छत्तीसगढ़ में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नए नियम लागू हुए करीब छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन नियमों का उल्लंघन करने वालों से कितनी पेनाल्टी वसूली जाएगी, यह अब तक तय नहीं हो पाया है। जुर्माने की स्पष्ट दर नहीं होने से नगरीय निकायों के सामने नियमों का प्रभावी तरीके से पालन कराने की चुनौती बनी हुई है। केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 27 जनवरी 2026 को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 का नोटिफिकेशन जारी किया था। नए नियमों ने 2016 के नियमों की जगह ली और 1 अप्रैल 2026 से देशभर में लागू किए गए। इन नियमों के तहत घरों, दुकानों, संस्थानों और अन्य जगहों से निकलने वाले कचरे को स्रोत स्तर पर चार श्रेणियों में अलग करना जरूरी किया गया है। इसमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी वेस्ट और स्पेशल केयर वेस्ट शामिल हैं। नियम लागू, लेकिन स्थानीय पेनाल्टी अभी तय नहीं नए प्रावधानों के मुताबिक स्थानीय निकायों को अलग-अलग श्रेणी के कचरे का संग्रहण, परिवहन और वैज्ञानिक तरीके से निपटान सुनिश्चित करना है। कचरा फैलाने और खुले में कचरा फेंकने जैसी गतिविधियों पर कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है। हालांकि छत्तीसगढ़ में इन नियमों के उल्लंघन पर लागू होने वाली पेनाल्टी की दर और स्थानीय स्तर पर कार्रवाई की विस्तृत व्यवस्था अभी अधिसूचित नहीं हुई है। ऐसे में निकायों के सामने यह स्पष्ट नहीं है कि घर से अलग-अलग कचरा नहीं देने, खुले में कचरा फेंकने या कचरा जलाने जैसे मामलों में कितनी राशि का जुर्माना लगाया जाए। चार श्रेणियों में कचरा अलग करना जरूरी नए नियमों में कचरे को स्रोत पर ही अलग करने पर जोर दिया गया है। घरों और संस्थानों से निकलने वाले कचरे को गीला, सूखा, सैनिटरी और स्पेशल केयर वेस्ट के रूप में अलग करना होगा। सूखे कचरे में प्लास्टिक, कागज, धातु, कांच, लकड़ी और रबर जैसी सामग्री को अलग कर रीसाइक्लिंग के लिए भेजने की व्यवस्था है। वहीं रसोई के कचरे, फल-सब्जियों के छिलकों, फूल और अन्य जैविक कचरे को कम्पोस्टिंग या बायोमीथेनेशन के जरिए प्रोसेस करने का प्रावधान किया गया है। लैंडफिल में सिर्फ अंतिम अवशेष भेजने पर जोर नए नियमों में लैंडफिल के इस्तेमाल को ऐसे कचरे तक सीमित करने की दिशा में प्रावधान किए गए हैं, जिसे रीसाइकिल नहीं किया जा सकता, ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता या जो निष्क्रिय अवशेष है। इसका उद्देश्य ऐसी सामग्री को लैंडफिल में जाने से रोकना है, जिससे दोबारा उपयोगी सामग्री, खाद या ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। बल्क वेस्ट जनरेटर की भी जिम्मेदारी प्रतिदिन 100 किलो या उससे अधिक कचरा उत्पन्न करने वाली संस्थाओं समेत निर्धारित मानकों के बल्क वेस्ट जनरेटर को अपने कचरे के संग्रहण, परिवहन और प्रोसेसिंग की पर्यावरणीय व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। इसके अलावा स्थानीय निकायों को कचरा प्रबंधन से जुड़े कार्यों के जरिए कार्बन क्रेडिट हासिल करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है। पुराने कचरा डंप साइटों की मैपिंग और मूल्यांकन के बाद बायोमाइनिंग और बायोरेमेडिएशन करने का प्रावधान भी नए नियमों में शामिल है। अब तैयार होगा पेनाल्टी का ड्राफ्ट संचालक, नगरीय प्रशासन नीलेश महादेव क्षीरसागर के अनुसार, नियमों के तहत पेनाल्टी तय करने के लिए ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। ड्राफ्ट तैयार होने और उसका नोटिफिकेशन जारी होने के बाद प्रदेश के नगरीय निकायों में उसी के आधार पर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल नए नियम लागू होने के बावजूद जुर्माने की दर तय नहीं होने से नगरीय निकायों में इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर की पेनाल्टी व्यवस्था का इंतजार है।