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कंपोजिट बिल्डिंग निर्माण में लापरवाही, SSP दफ्तर के पुराने रिकॉर्ड खराब होने के कगार पर

कलेक्टोरेट परिसर में बन रही नई कंपोजिट बिल्डिंग के निर्माण कार्य के बीच गंभीर लापरवाही सामने आई है। पुराने भवनों और एसएसपी कार्यालय को तोड़ा जा रहा है, लेकिन वहां रखे महत्वपूर्ण दस्तावेज अब तक पूरी तरह सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट नहीं किए गए हैं। बताया जा रहा है कि रिकॉर्ड रूम में 35 से 40 साल पुराने दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें विभिन्न थानों से जुड़े अहम रिकॉर्ड भी शामिल हैं। निर्माण कार्य और तोड़फोड़ के दौरान इन दस्तावेजों के खराब होने, गुम होने या आग जैसी घटना का खतरा बना हुआ है। पहले ये दस्तावेज खुले में पड़े थे, जिन्हें बाद में एक कमरे में रखा गया, लेकिन वहां भी स्थिति सुरक्षित नहीं है। टूटी हुई खिड़कियों के कारण बारिश का पानी, धूल और गंदगी अंदर पहुंच रही है, जिससे रिकॉर्ड तेजी से खराब हो रहे हैं। इस मामले पर पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला का कहना है कि दस्तावेजों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही सभी रिकॉर्ड को सुरक्षित कर लिया जाएगा। कलेक्टोरेट परिसर में बनने वाली यह नई बिल्डिंग 5 मंजिला होगी, जिसमें जिला प्रशासन के कई विभाग एक ही स्थान पर संचालित होंगे। हालांकि, अभी तक पूरा सामान नहीं हटने के कारण एसएसपी कार्यालय को पूरी तरह नहीं तोड़ा जा सका है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने भी इस स्थिति पर आपत्ति जताई है। पिछले करीब तीन महीनों से तोड़फोड़ का काम जारी है, जबकि दूसरी ओर निर्माण के तहत खुदाई और कॉलम डालने का कार्य भी शुरू हो चुका है।

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11 हाउसिंग कॉलोनियों का सर्वे के बाद ही होगा निगम को हैंडओवर, पहले दूर होंगी कमियां

हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों को नगर निगम के अधीन लाने की प्रक्रिया अब तेज कर दी गई है, लेकिन इसके पहले सभी कॉलोनियों का विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी कमियां दूर नहीं होतीं, तब तक कॉलोनियों का हैंडओवर नहीं किया जाएगा। इस संबंध में नगर निगम के चीफ इंजीनियर, जोन कमिश्नर और हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों की बैठक में अहम निर्णय लिया गया। तय हुआ कि दोनों विभागों की संयुक्त टीम कॉलोनियों का निरीक्षण करेगी और वहां सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और पेयजल व्यवस्था की स्थिति की जांच करेगी। निरीक्षण के दौरान यदि कहीं भी निर्माण कार्य में खामियां या अधूरी सुविधाएं पाई जाती हैं, तो उसकी रिपोर्ट तैयार कर हाउसिंग बोर्ड को सौंपी जाएगी। सभी कमियां दूर होने के बाद ही कॉलोनियों को नगर निगम के हवाले किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में इन कॉलोनियों में मरम्मत कार्य के लिए कोई स्थायी फंड उपलब्ध नहीं है, जिससे कई बार खर्च रहवासियों को उठाना पड़ता है। निगम के अधीन आने के बाद इन कार्यों के लिए केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले फंड का उपयोग किया जाएगा, जिससे लोगों को राहत मिलेगी। पानी की व्यवस्था में भी सुधार होने की संभावना है। अभी इन कॉलोनियों में ट्यूबवेल पर निर्भरता अधिक है, जिससे गर्मी के समय पानी की समस्या बढ़ जाती है। निगम के अधीन आने के बाद फिल्टर प्लांट के जरिए स्वच्छ पानी की आपूर्ति की जाएगी। इसके अलावा, शहर के विस्तार को ध्यान में रखते हुए सेजबहार, बोरियाकला और पिरदा क्षेत्रों की कॉलोनियों को भी भविष्य में नगर निगम में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। इन कॉलोनियों का होगा हैंडओवर:कचना फेस-2, भावना नगर फेस-2, शंकर नगर स्टूडियो अपार्टमेंट, हिमालयन हाइट्स डूमरतराई फेस-1 और 2, कमल विहार (इंद्रप्रस्थ), बोरियाखुर्द (सरोना), रायपुरा (हीरापुर) समेत कुल 11 कॉलोनियां। हाउसिंग बोर्ड के अपर आयुक्त सुनील कुमार भगत ने बताया कि संयुक्त निरीक्षण के बाद सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं में सुधार कराया जाएगा, और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही कॉलोनियों को निगम को सौंपा जाएगा।

