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हाईकोर्ट वकील की संदिग्ध मौत पर उठे सवाल: बिलासपुर में अधिवक्ताओं ने कलेक्टर-एसएसपी से की मुलाकात, स्पेशल जांच टीम की मांग

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हाईकोर्ट के अधिवक्ता राहुल अग्रवाल की संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस इसे आत्महत्या या हादसा बता रही है, लेकिन परिजन और वकील साथी इसे संदिग्ध मृत्यु मान रहे हैं। सोमवार को अधिवक्ताओं ने कलेक्टर और एसएसपी से मिलकर विशेष जांच टीम (Special Investigation Team) बनाने की मांग की। वकीलों ने कहा कि राहुल अग्रवाल एक होनहार अधिवक्ता थे। घटना की रात करीब 1 बजे वे अपने सहयोगी वकील के घर से निकले थे, लेकिन घर नहीं पहुंचे। कुछ घंटे बाद उनकी बाइक पुराने अरपा पुल के पास खड़ी मिली, जबकि राहुल लापता थे। 22 घंटे बाद मिला शव, शरीर पर चोट के निशान करीब 22 घंटे बाद राहुल का शव अरपा नदी में मिला। शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए, जिससे यह मामला और अधिक संदिग्ध हो गया। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह सामान्य दुर्घटना नहीं हो सकती — संभव है कि राहुल की मौत किसी अप्राकृतिक या आपराधिक कारण से हुई हो। निष्पक्ष जांच और साक्ष्यों की पड़ताल की मांग अधिवक्ताओं ने कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह से मुलाकात के दौरान कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्पेशल टीम गठित की जाए। उन्होंने मांग की कि सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स और घटनास्थल से मिले सभी साक्ष्यों की गहराई से जांच हो। वकीलों ने यह भी कहा कि जांच में लापरवाही से न केवल मृतक के परिवार को न्याय नहीं मिलेगा, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठेंगे। जानिए पूरा घटनाक्रम भाटापारा निवासी राहुल अग्रवाल (30) पिता सुरेश अग्रवाल, पिछले 7-8 साल से मंगला के ग्रीन गार्डन कॉलोनी में रह रहे थे। गुरुवार को वे रोज की तरह हाईकोर्ट में पेशी के बाद अपने दोस्तों मुकेश राठिया और अभिषेक आचार्य से मिले। तीनों ने पहले ट्रांसपोर्ट नगर में पार्टी की, फिर मुकेश के मोपका स्थित घर पहुंचे। देर रात तक सब साथ थे, लेकिन अगले दिन सुबह तक राहुल अपने घर नहीं लौटे। अगले दिन उनकी बाइक पुल के पास मिली और 22 घंटे बाद उनका शव नदी से बरामद किया गया। अब अधिवक्ताओं और परिवार का कहना है कि घटना के पीछे साजिश की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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बिलासपुर में कोचिंग स्टाफ की गुंडागर्दी: ट्यूटर को बीच सड़क पर पीटा, पत्नी बच्चे को लेकर बचाने की करती रही कोशिश — वीडियो वायरल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में एक ट्यूटर और उसकी पत्नी के साथ आचार्य इंस्टीट्यूट के स्टाफ द्वारा सरेआम मारपीट करने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। विवाद का कारण सिर्फ इतना था कि ट्यूटर ने कोचिंग सेंटर के सामने पम्पलेट बांटे, जिससे नाराज होकर इंस्टीट्यूट के दो स्टाफ ने उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। पम्पलेट बांटने पर शुरू हुआ विवाद जानकारी के अनुसार, क्रांति नगर निवासी अभय अग्रवाल अपनी पत्नी सेफाली कला मौर्य के साथ बच्चों को घर पर कोचिंग पढ़ाते हैं। 6 नवंबर को दोनों अपने दो साल के बच्चे को साथ लेकर सीएमडी कॉलेज के पास अपनी कोचिंग का प्रचार करने पहुंचे थे। जब वे आचार्य इंस्टीट्यूट के सामने पम्पलेट बांट रहे थे, तभी वहां मौजूद दो टीचर — आदिल और सर्वेश — उनसे बहस करने लगे। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ने ट्यूटर को गालियां देते हुए मारपीट शुरू कर दी। पत्नी अपने मासूम बच्चे को गोद में लेकर पति को बचाने की कोशिश करती रही, लेकिन आरोपियों ने उसकी एक न सुनी। FIR दर्ज, पुलिस ने शुरू की जांच पीड़ित ट्यूटर अभय अग्रवाल ने इस मामले की शिकायत तारबाहर थाने में दर्ज कराई है। टीआई कृष्णचंद सिदार ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मारपीट और धमकी देने का केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब दोनों की तलाश में जुटी है। वायरल वीडियो में दिखी हिंसा सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दोनों आरोपी शिक्षक ट्यूटर को गाली-गलौज करते हुए थप्पड़ और मुक्के मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान अभय की पत्नी बच्चे को लेकर बीच-बचाव करती दिखती है, जबकि आरोपी स्टाफ उसे भी धमकाते हैं। कोचिंग सेंटर्स की बढ़ती प्रतिस्पर्धा से उपजा विवाद शहर में दर्जनों कोचिंग सेंटर्स एक-दूसरे से छात्रों को आकर्षित करने की होड़ में लगे हुए हैं। मार्केटिंग और प्रचार-प्रसार को लेकर कई बार कोचिंग संचालकों के बीच टकराव की स्थिति बनती रहती है। बताया जा रहा है कि इस घटना के पीछे भी यही प्रतिस्पर्धा एक बड़ी वजह है। वहीं, शहर में कोचिंग संस्थानों के संचालन को लेकर प्रशासन की कोई ठोस निगरानी नहीं है, जिसके कारण ऐसे विवाद लगातार सामने आ रहे हैं।

