Bilashpur

बिलासपुर रेंज में QR कोड से होगी शिकायत, थानेदारों की मनमानी पर लगेगी लगाम: IG रामगोपाल गर्ग

बिलासपुर पुलिस रेंज में अब स्मार्ट और पारदर्शी पुलिसिंग की नई शुरुआत होने जा रही है। नवपदस्थ रेंज आईजी IPS रामगोपाल गर्ग ने कार्यभार संभालते ही स्पष्ट कर दिया है कि आम नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाएगा और थाने स्तर पर किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए रेंज के सभी थानों में क्यूआर कोड लगाए जाएंगे, ताकि पीड़ित सीधे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक अपनी शिकायत पहुंचा सकें। शुक्रवार शाम पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से चर्चा में आईजी गर्ग ने कहा कि पुलिस की दक्षता बढ़ाने के लिए तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाएगा। पुलिसिंग को आधुनिक और जवाबदेह बनाने के लिए मोबाइल एप और डिजिटल टूल्स को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि दुर्ग रेंज में सफल रहे ‘त्रिनयन’ और ‘सशक्त’ ऐप का प्रयोग अब बिलासपुर रेंज में भी किया जाएगा, जिससे अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया और तेज हो सकेगी। आईजी गर्ग ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी थाने में स्टाफ द्वारा गलत मंशा से बीएनएस की धाराएं जोड़ने या हटाने का प्रयास किया गया, तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि पुलिस का उद्देश्य आम जनता को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण देना है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि फर्जी शिकायतों को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो लोग तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर झूठी शिकायतें दर्ज कराएंगे, उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी। आईजी रामगोपाल गर्ग ने बताया कि बिलासपुर रेंज में बढ़ते अपराध और स्थानीय समस्याओं को लेकर पहले पुलिस अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके बाद क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार प्राथमिकताएं तय की जाएंगी। जो व्यवस्थाएं बेहतर काम कर रही हैं, उन्हें और मजबूत किया जाएगा, जबकि कमियों को दूर करने पर विशेष फोकस रहेगा।

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बिलासपुर उपभोक्ता आयोग का बड़ा आदेश: कोविड से मौत पर बीमा कंपनी देगी 1 करोड़ और 12% ब्याज

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बिलासपुर ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता को 1 करोड़ रुपए की बीमा राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा मानसिक कष्ट और मुकदमे के खर्च के रूप में 2 लाख रुपए अलग से देने का भी आदेश दिया गया है। इस मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल तथा सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पांडेय की पीठ ने की। कोविड संक्रमण से हुई थी बीमित महिला की मौत बिलासपुर निवासी कौशल प्रसाद कौशिक ने अपनी पत्नी शैल कौशिक के नाम पर मई 2020 में मैक्स लाइफ इंश्योरेंस से ‘प्लैटिनम वेल्थ प्लान’ के तहत 1 करोड़ रुपए का जीवन बीमा कराया था। पॉलिसी जारी करने से पहले बीमा कंपनी ने आवश्यक मेडिकल परीक्षण कराए थे। सितंबर 2020 में शैल कौशिक कोविड-19 से संक्रमित हो गईं। इलाज के दौरान 11 अक्टूबर 2020 को उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद पति ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया, लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि बीमित महिला को पहले से गंभीर बीमारी थी, जिसे पॉलिसी लेते समय छिपाया गया था। आयोग ने माना- पॉलिसी से पहले महिला पूरी तरह स्वस्थ थी उपभोक्ता आयोग ने मेडिकल रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि पॉलिसी जारी करने से पहले बीमा कंपनी ने खुद महिला की संपूर्ण मेडिकल जांच कराई थी और उस समय उन्हें पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया गया था। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी यह साबित करने में असफल रही कि महिला को पॉलिसी शुरू होने से पहले कोई गंभीर बीमारी थी, जो बीमा शर्तों के अंतर्गत आती हो। बीमा कंपनी की दलील खारिज बीमा कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि बीमित महिला को वर्ष 2016 से हृदय संबंधी बीमारी थी। हालांकि आयोग ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा कि कंपनी के पास ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है जिससे यह सिद्ध हो सके कि पॉलिसी जारी होने से पूर्व निर्धारित अवधि में महिला किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं या उन्होंने जानबूझकर जानकारी छिपाई थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल संदेह या अप्रमाणित रिकॉर्ड के आधार पर बीमा दावा खारिज करना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।

