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‘कच्चा कारोबार’ पर सख्ती: 1.5 लाख से ज्यादा व्यापारी GST से बाहर, 10 अप्रैल के बाद नोटिस

छत्तीसगढ़ में टैक्स चोरी पर रोक लगाने के लिए स्टेट GST विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। विभाग के सर्वे में सामने आया है कि बड़ी संख्या में व्यापारी और सेवा प्रदाता जीएसटी के दायरे में आने के बावजूद अब तक पंजीयन नहीं करा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के नियमों के अनुसार, जिन कारोबारियों का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपए से अधिक है और सेवा क्षेत्र में 20 लाख रुपए से ज्यादा आय है, उनके लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इसके बावजूद करीब 3.5 लाख संभावित कारोबारियों में से केवल 2 लाख ने ही पंजीयन कराया है, यानी लगभग डेढ़ लाख लोग अब भी सिस्टम से बाहर हैं। इसी अंतर को देखते हुए विभाग ने 10 अप्रैल के बाद ऐसे अपंजीकृत कारोबारियों को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया है। इसके लिए बैंकों और छत्तीसगढ़ राज्य बिजली वितरण कंपनी से उन क्षेत्रों की जानकारी जुटाई जा रही है जहां बिजली खपत अचानक बढ़ी है। ऐसे इलाकों में चल रहे उद्योगों और व्यवसायों की जांच कर उनके टर्नओवर का आकलन किया जाएगा। जांच में यह भी सामने आया है कि नॉन-ब्रांडेड सामान जैसे जूते-चप्पल, कपड़े, फर्नीचर, बर्तन और प्लास्टिक उत्पादों का कारोबार करने वाले कई व्यापारी जीएसटी से बच रहे हैं। जबकि ब्रांडेड कंपनियां नियमों का पालन कर रही हैं, स्थानीय और छोटे कारोबारी बिना पंजीयन के ही बड़े स्तर पर व्यापार कर रहे हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जीएसटी रजिस्ट्रेशन के बाद व्यापारियों को अपनी दुकान, दफ्तर या फैक्ट्री के बाहर जीएसटी नंबर प्रदर्शित करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर 30 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। अभी तक कई मामलों में चेतावनी देकर समय दिया जाता था, लेकिन अब सीधे कार्रवाई की जाएगी। विभाग के अनुसार, करीब 40 प्रतिशत व्यापारी अभी भी यह जानकारी प्रदर्शित नहीं कर रहे हैं। कोयला और ट्रांसपोर्टिंग सेक्टर को लेकर भी विभाग सतर्क है, क्योंकि इन क्षेत्रों में बिना बिल के लेनदेन और टैक्स चोरी के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। विभाग का कहना है कि पहले ऐसे व्यापारियों को जागरूक किया जाएगा, लेकिन जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। स्टेट जीएसटी कमिश्नर पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने कहा है कि इस साल हर हाल में पंजीकृत व्यापारियों की संख्या बढ़ाई जाएगी और टैक्स चोरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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बस्तर में इंद्रावती पर 930 मीटर का पुल फिर शुरू: नक्सल बाधा के बाद री-टेंडर जारी, सुरक्षा में होगा निर्माण

बस्तर के संवेदनशील इलाके में विकास की एक बड़ी परियोजना फिर पटरी पर लौटती दिख रही है। इंद्रावती नदी पर बेदरे में बन रहा 930 मीटर लंबा अंतरराज्यीय पुल, जो नक्सली दहशत के कारण वर्षों से रुका हुआ था, अब दोबारा शुरू होने जा रहा है। ब्रिज कॉर्पोरेशन ने इसके लिए 28 करोड़ रुपए का नया टेंडर जारी किया है। यह प्रोजेक्ट 2020-21 में शुरू हुआ था और शुरुआती चरण में 8 पिलर तैयार भी हो चुके थे, लेकिन नक्सलियों द्वारा ठेकेदार के कर्मचारियों के अपहरण और धमकी के बाद काम पूरी तरह बंद हो गया था। इसके बाद कोई भी ठेकेदार इस हाई-रिस्क जोन में काम करने के लिए तैयार नहीं था। अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में सुरक्षा बलों की मजबूत तैनाती के चलते भरोसा लौटा है और इंद्रावती नदी किनारे जवानों का स्थायी कैंप भी स्थापित किया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस बार कड़ी सुरक्षा के बीच हर हाल में पुल निर्माण पूरा किया जाएगा। यह पुल बीजापुर जिले को सीधे महाराष्ट्र से जोड़ेगा। बेदरे से महाराष्ट्र के भंवरागढ़ की दूरी मात्र 20 किलोमीटर है। पुल बनते ही बीजापुर से नागपुर और आगे मुंबई तक का सफर आसान हो जाएगा, जिससे अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। अबूझमाड़ क्षेत्र में बन रहा यह पुल विकास के लिहाज से टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। इसके बनने से शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। साथ ही सड़क, मोबाइल नेटवर्क और परिवहन सुविधाओं के विस्तार को भी गति मिलेगी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह पुल उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाएगा और नदी पार करने का जोखिम खत्म होगा। इंद्रावती नदी पर बनने वाला यह अब तक का सबसे लंबा पुल होगा, जो बस्तर और महाराष्ट्र के बीच संपर्क को नई दिशा देगा।

