Raipur

भुवनेश्वर कुमार के तूफान में उड़ी मुंबई इंडियंस: रोमांचक मुकाबले में RCB ने आखिरी गेंद पर दर्ज की जीत

रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए रोमांचक मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने मुंबई इंडियंस को 2 विकेट से हरा दिया। आखिरी गेंद तक चले इस मुकाबले में RCB ने शानदार जीत दर्ज की, जबकि इस हार के साथ मुंबई इंडियंस की प्लेऑफ में पहुंचने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। मैच में RCB के तेज गेंदबाज Bhuvneshwar Kumar ने घातक गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट हासिल किए और मुंबई की बल्लेबाजी को शुरुआत से दबाव में रखा। कप्तान Suryakumar Yadav को उन्होंने तीसरे ओवर में Virat Kohli के हाथों कैच आउट कराया। मुंबई इंडियंस निर्धारित 20 ओवर में 166 रन ही बना सकी। लक्ष्य का पीछा करने उतरी RCB की शुरुआत भी ज्यादा मजबूत नहीं रही और विराट कोहली बड़ा स्कोर बनाने में सफल नहीं हुए। इसके बावजूद टीम ने संघर्ष जारी रखा और आखिरी गेंद पर मुकाबला अपने नाम कर लिया। मुंबई इंडियंस की ओर से तेज गेंदबाज Corbin Bosch ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 विकेट झटके, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके। रायपुर में खेले गए इस मुकाबले को देखने के लिए छत्तीसगढ़, ओडिशा, गुजरात और मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों से क्रिकेट प्रेमी पहुंचे थे। मैच शुरू होने से पहले ही स्टेडियम लगभग पूरी तरह भर चुका था। चूंकि रायपुर इस सीजन में RCB का नया होम ग्राउंड बना हुआ है, इसलिए स्टेडियम में विराट कोहली के समर्थकों की संख्या सबसे ज्यादा नजर आई। करीब एक दशक बाद रायपुर में IPL मुकाबले का आयोजन हुआ, जिससे क्रिकेट फैंस में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। मौसम और पिच ने तेज गेंदबाजों को अच्छी मदद दी। बारिश और नमी के कारण गेंदबाजों को स्विंग मिली, जिससे बल्लेबाजों को शुरुआत में रन बनाने में परेशानी हुई। रायपुर के इस मैदान पर पहले भी गेंदबाजों को मदद मिलती रही है। यहां खेले गए IPL मुकाबलों में औसत स्कोर अपेक्षाकृत कम रहा है। हालांकि हाल के मैचों में यहां बल्लेबाजी के लिए बेहतर पिच भी देखने को मिली थी। इसी साल भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए टी20 मुकाबले में 400 से ज्यादा रन बने थे और टीम इंडिया ने बड़ा लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया था।

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सिक्किम की अनोखी पहल: बच्चे के जन्म पर 108 पेड़ लगाना अनिवार्य, सरकार देती है जमीन और पौधे

