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छत्तीसगढ़ विधानसभा: नकटी बुलडोजर कार्रवाई, इंद्रावती टाइगर शिकार और सड़क-दवा खरीद जैसे मुद्दों पर गरमाया सदन

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को कई अहम मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई, इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार, अमानक दवाइयों की खरीद और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़कों की स्थिति को लेकर सरकार से सवाल पूछे गए। नकटी बुलडोजर कार्रवाई पर हंगामा विपक्ष ने नकटी गांव में मकानों को हटाने की कार्रवाई को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि गरीब परिवारों को पर्याप्त पुनर्वास के बिना बेदखल किया गया और इसे “बुलडोजर कल्चर” का उदाहरण बताया। विपक्ष ने पूरे मामले पर सदन में चर्चा की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक सदन के गर्भगृह में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे, जिसके बाद नियमों के तहत वे स्वतः निलंबित हो गए। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि नकटी में की गई कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई। सभी संबंधित लोगों को पूर्व सूचना और नोटिस दिए गए थे। उन्होंने बताया कि प्रभावित परिवारों का पुनर्वास भी किया गया और कार्रवाई के दौरान किसी के घरेलू सामान को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार का मामला ध्यानाकर्षण के माध्यम से नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरफ्तार किए गए आईबी जवान का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया और पूरे मामले में राजनीतिक संरक्षण की आशंका जताई। महंत ने दावा किया कि दो बाघों के शिकार से करोड़ों रुपये का अवैध लाभ कमाया गया। वन मंत्री केदार कश्यप ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि किसी भी आरोपी को बचाने का प्रयास नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि टाइगर रिजर्व में निगरानी व्यवस्था सक्रिय है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। मंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 के आकलन के अनुसार इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पांच बाघों की पुष्टि हुई थी और रिजर्व के संचालन पर प्रतिवर्ष लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। अमानक दवाइयों की खरीद पर सरकार का जवाब सदन में CGMSC द्वारा दवाइयों की खरीद को लेकर भी सवाल उठे। विपक्ष ने गुजरात में प्रतिबंधित दवाइयों से जुड़े मामले का हवाला देते हुए छत्तीसगढ़ में खरीद प्रक्रिया पर सवाल किए। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्पष्ट किया कि जिस दवा पर प्रतिबंध लगाया गया था, उसकी खरीद राज्य में नहीं की गई। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में गुणवत्ता परीक्षण में असफल रहने वाली 24 दवाइयों की पहचान की गई है और चार कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पर चर्चा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़कों की मरम्मत को लेकर भी कई विधायकों ने सवाल उठाए। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि अधिकांश सड़कों का पहले ही नवीनीकरण किया जा चुका है और जिन मार्गों को मरम्मत की आवश्यकता है, उन पर चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अब सड़कों की स्थिति का आकलन पारंपरिक तरीके की बजाय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक की मदद से किया जाएगा। सड़क का वीडियो रिकॉर्ड कर AI गड्ढों और मरम्मत की आवश्यकता का स्वतः विश्लेषण करेगा, जिससे निरीक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सकेगी।

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नकटी गांव बुलडोजर कार्रवाई पर विधानसभा में हंगामा, विधायक कॉलोनी को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को रायपुर के नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। इस विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई और सदन में नारेबाजी का माहौल बन गया। विपक्ष ने नकटी गांव में मकानों को हटाने की कार्रवाई को लेकर स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत किया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसे स्वीकार नहीं किया। विपक्ष ने संबंधित दस्तावेज सदन की कार्यवाही में रखने की अनुमति भी मांगी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक सदन के गर्भगृह में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। नियमों के अनुसार इस दौरान विपक्ष के विधायक स्वतः निलंबित माने गए। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि नकटी गांव में जिन 85 मकानों को हटाया गया, उनमें कई प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने थे। उन्होंने दावा किया कि वहां बिजली, पानी सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध थीं। उनका कहना था कि प्रभावित परिवारों को जो वैकल्पिक आवास दिए जा रहे हैं, उनका आकार पर्याप्त नहीं है। कांग्रेस विधायकों ने मांग की कि किसी भी बेदखली से पहले प्रभावित लोगों के लिए उचित पुनर्वास सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय सांसद के आश्वासन के बावजूद कार्रवाई की गई, जो उचित नहीं है। विधायक लखेश्वर बघेल ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए गरीब परिवारों के मकान हटाए गए हैं। इस पर वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि यदि विधायक कॉलोनी निर्माण से जुड़े कोई आधिकारिक दस्तावेज मौजूद हैं, तो उन्हें सदन के पटल पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इस पूरे मामले पर जवाब देते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि नकटी गांव में की गई कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में थी। उन्होंने बताया कि अतिक्रमण की शिकायत मिलने के बाद अतिरिक्त तहसीलदार द्वारा जांच की गई, जिसमें अवैध कब्जे पाए गए। इसके बाद वर्ष 2025 में अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया गया और 28 जून को बेदखली की कार्रवाई की गई। राजस्व मंत्री के अनुसार प्रशासन ने प्रभावित लोगों को पहले ही अपना सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया था। साथ ही प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए नवा रायपुर के सेक्टर-30 में फ्लैट उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि कार्रवाई के दौरान किसी के घरेलू सामान को नुकसान नहीं पहुंचाया गया और पुनर्वास की व्यवस्था भी की गई। इसलिए यह कहना सही नहीं है कि प्रभावित लोगों को बिना व्यवस्था के हटाया गया। सरकार का पक्ष सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इससे नाराज विपक्ष ने फिर से सदन में विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंच गया, जिसके बाद नियमों के तहत विपक्ष के सभी विधायक स्वतः निलंबित हो गए।