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जनगणना 2027: 16 अप्रैल से मकानों की गिनती शुरू, ऑनलाइन फॉर्म की भी सुविधा

देश में होने वाली जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत 16 अप्रैल से होगी। इस चरण में मकानों की गिनती के साथ-साथ वहां रहने वाले लोगों से जुड़ी अहम जानकारी जुटाई जाएगी। इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम, मकान कच्चा है या पक्का और घर में मौजूद प्रमुख सामानों का भी विवरण लिया जाएगा। इस बार जनगणना में लोगों को ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा भी दी गई है। 16 से 30 अप्रैल के बीच लोग खुद पोर्टल पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं। यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है जो दिन में घर पर नहीं रहते और सर्वे टीम के आने पर अक्सर घर बंद मिलता है। अधिकारियों के मुताबिक, सर्वे के दौरान कई बार घर बंद मिलने पर “डोर लॉक” एंट्री कर दी जाती है, जिससे सही जानकारी दर्ज नहीं हो पाती। ऐसे में ऑनलाइन फॉर्म भरना सबसे आसान और बेहतर विकल्प माना जा रहा है। इस प्रक्रिया में करीब 15 से 20 मिनट का समय लगता है और फॉर्म जमा करने के बाद 11 अंकों की एक यूनिक आईडी मिलती है। जब प्रगणक घर आएंगे तो सिर्फ यह आईडी दिखाकर प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। जनगणना के इस चरण में यह भी स्पष्ट किया गया है कि व्यक्ति जहां रहता है, उसे उसी मकान की जानकारी देनी होगी। यदि किसी के पास एक से अधिक मकान हैं, तो केवल उसी घर का विवरण देना होगा जहां वह वर्तमान में रह रहा है। बाकी मकानों में रहने वाले किरायेदार अपनी जानकारी अलग से देंगे। हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राओं को भी वहीं की जानकारी दर्ज करनी होगी जहां वे रह रहे हैं। सरकार के अनुसार, यह डेटा भविष्य की योजनाओं जैसे पानी, सड़क, बिजली और अन्य सुविधाओं की योजना बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। गलत या अधूरी जानकारी देने से किसी क्षेत्र को जरूरी संसाधन मिलने में दिक्कत आ सकती है। अगर कोई परिवार फॉर्म नहीं भरता और घर बंद मिलता है, तो अधूरी जानकारी दर्ज होने की संभावना रहती है, जिसे बाद में सुधारना मुश्किल हो सकता है। इसलिए लोगों से अपील की गई है कि वे समय रहते सही जानकारी दर्ज करें। ऑनलाइन स्व-गणना के लिए लोगों को आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in पर लॉगिन करना होगा, जहां परिवार का रजिस्ट्रेशन, लोकेशन मार्क करना और घर से जुड़े सवालों का जवाब देना होगा। फॉर्म सबमिट करने के बाद मिलने वाली आईडी को सुरक्षित रखना जरूरी है। 30 अप्रैल के बाद, 1 मई से प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। जिन लोगों ने ऑनलाइन फॉर्म भर दिया होगा, उनसे आईडी लेकर प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जबकि बाकी लोगों से सीधे जानकारी ली जाएगी। इस कार्य के लिए प्रदेशभर में करीब 53 हजार प्रगणक तैनात किए जाएंगे और पहले चरण की प्रक्रिया लगभग एक महीने तक चलेगी।

