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नकटी गांव बुलडोजर कार्रवाई पर कांग्रेस का प्रदेशव्यापी विरोध, सीएम का पुतला दहन करेगी पार्टी

रायपुर जिले के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान 85 मकानों को तोड़े जाने के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने राज्यभर में आंदोलन करने का फैसला किया है। पार्टी ने सभी जिलों में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का पुतला दहन करने और विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है। कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार ने बारिश के मौसम में कार्रवाई कर कई परिवारों को बेघर कर दिया। पार्टी का कहना है कि बिना पुनर्वास की व्यवस्था किए लोगों के मकान गिराना मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ है और इससे प्रभावित परिवारों के सामने रहने तथा आजीविका का संकट पैदा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस नकटी गांव के प्रभावित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों के आशियाने तोड़ रही है, लेकिन उनके पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बैज ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से लेकर विधानसभा तक उठाएगी और प्रभावित लोगों को न्याय दिलाने के लिए लगातार संघर्ष करेगी। इसी बीच कांग्रेस विधायकों ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नकटी गांव के प्रभावित परिवारों के लिए उचित पुनर्वास और राहत की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि पुनर्वास सुनिश्चित किए बिना इस तरह की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। प्रदेश कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रभावित परिवारों को न्याय और पुनर्वास नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसके लिए सभी जिला और ब्लॉक इकाइयों को विरोध प्रदर्शन की तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

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रायपुर एयरपोर्ट की जमीन पर किसान का दावा, सुप्रीम कोर्ट में ₹3500 करोड़ मुआवजे की मांग

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की जमीन को लेकर एक पुराना विवाद फिर चर्चा में है। रायपुर निवासी किसान अश्विनी बांधे का दावा है कि एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग और आसपास का हिस्सा उनके पूर्वजों की जमीन पर बना है। उनका कहना है कि वर्ष 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने यह जमीन अस्थायी रूप से सैन्य जरूरतों के लिए ली थी, जिसे युद्ध समाप्त होने के बाद वापस किया जाना था। अश्विनी बांधे पिछले करीब 35 वर्षों से इस मामले को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि जून 2026 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर लगभग ₹3,500 करोड़ के मुआवजे की मांग की है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने उनके दावे पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है और मामला विचाराधीन है। बांधे के अनुसार, उनके परिवार की करीब 30 एकड़ 18 डिसमिल जमीन माना क्षेत्र में थी, जिसे ब्रिटिश शासन के दौरान डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट के तहत अधिग्रहित किया गया था। उनका दावा है कि युद्ध समाप्त होने के बाद यह कानून समाप्त हो गया था, इसलिए जमीन वापस मिलनी चाहिए थी। किसान का कहना है कि हाल ही में संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ऐतिहासिक दस्तावेजों की प्रदर्शनी में उन्हें ऐसे सरकारी रिकॉर्ड मिले, जिनमें उनके पूर्वजों की जमीन का उल्लेख है। उन्होंने लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत इन दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां भी प्राप्त की हैं, जिन्हें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपने दावे के समर्थन में प्रस्तुत किया है। संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि विभाग के अभिलेखों में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान माना एयरफील्ड के लिए अधिग्रहित जमीन से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित हैं, जिनमें कई किसानों और भू-स्वामियों के नाम दर्ज हैं। हालांकि, इन दस्तावेजों से किसी के स्वामित्व या मुआवजे के दावे पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। अश्विनी बांधे का कहना है कि अधिग्रहण के बाद समय पर मुआवजा नहीं मिलने और ब्याज सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के आधार पर उन्होंने करीब ₹3,500 करोड़ का दावा किया है। उनका यह भी कहना है कि नवा रायपुर क्षेत्र की कुछ अन्य जमीनों को लेकर भी अलग-अलग विवाद लंबित हैं। नोट: यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। किसान द्वारा किए गए दावे पर अभी न्यायालय का अंतिम फैसला आना बाकी है। संबंधित सरकारी विभागों का विस्तृत पक्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने पर स्थिति स्पष्ट होगी।

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रायपुर रेलवे स्टेशन पर टिकट चेकिंग अभियान, 245 यात्रियों से वसूला गया जुर्माना