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मोबाइल चलाने से टोका तो छात्रा ने लगाई नदी में छलांग: सुबह मिली लाश, पिता और बहन के सामने दी थी जान

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 9वीं कक्षा की एक छात्रा ने मोबाइल चलाने से रोके जाने पर आत्महत्या कर ली। घटना 3 नवंबर देर रात की है, जब छात्रा अदिति कठौते (14) मोबाइल देख रही थी। बड़ी बहन ने उसे मना किया तो वह नाराज होकर घर से भाग गई और अरपा नदी के छठ घाट पर जाकर कूद गई। यह घटना सरकंडा थाना क्षेत्र के राजकिशोर नगर की है। बताया गया कि अदिति के पिता अरुण कठौते और बड़ी बहन चेतना उसके पीछे-पीछे दौड़े, लेकिन जब तक वे पहुंचते, अदिति नदी में छलांग लगा चुकी थी। बहन के चिल्लाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। दो युवकों ने अदिति को बचाने की कोशिश भी की, पर पानी गहरा होने से वे आगे नहीं बढ़ सके। सुबह मिली छात्रा की लाश, एसडीआरएफ ने किया रेस्क्यू घटना की जानकारी मिलते ही सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्या और एएसआई देवेंद्र तिवारी रात में ही मौके पर पहुंचे, लेकिन अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू अभियान संभव नहीं हो सका। मंगलवार की सुबह एसडीआरएफ टीम और स्थानीय गोताखोरों की मदद से तलाशी अभियान शुरू किया गया। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद छात्रा का शव नदी से बरामद किया गया। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल मामले में मर्ग दर्ज कर जांच जारी है।