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कांग्रेस की मांग: बस्तर के हर गांव को मिले 1 करोड़, सरकार से वादा निभाने की अपील

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बस्तर के विकास को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए कहा है कि सरकार अपने वादे के मुताबिक हर ग्राम पंचायत को तुरंत 1 करोड़ रुपए की राशि जारी करे। पार्टी का कहना है कि सरकार ने पहले घोषणा की थी कि जो गांव नक्सल मुक्त होंगे, उन्हें यह आर्थिक सहायता दी जाएगी। अब जब सरकार खुद प्रदेश को नक्सल मुक्त बताने का दावा कर रही है, तो इस घोषणा को जमीन पर उतारना जरूरी है। कांग्रेस के संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि इस फैसले से बस्तर के गांवों में विकास को गति मिलेगी और लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा। उन्होंने “डबल इंजन” सरकार से बस्तर के लिए विशेष आर्थिक पैकेज घोषित करने की मांग भी की है, ताकि क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिल सकें। पार्टी ने यह भी कहा कि वनोपज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना जरूरी है, जिससे बस्तर के लोगों की आजीविका मजबूत हो सके। इसके साथ ही युवाओं के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है, ताकि उन्हें बाहर पलायन न करना पड़े। कांग्रेस ने NMDC Limited का मुख्यालय बस्तर में स्थापित करने की मांग उठाते हुए कहा कि यहां से निकलने वाले लौह अयस्क से कंपनी को बड़ा लाभ होता है, लेकिन उसका मुख्यालय हैदराबाद में है। पार्टी का मानना है कि अब बस्तर में बुनियादी सुविधाएं बेहतर हो चुकी हैं, ऐसे में मुख्यालय यहां शिफ्ट किया जाना चाहिए, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही पार्टी ने बस्तर के लोगों में बढ़ रही उस चिंता का भी जिक्र किया, जिसमें खनिज संपदा और जंगलों के निजीकरण का डर जताया जा रहा है। कांग्रेस ने सरकार से साफ तौर पर आश्वासन देने की मांग की है कि क्षेत्र के संसाधनों को निजी हाथों में नहीं सौंपा जाएगा और स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा की जाएगी। रेल कनेक्टिविटी को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि दल्लीराजहरा से जगदलपुर तक रेल लाइन परियोजना में लगातार देरी हो रही है। इस परियोजना को 2021 तक पूरा करने का दावा किया गया था, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका, जिससे बस्तर के लोगों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है।

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RTE में लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त, छुट्टी के दिन सुनवाई; बिलासपुर की बदहाली पर भी कड़ा रुख

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत पहली कक्षा में प्रवेश प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है। एक रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए अवकाश के दिन विशेष सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान प्रक्रिया में देरी पर नाराजगी जताई और राज्य सरकार से विस्तृत हलफनामा मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी। RTE में हजारों आवेदन लंबित सुनवाई में सामने आया कि कुल 38,438 आवेदनों में से सिर्फ 23,766 का ही सत्यापन हो पाया है, जबकि 16 हजार से अधिक आवेदन अब भी लंबित हैं। कोर्ट ने माना कि नोडल प्राचार्यों की धीमी कार्यप्रणाली के कारण पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। लॉटरी प्रक्रिया पर संकट कोर्ट ने कहा कि 13 से 17 अप्रैल के बीच प्रस्तावित स्कूल आवंटन की लॉटरी प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है, जिससे अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। सरकार से इस पर स्पष्ट जवाब मांगा गया है। बिलासपुर की बदहाल व्यवस्था पर भी सख्ती बिलासपुर में गंदगी और अधूरी नाली निर्माण को लेकर भी हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक खबर पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। अधूरी नाली और टूटी पाइपलाइन से परेशानी मामला सिरगिट्टी क्षेत्र के वार्ड 12 (बन्नाक मोहल्ला) का है, जहां करीब डेढ़ महीने से नाली निर्माण अधूरा पड़ा है। 10 फीट गहरी खुदाई के बाद काम रोक दिया गया, जिससे पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई और जल आपूर्ति बाधित हो गई। बीमारी का खतरा बढ़ा इलाके में गंदगी और जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा बना हुआ है। कोर्ट ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला बताया। एक हफ्ते में काम पूरा करने के निर्देश हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को एक सप्ताह के भीतर नाली निर्माण पूरा करने, पाइपलाइन दुरुस्त करने, जल आपूर्ति बहाल करने और पूरे क्षेत्र में सफाई व सैनिटाइजेशन कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई करने को कहा है। अगली सुनवाई RTE मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी, जबकि बिलासपुर की सफाई और निर्माण कार्य से जुड़े मामले में अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2026 को तय की गई है, जिसमें प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी।