रायपुर रेलवे स्टेशन पर 30 जून को विशेष टिकट चेकिंग अभियान चलाया गया। यह अभियान वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अवधेश कुमार त्रिवेदी के निर्देश पर आयोजित किया गया। अभियान के दौरान स्टेशन के सभी प्लेटफॉर्म और 18 ट्रेनों में टिकटों की जांच की गई। जांच के दौरान बिना टिकट यात्रा करते हुए 158 यात्री पकड़े गए, जिनसे 1,48,555 रुपये का जुर्माना वसूला गया। वहीं, गलत या अनियमित टिकट पर यात्रा करने वाले 72 यात्रियों से 55,635 रुपये वसूले गए। इसके अलावा अधिक सामान लेकर यात्रा करने वाले 12 यात्रियों से 1,750 रुपये और रेलवे परिसर में गंदगी फैलाने वाले 3 लोगों से 3,000 रुपये का जुर्माना लिया गया। इस तरह कुल 245 मामलों में कार्रवाई की गई। रेलवे प्रशासन ने बताया कि अभियान का उद्देश्य यात्रियों को सही टिकट लेकर यात्रा करने और रेलवे नियमों का पालन करने के लिए जागरूक करना है। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले वैध टिकट और प्लेटफॉर्म पर प्रवेश के लिए प्लेटफॉर्म टिकट जरूर लें तथा रेलवे परिसर को स्वच्छ रखने में सहयोग करें।

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छत्तीसगढ़ के 16 हजार कोटवारों का सरकार को अल्टीमेटम, 15 अगस्त तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा प्रदेशव्यापी आंदोलन

छत्तीसगढ़ के कोटवारों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर सरकार को अंतिम चेतावनी दी है। कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ ने कहा है कि यदि 15 अगस्त तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो 16 हजार से अधिक कोटवार पूरे प्रदेश में आंदोलन शुरू करेंगे। संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम किशोर बाघ ने बताया कि कई बार शासन और प्रशासन का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि दशकों से राजस्व विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य करने के बावजूद कोटवारों को नियमित कर्मचारी का दर्जा, पर्याप्त मानदेय और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। संघ का आरोप है कि वर्तमान में मिलने वाला पारिश्रमिक बेहद कम है, जिससे कोटवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता, झूठी शिकायतों के आधार पर कार्रवाई और सेवा के दौरान परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता नहीं दिए जाने जैसी समस्याएं भी लगातार बनी हुई हैं। कोटवार संघ की प्रमुख मांगों में राजस्व विभाग के अधीन नियमितीकरण, न्यूनतम 15 हजार रुपये मासिक मानदेय, नियुक्ति में परिवार के योग्य सदस्य को प्राथमिकता, बेबुनियाद शिकायतों पर कार्रवाई रोकना, बेगार प्रथा समाप्त करना तथा नगर निगम और नगरपालिका क्षेत्रों में कोटवारों की नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को हटाना शामिल है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो प्रदेशभर के करीब 16 हजार कोटवार एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करेंगे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपने अधिकारों की मांग करेंगे।

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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कम अंक वाले छात्रों को प्रवेश से इनकार? शिक्षक संघ ने सरकार से की हस्तक्षेप की मांग

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दिए जाने के आरोप सामने आए हैं। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। शिक्षक संघ का कहना है कि बोर्ड परीक्षा के कमजोर परिणामों के बाद कई प्राचार्यों के तबादले और प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। इसी दबाव के कारण कुछ स्कूल अब कम अंक लाने वाले विद्यार्थियों का दाखिला लेने से बच रहे हैं। संघ के अनुसार, कुछ सरकारी स्कूल पिछले वर्ष के बोर्ड परीक्षा परिणाम के आधार पर छात्रों का चयन कर रहे हैं। इससे कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश से वंचित किया जा रहा है, जबकि सरकारी स्कूल सभी छात्रों के लिए खुले होने चाहिए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बेहतर परीक्षा परिणाम दिखाने के दबाव का असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। संघ का दावा है कि कार्रवाई के डर से कुछ स्थानों पर बोर्ड परीक्षाओं में नकल जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं। उनका कहना है कि केवल अच्छे रिजल्ट पर जोर देने से शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। शिक्षक संघ ने यह भी सवाल उठाया कि राज्य सरकार एक ओर स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की संख्या कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर यदि पढ़ने के इच्छुक छात्रों को ही प्रवेश नहीं मिलेगा तो यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। संघ ने सरकार से मांग की है कि सभी सरकारी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं ताकि हर पात्र विद्यार्थी को बिना किसी भेदभाव के प्रवेश मिल सके और किसी भी छात्र को केवल कम अंक होने के आधार पर दाखिले से वंचित न किया जाए।