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बिलासपुर रेल हादसा: सिग्नल फेल या लापरवाही? मालगाड़ी से टकराई मेमू ट्रेन, 11 की मौत – 25 घायल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मंगलवार दोपहर एक बड़ा रेल हादसा हो गया। कोरबा से बिलासपुर आ रही एक मेमू लोकल ट्रेन ने लालखदान स्टेशन के पास खड़ी मालगाड़ी को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मेमू ट्रेन का इंजन मालगाड़ी के कोयले से लदे वैगन पर चढ़ गया। इस भीषण दुर्घटना में लोको पायलट समेत 11 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक लोग घायल हुए हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि हादसे की वजह ऑटो सिग्नल फेल्योर या सिग्नल ओवरशूट हो सकती है। हालांकि रेलवे ने कहा है कि इसकी पुष्टि सीआरएस (कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी) की जांच रिपोर्ट के बाद ही होगी। 200 यात्रियों में मचा हड़कंप, कई बोगियां क्षतिग्रस्त घटना के वक्त ट्रेन में लगभग 200 यात्री सवार थे। मेमू करीब 50 से 60 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही थी। टक्कर लगते ही बोगियों में अफरा-तफरी मच गई।प्रत्यक्षदर्शी नरेंद्र मौर्य ने बताया, “जोरदार धमाका हुआ तो हम घर से बाहर निकले। ट्रेन के पास पहुंचे तो यात्री घायल हालत में चिल्ला रहे थे। हमने घायलों को बाहर निकालकर एंबुलेंस में भेजा।” सीएम ने जताया दुख, राहत राशि का ऐलान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हादसे को दुखद बताते हुए मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की है।वहीं, रेलवे मंत्रालय ने मृतकों के परिवारों को 10 लाख, गंभीर रूप से घायलों को 5 लाख और सामान्य रूप से घायल यात्रियों को 1 लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है। कवच सिस्टम की कमी पर उठे सवाल हादसे के बाद रेल सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ को लेकर सवाल उठने लगे हैं। देश में 15 हजार से ज्यादा इंजनों में से केवल 1,290 इंजनों में यह सिस्टम लगाया गया है, जबकि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) जोन में किसी भी इंजन में यह नहीं है।कवच सिस्टम ट्रेन की गति नियंत्रित कर टक्कर जैसी घटनाओं को रोकने में मदद करता है। इसे स्थापित करने की लागत करीब 80 से 90 लाख रुपए प्रति इंजन है। क्या है कवच सिस्टम? कवच एक ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम (ATP) है जो ट्रेन की गति सीमा और लोको पायलट की त्रुटियों पर स्वतः ब्रेक लगाता है। इससे ट्रेनें सिग्नल पार करने से पहले रुक जाती हैं और संभावित टक्कर से बचाव होता है। जांच शुरू, सिग्नल फेल या ओवरशूट – कारण की पुष्टि बाकी रेलवे के सीपीआरओ डॉ. सुष्कर विपुल विलास राव ने कहा कि हादसे की वजह की जांच कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी बीके मिश्रा करेंगे।विशेषज्ञों के अनुसार, यह दुर्घटना सिग्नल सिस्टम फेल या लोको पायलट की ओर से सिग्नल ओवरशूट की वजह से हो सकती है।

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छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी पर संकट के बादल: कंप्यूटर ऑपरेटर और कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, 17 नवंबर से शुरू हो सकती खरीदी

छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू करने की तैयारी की जा रही है, लेकिन इस बार खरीदी प्रक्रिया पर संकट मंडरा रहा है। राज्यभर में सहकारी समितियों के कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर सोमवार (3 नवंबर) से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।उनका कहना है कि जब तक चार सूत्रीय मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे। हड़ताल के साथ-साथ 15 और 16 नवंबर को शनिवार और रविवार के अवकाश होने से खरीदी प्रक्रिया पर संशय और गहरा गया है। हड़ताल और अवकाश से टल सकती खरीदी की तारीख राज्य सरकार ने 15 नवंबर से धान खरीदी की घोषणा की है, लेकिन यह तारीख शनिवार होने के कारण सवालों के घेरे में है। अगले दिन रविवार है, जिससे खरीदी का वास्तविक प्रारंभ सोमवार, 17 नवंबर से ही संभव माना जा रहा है।दूसरी ओर, कर्मचारियों की हड़ताल ने प्रशासन को मुश्किल में डाल दिया है। बिना कर्मचारियों और ऑपरेटरों के टोकन प्रक्रिया, डेटा एंट्री और पंजीयन कार्य प्रभावित हो सकता है। कर्मचारियों ने कहा – जब तक मांगें नहीं मानी जाएंगी, टोकन जारी नहीं होंगे सहकारी समितियों के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, वे टोकन नहीं काटेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से लंबित वेतन, कमीशन और पेनाल्टी राशि सहित चार प्रमुख मुद्दों पर संघर्ष कर रहे हैं।उनका आरोप है कि कई बार ज्ञापन देने और आंदोलन करने के बावजूद सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाया है। बिलासपुर में हड़ताल की शुरुआत, रैली और नारेबाजी सोमवार को छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी संघ और समर्थन मूल्य धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ ने बिलासपुर के कोन्हेर गार्डन से अनिश्चितकालीन हड़ताल की शुरुआत की।कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि उनकी मांगें सालों से लंबित हैं। 24 अक्टूबर को जिला स्तर पर और 28 अक्टूबर को संभाग स्तर पर प्रदर्शन के बाद भी सरकार ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया, इसलिए अब वे अनिश्चितकालीन हड़ताल के रास्ते पर हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगें प्रशासन का दावा – तय तारीख पर खरीदी की तैयारी जारी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभात मिश्रा ने बताया कि जिन किसानों का पंजीयन पूरा हो गया है, उनसे शासन के निर्देशों के अनुसार धान की खरीदी की जाएगी। उन्होंने कहा कि हड़ताल के बावजूद जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां जारी रखी हैं और खरीदी में कोई बड़ी बाधा नहीं आने दी जाएगी।