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बिलासपुर में अवैध OYO होटल पर नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, रिहायशी इलाके में संचालित भवन किया गया सील

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में नगर निगम ने नियमों की अनदेखी कर संचालित एक OYO होटल पर सख्त कार्रवाई की है। सरकंडा थाना क्षेत्र के देवनंदन नगर स्थित रिहायशी इलाके में बिना अनुमति बनाए गए तीन मंजिला भवन में अवैध रूप से होटल का संचालन किया जा रहा था। स्थानीय लोगों की लगातार शिकायतों और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना के बाद नगर निगम ने सोमवार को उक्त भवन को सील कर दिया। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, देवनंदन नगर के निवासियों ने शिकायत की थी कि उनके रिहायशी क्षेत्र में OYO होटल चलाया जा रहा है, जहां रोजाना युवक-युवतियों का संदिग्ध आना-जाना रहता है। इससे मोहल्ले का सामाजिक माहौल बिगड़ रहा था और खासकर महिलाएं व युवतियां खुद को असुरक्षित महसूस कर रही थीं। शिकायत मिलने के बाद निगम की भवन शाखा ने मौके पर जांच की। जांच में पाया गया कि भवन का नक्शा रिहायशी उपयोग के लिए स्वीकृत कराया गया था, लेकिन अंदर होटल के तौर पर कमरों का निर्माण किया गया है। यह पूरी तरह से व्यवसायिक गतिविधि की श्रेणी में आता है, जिसके लिए अलग से अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना किसी वैध अनुमति के लंबे समय से इस भवन में OYO होटल का संचालन किया जा रहा था। स्थानीय लोगों ने निगम कमिश्नर को भी इस मामले की शिकायत करते हुए कहा था कि होटल के कारण क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है। जांच में अवैध संचालन की पुष्टि होने के बाद नगर निगम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए होटल को सील कर दिया। नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शहर में बिना अनुमति निर्माण और अवैध व्यवसायिक गतिविधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले भवन मालिकों और संचालकों के खिलाफ न सिर्फ सीलिंग की कार्रवाई होगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। जानकारी के अनुसार, सील किए गए OYO होटल का संचालन अंकित सिंह द्वारा किया जा रहा था।

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हाईकोर्ट का अहम फैसला: बिना सबूत अफेयर का आरोप लगाना मानसिक क्रूरता, डॉक्टर पति को तलाक, पत्नी को 25 लाख गुजारा भत्ता

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस प्रमाण के जीवनसाथी पर अवैध संबंधों का आरोप लगाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने एक डॉक्टर पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार मानते हुए डॉक्टर पति की तलाक याचिका स्वीकार कर ली। साथ ही पत्नी को 25 लाख रुपये एकमुश्त गुजारा भत्ता देने का आदेश भी दिया गया है। क्या है पूरा मामला मामला सारंगढ़ निवासी डॉक्टर से जुड़ा है, जिनकी शादी वर्ष 2008 में रायगढ़ में भिलाई की रहने वाली महिला डॉक्टर से हुई थी। शादी के बाद दंपती की एक बेटी हुई, लेकिन कुछ वर्षों बाद ही दोनों के रिश्तों में तनाव पैदा हो गया। अंततः वर्ष 2014 से दोनों अलग-अलग रहने लगे। पति का आरोप था कि पत्नी का व्यवहार शादी के कुछ समय बाद ही अपमानजनक और संदेहपूर्ण हो गया था। उस पर बार-बार अवैध संबंधों के आरोप लगाए गए, जिससे उसे मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी छोटी-छोटी बातों पर विवाद करती थी, मांग में सिंदूर लगाने और मंगलसूत्र पहनने से इनकार करती थी, यहां तक कि एक बार जानलेवा हमला भी किया गया। फैमिली कोर्ट से हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला पति ने दुर्ग स्थित फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी, जिसे फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद पति ने हाईकोर्ट में अपील की। सुनवाई के दौरान सामने आया कि पत्नी ने अपने लिखित बयान में पति पर किसी अन्य महिला डॉक्टर से संबंध होने का गंभीर आरोप लगाया था। पत्नी का यह भी दावा था कि कथित महिला ने उसके घर में घुसकर तोड़फोड़ की थी, लेकिन इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया जा सका। कोर्ट की टिप्पणी: चरित्र हनन सबसे गंभीर क्रूरता हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षित पत्नी द्वारा बिना आधार के पति के चरित्र पर लांछन लगाना मानसिक क्रूरता का सबसे गंभीर रूप है। कोर्ट ने माना कि पत्नी अपने आरोपों को साबित करने में असफल रही, जिससे पति को गंभीर मानसिक पीड़ा हुई। हालांकि कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि केवल अलग रहने के आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता, लेकिन मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक उचित है। 25 लाख रुपये एकमुश्त गुजारा भत्ता हाईकोर्ट ने तलाक मंजूर करते हुए यह भी कहा कि दोनों पति-पत्नी डॉक्टर हैं और आर्थिक रूप से सक्षम हैं, फिर भी बेटी की परवरिश और भविष्य के कानूनी विवादों से बचने के लिए पति को पत्नी को 25 लाख रुपये एकमुश्त गुजारा भत्ता देना होगा। यह राशि 6 महीने के भीतर अदा करनी होगी।