सिक्किम में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक अनोखी पहल की जा रही है। यहां बच्चे के जन्म पर परिवारों को 108 पौधे लगाने होते हैं। खास बात यह है कि लोग इन पौधों की देखभाल अपने बच्चों की तरह कर रहे हैं। पौधों को पानी देना, खाद डालना और उनकी सुरक्षा करना परिवार की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। कई परिवार बच्चों का जन्मदिन भी इन पौधों के बीच मनाते हैं। यह पहल सिक्किम सरकार की ‘मेरो रुख, मेरो संतति’ योजना के तहत शुरू की गई है, जिसका अर्थ है “मेरा पेड़, मेरी संतान”। पर्यावरण संरक्षण के लिए इसे देश की अनोखी सरकारी योजनाओं में से एक माना जा रहा है। योजना के अनुसार, बच्चे के जन्म पर माता-पिता को 108 पौधे लगाने अनिवार्य हैं। जिन परिवारों के पास जमीन उपलब्ध है, वे अपने खेत या निजी भूमि पर पौधे लगाते हैं। वहीं जिनके पास जमीन नहीं है, उन्हें सरकार जमीन और पौधे उपलब्ध कराती है। इन पौधों में फलदार, औषधीय और अन्य उपयोगी प्रजातियां शामिल होती हैं। पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी माता-पिता की होती है, जबकि सरकार निगरानी के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम भी संचालित कर रही है। योजना के तहत पौधरोपण करने वाले परिवारों के बच्चों के नाम पर सरकार 18 वर्षों के लिए 10,800 रुपए की एफडी भी करती है। बच्चे बड़े होने पर इन पेड़ों की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी जाएगी। सिक्किम में भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाओं के कारण कम होती हरियाली को देखते हुए फरवरी 2023 में यह योजना शुरू की गई थी। शुरुआत में 100 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 108 कर दिया गया, क्योंकि इसे शुभ अंक माना जाता है। अब तक इस योजना के तहत 9,653 परिवारों ने 10.42 लाख से ज्यादा पौधे लगाए हैं। इससे राज्य में हरियाली और वन क्षेत्र बढ़ाने में मदद मिल रही है। देश के अन्य राज्यों में भी पर्यावरण संरक्षण के लिए अलग-अलग योजनाएं चलाई जा रही हैं। छत्तीसगढ़ में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत लाखों पौधे लगाए गए हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश और गुजरात में भी जन्म और संस्कृति से जुड़े पौधरोपण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। सिक्किम के मुख्यमंत्री Prem Singh Tamang ने कहा कि इस योजना से लोग पौधों को परिवार का हिस्सा मानकर उनकी देखभाल कर रहे हैं, जिससे राज्य में हरियाली लगातार बढ़ रही है। वहीं पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक Rakesh Chaturvedi का कहना है कि सरकारी योजनाओं में अक्सर बड़ी संख्या में पौधे सूख जाते हैं, लेकिन निजी देखभाल के कारण इस योजना में लगभग 90 प्रतिशत पौधे सुरक्षित और जीवित रह रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन मौसम खराब: तेज आंधी-बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट, 40KM रफ्तार से चलेगी हवा

राजस्थान से पश्चिम बंगाल तक बनी ट्रफ लाइन और बिहार से आंध्र प्रदेश तक सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से छत्तीसगढ़ का मौसम लगातार बदला हुआ नजर आ रहा है। प्रदेश के कई इलाकों में शाम और रात के समय बादल छाने, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। साथ ही बिजली गिरने की संभावना भी जताई गई है। विभाग के अनुसार अगले 5 दिनों तक प्रदेश में कहीं-कहीं हल्की बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रह सकता है। हालांकि 11 मई के बाद थंडरस्टॉर्म की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है। बीते 24 घंटों में तापमान में ज्यादा बदलाव दर्ज नहीं किया गया, लेकिन आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। इससे गर्मी का असर फिर तेज होने की संभावना है। प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान दुर्ग सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं पेंड्रा रोड सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 19.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। राजधानी रायपुर में दोपहर और शाम के समय बादल छाए रहने की संभावना है। यहां अधिकतम तापमान करीब 40 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान लगाया गया है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और खुले स्थानों में बिजली चमकने के समय सावधानी बरतने की सलाह दी है।

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रायपुर स्काईवॉक फिर विवादों में: 10 महीने बाद भी अधूरा निर्माण, लोगों को चढ़नी होंगी 100 सीढ़ियां