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रायपुर: NIT के पास 7 संस्थानों पर नगर निगम की कार्रवाई, गंदगी और सिंगल यूज प्लास्टिक मिलने पर ₹50 हजार का जुर्माना

रायपुर नगर पालिक निगम के जोन क्रमांक-7 ने स्वच्छता संबंधी मिली जनशिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एनआईटी के आसपास स्थित सात संस्थानों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई जगहों पर गंदगी और प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग पाए जाने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की गई। नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर जोन-7 की जोन कमिश्नर डॉ. तृप्ति पाणीग्रही के मार्गदर्शन में यह अभियान चलाया गया। निरीक्षण के दौरान जोन स्वास्थ्य अधिकारी आत्मानंद साहू और स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौजूद रही। निरीक्षण में प्राप्त जनशिकायत सही पाए जाने के बाद सातों संस्थानों के संचालकों को भविष्य में स्वच्छता नियमों का पालन करने की सख्त चेतावनी दी गई। साथ ही नगर निगम ने सभी संस्थानों पर कुल 50 हजार रुपये का ई-चालान जारी किया। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि शहर में स्वच्छता बनाए रखने और सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराने के लिए ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे स्वच्छता नियमों का पालन करें और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने से बचें।

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नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई के बाद खुले आसमान तले गुजरी विस्थापितों की रात, सांसद के आश्वासन पर उठे सवाल

रायपुर के नकटी गांव में सोमवार तड़के हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद कई परिवारों को पूरी रात खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ी। प्रभावित लोगों का आरोप है कि सुबह करीब 4 बजे पहले इलाके की बिजली बंद कर दी गई और उसके बाद प्रशासन ने मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। इस अभियान में करीब 80 घरों को ध्वस्त किया गया, जिससे महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे बेघर हो गए। देर रात कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे। लोगों ने उन्हें बताया कि पुनर्वास के नाम पर बड़े परिवारों को केवल एक कमरा दिया जा रहा है। उनका कहना है कि जिन मकानों का आवंटन किया जा रहा है, वहां बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं, जिससे वहां रहना मुश्किल होगा। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि दो दिन पहले वे रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मिले थे। उनका कहना है कि सांसद ने आश्वासन दिया था कि बारिश के मौसम में किसी भी घर को नहीं तोड़ा जाएगा और प्रशासन के साथ बातचीत कर समाधान निकाला जाएगा। कार्रवाई होने के बाद प्रभावित परिवारों ने इस आश्वासन पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जताई। कार्रवाई के दौरान कई भावुक तस्वीरें सामने आईं। कोई अपने घर का सामान मलबे के बीच समेटता नजर आया तो कोई टूटे हुए मकान के पास परिवार के साथ बैठा रहा। कई लोग पूरे दिन अपने घरों के अवशेषों के पास ही डटे रहे। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस मकानों में विस्थापित परिवारों को बसाने के लिए आवंटन की कार्रवाई जारी है। इस पूरे मामले पर पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बरसात से ठीक पहले की गई इस कार्रवाई को असंवेदनशील बताते हुए इसकी आलोचना की और सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। वहीं कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने आरोप लगाया कि विधायक आवास परियोजना के लिए 95 से अधिक परिवारों को बेघर किया गया है। उन्होंने कहा कि लोगों को पहले आश्वासन दिया गया था कि बारिश के दौरान कोई कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन इसके बावजूद मकान तोड़ दिए गए। बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित बच्चों ने भी अपनी पीड़ा साझा की। उनका कहना था कि सुबह से घर में खाना नहीं बन पाया था और वे भूखे-प्यासे थे। इसी दौरान प्रशासन और पुलिस की टीम पहुंची और मकानों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी। कार्रवाई के बीच एक ओर जहां लोगों के घर गिराए जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ओर से मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और प्रभावित लोगों को नाश्ते के पैकेट भी वितरित किए गए। पूरे घटनाक्रम के बाद नकटी गांव का माहौल देर रात तक तनावपूर्ण बना रहा।