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छत्तीसगढ़ में बिजली महंगी होने के आसार, पावर कंपनी ने 24% टैरिफ बढ़ाने का दिया प्रस्ताव

रायपुर।छत्तीसगढ़ में नए वित्तीय वर्ष 2026-27 से बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लग सकता है। छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी ने राज्य विद्युत नियामक आयोग में याचिका दाखिल कर करीब 6 हजार करोड़ रुपये के घाटे का दावा किया है। इसी के आधार पर कंपनी ने औसतन 24 प्रतिशत तक बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। अगर नियामक आयोग पावर कंपनी के घाटे को आंशिक या पूरी तरह से स्वीकार करता है, तो प्रदेश के घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं की बिजली बिल में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। दिसंबर में दाखिल की गई याचिका नियमों के अनुसार पावर कंपनी को हर साल दिसंबर में आगामी वित्तीय वर्ष के टैरिफ निर्धारण के लिए याचिका दाखिल करनी होती है। इस बार कंपनी ने 31 दिसंबर की समय-सीमा से एक दिन पहले 30 दिसंबर को ही आयोग में अपनी याचिका प्रस्तुत कर दी। याचिका में कंपनी ने 2026-27 के लिए अनुमानित आय, खर्च, संभावित लाभ और पूर्व वर्षों के घाटे का विस्तृत ब्यौरा दिया है। कंपनी का कहना है कि नए सत्र में होने वाले लाभ को पुराने घाटे में समायोजित करने के बाद भी लगभग 6 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व की जरूरत पड़ेगी। 24% तक दर बढ़ाने का सुझाव पावर कंपनी ने याचिका के साथ नया टैरिफ प्लान भी जमा किया है, जिसमें बिजली दरों में औसतन 24 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव शामिल है। अब इस पर राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा गहन समीक्षा की जाएगी। प्रक्रिया के तहत आम उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों से दावा-आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। इसके बाद जनसुनवाई आयोजित होगी, जिसमें लोग अपनी राय और आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। सभी पक्षों को सुनने के बाद आयोग अंतिम टैरिफ का फैसला करेगा। पहले भी किया था घाटे का दावा यह पहला मौका नहीं है जब पावर कंपनी ने बड़े घाटे का हवाला दिया हो। पिछले वित्तीय वर्ष में भी कंपनी ने करीब 5 हजार करोड़ रुपये के घाटे का दावा किया था। हालांकि, नियामक आयोग ने उस दावे को पूरी तरह स्वीकार न करते हुए घाटा केवल 500 करोड़ रुपये ही माना था। उस समय कंपनी ने 28,397.64 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता बताई थी, लेकिन आयोग ने केवल 25,636.38 करोड़ रुपये को ही मंजूरी दी थी। तब मामूली बढ़ोतरी पर लगी थी मुहर यदि पिछली बार कंपनी का पूरा घाटा मान लिया जाता, तो बिजली दरों में लगभग 20 प्रतिशत तक वृद्धि होती। लेकिन आयोग के हस्तक्षेप के चलते बिजली दरें दो प्रतिशत से भी कम बढ़ाई गई थीं। अब एक बार फिर सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार नियामक आयोग पावर कंपनी के घाटे को कितनी मान्यता देता है। इसी पर तय होगा कि छत्तीसगढ़ के लोगों को आने वाले दिनों में बिजली कितनी महंगी पड़ेगी।