रायपुर का बहुचर्चित स्काईवॉक प्रोजेक्ट एक बार फिर चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। 21 मई 2025 को दोबारा शुरू हुआ निर्माण कार्य 20 अप्रैल 2026 तक पूरा होना था, लेकिन तय समय बीतने के बावजूद प्रोजेक्ट अभी अधूरा है। मौके पर फिलहाल केवल सीढ़ियां लगाने का काम चल रहा है, जबकि लिफ्ट और एस्केलेटर अब तक शुरू नहीं हो पाए हैं। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि स्काईवॉक का उपयोग करने वाले लोगों को लगभग 90 से 100 सीढ़ियां चढ़नी और उतरनी पड़ेंगी। रेरा ऑफिस की ओर से आने वाले लोगों को 50 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी होंगी, जबकि मेकाहारा-सेंट्रल जेल रोड की ओर उतरने के लिए करीब 45 सीढ़ियां उतरनी पड़ेंगी। इसको लेकर आम लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों का कहना है कि अधूरे और असुविधाजनक प्रोजेक्ट को हटाया जाना चाहिए। स्काईवॉक में कुल 12 एंट्री और एग्जिट पॉइंट बनाए जा रहे हैं। रेरा ऑफिस, कलेक्ट्रेट टाउन हॉल, घड़ी चौक, तहसील कार्यालय, जिला न्यायालय और सेंट्रल जेल के सामने सीढ़ियां लग चुकी हैं। वहीं डीकेएस अस्पताल, शहीद स्मारक मल्टीलेवल पार्किंग, पुराने जेल मुख्यालय और अंबेडकर अस्पताल के पास अभी काम बाकी है। करीब 8 साल से अधूरे पड़े इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने 37.75 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया था। PSA कंस्ट्रक्शन कंपनी को जिम्मेदारी दी गई, लेकिन 10 महीने बाद भी काम पूरा नहीं हो सका। शास्त्री चौक पर स्काईवॉक को मजबूती देने के लिए रोटरी बनाई जा रही है। इसके अलावा पिलरों पर गर्डर शिफ्ट करने और शेड लगाने का काम जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, दिन में भारी ट्रैफिक होने की वजह से अधिकांश निर्माण कार्य रात में किया जा रहा है, जिससे देरी हो रही है। PWD के मुख्य अभियंता एस.के. कोरी ने बताया कि प्रोजेक्ट में 8 एस्केलेटर और 3 लिफ्ट लगाने की योजना है, लेकिन अब तक उनकी जगह तय नहीं हो सकी है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष श्री कुमार मेमन ने कहा कि स्काईवॉक “सफेद हाथी” बन चुका है और इसकी उपयोगिता बेहद कम है। उनका आरोप है कि यह प्रोजेक्ट पूर्व मंत्री राजेश मूणत की जिद का नतीजा है, जिस पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। वहीं भाजपा प्रवक्ता अमित चिमनानी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में गठित कमेटी के सर्वे में 67 फीसदी लोगों ने स्काईवॉक पूरा करने का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि इसे तोड़ना जनता के पैसे की बर्बादी होगी।

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रायपुर IPL मैच में अव्यवस्था: टिकट होने के बावजूद नहीं मिली एंट्री, ब्लैक में बिके टिकट और फ्री WiFi सेवा फेल

रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए IPL मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने मुंबई इंडियंस को रोमांचक मुकाबले में दो विकेट से हराया। इस हार के साथ मुंबई इंडियंस की प्लेऑफ की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं। मैच को लेकर क्रिकेट प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। छत्तीसगढ़ समेत ओडिशा, राजस्थान और कई अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में दर्शक मैच देखने पहुंचे। मैच शुरू होने से पहले स्टेडियम के बाहर टिकटों की ब्लैक मार्केटिंग खुलकर होती दिखाई दी। कई लोगों ने तय कीमत से काफी ज्यादा पैसे देकर टिकट खरीदे। रिपोर्टर द्वारा ग्राहक बनकर पूछताछ करने पर ब्रोकरों ने टिकट की कीमत में करीब डेढ़ हजार रुपए तक अधिक वसूली की बात कही। विराट कोहली और रोहित शर्मा के फैंस का खास उत्साह देखने को मिला। महासमुंद से आया एक युवक पैर में चोट होने के बावजूद अपने दोस्त के कंधे पर बैठकर स्टेडियम पहुंचा। वहीं राजस्थान से आए एक फैन ने अपने शरीर पर सूर्यकुमार यादव का नाम लिखवाया और बताया कि वे पहले भी खिलाड़ी के नाम का टैटू बनवा चुके हैं। रायपुर की प्रिशा केसरवानी ने RCB की जीत की कामना करते हुए श्रीकृष्ण और राधा की पेंटिंग वाला पोस्टर तैयार किया। कुछ दर्शक प्रेमानंद महाराज के साथ विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की तस्वीर वाले पोस्टर लेकर पहुंचे। बच्चों में भी मैच को लेकर अलग उत्साह नजर आया, जहां पिता रोहित शर्मा के समर्थक तो बेटा विराट कोहली का फैन दिखाई दिया। शाम होते-होते स्टेडियम की ओर जाने वाले रास्तों पर भारी ट्रैफिक जाम लग गया। पुलिस और ट्रैफिक विभाग की ओर से पहले ही रूट और पार्किंग व्यवस्था जारी की गई थी, लेकिन भीड़ के कारण कई जगह यातायात प्रभावित रहा। इसी बीच RCB टीम जब स्टेडियम पहुंची तो फैंस ने जोरदार स्वागत किया। हालांकि कई दर्शकों ने अव्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। कुछ लोगों का आरोप था कि वैध टिकट होने के बावजूद उन्हें गेट के बाहर रोक दिया गया और अंदर प्रवेश नहीं दिया गया। वहीं स्टेडियम में फ्री WiFi सुविधा के दावे भी फेल साबित हुए। गेट नंबर 9 के बाहर लंबे समय तक फैंस खड़े रहे।