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12 अप्रैल को रायपुर में CDS और NDA परीक्षा, 8 सेंटर तैयार

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित CDS और NDA परीक्षा 12 अप्रैल 2026 को रायपुर जिले के विभिन्न केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। परीक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली हैं और अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी तय कर दी गई हैं। CDS परीक्षा तीन अलग-अलग पालियों में होगी। पहली पाली सुबह 9 बजे से 11 बजे तक, दूसरी पाली दोपहर 12:30 बजे से 2:30 बजे तक और तीसरी पाली शाम 4 बजे से 6 बजे तक आयोजित की जाएगी। इसके लिए शहर में तीन केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें राष्ट्रीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बाल आश्रम परिसर कचहरी चौक, पीजी उमाठे शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला शांति नगर और पीजी डागा गर्ल्स कॉलेज शामिल हैं। वहीं NDA परीक्षा दो पालियों में आयोजित होगी। पहली पाली सुबह 10 बजे से 12:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से 4:30 बजे तक होगी। इसके लिए जिले में पांच परीक्षा केंद्र निर्धारित किए गए हैं, जिनमें लक्ष्मीनारायण कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला गुरुकुल परिसर, स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय लालपुर, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, रायपुर कॉन्वेंट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गुढियारी और श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी शामिल हैं। परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए डिप्टी कलेक्टर उपेंद्र किण्डो को सहायक समन्वयक पर्यवेक्षक और विशेष रोजगार कार्यालय रायपुर के अधिकारी केदारनाथ पटेल को कंट्रोल रूम प्रभारी नियुक्त किया गया है। प्रशासन ने सभी अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे समय से पहले अपने परीक्षा केंद्र पहुंचें और जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, ताकि परीक्षा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।

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रायपुर में छात्रों को राहत: आधार और निवास प्रमाण पत्र पर मिलेगा 5 किलो LPG सिलेंडर

रायपुर में एलपीजी गैस को लेकर हो रही परेशानियों के बीच जिला प्रशासन ने छात्रों के लिए राहत भरा कदम उठाया है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर कलेक्टरेट स्थित रेडक्रॉस हॉल में अपर कलेक्टर कीर्तिमान सिंह राठौर ने गैस एजेंसियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में गैस की उपलब्धता, स्टॉक और वितरण व्यवस्था को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि जिले में रहने वाले विद्यार्थियों को अब 5 किलो का छोटा गैस सिलेंडर एजेंसियों द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए छात्रों को केवल अपना आधार कार्ड और निवास प्रमाण पत्र दिखाना होगा। अपर कलेक्टर ने साफ कहा कि जिले में गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है और सभी उपभोक्ताओं को नियमों के अनुसार गैस दी जा रही है। उन्होंने गैस वितरकों को निर्देश दिए कि वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। साथ ही चेतावनी दी कि नियमों के खिलाफ सिलेंडर लेने की कोशिश करने या डिलीवरी कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, एम्स, मेकाहारा, वृद्धाश्रम, अनाथालय और अन्य जरूरी संस्थानों में गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन के बाद ही अगली गैस बुकिंग की जा सकेगी। फिलहाल नए गैस कनेक्शन और सिंगल-डबल कनेक्शन पर अस्थायी रोक लगाई गई है। इंडेन डीलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष और ऑल एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष विकास मरकाम ने लोगों से अपील की है कि घबराने की जरूरत नहीं है, पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और सभी को नियमानुसार गैस मिलती रहेगी।