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रायपुर रेल सेक्शन में सिग्नलिंग कार्य: कई ट्रेनें रद्द और आंशिक रूप से प्रभावित

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल में ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम लगाने का काम जारी है, जिसके चलते रायपुर–उरकुरा–मांढर सेक्शन में आज कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। इस तकनीकी कार्य के कारण कुछ ट्रेनों को पूरी तरह रद्द किया गया है, जबकि कुछ ट्रेनों को आंशिक रूप से चलाया जाएगा। रेलवे प्रशासन के अनुसार, कुल 9 मेमू ट्रेनें और एक पैसेंजर ट्रेन पूरी तरह रद्द रहेंगी। वहीं 4 ट्रेनें अपने निर्धारित रूट के कुछ हिस्से में ही संचालित होंगी। यानी ये ट्रेनें पूरे मार्ग पर नहीं चलेंगी, बल्कि कुछ स्टेशनों तक सीमित रहेंगी या बीच के स्टेशन से शुरू/समाप्त होंगी। पूरी तरह रद्द रहने वाली ट्रेनें: आंशिक रूप से चलने वाली ट्रेनें: रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को होने वाली असुविधा पर खेद जताया है और कहा है कि यह कार्य भविष्य में बेहतर और सुरक्षित रेल सेवा के लिए जरूरी है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी अवश्य जांच लें।

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कांग्रेस ने बिलासपुर में केंद्र सरकार पर पेट्रोल-गैस महंगाई का आरोप लगाया

बिलासपुर में कांग्रेस ने पेट्रोल और कमर्शियल गैस की बढ़ती कीमतों और बढ़ती महंगाई के खिलाफ मोर्चा खोला है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने पत्रकार वार्ता में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों से आम जनता के बजाय निजी कंपनियों को फायदा मिल रहा है। गंगोत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि अमेरिका पर निर्भरता कम करें और ईरान व रूस से पेट्रोल और गैस आयात कर जनता को राहत दी जाए। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा टैक्स कम करने का लाभ आम जनता को नहीं मिल रहा, बल्कि जामनगर की रिफाइनरी जैसी निजी कंपनियों को फायदा पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और गैस की कीमतें बढ़ने से आम नागरिकों के खर्च बढ़ गए हैं और होटल व कमर्शियल क्षेत्रों में भी महंगाई ने दाम बढ़ा दिए हैं। छात्र, मजदूर और आम लोग इस स्थिति से परेशान हैं। गंगोत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी संसद में लगातार पेट्रोलियम उत्पादों की मूल्यवृद्धि और महंगाई के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और पार्टी हर स्तर पर जनता को हो रही परेशानी के खिलाफ विरोध जारी रखेगी।

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बिलासपुर में रेलवे नौकरी के नाम पर 15 लाख की ठगी, मां-बेटी भेजी फर्जी ज्वाइनिंग लेटर

बिलासपुर में रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर 15 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। तोरवा थाना क्षेत्र में रहने वाले रिटायर्ड कर्मचारी एन वेंकट सूर्यप्रताप ने पुलिस को शिकायत दी कि उनके बेटे को रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा देकर महिला और उसकी बेटी ने पैसे ऐंठे। आरोप है कि विशाखापट्टनम की तेनिटी इंद्राणी और उनकी बेटी वलिवेती वेंकट नागा कीर्ति ने ई-मेल के जरिए फर्जी ज्वाइनिंग लेटर भेजा और राजनीतिक कोटे में नियुक्ति दिलाने का दावा किया। शुरुआत में 4 लाख रुपए की राशि ली गई, इसके बाद अलग-अलग बहानों से और रकम वसूली गई। दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच आरोपियों ने यूपीआई, बैंक ट्रांसफर और एनईएफटी के जरिए कुल 15 लाख रुपए 18 अलग-अलग ट्रांजेक्शन में ले लिए। जब नौकरी नहीं लगी, तो आरोपियों ने कोविड-19 और चुनाव का हवाला देकर समय टालते रहे। तोरवा पुलिस ने शिकायत पर महिला और उसकी बेटी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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बिलासपुर रेलवे जोन: कोयला परिवहन में देश में नंबर वन, माल लदान और यात्री सेवाओं में कीर्तिमान