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रायपुर के सरोना फ्लाईओवर पर 6 ट्रैक्टरों से लदा ट्रेलर पलटा, 40 मिनट बाद बहाल हुआ यातायात

राजधानी रायपुर के सरोना फ्लाईओवर पर मंगलवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। दुर्ग से रायपुर की ओर आ रहा 6 ट्रैक्टरों से लदा ट्रेलर फ्लाईओवर पर अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे के कारण दुर्ग-रायपुर मार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया और वाहनों की लंबी कतार लग गई। हालांकि, इस दुर्घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। ट्रैफिक डीएसपी सतीश ठाकुर के अनुसार, घटना सुबह करीब 8 बजे हुई। सूचना मिलते ही ट्रैफिक पुलिस और संबंधित विभाग की टीम मौके पर पहुंची। क्रेन की सहायता से पलटे हुए ट्रेलर को हटाने का कार्य शुरू किया गया और करीब 40 मिनट की मशक्कत के बाद मार्ग को साफ कर यातायात दोबारा सुचारू कर दिया गया। हादसे में ट्रेलर पर लदे कुछ ट्रैक्टरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है, जबकि चालक पूरी तरह सुरक्षित है। प्रारंभिक जांच में ट्रेलर के अनियंत्रित होने को दुर्घटना की वजह माना जा रहा है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। यातायात बाधित होने के दौरान ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर वाहन चालकों से वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करने की अपील की थी। पुलिस ने दुर्ग से रायपुर आने वाले हल्के वाहनों को सरोना फ्लाईओवर के बजाय एम्स-मोहबा बाजार मार्ग से शहर में प्रवेश करने की सलाह दी, ताकि जाम से बचा जा सके। ट्रैफिक डीएसपी ने बताया कि फिलहाल फ्लाईओवर से ट्रेलर को हटाकर सड़क पूरी तरह खाली करा दी गई है और अब दुर्ग-रायपुर मार्ग पर यातायात सामान्य रूप से संचालित हो रहा है।

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ZIP फाइल खोलते ही मोबाइल हो सकता है हैक, CEO बनकर भेजे जा रहे फर्जी मैसेज; 30 महीनों में 791 करोड़ की साइबर ठगी