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छत्तीसगढ़ को जल्द मिलेगा स्थायी DGP: अरुणदेव गौतम सबसे आगे

छत्तीसगढ़ में जल्द ही स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति होने की संभावना है। इस पद के लिए वर्तमान में प्रभारी DGP आईपीएस अरुणदेव गौतम और हिमांशु गुप्ता के नाम पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस मामले में अरुणदेव गौतम का नाम प्राथमिकता में माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और UPSC द्वारा भेजे गए नोटिस की समय-सीमा पूरी हो चुकी है। यूपीएससी ने राज्य सरकार से पूछा था कि स्थायी DGP की नियुक्ति में देरी क्यों हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार किसी भी राज्य में केवल प्रभारी DGP की नियुक्ति नहीं होनी चाहिए। 13 मई 2025 को UPSC ने दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों अरुणदेव गौतम (1992 बैच) और हिमांशु गुप्ता (1994 बैच) का पैनल राज्य सरकार को भेजा था। सामान्यतः तीन नाम भेजे जाते हैं, लेकिन इस बार विकल्प सीमित होने के कारण केवल दो ही नाम शामिल किए गए। जनवरी 2025 में पूर्व DGP अशोक जुनेजा के रिटायर होने के बाद अरुणदेव गौतम को प्रभारी DGP बनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने ‘प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार’ मामले में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि DGP की नियुक्ति नियमित और तय प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए। अरुणदेव गौतम का करियर काफी विस्तृत रहा है। वे मूलतः उत्तरप्रदेश के कानपुर जिले के अभयपुर गाँव के रहने वाले हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए और राजनीति शास्त्र में एमए किया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल की डिग्री हासिल की। 1992 बैच के आईपीएस अरुणदेव गौतम ने मध्यप्रदेश और बाद में छत्तीसगढ़ कैडर में विभिन्न पदों पर कार्य किया। उन्होंने बिलासपुर, कोरिया, जशपुर, राजनांदगांव, सरगुजा और रायगढ़ में एसपी और डीआईजी के रूप में सेवाएँ दीं। चुनौतीपूर्ण जिलों में कार्य करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ संभाली, जिसमें राजनांदगांव और झीरम कांड के बाद बस्तर IG के रूप में कार्य करना शामिल है। सुप्रीम कोर्ट के 2006 के निर्देशों के अनुसार राज्य सरकारें UPSC द्वारा सूचीबद्ध तीन सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से अपने DGP का चयन करें। चयनित अधिकारी को कम से कम दो साल का कार्यकाल पूरा करना अनिवार्य है। DGP बनने के लिए सामान्य रूप से 30 साल सेवा अनिवार्य होती है, जबकि छोटे राज्यों में विशेष मामलों में इसे 25 साल कर दिया जाता है।

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शारदा चौक-तात्यापारा रोड चौड़ीकरण को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन: हस्ताक्षर अभियान चलाकर सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप