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केस लड़ते-लड़ते प्यार में पड़ा वकील: महिला को तलाक दिलाने के बाद किया दुष्कर्म, शादी से मुकरा तो पहुंचा जेल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक वकील पर अपने ही मुवक्किल के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा है। सरकंडा इलाके की रहने वाली महिला का केस लड़ते-लड़ते वकील ने उससे नजदीकियां बढ़ाईं। पहले उसने महिला को उसके पति से तलाक दिलाया, फिर शादी का वादा करके संबंध बनाए। बाद में जब महिला ने शादी के लिए दबाव बनाया, तो वकील ने इंकार कर दिया और मारपीट भी की। महिला की शिकायत पर आरोपी वकील को गिरफ्तार कर लिया गया है। तलाक केस के दौरान हुआ वकील से प्रेम संबंध पुलिस के अनुसार, 26 वर्षीय पीड़िता का विवाह कुछ साल पहले हुआ था, लेकिन पति के साथ उसका रिश्ता खराब था। आए दिन झगड़ों और मारपीट से परेशान होकर उसने तलाक के लिए न्यायालय में याचिका दाखिल की।वर्ष 2025 में महिला ने अपने केस की पैरवी के लिए सरकंडा क्षेत्र के लतेल बाड़ा निवासी वकील पवन अवस्थी को नियुक्त किया। कोर्ट में केस चलने के दौरान दोनों के बीच लगातार मुलाकातें होती रहीं और इसी दौरान वकील ने महिला से प्रेम का इजहार किया। शादी का झांसा देकर बनाए संबंध महिला के अनुसार, वकील ने बताया कि उसकी भी अपनी पत्नी से नहीं बनती और वह जल्द ही तलाक लेकर उससे शादी करेगा। इस भरोसे पर महिला ने उस पर विश्वास किया, जिसके बाद दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। लेकिन तलाक का मामला खत्म होने के बाद वकील का रवैया बदल गया। शादी के दबाव पर की मारपीट जब महिला ने शादी के लिए जोर दिया, तो वकील ने टालमटोल शुरू कर दी। बाद में उसने साफ तौर पर शादी से इनकार कर दिया। इस दौरान उसने महिला से झगड़ा किया, उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया और मारपीट की।इसके बाद परेशान होकर महिला ने 2 नवंबर को सरकंडा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने वकील के खिलाफ दुष्कर्म, मारपीट और धमकी के तहत मामला दर्ज किया और 3 नवंबर को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस जांच जारी फिलहाल सरकंडा पुलिस ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और पूरे मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी बयान दर्ज कर केस को कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा।

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छात्रों की आत्महत्या रोकने बड़ा कदम: अब स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में होंगे मनोचिकित्सक, शिक्षा विभाग ने जारी की नई गाइडलाइन