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रायपुर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन ठप, वेतन नहीं मिलने पर कर्मचारियों ने किया काम बंद

रायपुर में रविवार को डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही। कचरा उठाने वाली गाड़ियों के कर्मचारियों ने वेतन भुगतान नहीं होने के विरोध में काम बंद कर दिया, जिसके कारण शहर के कई इलाकों में घरों से कचरा नहीं उठ सका। कचरा कलेक्शन का जिम्मा संभाल रही रामकी ग्रुप के कर्मचारियों ने सुबह से ही गाड़ियां खड़ी कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। दलदल सिवनी क्षेत्र में बड़ी संख्या में कचरा गाड़ियां खड़ी नजर आईं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें हर महीने 7 तारीख तक वेतन मिल जाता था, लेकिन इस बार अब तक भुगतान नहीं किया गया है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वेतन में देरी की समस्या लगातार बनी हुई है। उनका कहना है कि पहले भी कई बार भुगतान समय पर नहीं मिला, जिससे आर्थिक परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। इसी वजह से मजबूर होकर काम बंद करना पड़ा। यह पहला मौका नहीं है जब सफाई व्यवस्था को लेकर रामकी ग्रुप और नगर निगम के बीच विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई थी। उस समय नगर निगम ने कंपनी पर करीब 18 लाख रुपए की कटौती और 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाने के निर्देश दिए थे। पूर्व समीक्षा बैठक में महापौर मीनल चौबे ने कंपनी अधिकारियों को बुलाकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि शहर की सफाई व्यवस्था से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में इस तरह की स्थिति बनने पर अनुबंध की शर्तों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम पहले ही यह साफ कर चुका है कि कंपनी को भुगतान कार्य की गुणवत्ता और संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर ही किया जाएगा। अधिकारियों को सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति में अनुबंध की समीक्षा के निर्देश भी दिए गए थे।

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10 साल बाद रायपुर में IPL का रोमांच, MI-RCB मुकाबले में टॉस निभा सकता है अहम भूमिका