रायपुर में शारदा चौक से तात्यापारा तक सड़क चौड़ीकरण की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर सोमवार को कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सड़क पर आने-जाने वाले लोगों से हस्ताक्षर करवाकर समर्थन जुटाया और सरकार से जल्द काम शुरू करने की मांग की। पूर्व महापौर एजाज ढेबर ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मुद्दे को लेकर कलेक्टर, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और मंत्रियों तक बात रखी गई थी। उस समय आश्वासन दिया गया था कि कमेटी बनाकर दो महीने के भीतर मुआवजा प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि हर बार राज्य और नगर निगम का बजट आने पर लोगों को उम्मीद होती है कि इस सड़क का चौड़ीकरण शुरू होगा, लेकिन अब तक केवल घोषणाएं ही हुई हैं और जमीन पर काम नजर नहीं आ रहा है। ढेबर ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के भीतर ही इस मुद्दे को लेकर स्पष्टता नहीं है। एक ओर मंत्री फ्लाईओवर की बात कर रहे हैं, वहीं सांसद सड़क चौड़ीकरण के पक्ष में पत्र लिख रहे हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस के शहर जिला अध्यक्ष कुमार मेनन ने कहा कि उनकी सरकार के दौरान इस परियोजना के लिए बजट आवंटित कर प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। अब वर्तमान सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह इसे आगे बढ़ाती, लेकिन बिना किसी स्पष्ट कारण के चौड़ीकरण के बजाय फ्लाईओवर की बात की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि तैयार डीपीआर होने के बावजूद प्रोजेक्ट में बदलाव किया जाना समझ से परे है। सरकार, नगर निगम और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी के कारण यह काम अटका हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द काम शुरू नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। स्थानीय लोगों ने भी अपनी परेशानी जाहिर की है। नयापारा निवासी प्रतीक तिवारी के अनुसार इस मार्ग पर रोजाना भारी जाम की स्थिति बनती है, खासकर शाम के समय हालात और खराब हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि कई बार एंबुलेंस भी समय पर नहीं निकल पाती, जिससे गंभीर स्थिति बन जाती है। वहीं राहुल तिवारी ने कहा कि इस सड़क चौड़ीकरण की मांग पिछले कई वर्षों से की जा रही है और बजट भी स्वीकृत हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद काम शुरू नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर जनता को राहत देने में रुचि नहीं दिखा रही है। कांग्रेस ने आम जनता से हस्ताक्षर अभियान में जुड़कर इस मांग को मजबूत करने की अपील की है और कहा है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

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बिलासपुर में जुआ फड़ पर छापा: 9 जुआरी गिरफ्तार, 4 लग्जरी कार और 84 हजार कैश जब्त

बिलासपुर के नेहरू नगर इलाके में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जनता कंस्ट्रक्शन के कार्यालय में चल रहे जुआ फड़ का खुलासा किया है। देर रात हुई इस कार्रवाई में पुलिस ने मौके से 9 लोगों को गिरफ्तार किया। उनके पास से 84,400 रुपये नकद, 13 मोबाइल फोन और चार लग्जरी कार जब्त की गई हैं। जब्त सामान की कुल कीमत लगभग 45.84 लाख रुपये आंकी गई है। सिविल लाइन थाना पुलिस को स्मार्ट रोड पर स्थित इस कार्यालय के बाहर महंगी गाड़ियों जैसे बीएमडब्ल्यू, थार, ग्लेंजा और क्रेटा की मौजूदगी देखकर संदेह हुआ था। इसके बाद मिली सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने दबिश दी, जहां जुआ खेलते हुए लोगों को रंगे हाथों पकड़ा गया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने सभी आरोपियों की वीडियोग्राफी कराई, ताकि उनकी पहचान सुनिश्चित की जा सके। साथ ही उनसे थाने में कान पकड़वाकर भविष्य में जुआ न खेलने की हिदायत भी दी गई। यह पूरी कार्रवाई एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) की टीम द्वारा शनिवार देर रात की गई। सिविल लाइन थाना प्रभारी सुम्मत साहू ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ जुआ एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में चंद्रप्रकाश पांडेय, सागर मंगेशकर, नितेश चंद्र शर्मा, दुर्गेश सारथी, अखिलेश त्रिवेदी, अमन धर, आशीष खूंटे, रोशन सोनी और सृजन शर्मा शामिल हैं।

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बेलतरा में 30 साल बाद सड़कों का निर्माण शुरू: चुनाव बहिष्कार की चेतावनी के बाद MLA सुशांत शुक्ला ने किया शिलान्यास