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर जोन ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में माल लदान और राजस्व अर्जन के मामले में कई रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। जोन के जीएम तरुण प्रकाश के अनुसार इस अवधि में कुल 261.25 मिलियन टन माल का लदान किया गया, जिससे 32 हजार करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। माल लदान में पिछले साल की तुलना में 3.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो संभवतः भारतीय रेलवे में सबसे अधिक है। विशेष रूप से कोयला परिवहन में 199.50 मिलियन टन का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए बिलासपुर जोन ने देश में पहला स्थान हासिल किया, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई। 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में यात्री ट्रेनों की संख्या में 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसके जरिए कुल 8.3 करोड़ यात्रियों को उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाया गया। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग सहित 50 स्टेशनों का पुनर्विकास कार्य जारी है। पहले चरण में 47 में से 17 स्टेशनों का काम पूरा हो चुका है और दिसंबर तक सभी फेज-1 के कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में 125 किलोमीटर नई लाइन और मल्टी-ट्रैकिंग का काम पूरा किया गया। साथ ही 18 रोड ओवर ब्रिज और 27 रोड अंडर ब्रिज का निर्माण हुआ, जबकि 34 लेवल क्रॉसिंग गेट बंद कर सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाया गया। रेलवे सुरक्षा और संचालन में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इसमें वैगनों की निगरानी, लोको पायलट्स के प्रदर्शन की निगरानी और फायर सेफ्टी सिस्टम को मजबूत करना शामिल है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस साल यात्रियों की संख्या में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या 35,469 और पैसेंजर ट्रेनों की संख्या 50,407 रही। 4 नई ट्रेन सेवाएं शुरू हुईं, 7 ट्रेनों का विस्तार किया गया, और 36 ट्रेन-जोड़ियों में 28 नए ठहराव जोड़े गए। 5 आईसीएफ रेकों को आधुनिक एलएचबी कोचों में परिवर्तित किया गया। त्योहारों के दौरान 32 आरक्षित विशेष ट्रेनों के 126 ट्रिप और 9 अनारक्षित विशेष ट्रेनें चलाई गईं। भारत गौरव ट्रेनों के 84 ट्रिप संचालित किए गए। यात्रियों की सुविधा के लिए 14 लिफ्ट, 12 एस्केलेटर, 12 फुट ओवर ब्रिज, 9 प्लेटफॉर्म अपग्रेड और 9 नए शौचालय बनाए गए। ‘रेल मदद’ पोर्टल के माध्यम से 51,000 से अधिक शिकायतें सुलझाई गईं। ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत 324 बच्चों को बचाया गया। रेलवे सुरक्षा बल ने ₹55.61 लाख के अवैध टिकट, ₹3.31 करोड़ के नशीले पदार्थ जब्त किए और ₹1.72 करोड़ चोरी गई संपत्ति वापस लौटाई। 4,193 नए कर्मचारियों की भर्ती की गई और उन्हें ₹1 करोड़ का बीमा कवर प्रदान किया गया। रेल हादसों में 45 प्रतिशत की कमी आई। 11 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और 25 स्टेशनों पर EI मॉडिफिकेशन किया गया। ‘कवच’ प्रणाली के तहत 101 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में स्थापना की गई। सभी कोचों में अग्नि-निरोधक प्रणाली और 212 कोचों में एरोसोल आधारित अग्निशमन प्रणाली लागू की गई। 58 स्टेशनों पर फायर अलार्म लगाए गए और 343 किलोमीटर सुरक्षा फेंसिंग की गई। नई रेल परियोजनाओं में राव घाट से जगदलपुर नई रेल लाइन स्वीकृत हुई, जो चार जिलों से होकर गुजरेगी और बस्तर का 40 किलोमीटर क्षेत्र शामिल होगा। पिछले 10 वर्षों में 1,475 किलोमीटर लंबी 15 परियोजनाएं पूरी हुई हैं, जबकि 2,790 किलोमीटर की 41 परियोजनाएँ स्वीकृत और प्रगति पर हैं।

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दतरेंगा से अमलेश्वर पुल तक चौड़ी होगी सड़क, महादेव घाट तक पहुंच 10-15 मिनट में संभव