करीब एक दशक बाद रायपुर एक बार फिर आईपीएल मुकाबलों की मेजबानी के लिए तैयार है। शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम में IPL 2026 का पहला मैच मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच खेला जाएगा। मैच को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और शनिवार शाम दोनों टीमों ने जमकर अभ्यास किया। हालांकि प्रैक्टिस के दौरान बारिश ने थोड़ी देर के लिए व्यवधान डाला। मौसम विभाग के अनुसार मैच के दिन शाम के समय बादल छाए रह सकते हैं और हल्की धूलभरी हवा चलने की संभावना है, लेकिन भारी बारिश के आसार नहीं हैं। ऐसे में मैच रद्द होने जैसी स्थिति बनने की संभावना कम मानी जा रही है। रायपुर के आईपीएल रिकॉर्ड पर नजर डालें तो यहां अब तक कुल 6 मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें 4 बार लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम ने जीत दर्ज की है। वहीं पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम केवल 2 मैच जीत सकी है। इससे साफ है कि यहां की पिच दूसरी पारी में बल्लेबाजों को ज्यादा मदद देती रही है। बारिश के बाद पिच और आउटफील्ड में हल्की नमी रहने की संभावना है। ऐसे में शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को सीम और स्विंग मिल सकती है। नई गेंद कुछ समय तक रुककर आने की भी संभावना है, जिससे बल्लेबाजों को शुरुआत में सतर्क रहना पड़ सकता है। क्रिकेट विशेषज्ञों के मुताबिक टॉस इस मुकाबले में अहम साबित हो सकता है। नमी को देखते हुए कप्तान पहले गेंदबाजी का फैसला कर सकते हैं ताकि शुरुआती मूवमेंट का फायदा उठाया जा सके। हालांकि मैच आगे बढ़ने के साथ बल्लेबाजी आसान हो सकती है। अगर पिच में नमी बरकरार रही तो स्पिन गेंदबाजों को भी मिडिल ओवर्स में टर्न और ग्रिप मिल सकती है। इससे बल्लेबाजों के लिए बड़े शॉट खेलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। रायपुर इससे पहले दिल्ली डेयरडेविल्स का सेकेंड होम वेन्यू रह चुका है। 2013, 2015 और 2016 में यहां कुल 6 आईपीएल मैच खेले गए थे। दिल्ली ने इनमें सबसे ज्यादा 4 मुकाबले जीते थे, जबकि सनराइजर्स हैदराबाद और RCB को एक-एक जीत मिली थी। मैच से पहले मुंबई इंडियंस के बल्लेबाज रोहित शर्मा ने नेट्स में लंबे समय तक बल्लेबाजी अभ्यास किया। वहीं जसप्रीत बुमराह ने गेंदबाजी और फिटनेस पर विशेष फोकस किया। दूसरी ओर RCB के ऑलराउंडर जेकब बेथेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि टीम रायपुर की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने पर ध्यान दे रही है और खिलाड़ी आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेंगे। 10 मई को MI और RCB के बीच मुकाबला खेला जाएगा, जबकि 13 मई को RCB का सामना कोलकाता नाइट राइडर्स से होगा। दोनों मैच शाम 7:30 बजे शुरू होंगे। मैच के मद्देनजर ट्रैफिक और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। दर्शकों को वैध टिकट या पास के साथ समय से पहले स्टेडियम पहुंचने की सलाह दी गई है। स्टेडियम में कई प्रतिबंधित वस्तुओं के साथ प्रवेश पर रोक रहेगी और पूरे परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जाएगी।

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मैग्नेटो मॉल पार्किंग में विवाद, इंफ्लूएंसर के भाई पर शिक्षक परिवार से बदसलूकी का आरोप

रायपुर के मैग्नेटो मॉल की पार्किंग में गाड़ी निकालने को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मामला पुलिस थाने तक पहुंच गया। सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर सोमा देवांगन के भाई रॉकी पर शिक्षक परिवार के साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और हॉकी स्टिक दिखाकर धमकाने के आरोप लगे हैं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पीड़िता धनिशा धीवर ने तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि वे 9 मई की रात अपने परिवार के साथ मैग्नेटो मॉल घूमने गई थीं। लौटते समय उनके परिवार की बोलेरो गाड़ी पार्किंग से निकल रही थी, तभी दूसरी कार में सवार रोहन, सोमा और गरिमा वहां पहुंचे। शिकायत के अनुसार, कार चालक रोहन ने गाड़ी से उतरते ही गोपेश साहू को “गांव का गंवार” कहते हुए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। आरोप है कि उसने यह भी कहा कि “ऐसे लोगों को मॉल में एंट्री कौन देता है।” पीड़ित परिवार का कहना है कि रोहन ने खुद को एक मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़ा बताते हुए रौब दिखाया। परिवार ने आरोप लगाया कि विवाद बढ़ने पर रोहन ने अपनी गाड़ी से हॉकी स्टिक निकाली और मारपीट की धमकी देने लगा। इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई, जिसमें गोपेश साहू और अरमान धीवर को चोट आई। घटना की सूचना मिलने पर तेलीबांधा पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराया। बाद में दोनों पक्षों ने थाने में एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस वायरल वीडियो और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच कर रही है। वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर सोमा देवांगन ने भी दूसरे पक्ष के खिलाफ शिकायत दी है। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद देर रात बजरंग दल के कार्यकर्ता भी तेलीबांधा थाने पहुंचे और शिक्षक परिवार के समर्थन में आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। इस बीच आरोपी रोहन की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें वह कथित तौर पर सटोरी बाबू खेमानी के साथ नजर आ रहा है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और वायरल वीडियो की सत्यता भी परखी जा रही है।