बिलासपुर जिले के बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में करीब 30 साल बाद सड़क निर्माण कार्य शुरू हुआ है। लंबे समय से सड़क सुविधा नहीं मिलने से परेशान ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार तक की चेतावनी दी थी। अब विधायक सुशांत शुक्ला की पहल पर विभिन्न गांवों में 14 करोड़ 56 लाख 34 हजार रुपये की लागत से सड़कों का निर्माण कार्य शुरू किया गया है। इस क्षेत्र के कई गांव आज भी बुनियादी सड़क सुविधा से वंचित थे। यहां ज्यादातर जगहों पर कच्ची और डब्ल्यूबीएम सड़कें थीं, जो खासकर बारिश के मौसम में पूरी तरह खराब हो जाती थीं। इससे ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। विधायक सुशांत शुक्ला ने बताया कि चुनाव के दौरान जब वे इन गांवों में पहुंचे थे, तब लोगों की सबसे बड़ी मांग सड़क निर्माण ही थी। ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए चुनाव बहिष्कार की चेतावनी भी दी थी। उस समय उन्होंने आश्वासन दिया था कि जीतने के बाद इस समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। इसके बाद उनकी पहल पर भरदैयाडीह से कलमीटार, गोदईया-कलमीटार, भदरापारा-बरभांठा और करमा-बरभांठा-सरगाधोड़ी मार्गों के निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। अब स्वीकृति मिलने के बाद इन सभी सड़कों का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इन परियोजनाओं में भरदैयाडीह से कलमीटार मार्ग (3 किलोमीटर) के लिए 289 लाख रुपये, गोदईया-कलमीटार मार्ग (2.45 किलोमीटर) के लिए 278.48 लाख रुपये, भदरापारा-बरभांठा मार्ग (2.70 किलोमीटर) के लिए 360 लाख रुपये और करमा-बरभांठा-सरगाधोड़ी मार्ग (4.20 किलोमीटर) के लिए 478.86 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा ग्राम लगरा में सीसी रोड और नाली निर्माण के लिए 50 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इन सड़कों के निर्माण से क्षेत्र की यातायात व्यवस्था में सुधार होगा और ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी। लंबे इंतजार के बाद विकास कार्य शुरू होने से गांवों में उत्साह का माहौल है। बिटकुली गांव के सरपंच शिव कुमार यादव ने बताया कि ग्रामीण वर्षों से सड़क की समस्या से जूझ रहे थे और बरसात के समय स्थिति और भी खराब हो जाती थी। अब सड़क बनने से लोगों को आवागमन में काफी सुविधा मिलेगी और क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी।

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20 साल से अटका शारदा चौक-तात्यापारा प्रोजेक्ट: फ्लाईओवर की घोषणा के 41 दिन बाद भी एजेंसी तय नहीं

रायपुर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल शारदा चौक से तात्यापारा चौक तक सड़क चौड़ीकरण का मामला पिछले 20 वर्षों से लंबित है। 24 फरवरी को विधानसभा में पेश बजट में इस मार्ग पर फ्लाईओवर निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये की घोषणा की गई थी, जिससे लोगों को राहत की उम्मीद जगी थी। हालांकि 41 दिन बीत जाने के बाद भी निर्माण के लिए किसी एजेंसी का चयन नहीं हो पाया है, जिससे परियोजना एक बार फिर अनिश्चितता में फंस गई है। मामले की पड़ताल में सामने आया है कि प्रस्तावित फ्लाईओवर को लेकर नगर निगम और लोक निर्माण विभाग दोनों ही स्पष्ट जिम्मेदारी लेने से पीछे हट रहे हैं। दोनों विभागों का कहना है कि शासन स्तर पर अभी तक एजेंसी तय नहीं की गई है। इसी वजह से वर्षों से लंबित सड़क चौड़ीकरण और हाल ही में घोषित फ्लाईओवर फिलहाल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। इस बीच रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखी गई चिट्ठी के बाद यह मुद्दा और गरमा गया है। सांसद ने अपने पत्र में सवाल उठाया है कि जब पहले ही शहर के विधायकों और महापौर की बैठक में सड़क चौड़ीकरण पर सहमति बन चुकी थी, तो बजट में अचानक फ्लाईओवर का प्रावधान कैसे जोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि इस फैसले को लेकर शहरवासियों में असंतोष और नाराजगी है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि नगरीय निकाय चुनाव 2025 के दौरान जारी ‘अटल विश्वास पत्र’ में तात्यापारा-शारदा चौक सड़क चौड़ीकरण को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का वादा किया गया था। इसके अलावा विधानसभा में भी कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। करीब दो साल पहले नगर निगम द्वारा कराए गए सर्वे के अनुसार इस चौड़ीकरण परियोजना की जद में लगभग 102 दुकानें और मकान आते हैं। उस समय जमीन अधिग्रहण के लिए करीब 122 करोड़ रुपये मुआवजे का अनुमान लगाया गया था, जबकि सड़क निर्माण की लागत 12 से 15 करोड़ रुपये के बीच आंकी गई थी। अब नई गाइडलाइन दर लागू होने के कारण इस परियोजना की लागत बढ़ना तय माना जा रहा है, क्योंकि पहले दी गई 30 प्रतिशत की छूट अब समाप्त हो चुकी है। यह मार्ग शहर के सबसे व्यस्त रूट्स में से एक है, जहां से रोजाना करीब डेढ़ लाख वाहन गुजरते हैं। सुबह और शाम के समय यहां 15 से 20 मिनट तक जाम की स्थिति बनी रहती है, जिसका असर आसपास की सड़कों पर भी पड़ता है। इधर, विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर नगर सरकार को घेरा है। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि महापौर ने मुआवजा देने का आश्वासन दिया था, लेकिन एक साल बाद भी बजट में इसके लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि फ्लाईओवर बनाया जाता है तो इससे प्रभावित लोगों पर दोहरी मार पड़ेगी। वहीं अधिकारियों के बीच भी जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पीडब्ल्यूडी के सीई एसके कोरी का कहना है कि यह परियोजना उनके बजट में शामिल नहीं है, इसलिए निर्माण एजेंसी को लेकर उनके पास कोई जानकारी नहीं है। दूसरी ओर नगर निगम आयुक्त विश्वेश कुमार का कहना है कि फ्लाईओवर का निर्माण पीडब्ल्यूडी को करना है और वे इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करेंगे। कुल मिलाकर, शहर के इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिससे आम लोगों को ट्रैफिक समस्या से राहत मिलने में और देरी हो सकती है।