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न्यू ईयर पर सख्ती: स्टंट और सड़क पर केक काटने पर जेल, 10 बजे बाद DJ बंद

छत्तीसगढ़ में पुलिस हाई अलर्ट, रायपुर–बिलासपुर–दुर्ग–बस्तर में कड़ी निगरानी रायपुर | नए साल के जश्न को लेकर छत्तीसगढ़ पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। रायपुर में जारी आदेश के मुताबिक रात 10 बजे के बाद डीजे और तेज म्यूजिक पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। बिना वैध लाइसेंस शराब परोसने वाले होटल, फार्महाउस और बार संचालकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने साफ किया है कि नियम टूटने पर लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। 🚓 रायपुर में 600 जवान, CCTV से होगी निगरानी नए साल की रात राजधानी में 50 पेट्रोलिंग वाहन और करीब 600 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। पुलिस अधिकारियों ने होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और फार्महाउस संचालकों के साथ बैठक कर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पुलिस के अनुसार, सभी कार्यक्रम CCTV कैमरों की निगरानी में होंगे। नशा, ड्रग्स, अवैध शराब या तय समय के बाद म्यूजिक मिलने पर आयोजक सीधे जिम्मेदार माने जाएंगे। इसके साथ ही पार्किंग को लेकर भी सख्ती रहेगी। मेन रोड या सर्विस रोड पर पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित होगी। ट्रैफिक बाधित होने की स्थिति में कार्रवाई तय है। 🚫 सड़क पर जश्न मना तो होगी कार्रवाई रायगढ़ और सरगुजा पुलिस ने भी साफ कर दिया है कि सड़कों पर जश्न, तेज रफ्तार बाइकिंग, स्टंट, गाली-गलौज या हुड़दंग करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 🍰 दुर्ग में सड़क पर केक काटा तो सीधी जेल दुर्ग पुलिस ने चेतावनी दी है कि 31 दिसंबर की रात सड़क पर स्टंट या केक काटते पाए जाने पर तुरंत जेल भेजा जाएगा। एसएसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि नए साल की रात और 1 जनवरी को पूरे जिले में पुलिस हाई अलर्ट पर रहेगी। 🚁 बिलासपुर में ड्रोन से निगरानी, 800 जवान तैनात बिलासपुर में नए साल के जश्न पर ड्रोन कैमरों से नजर रखी जाएगी। एसएसपी रजनीश सिंह के मुताबिक शहर और ग्रामीण इलाकों में 800 से ज्यादा पुलिसकर्मी और 100 होमगार्ड जवान तैनात रहेंगे।तेज म्यूजिक, बिना साइलेंसर वाहन, ट्रिपल राइडिंग और अवैध हथियार रखने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। 🛡️ बस्तर में पहले से सुरक्षा कड़ी बस्तर संभाग में नए साल से चार दिन पहले ही सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जगदलपुर शहर में 150 से ज्यादा CCTV कैमरों से निगरानी की जा रही है। यहां 300 से 400 जवान तैनात किए गए हैं। होटल, बस स्टैंड और टैक्सी स्टैंड पर विशेष नजर रखी जा रही है। 🍺 नशे में ग्राहक की जिम्मेदारी आयोजक की एसएसपी लाल उमेद सिंह ने कहा कि इवेंट आयोजक अपने हर मेहमान की जिम्मेदारी लेंगे। अगर कोई ग्राहक शराब के नशे में पाया जाता है, तो उसे सुरक्षित घर पहुंचाना आयोजक की जिम्मेदारी होगी।इवेंट से पहले नजदीकी थाना को पूरी जानकारी देना अनिवार्य किया गया है। 📞 पुलिस की अपील पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी आपात स्थिति या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत 112 या कंट्रोल रूम नंबर 9479192099 पर दें।पुलिस ने साफ कहा है—जश्न मनाएं, लेकिन कानून के दायरे में रहकर।