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गौ-तस्करी का ‘ट्रायंगल कॉरिडोर’ उजागर, छत्तीसगढ़ से ओडिशा होते हुए आंध्र तक पहुंच रहे मवेशी

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से संचालित हो रहे कथित गौ-तस्करी नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। देवभोग क्षेत्र से ओडिशा सीमा के रास्ते गाय-बैलों को बड़े पैमाने पर बाहर भेजे जाने का मामला सामने आया है। जांच और स्थानीय जानकारी के मुताबिक यह नेटवर्क छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्रप्रदेश को जोड़ते हुए संगठित तरीके से काम कर रहा है। देवभोग से करीब 8 किलोमीटर दूर ओडिशा सीमा शुरू होती है। यहां बीजू एक्सप्रेस-वे के आसपास रात के समय बड़ी संख्या में गाय-बछड़ों के साथ संदिग्ध लोग देखे गए। पूछताछ में उन्होंने खुद को किसान बताया और मवेशियों को धरमगढ़ बाजार ले जाने की बात कही। स्थानीय लोगों के अनुसार ओडिशा के कालाहांडी जिले के धरमगढ़ में हर शुक्रवार बड़ा मवेशी बाजार लगता है, जहां हजारों की संख्या में गाय-बैल खरीदे और बेचे जाते हैं। आरोप है कि यहां से अधिकांश मवेशियों को आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के कसाईघरों तक पहुंचाया जाता है। जानकारी के मुताबिक तस्करी का नेटवर्क गांव स्तर तक फैला हुआ है। एजेंट सीमावर्ती गांवों में घूमकर बूढ़े और कमजोर मवेशियों को 1000 से 1500 रुपए में खरीदते हैं। बाद में इन्हें समूह बनाकर बाजार पहुंचाया जाता है। आरोप है कि एक एजेंट हर सप्ताह दर्जनों मवेशियों की खरीद-बिक्री करता है। धरमगढ़ मवेशी मंडी के बाहर लग्जरी वाहनों की मौजूदगी ने भी संदेह बढ़ाया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि बाजार में किसान कम और बड़े सप्लायर व दलाल ज्यादा सक्रिय रहते हैं। यही लोग मवेशियों को आगे ट्रकों और जंगल के रास्तों से आंध्रप्रदेश तक पहुंचाते हैं। बताया जा रहा है कि मवेशियों को सीधे वाहनों में नहीं ले जाया जाता, बल्कि चरणबद्ध तरीके से पैदल सीमा पार कराई जाती है। इसके लिए अलग-अलग टीमों में मजदूर लगाए जाते हैं, जो जंगल और घाटी वाले रास्तों से मवेशियों को आगे बढ़ाते हैं ताकि पुलिस कार्रवाई से बचा जा सके। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 1500 रुपए में खरीदे गए मवेशियों को आंध्र सीमा तक पहुंचाकर 4000 रुपए तक में बेचा जाता है। बूढ़े और कमजोर पशुओं को छोटे वाहनों से भी ले जाया जाता है। पुलिस को शक है कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरतों के लिए ओडिशा पर निर्भरता का फायदा अब तस्करी नेटवर्क उठा रहा है। उनका आरोप है कि सीमा पर प्रभावी निगरानी और संयुक्त कार्रवाई नहीं होने से यह अवैध कारोबार लगातार बढ़ रहा है। गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने कहा कि उन्हें फिलहाल मवेशी तस्करी की जानकारी नहीं है। यदि ऐसे मामले सामने आते हैं तो जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं गरियाबंद एसपी नीरज चंद्राकर ने दावा किया कि पुलिस लगातार निगरानी कर रही है और सीमावर्ती इलाकों में चौकसी बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर कार्रवाई भी की जा रही है।