छात्रों में बढ़ते आत्महत्या के मामलों को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ा निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट के सुझावों के आधार पर विभाग ने नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत अब प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों, कोचिंग संस्थानों और छात्रावासों में प्रमाणित मनोवैज्ञानिक या परामर्शदाता (काउंसलर) की तैनाती अनिवार्य होगी। समग्र शिक्षा राज्य परियोजना द्वारा जारी 14 बिंदुओं की इस गाइडलाइन को सभी जिलों के कलेक्टरों को भेजा गया है और इसके पालन के सख्त निर्देश दिए गए हैं। कोविड-19 के बाद बढ़ी छात्रों की मानसिक समस्या शिक्षा विभाग ने माना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है, जिसके चलते आत्महत्या के मामलों में वृद्धि हुई है।इसी को ध्यान में रखते हुए अब स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और सुरक्षा उपायों को लागू करने के आदेश दिए गए हैं। हर संस्थान में काउंसलर या मनोवैज्ञानिक अनिवार्य गाइडलाइन के अनुसार, जिन शिक्षण संस्थानों में 100 या उससे अधिक छात्र हैं, वहां स्थायी काउंसलर या मनोवैज्ञानिक की नियुक्ति करनी होगी।छोटे संस्थानों को जरूरत पड़ने पर बाहरी परामर्शदाताओं से रेफरल सिस्टम बनाना होगा। हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर पर इग्नू से गाइडेंस एंड काउंसलिंग में डिप्लोमा प्राप्त शिक्षक भी काउंसलिंग की जिम्मेदारी निभा सकेंगे। निजी स्कूलों के लिए भी यह नियम अनिवार्य रहेगा। सुरक्षा उपाय और अनुशासनिक बदलाव नई गाइडलाइन में संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि— अब नहीं बनेंगे ‘मेधावी छात्रों’ के अलग बैच शिक्षा विभाग ने यह भी साफ किया है कि अब किसी भी संस्थान में छात्रों की क्षमता या अंकों के आधार पर अलग-अलग बैच नहीं बनाए जाएंगे।विभागीय सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने सभी जिलों के कलेक्टरों को इस आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जिला स्तरीय निगरानी समिति बनेगी गाइडलाइन के अनुसार, आत्महत्या रोकथाम उपायों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति गठित की जाएगी।इसमें शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, आदिवासी विकास, समाज कल्याण, पुलिस, स्वास्थ्य और बाल संरक्षण विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।इसके साथ ही दो सिविल सोसायटी सदस्य और दो शिक्षाविद भी समिति में रहेंगे। समिति छात्रों से जुड़ी मानसिक स्वास्थ्य गतिविधियों, प्रशिक्षण और परामर्श का गोपनीय रिकॉर्ड रखेगी और हर साल उसकी रिपोर्ट तैयार करेगी। बच्चों से अपील — जीवन सबसे कीमती है शिक्षा विभाग ने छात्रों से अपील की है कि वे कभी भी गलत कदम न उठाएं।माता-पिता अपनी सीमाओं के बावजूद बच्चों को बेहतर भविष्य देने की कोशिश करते हैं।इसलिए हर छात्र को मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।हर समस्या का समाधान है, बस मदद मांगने से झिझकना नहीं चाहिए।

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बिलासपुर में कांग्रेस नेता पर फायरिंग केस में नया खुलासा: रसूखदारों के नाम आए सामने, पुलिस ने शुरू की एंड टू एंड कार्रवाई