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रायपुर में बदले कचरा प्रबंधन के नियम: अब गीला-सूखा ही नहीं, 4 तरह का कचरा अलग करना होगा

राजधानी रायपुर में कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 के तहत नई व्यवस्था लागू करने की शुरुआत कर दी है। इसके लिए जोन-1 की साम्राज्य और अनुग्रह रेसिडेंसी सोसायटियों को मॉडल के रूप में चुना गया है। यहां रहने वाले परिवारों को अब गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे को अलग-अलग करके ही नगर निगम की एजेंसी को देना होगा। नगर निगम के अनुसार, दोनों सोसायटियों में 200 से अधिक परिवार रहते हैं। स्वच्छता दीदियों और रामकी कंपनी के कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे घर-घर जाकर लोगों को नए नियमों की जानकारी दें। जागरूकता अभियान पूरा होने के बाद यदि कोई परिवार मिश्रित कचरा देगा तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। जिन क्षेत्रों में कचरा वाहन सीधे नहीं पहुंच सकते, वहां ‘व्हील गैंग’ के माध्यम से कचरा एकत्र कर मुख्य वाहनों तक पहुंचाया जाएगा। नगर निगम 100 किलो से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले बल्क वेस्ट जनरेटरों का ऑनलाइन पंजीयन भी करा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मॉडल सोसायटियों में सफलता मिलने के बाद यह चार-स्तरीय कचरा पृथक्करण व्यवस्था पूरे रायपुर में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।

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छत्तीसगढ़ में 21% कम बारिश, 13 जुलाई से तेज वर्षा के आसार; 4 जिलों में येलो अलर्ट

छत्तीसगढ़ में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से 11 जुलाई तक राज्य में सामान्य से 21 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इस अवधि में जहां 320.6 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, वहीं केवल 252.4 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। हालांकि 13 जुलाई से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना जताई गई है। पिछले 24 घंटों में सरगुजा संभाग के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हुई, जबकि बस्तर संभाग के कुछ हिस्सों में भी अच्छी वर्षा दर्ज की गई। रविवार के लिए सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर और जशपुर जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और बिजली गिरने की आशंका है। मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तर-पश्चिम बिहार के ऊपर सक्रिय दो चक्रवाती परिसंचरण बंगाल की खाड़ी से नमी खींच रहे हैं, जिससे छत्तीसगढ़ में बादल बनने और बारिश की स्थिति बनी हुई है। प्रदेश के 32 में से 16 जिले अब भी सामान्य से कम बारिश का सामना कर रहे हैं। सबसे अधिक 74 प्रतिशत अतिरिक्त बारिश सारंगढ़-बिलाईगढ़ में दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की है।

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छत्तीसगढ़ मानसून सत्र: कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी में, कल विधायक दल की बैठक में होगा अंतिम फैसला

छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से पहले प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस राज्य सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है। इस संबंध में अंतिम निर्णय रविवार शाम होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक में लिया जाएगा। जानकारी के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष के सरकारी निवास पर शाम 5 बजे कांग्रेस विधायक दल की बैठक आयोजित की गई है। बैठक में विधानसभा सत्र की रणनीति तय करने के साथ यह भी फैसला होगा कि सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाए या नहीं। यदि प्रस्ताव लाया जाता है, तो कांग्रेस सरकार को कई अहम मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। इनमें नकटी गांव में कथित प्रधानमंत्री आवास तोड़े जाने का मामला, प्रदेश की कानून-व्यवस्था, जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग, किसानों को खाद की कमी, बिजली दरों में वृद्धि, महिलाओं की सुरक्षा, बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया में देरी जैसे विषय शामिल हैं। कांग्रेस का कहना है कि इन मुद्दों पर सरकार से सदन में जवाब मांगा जाएगा और पूरे मानसून सत्र के दौरान इन विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सभी विधायकों की मौजूदगी में रविवार की बैठक में विधानसभा की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होगा। सत्र भले ही अवधि में छोटा हो, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है, जबकि सत्ता पक्ष भी अपने जवाब और रणनीति को अंतिम रूप दे रहा है। इस बार विधानसभा सचिवालय में कुल 1033 प्रश्न जमा किए गए हैं। इनमें 36 विधायकों ने नियमों के अनुसार अधिकतम 20-20 प्रश्न लगाए हैं। खास बात यह है कि प्रश्न पूछने वालों में विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायक भी शामिल हैं। ऐसे में सत्र के दौरान विभिन्न विभागों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। अविश्वास प्रस्ताव क्या होता है? अविश्वास प्रस्ताव पूरी सरकार के खिलाफ लाया जाता है, किसी एक मंत्री या विभाग के खिलाफ नहीं। यदि विपक्ष इसे सदन में प्रस्तुत करता है, तो सरकार के कामकाज, कानून-व्यवस्था, किसानों, रोजगार, भ्रष्टाचार और अन्य प्रमुख विषयों पर व्यापक चर्चा होती है। अंत में मतदान के माध्यम से यह तय किया जाता है कि सरकार के पास सदन का बहुमत और विश्वास कायम है या नहीं।

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रायपुर: मंदिर की प्राचीन बावड़ी में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

रायपुर जिले के धरसीवां थाना क्षेत्र में स्थित कुंबरगढ़ के प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर परिसर में शनिवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया। मंदिर की प्राचीन बावड़ी में डूबने से दो छोटे बच्चों की जान चली गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। पुलिस के अनुसार, मृत बच्चों की पहचान 7 वर्षीय साक्षी साहू और 4 वर्षीय श्रवण धीवर, निवासी ग्राम कुर्रा, धरसीवां के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दोनों बच्चे अन्य बच्चों के साथ मंदिर परिसर के आसपास खेल रहे थे। इसी दौरान वे बावड़ी के किनारे पहुंच गए और अचानक संतुलन बिगड़ने से गहरे पानी में गिर पड़े। जब काफी देर तक दोनों बच्चे दिखाई नहीं दिए, तो परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान दोनों को बावड़ी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। सूचना मिलने पर धरसीवां पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की कमी पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यह बावड़ी काफी गहरी है, लेकिन इसके चारों ओर न तो पर्याप्त घेराबंदी की गई है और न ही किसी प्रकार के चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी सुरक्षा उपायों की मांग की गई थी, लेकिन प्रशासन ने इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए बावड़ी के चारों ओर मजबूत सुरक्षा दीवार, लोहे की जाली और स्पष्ट चेतावनी संकेत लगाए जाएं, ताकि किसी अन्य परिवार को इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े।

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बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति बैठक शुरू, संगठन मजबूत करने और आगामी रणनीति पर मंथन

भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक शुक्रवार को रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में शुरू हुई। बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव, संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी और विभिन्न प्रकोष्ठों के प्रदेश संयोजक एवं पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान संगठन की वर्तमान गतिविधियों की समीक्षा की जा रही है। इसके साथ ही पार्टी को बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत बनाने की रणनीति तथा आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा हो रही है। बैठक में सभी प्रकोष्ठों के कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा। साथ ही आने वाले समय में चलाए जाने वाले जनसंपर्क अभियान, संगठनात्मक गतिविधियों और पार्टी के कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तय की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, विभिन्न प्रकोष्ठों को समाज के अलग-अलग वर्गों तक केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं तथा उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से पहुंचाने की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बैठक में सरकार के कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर पदाधिकारियों को संबोधित करेंगे। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव संगठन की प्राथमिकताओं, आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर दिशा-निर्देश देंगे। सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। यह बैठक ऐसे समय आयोजित हो रही है, जब 13 जुलाई से छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। इसके अलावा भाजपा आने वाले महीनों में कई संगठनात्मक और जनसंपर्क कार्यक्रमों की तैयारी में जुटी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए बैठक को संगठन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक के दौरान विभिन्न प्रकोष्ठों से फीडबैक और सुझाव भी लिए जा रहे हैं, ताकि भविष्य के कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सके।

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कोल लेवी घोटाला: EOW का दावा- पार्टी फंड के नाम पर 800 करोड़ जुटाने के आरोप में रामगोपाल अग्रवाल रिमांड पर

छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल लेवी घोटाले में गिरफ्तार कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को लेकर आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने कोर्ट में कई गंभीर दावे किए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, पार्टी फंड के नाम पर करीब 800 करोड़ रुपये एकत्र किए गए, जिनकी एंट्री और प्रबंधन की जिम्मेदारी रामगोपाल अग्रवाल के पास थी। EOW का कहना है कि कथित तौर पर यह रकम बोरी और कार्टन में भरकर कांग्रेस भवन लाई जाती थी। इसके बाद हवाला नेटवर्क के जरिए धनराशि दिल्ली भेजी जाती थी। जांच एजेंसी का दावा है कि कोल लेवी से प्राप्त करोड़ों रुपये के लेन-देन में रामगोपाल अग्रवाल की अहम भूमिका रही। कोर्ट में पेश दस्तावेजों के अनुसार, कांग्रेस के अकाउंटेंट और रामगोपाल अग्रवाल के निजी सहायक देवेंद्र डड़सेना ने अपने बयान में कहा कि कथित कोल लेवी की राशि कांग्रेस भवन पहुंचती थी, जहां से उसका संचालन रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से किया जाता था। EOW के मुताबिक, कोल लेवी से 52 करोड़ 62 लाख 20 हजार रुपये सीधे उनके पास पहुंचे थे। जांच के दौरान कुछ कारोबारियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। एजेंसी के अनुसार, भिलाई के कारोबारी लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू ने बयान में कहा कि दीपेन चावड़ा के माध्यम से लगभग 800 करोड़ रुपये कांग्रेस भवन भेजे गए थे। वहीं, निखिल चंद्राकर ने भी कथित कोल लेवी की राशि रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचने की बात स्वीकार की है। पूछताछ में रामगोपाल अग्रवाल ने बताया कि रायपुर छोड़ने के बाद वे ओडिशा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, मध्यप्रदेश और दिल्ली सहित आठ राज्यों में रहे। इस दौरान उन्होंने पुरी, वाराणसी और प्रयागराज जैसे धार्मिक स्थलों के दर्शन किए और विशेष पूजा भी कराई। EOW का कहना है कि फरारी के दौरान भी वे परिवार, कुछ नेताओं और कारोबारियों के संपर्क में बने रहे। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस पूरे मामले का खुलासा 30 जून 2022 को आयकर विभाग द्वारा कोल कारोबारी सूर्यकांत तिवारी और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों और डायरी से हुआ था। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। रामगोपाल अग्रवाल ने 8 जुलाई 2026 को सरेंडर किया था। अगले दिन उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां EOW ने 14 दिन की रिमांड की मांग की थी। हालांकि अदालत ने 9 दिन की रिमांड मंजूर करते हुए उन्हें 17 जुलाई तक पूछताछ के लिए एजेंसी की हिरासत में भेज दिया। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूछताछ के आधार पर कस्टम मिलिंग, डीएमएफ और शराब घोटाले से जुड़े मामलों में भी आगे कार्रवाई हो सकती है। वहीं, ED भी इस प्रकरण में अलग से जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। नोट: ये आरोप आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) द्वारा अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों और जांच के दावों पर आधारित हैं। मामले की सुनवाई न्यायालय में लंबित है और अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।

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रामगोपाल अग्रवाल 17 जुलाई तक EOW रिमांड पर, शराब-कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में होगी पूछताछ