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महासमुंद गैस घोटाले में बड़ा खुलासा, खाद्य अधिकारी निकला सिंडिकेट का मास्टरमाइंड

महासमुंद जिले में जब्त एलपीजी गैस कैप्सूल ट्रकों से करोड़ों रुपए की गैस गायब होने के मामले में पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव इस पूरे गैस सिंडिकेट का मुख्य संचालक था। पुलिस का दावा है कि अधिकारियों, गैस एजेंसी संचालकों और कारोबारियों की मिलीभगत से करीब 92 टन एलपीजी गैस का गबन किया गया। पुलिस के अनुसार खाद्य अधिकारी अजय यादव ने गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर, रायपुर निवासी मनीष चौधरी और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर करीब डेढ़ करोड़ रुपए कीमत की गैस का अवैध कारोबार किया। मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर समेत अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। जांच में सामने आया कि दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। सुरक्षा कारणों से इन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग को दी गई थी। इसी दौरान गैस निकालने की योजना तैयार की गई। पुलिस के मुताबिक 23 मार्च 2026 को आरंग के एक ढाबे में आरोपियों की बैठक हुई, जहां गैस बेचने की डील तय की गई। इसके बाद 26 मार्च को ट्रकों में मौजूद गैस का आकलन किया गया। ट्रकों में करीब 102 से 105 मीट्रिक टन एलपीजी होने की जानकारी सामने आई थी। जांच में पता चला कि ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के साथ करीब 80 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। 30 मार्च को खाद्य विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में छह गैस कैप्सूल ट्रकों को सुपुर्दनामा पर लेकर अभनपुर स्थित प्लांट पहुंचाया गया। पुलिस का कहना है कि इसके बाद सुनियोजित तरीके से ट्रकों से गैस निकाली गई। 31 मार्च, 1 अप्रैल और 5 अप्रैल की रात अलग-अलग कैप्सूलों से गैस खाली की गई और तीन दिनों में करीब 92 टन एलपीजी गायब कर दी गई। यह गैस निजी टैंकरों, बुलेट टैंकों और विभिन्न एजेंसियों में सप्लाई की गई। जांच में यह भी सामने आया कि ट्रकों का वजन जानबूझकर देर से कराया गया ताकि गैस पहले ही निकाली जा सके। पांच ट्रकों का वजन 6 अप्रैल और आखिरी ट्रक का वजन 8 अप्रैल को कराया गया, तब तक अधिकांश कैप्सूल खाली हो चुके थे। दस्तावेजों की जांच में पुलिस को कालाबाजारी के सबूत भी मिले हैं। रिकॉर्ड के अनुसार ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स ने अप्रैल में केवल 47 टन गैस खरीदी, जबकि बिक्री 107 टन दिखाई गई। इससे साफ हुआ कि बड़ी मात्रा में बिना वैध खरीदी के गैस बेची गई। पुलिस ने यह भी दावा किया कि आरोपियों ने जांच को गुमराह करने और पूरे मामले का ठीकरा पुलिस पर फोड़ने की योजना बनाई थी। अप्रैल महीने के रिकॉर्ड और एंट्री रजिस्टर गायब पाए गए, जिससे साक्ष्य मिटाने की कोशिश की पुष्टि हुई। महासमुंद पुलिस की 40 सदस्यीय टीम ने 15 दिनों तक तकनीकी जांच, कॉल डिटेल, दस्तावेज विश्लेषण और पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। फिलहाल मामले में बीएनएस और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई जारी है।

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