बिलासपुर में कांग्रेस नेता नीतेश सिंह पर फायरिंग मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस ने बताया है कि इस हमले के पीछे स्थानीय रसूखदारों की भूमिका भी हो सकती है। गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ के दौरान कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम बताए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। 🔹 चुनावी रंजिश और जमीन विवाद से जुड़ा मामला यह घटना सरकंडा थाना क्षेत्र की है। 28 अक्टूबर की शाम कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष विश्वजीत अनंत और उसके साथियों ने जनपद उपाध्यक्ष नीतेश सिंह पर हमला किया था। हमलावरों ने करीब 14 राउंड फायरिंग की, जिसमें नीतेश समेत दो अन्य लोग घायल हुए। जांच में सामने आया है कि वारदात के पीछे जनपद उपाध्यक्ष पद के चुनाव में हार और जमीन विवाद प्रमुख कारण थे। नीतेश की जीत से नाराज गुट ने यह हमला योजना बनाकर कराया था। 🔹 मास्टरमाइंड समेत 7 आरोपी गिरफ्तार पुलिस ने तेजी दिखाते हुए 24 घंटे के भीतर ही मुख्य आरोपी विश्वजीत अनंत सहित सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें नाबालिगों को बाल सुधार गृह भेज दिया गया है, जबकि चार आरोपियों को दो नवंबर तक रिमांड पर लिया गया है। पुलिस उनसे यह जानकारी जुटा रही है कि पिस्टल, कट्टा और कारतूस कहां से और किसके जरिए मिले। 🔹 रसूखदारों और हथियार सप्लायर गैंग की तलाश पूछताछ में पुलिस के हाथ कई महत्वपूर्ण सुराग लगे हैं। आरोपियों ने बताया है कि शहर में कुछ प्रभावशाली लोग हथियारों की सप्लाई और आपराधिक गिरोहों से जुड़े हैं। फिलहाल पुलिस ने इनके नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन दावा है कि जल्द बड़ा खुलासा किया जाएगा। इस बीच, पुलिस अवैध हथियार सप्लाई करने वाले गिरोह की भी तलाश में जुटी है। सूत्रों के अनुसार, जांच में ऐसे कई नाम सामने आए हैं जो लंबे समय से इस कारोबार से जुड़े हैं। 🔹 बाइक बरामद, साक्ष्य जुटा रही पुलिस एडिशनल एसपी ग्रामीण अर्चना झा ने बताया कि सभी आरोपियों के मेमोरेंडम बयान दर्ज किए जा चुके हैं। उनकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल दो मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं, जिन्हें घटना के बाद अलग-अलग जगहों पर छिपाया गया था। ACCU की टीम अब इस केस में तकनीकी और भौतिक साक्ष्य इकट्ठा कर रही है। 🔹 पुलिस की तैयारी — एंड टू एंड एक्शन बिलासपुर पुलिस का कहना है कि इस फायरिंग केस में एंड टू एंड कार्रवाई की जाएगी। यानी केवल शूटर ही नहीं, बल्कि साजिश रचने वालों और हथियार सप्लाई करने वालों को भी गिरफ्तार किया जाएगा। पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़ा हथियार सप्लायर नेटवर्क उजागर किया जाएगा और अवैध हथियारों की बरामदगी भी संभव है।

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रायपुर मेकाहारा अस्पताल में अव्यवस्था: एक ही बेड पर दो प्रसूताएं, हाईकोर्ट ने जताई नारा

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल (मेकाहारा) अस्पताल में लापरवाही और संसाधनों की भारी कमी एक बार फिर सामने आई है। यहां एक ही बेड पर दो प्रसूताओं को भर्ती करने का मामला सामने आया है। 29 अक्टूबर को अस्पताल के गायनी वार्ड में सभी 150 बेड भरे हुए थे। ऐसे में मजबूर होकर वार्ड नंबर 5 और 6 में दो-दो महिलाओं को एक ही बेड पर रखा गया। दोनों प्रसूताएं अपने नवजात शिशुओं के साथ बमुश्किल बेड का आधा हिस्सा साझा कर रहीं थीं। 🔹 हाईकोर्ट ने जताई गहरी चिंता मेकाहारा की इस अव्यवस्था को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा — “एक ही बेड पर दो प्रसूताओं को रखना बेहद चिंताजनक और अमानवीय स्थिति है। प्रसूताओं की गोपनीयता, स्वच्छता और गरिमा की रक्षा आवश्यक है।” मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) से शपथपत्र के साथ रिपोर्ट तलब की है। साथ ही अस्पतालों में किट और रीजेंट की कमी पर CG-MSC के प्रबंध निदेशक से जवाब मांगा गया है। 🔹 हर घंटे एक डिलीवरी, बेड फुल अस्पताल प्रशासन के अनुसार, गायनी वार्ड में हर घंटे लगभग एक डिलीवरी होती है, यानी दिनभर में करीब 24 प्रसव किए जाते हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण कई बार बेड की भारी कमी हो जाती है। 🔹 मातृ-शिशु अस्पताल बनाने की तैयारी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि मेकाहारा में पूरे प्रदेश से मरीज रेफर होकर आते हैं। किसी भी प्रसूता को वापस नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि जल्द ही अलग से मातृ-शिशु अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है, ताकि बेड की कमी दूर की जा सके। 🔹 हाईकोर्ट ने खबर को माना जनहित याचिका 30 अक्टूबर को एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट को देखते हुए हाईकोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया। अदालत ने कहा कि अस्पताल में फैली अव्यवस्था महिलाओं और नवजातों के जीवन के लिए खतरा बन सकती है। मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी। 🔹 परिजनों का गुस्सा, अस्पताल में हंगामा एक ही बेड पर दो-दो महिलाओं को भर्ती किए जाने पर मरीजों के परिजनों ने विरोध जताया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए हंगामा भी किया। बाद में स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। अस्पताल में पहले भी सर्जरी में देरी, अव्यवस्था और भीड़भाड़ जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं।