साइबर अपराधी अब लोगों को निशाना बनाने के लिए एक नया तरीका अपना रहे हैं, जिसे CEO इम्पर्सनेशन स्कैम या बॉस ZIP फ्रॉड कहा जा रहा है। इस तरीके में ठग किसी कंपनी के सीईओ, डायरेक्टर या वरिष्ठ अधिकारी बनकर कर्मचारियों को व्हाट्सएप या ई-मेल के जरिए संदेश भेजते हैं। संदेश के साथ एक ZIP फाइल भी भेजी जाती है, जिसे डाउनलोड या ओपन करते ही मोबाइल या कंप्यूटर मालवेयर की चपेट में आ सकता है। गृह मंत्रालय ने इस तरह की साइबर ठगी को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले 30 महीनों में छत्तीसगढ़ में साइबर अपराधी करीब 791 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। ZIP फाइल के जरिए कैसे होती है ठगी? साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ठग कर्मचारियों पर जल्दबाजी का दबाव बनाते हैं। वे सिक्योरिटी अपडेट, जरूरी दस्तावेज, पेमेंट अप्रूवल या अन्य आधिकारिक काम का बहाना बनाकर ZIP फाइल भेजते हैं। कई बार इस फाइल के अंदर EXE या DLL जैसी खतरनाक फाइलें छिपी होती हैं। यदि उपयोगकर्ता ऐसी फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल कर देता है, तो डिवाइस संक्रमित हो सकता है। इसके बाद साइबर अपराधी बैंकिंग ऐप, ओटीपी, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में वे संपर्क सूची में बदलाव कर अपने नंबर को वरिष्ठ अधिकारी के नाम से सेव कर देते हैं, जिससे कर्मचारी आसानी से उनके झांसे में आ जाते हैं और फर्जी निर्देशों पर पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। बचाव के लिए क्या करें? साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से आने वाले संदिग्ध संदेश या ZIP फाइल पर बिना पुष्टि किए भरोसा न करें। किसी भी भुगतान या जरूरी निर्देश का पालन करने से पहले संबंधित अधिकारी से फोन, वीडियो कॉल या व्यक्तिगत संपर्क के जरिए पुष्टि करें। साथ ही व्हाट्सएप पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन जैसे सुरक्षा फीचर्स सक्रिय रखें और किसी भी अनजान ZIP, EXE या DLL फाइल को डाउनलोड या ओपन करने से बचें। पुलिस की कार्रवाई जारी रायपुर पुलिस ने हाल ही में 101 म्यूल अकाउंट धारकों को गिरफ्तार किया है। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में करीब 1.57 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के लिए किया गया था। इसके अलावा पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर गिरोह का भी खुलासा किया, जिसने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर दो वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की। पुलिस लगातार साइबर अपराधियों के बैंक खातों को फ्रीज कर रही है और समय पर शिकायत मिलने पर पीड़ितों की रकम रोकने का प्रयास भी किया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। साइबर ठगी होने पर तुरंत क्या करें?

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छत्तीसगढ़ में मानसून का कहर: सरगुजा में आकाशीय बिजली से 3 की मौत, बिलासपुर में कार पर गिरा पेड़

छत्तीसगढ़ में मानसून अब पूरे प्रदेश में सक्रिय हो चुका है। लगातार हो रही बारिश के बीच कई जिलों से हादसों की खबरें सामने आई हैं। सरगुजा जिले के धौरपुर थाना क्षेत्र के डुमकी गांव में सोमवार शाम आकाशीय बिजली गिरने से दो बच्चों और एक युवक की मौत हो गई, जबकि एक 12 वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से झुलस गई। जानकारी के अनुसार, बच्चे आम बीनने के लिए एक पेड़ के नीचे खड़े थे। इसी दौरान पास में मवेशी चरा रहा एक युवक भी वहां पहुंच गया। अचानक पेड़ पर बिजली गिरने से चारों उसकी चपेट में आ गए। हादसे में 5 वर्षीय सागर, 9 वर्षीय रानी और 36 वर्षीय राम साय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि श्रद्धा (12) गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसका इलाज जारी है। उधर, बिलासपुर में सोमवार शाम तेज आंधी और बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। कलेक्टर बंगले के पास एक बड़ा पेड़ सड़क किनारे खड़ी कार पर गिर गया, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि कार में मौजूद लोग सुरक्षित बच गए। पेड़ गिरने से बिजली के तार भी टूट गए, जिसके चलते आसपास के क्षेत्र में कुछ समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 22 जून को दंतेवाड़ा से छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था। अब 30 जून तक मानसून पूरे प्रदेश में फैल चुका है। सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, जशपुर, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और रायगढ़ सहित उत्तर एवं उत्तर-पूर्व के 14 जिलों में भी मानसून पहुंच गया है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। साथ ही कई क्षेत्रों में गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की गई है। लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने की अपील की गई है। राजधानी रायपुर में मंगलवार को दिनभर बादल छाए रहने और गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है। अधिकतम तापमान लगभग 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो बस्तर संभाग में प्रदेश के अन्य हिस्सों की तुलना में बेहतर वर्षा हुई है, लेकिन वहां भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं मध्य छत्तीसगढ़ और कुछ अन्य जिलों में वर्षा की भारी कमी बनी हुई है। राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बलौदाबाजार, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और सक्ती जैसे जिलों में सामान्य से 80 से 95 प्रतिशत तक कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों की बारिश से इस कमी में कुछ हद तक सुधार हो सकता है।

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