छत्तीसगढ़ के चर्चित कथित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में आरोपी पूर्व प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने लगभग तीन वर्ष बाद रायपुर स्थित आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) कार्यालय में आत्मसमर्पण किया। गुरुवार को मेडिकल परीक्षण के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें 17 जुलाई तक EOW की कस्टोडियल रिमांड पर भेज दिया। EOW की ओर से लंबी रिमांड की मांग की गई थी, लेकिन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 9 दिन की कस्टोडियल रिमांड मंजूर की। इस अवधि में जांच एजेंसी विभिन्न मामलों में उनसे पूछताछ करेगी। EOW के आरोप क्या हैं? जांच एजेंसी का दावा है कि कथित कोल लेवी घोटाले की जांच के दौरान जब्त की गई एक डायरी में कांग्रेस भवन के नाम पर करोड़ों रुपये के लेन-देन का उल्लेख मिला है। EOW का आरोप है कि यह राशि रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से राजीव भवन तक पहुंचाई गई थी। एजेंसी अब धन के स्रोत, लेन-देन, संबंधित व्यक्तियों और धन के उपयोग की जांच कर रही है। इसके अलावा EOW का यह भी दावा है कि कथित शराब घोटाले में अनवर ढेबर और उसके सहयोगियों द्वारा तथा कस्टम मिलिंग मामले में रोशन चंद्राकर के माध्यम से भी करोड़ों रुपये रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाए गए। बेटे से भी हुई पूछताछ जांच के दौरान EOW ने रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल से भी दो दिनों तक पूछताछ की। अधिकारियों ने उनसे पिछले तीन वर्षों के दौरान रामगोपाल अग्रवाल के ठिकानों, आर्थिक लेन-देन और कथित संपर्कों से जुड़े कई सवाल पूछे। एजेंसी का कहना है कि जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। कांग्रेस ने उठाए सवाल कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। पार्टी ने इसके विरोध में प्रदेशभर में प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल भी गिरफ्तारी के विरोध में अदालत पहुंचे। हालांकि उन्होंने मीडिया से बातचीत में मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि वह स्वयं भी इस प्रकरण में आरोपी हैं, इसलिए कुछ कहना उचित नहीं होगा। किन मामलों में जांच? रामगोपाल अग्रवाल का नाम कथित 3,200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले, लगभग 540 करोड़ रुपये के कोल लेवी मामले और 127 करोड़ रुपये के कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाले की जांच में सामने आया है। जांच एजेंसियां इन मामलों में कथित धन के प्रवाह, लाभार्थियों और वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही हैं। हालांकि, इन सभी मामलों में जांच अभी जारी है और आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना बाकी है। अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

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छत्तीसगढ़ में 2027 से बदलेगा स्कूलों का शैक्षणिक सत्र, पहली कक्षा में प्रवेश के लिए न्यूनतम उम्र 6 वर्ष अनिवार्य

छत्तीसगढ़ सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप स्कूल शिक्षा व्यवस्था में अहम बदलाव करने का निर्णय लिया है। नए नियमों के अनुसार वर्ष 2027 से प्रदेश के सभी स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चे की न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित की गई है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही वर्ष 2027 से राज्य में नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू होगा। पहले जहां स्कूल 16 जून से खुलते थे, वहीं अब अप्रैल के पहले दिन से प्रवेश प्रक्रिया और शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। इस दौरान विद्यार्थियों को किताबें, यूनिफॉर्म और पात्र छात्रों को साइकिल भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद 1 मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। शैक्षणिक सत्र में होगा बदलाव नई व्यवस्था के तहत पूरे प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से 31 मार्च तक संचालित होगा। यह प्रणाली केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप लागू की जाएगी, जिससे सीजी बोर्ड और सीबीएसई स्कूलों के बीच सत्र का अंतर समाप्त हो सके। बदलाव की वजह वर्तमान व्यवस्था में स्कूल जून के मध्य में खुलते हैं और शुरुआती कई सप्ताह तक प्रवेश, पुस्तक वितरण, यूनिफॉर्म और अन्य योजनाओं का लाभ देने की प्रक्रिया चलती रहती है। इससे नियमित पढ़ाई देर से शुरू होती है और कई स्कूलों में जुलाई तक पढ़ाई प्रभावित रहती है। शिक्षा विभाग का मानना है कि नए कैलेंडर से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अधिक समय मिलेगा, पाठ्यक्रम समय पर पूरा होगा और बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में भी सुधार देखने को मिलेगा। आयु सीमा में विशेष छूट यदि कोई बच्चा 1 अप्रैल तक निर्धारित 6 वर्ष की आयु पूरी नहीं करता, लेकिन 1 जुलाई तक उसकी आयु 6 वर्ष हो जाती है, तो उसे अधिकतम तीन महीने की विशेष छूट देकर पहली कक्षा में प्रवेश दिया जा सकेगा। सभी स्कूलों में लागू होगा नियम नई आयु सीमा और शैक्षणिक सत्र की व्यवस्था सरकारी, निजी तथा अनुदान प्राप्त सभी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगी। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर होने वाले प्रवेश भी इसी नियम के अनुसार किए जाएंगे। इन विद्यार्थियों को मिलेगी छूट जो छात्र किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय की प्री-प्राइमरी या केजी शिक्षा पूरी करके पहली कक्षा में प्रवेश ले रहे हैं, उन पर नई आयु सीमा लागू नहीं होगी। ऐसे मामलों में विद्यालय द्वारा जारी टीसी, अंकसूची या स्कोर कार्ड में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। शिक्षा विभाग का उद्देश्य स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से विद्यार्थियों को समय पर किताबें और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा सकेगी तथा सत्र की शुरुआत से ही नियमित पढ़ाई सुनिश्चित होगी।

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