबाई 6.3 मीटर होनी थी, जिसमें 5.5 मीटर साड़ी और 80 सेंटीमीटर ब्लाउज पीस शामिल था। अगस्त 2025 से फरवरी 2026 के बीच इन साड़ियों का वितरण किया गया। लेकिन कई जिलों में वितरित साड़ियों की लंबाई तय मानक से कम पाई गई। कई जगहों पर सिर्फ 5 मीटर की साड़ी ही दी गई, जिससे कार्यकर्ताओं को पहनने में परेशानी हो रही है। इतना ही नहीं, साड़ी धोने पर रंग निकल जाता है और कपड़ा सिकुड़कर और छोटा हो जाता है। कार्यकर्ताओं ने गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दी गई साड़ियां बाजार में 250 रुपए या उससे भी कम कीमत की लगती हैं। शिकायतों के बाद विभाग के संचालक ने पूरे प्रदेश में साड़ियों की जांच के आदेश दिए हैं। जिला अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जहां भी साड़ियों में कमी पाई जाए, उन्हें बदला जाए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से हस्ताक्षर कर मंत्रालय को पत्र भेजकर साड़ियां वापस लेने और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यूनिफॉर्म उनके सम्मान और पहचान से जुड़ी होती है। कई कार्यकर्ता नई साड़ियां छोड़कर पुरानी पहन रही हैं, जबकि कुछ बिना यूनिफॉर्म के ही काम कर रही हैं। बिलासपुर जिले के मंगला, निरतू, घूटकू और गनियारी क्षेत्रों में जांच के दौरान पाया गया कि साड़ियों की लंबाई और चौड़ाई दोनों कम हैं। पानी में डालते ही रंग छूट गया और कपड़ा काफी पतला व पारदर्शी निकला। बिलासपुर में ही 1930 महिलाओं ने साड़ियों की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई है और उनका उपयोग बंद कर दिया है। कुछ कार्यकर्ताओं ने बताया कि पहले दी गई साड़ियां सही माप की थीं, लेकिन इस बार की साड़ियां बेहद खराब हैं। मामले की जांच के लिए संचालक रेणुका श्रीवास्तव ने एक समिति का गठन किया है, जिसने दुर्ग, धमतरी और रायगढ़ सहित कई जिलों में जांच की है। रिपोर्ट के आधार पर सभी जिलों से विस्तृत जानकारी मांगी गई है। फिलहाल खादी ग्रामोद्योग बोर्ड को भुगतान रोक दिया गया है। दोषपूर्ण साड़ियों को बदलने के निर्देश दिए गए हैं और संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। विभाग की ओर से यह भी कहा गया है कि जहां-जहां खराब साड़ियों की सप्लाई हुई है, उन्हें वापस लेकर नई साड़ियां दी जाएंगी।

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आई-गॉट प्लेटफॉर्म पर 3 कोर्स अनिवार्य, पूरा न करने पर अप्रैल वेतन पर रोक

राज्य सरकार ने मिशन कर्मयोगी के तहत विकसित आई-गॉट (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) प्लेटफॉर्म को लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। यह एआई आधारित ऑनलाइन प्रणाली है, जिसका उद्देश्य सभी शासकीय अधिकारी और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाना, कौशल विकसित करना और उन्हें नियमित प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। अब सभी अधिकारी-कर्मचारियों के लिए एआई से जुड़े कोर्स सहित कम से कम तीन कोर्स पूरे करना अनिवार्य कर दिया गया है। वर्ष 2026-27 से इन कोर्सों को एपीएआर (वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन) से भी जोड़ा जाएगा। विशेष रूप से अप्रैल महीने का वेतन प्राप्त करने के लिए तीनों कोर्स पूरे करना जरूरी होगा। डीडीओ (आहरण एवं संवितरण अधिकारी) वेतन जारी करने से पहले कर्मचारियों के कोर्स पूर्ण होने के प्रमाण पत्र की जांच करेंगे, उसके बाद ही भुगतान किया जाएगा। आई-गॉट प्लेटफॉर्म पर 100 से अधिक कोर्स उपलब्ध हैं। कर्मचारी परिचय पोर्टल या ईएचआरएमएस पोर्टल के ‘ट्रेनिंग के अवसर’ सेक्शन के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। उन्हें अपनी प्रोफाइल में पदनाम, विभाग, एनआईसी ईमेल और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी अपडेट करनी होगी। सभी विभागों को 15 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन और पूर्ण किए गए कोर्स का विवरण ई-ऑफिस के माध्यम से भेजना होगा। प्रशिक्षण को तीन तरीकों से संचालित किया जाएगा—इंडक्शन प्रोग्राम, मिड-करियर लर्निंग और सेल्फ लर्निंग। प्रत्येक कोर्स के अंत में परीक्षा होगी और सफल उम्मीदवारों को डिजिटल प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इन प्रमाण पत्रों का प्रभाव पदोन्नति और अन्य लाभों पर भी पड़ेगा। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द अपने कर्मचारियों को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ें और उनकी ऑनबोर्डिंग सुनिश्चित करें।

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