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6 माह की गर्भवती रेप पीड़िता को गर्भपात की अनुमति, हाईकोर्ट ने कहा— पीड़िता को अपने भविष्य का निर्णय लेने का अधिकार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने दुष्कर्म की शिकार एक नाबालिग किशोरी को गर्भपात कराने की अनुमति प्रदान की है। जस्टिस पी.पी. साहू ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शीतकालीन अवकाश के दौरान विशेष सुनवाई कर यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल और पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को निर्देश दिया है कि 23 दिसंबर को विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में पीड़िता का सुरक्षित गर्भपात कराया जाए। साथ ही अदालत ने भ्रूण का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं। शादी का झांसा देकर किया गया दुष्कर्म मामला रायपुर जिले का है, जहां 16 वर्षीय नाबालिग लड़की को आरोपी युवक ने प्रेम जाल में फंसाकर शादी का वादा किया और उसके साथ दुष्कर्म किया। परिजनों को तब शक हुआ जब किशोरी के पेट का आकार असामान्य रूप से बढ़ने लगा। पूछताछ करने पर पीड़िता ने आपबीती बताई। इसके बाद परिजन उसे चिकित्सक के पास ले गए, जहां जांच में सामने आया कि किशोरी करीब 25 सप्ताह (6 महीने) की गर्भवती है। मेडिकल रिपोर्ट के बाद कोर्ट पहुंचा मामला पीड़िता की ओर से परिजनों के माध्यम से हाईकोर्ट में गर्भपात की अनुमति के लिए याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने 19 दिसंबर को बीआर अंबेडकर अस्पताल और जेएनएम मेडिकल कॉलेज को मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि गर्भपात की प्रक्रिया से पीड़िता को कोई गंभीर चिकित्सकीय खतरा नहीं है। अवकाश में भी हुई सुनवाई, कोर्ट ने दी राहत रिपोर्ट आने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने शीतकालीन अवकाश के बावजूद विशेष बेंच गठित कर सुनवाई की। सुनवाई के बाद अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए गर्भपात की अनुमति प्रदान कर दी। हाईकोर्ट की टिप्पणी— पीड़िता को मिले निर्णय की स्वतंत्रता हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दुष्कर्म पीड़िता को यह अधिकार और स्वतंत्रता मिलनी चाहिए कि वह स्वयं तय करे कि गर्भावस्था को जारी रखना है या समाप्त करना है। अदालत ने इसे पीड़िता के जीवन और भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय बताया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में होगा गर्भपात कोर्ट ने निर्देश दिया है कि गर्भपात की प्रक्रिया मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट, 1971 के तहत की जाए। यह प्रक्रिया दो पंजीकृत चिकित्सकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में संपन्न होगी। इसके साथ ही, भविष्य की जांच और ट्रायल को ध्यान में रखते हुए भ्रूण का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। पीड़िता को निर्धारित तिथि पर अस्पताल में उपस्थित होकर सभी औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया है।

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बिलासपुर: प्रेम विवाह से नाराज चाचा ने किया टंगिया से हमला, ससुर गंभीर रूप से घायल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में प्रेम विवाह को लेकर पारिवारिक विवाद हिंसक रूप ले चुका है। चकरभाठा थाना क्षेत्र के ग्राम कुंआ में एक युवक की शादी से नाराज युवती के चाचा ने उसके ससुर पर टंगिया से जानलेवा हमला कर दिया। घायल व्यक्ति ने थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। क्या है पूरा मामला? ग्राम कुंआ निवासी किसान मनोज कुर्रे के अनुसार, उनके बेटे अरमान ने गांव की युवती शशि से प्रेम विवाह किया था। यह शादी शशि के चाचा लक्ष्मण जगत को मंजूर नहीं थी और वह लंबे समय से रंजिश पाले हुए था। बुधवार दोपहर मनोज खेत से लौट रहे थे। जैसे ही वे लक्ष्मण जगत के घर के सामने पहुंचे, आरोपी ने उन्हें देखकर गाली-गलौज शुरू कर दी। मनोज के विरोध करने पर लक्ष्मण घर के भीतर गया, टंगिया निकालकर लाया और मनोज पर वार कर दिया। गंभीर रूप से घायल मनोज किसी तरह वहां से बचकर घर पहुंचे और बाद में परिवार के साथ थाने पहुंचे। पुलिस की कार्रवाई चकरभाठा पुलिस ने मनोज की शिकायत के आधार पर आरोपी लक्ष्मण जगत के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की तलाश जारी है और ग्रामीणों के बयान भी लिए जा रहे हैं। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है, जिसे नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस टीम निगरानी बढ़ा रही है।