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ऑपरेशन ‘निश्चय’ में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 5 जिलों में दबिश, नशीली सामग्री और हथियार बरामद, 46 वारंटी गिरफ्तार

रायपुर रेंज में पुलिस ने ऑपरेशन “निश्चय” के तहत 4 और 5 अप्रैल को व्यापक अभियान चलाकर अपराधियों पर सख्ती दिखाई। इस दौरान बलौदाबाजार-भाटापारा, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद और रायपुर ग्रामीण जिलों में 95 टीमों ने एक साथ 384 स्थानों पर रेड, दबिश और चेकिंग की कार्रवाई की। अभियान के दौरान अवैध शराब, मादक पदार्थ, हथियार और फरार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। आबकारी एक्ट के तहत 126 मामले दर्ज कर 126 आरोपियों पर कार्रवाई की गई। पुलिस ने कुल 802.436 लीटर शराब और 597 पौवा जब्त किए। नारकोटिक्स/एनडीपीएस एक्ट के तहत 22 मामलों में 21.945 किलोग्राम मादक पदार्थ और 60 टैबलेट बरामद की गईं। आर्म्स एक्ट के तहत 6 मामले दर्ज कर 2 पिस्टल जब्त किए गए। इसके अलावा विभिन्न प्रतिबंधात्मक धाराओं में 174 कार्रवाई की गई। वारंट तामील अभियान के दौरान 31 गिरफ्तारी वारंट, 14 स्थायी वारंट और 1 जमानती वारंट सहित कुल 46 वारंटियों को गिरफ्तार किया गया। जिला स्तर पर भी पुलिस ने सघन कार्रवाई की। बलौदाबाजार-भाटापारा में 13 मामलों में 5.6 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किया गया। गरियाबंद में 119 रेड के दौरान 158 लीटर शराब पकड़ी गई। धमतरी में 150 स्थानों पर दबिश देकर 3.9 किलोग्राम मादक पदार्थ बरामद किया गया। महासमुंद में 10.5 किलोग्राम मादक पदार्थ और 357 लीटर शराब जब्त की गई, जबकि रायपुर ग्रामीण क्षेत्र में 1.8 किलोग्राम गांजा और 597 पौवा शराब बरामद हुई। इसके अलावा सट्टा-जुआ एक्ट के तहत 2 मामलों में 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर 6,230 रुपए जब्त किए गए। अन्य आपराधिक मामलों में भी पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि ऑपरेशन “निश्चय” के तहत असामाजिक तत्वों, तस्करों और फरार आरोपियों के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था मजबूत बनी रहे।

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