रायपुर में रिंग रोड नंबर-2 पर भाठागांव और रायपुरा चौक के ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए नगर निगम वैकल्पिक सड़क विकसित कर रहा है। पहले चरण में 1.04 किलोमीटर सड़क का निर्माण अंतिम चरण में है। दूसरे चरण में दतरेंगा से अमलेश्वर पुल तक सड़क का चौड़ीकरण किया जाएगा, जिससे महादेव घाट मार्ग पर जाम में काफी कमी आएगी। निगम 3.43 करोड़ रुपए की लागत से भाठागांव से दतरेंगा मोड़ तक सड़क बना रहा है। पहले चरण में 1 किमी हिस्से का डामरीकरण इसी माह पूरा होने की तैयारी में है। दूसरे चरण में 2.5 किमी सड़क का चौड़ीकरण किया जाएगा, जिसके लिए 2.33 करोड़ रुपए का ठेका दिया गया है और इसका निर्माण मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। महादेव घाट-रायपुरा मार्ग पर प्रतिदिन 45 हजार से अधिक वाहन चलते हैं। मौजूदा संकरी सड़क पर पीक आवर्स में रायपुरा चौक ब्रिज पार करने में 15-20 मिनट लगते हैं, जबकि पर्वों के दौरान 4 किलोमीटर की दूरी तय करने में एक घंटे से अधिक समय लग जाता है। नए मार्ग बनने के बाद यही दूरी 10-15 मिनट में पूरी की जा सकेगी। भाठागांव से आगे की सड़क वर्तमान में जर्जर और बारिश में जलभराव वाली है, इसलिए लोग इसका कम उपयोग करते हैं। सड़क चौड़ी और बेहतर होने पर यह मुख्य वैकल्पिक मार्ग बन जाएगा। पहले चरण के काम से पहले बिजली पोल शिफ्टिंग के लिए निगम ने सीएसपीडीसीएल को करीब 35 लाख रुपए दे दिए हैं। यह नया मार्ग पुराना धमतरी रोड, पाटन-अमलेश्वर और संतोषी नगर जैसे इलाकों को सीधे जोड़ेगा। इसके साथ ही महादेवघाट रिवरफ्रंट और हटकेश्वरनाथ कॉरिडोर के विकास के बाद इसकी उपयोगिता और बढ़ जाएगी। नगर निगम ने एक अन्य वैकल्पिक मार्ग के लिए भी 30 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इस मार्ग से लोग विभिन्न रूटों से जुड़ सकेंगे। पुराना धमतरी रोड से दतरेंगा होकर भाठागांव पहुंचने वाले अमलेश्वर पुल और महादेव घाट तक आसानी से जा सकेंगे। पाटन-अमलेश्वर से बस स्टैंड आने वाले लोग सीधे इस चौड़ी सड़क का उपयोग कर भाठागांव पहुंच सकते हैं। रोजाना कामकाज के लिए नगर घड़ी चौक, भाठागांव, पचपेड़ी और अन्य क्षेत्रों में जाने वाले लोग इस मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी तरह संतोषी नगर-मठपुरैना के लोग सीधे महादेव घाट या अमलेश्वर के लिए जा सकेंगे। सड़क का चौड़ीकरण इसलिए आवश्यक है क्योंकि रायपुरा- महादेवघाट मार्ग संकरा है और रोज जाम की स्थिति रहती है। त्योहारों में 1 घंटे से अधिक समय लगता है। नया मार्ग बनने के बाद 10-15 मिनट में दूरी पूरी हो सकेगी। दूसरे चरण का काम इस मार्ग पर लगे बिजली के खंभों की शिफ्टिंग के बाद शुरू होगा। इसके लिए निगम ने सीएसपीडीसीएल को 35 लाख रुपए की राशि सौंप दी है। शिफ्टिंग का काम पूरा होने के बाद ही सड़क चौड़ीकरण का काम शुरू होगा। इसका ठेका मेसर्स नरेंश एंड कंपनी को दिया गया है। भास्कर एक्सपर्ट एसके जैन के अनुसार, राजधानी जैसी आबादी के लिए वैकल्पिक चौड़ी सड़क बनाना हमेशा फायदेमंद होता है। इससे कनेक्टिविटी बढ़ती है, समय की बचत होती है और ट्रैफिक का दबाव कम होता है, जिससे लोगों को जाम से राहत मिलती है।

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