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बिलासपुर गोलीकांड: कांग्रेस में वर्चस्व की जंग में चली गोलियां — नितेश सिंह की हत्या की साजिश रचने वाला मास्टरमाइंड युवा कांग्रेस का पूर्व उपाध्यक्ष निकला

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हाल ही में हुए गोलीकांड ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को हिला कर रख दिया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस हमले के पीछे युवा कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष विश्वजीत अनंत का हाथ था, जिसने राजनीतिक वर्चस्व और जमीन विवाद के चलते कांग्रेस नेता और जनपद उपाध्यक्ष नितेश सिंह की हत्या की साजिश रची थी। विश्वजीत और उसके साथियों ने पहले दो बार हत्या की कोशिश की, लेकिन असफल रहे। तीसरी बार, 28 अक्टूबर की शाम उन्होंने नितेश सिंह के मस्तूरी स्थित ऑफिस के बाहर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। हालांकि, हमले में नितेश बाल-बाल बच गए और उनके साथियों को मामूली चोटें आईं। 24 घंटे में पुलिस ने किया खुलासा, मास्टरमाइंड समेत 7 आरोपी गिरफ्तार पुलिस ने तेजी दिखाते हुए 24 घंटे के भीतर ही मास्टरमाइंड विश्वजीत अनंत, उसके भाइयों और साथियों सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं। एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि हमले के दौरान 14 राउंड फायरिंग की गई थी। अगर हमलावर प्रोफेशनल शूटर होते, तो बड़ा हादसा हो सकता था। पुलिस ने मौके से दो देसी पिस्टल, एक कट्टा, कई कारतूस और मैगजीन बरामद किए हैं। राजनीतिक वर्चस्व और जमीन विवाद से उपजी रंजिश जांच में सामने आया है कि आरोपी विश्वजीत अनंत और नितेश सिंह के बीच राजनीतिक गुटबाजी और जमीन विवाद लंबे समय से चल रहा था। नितेश ने जनपद उपाध्यक्ष चुनाव में नागेंद्र राय को हराया था, जो अब विपक्षी गुट में हैं। पुलिस का मानना है कि इसी राजनीतिक प्रतिद्वंदिता और वर्चस्व की लड़ाई ने इस घटना को जन्म दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए आरोपी के मंत्री और धार्मिक गुरुओं के साथ फोटो गिरफ्तारी के बाद विश्वजीत अनंत के सोशल मीडिया अकाउंट से कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें वह राज्य सरकार के मंत्री और समाज के धार्मिक गुरुओं के साथ दिखाई दे रहा है। इनमें मंत्री खुशवंत साहेब के साथ उसके करीबी संबंधों की झलक मिलती है। यह भी सामने आया कि घटना के बाद विश्वजीत ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो स्टोरी अपलोड की, जिसमें वह कार चलाते हुए बैकग्राउंड में “बंदूक लाठी चाहे गोली बरसाए” गाने पर रील बना रहा था। पुलिस जुटा रही हथियारों के स्रोत की जानकारी पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हमलावरों को हथियार और कारतूस कहां से मिले। एसएसपी ने कहा है कि अवैध हथियार सप्लाई चेन से जुड़े सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा। जांच अभी जारी है और पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की भी पहचान कर रही है।

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