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बिलासपुर में प्रार्थना सभा के दौरान बाइबिल मिलने पर हंगामा, बिना अनुमति कार्यक्रम; तीन पर FIR

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में प्रार्थना सभा के बहाने कथित धर्म परिवर्तन कराने का मामला सामने आया है। पचपेड़ी थाना क्षेत्र के ग्राम चिल्हाटी में आयोजित इस सभा में पुलिस को 30 से अधिक लोगों के पास बाइबिल मिली। आयोजन की सूचना पर बजरंग दल के सदस्यों ने विरोध जताया, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। ग्राम चिल्हाटी के अटल चौक निवासी अनिता नायक के घर बुधवार को यह प्रार्थना सभा रखी गई थी। यहां बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और युवतियां मौजूद थीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उपस्थित व्यक्तियों को लुभावने प्रस्ताव देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। विरोध के बाद पहुंची पुलिस प्रार्थना सभा की खबर मिलते ही बजरंग दल के नारायण पटेल सहित कई कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और आपत्ति जताई। विरोध बढ़ने की स्थिति बनी तो पचपेड़ी पुलिस भी स्थल पर पहुंची और भीड़ को शांत कराया। पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर पता चला कि कार्यक्रम के लिए बाहरी जिले से पास्टर बुलाया गया था, लेकिन किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी। बिना अनुमति सभा, तीन लोगों पर केस दर्ज पुलिस ने पहले आयोजक और पास्टर से अनुमति संबंधी दस्तावेज मांगे, परंतु कुछ भी प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद पुलिस ने अनिता नायक (32), अम्बद देवदास (52) निवासी बलौदाबाज़ार और जे. प्रभाकर राव (38) निवासी बलौदाबाज़ार को हिरासत में लिया।पूछताछ के बाद तीनों के खिलाफ धारा 299 और 3(5) BNS के तहत अपराध दर्ज किया गया है। सभा के बाद भोजन की व्यवस्था, प्रलोभन का आरोप स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि सभा के बाद भोजन की व्यवस्था भी की गई थी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को इकट्ठा किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे आयोजनों को लेकर गांव में भारी नाराज़गी है और भविष्य में इस तरह की गतिविधियाँ नहीं होने दी जाएँगी।

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छत्तीसगढ़ में लोहा कारोबारियों पर IT की बड़ी कार्रवाई, 50 स्थानों पर छापेमारी जारी

छत्तीसगढ़ में आयकर विभाग ने लोहा और स्टील से जुड़े कारोबारियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 50 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की है। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और रायगढ़ जिलों में स्पंज आयरन, स्टील रोलिंग मिल, पावर प्लांट संचालकों और रियल एस्टेट कारोबारियों के प्रतिष्ठानों पर टीमों ने दबिश दी। कार्रवाई के दौरान 100 से अधिक CRPF जवान सुरक्षा के लिए तैनात किए गए हैं। सभी ठिकानों पर वित्तीय दस्तावेज, लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की गहन जांच की जा रही है। जमीन खरीद-फरोख्त में शामिल कारोबारियों के घर और दफ्तर भी सर्च ऑपरेशन की सूची में हैं। 5 दिन पहले हुई थी ED की बड़ी रेड 30 नवंबर को मेडिकल कॉलेजों की मान्यता से जुड़े कथित रिश्वतखोरी मामले में ED ने देशभर के 8 राज्यों में छापे मारे थे, जिनमें रायपुर स्थित रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज भी शामिल था।इस दौरान ED ने मोबाइल फोन, DVR, हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव जैसे डिजिटल सबूत जब्त किए थे। कॉलेज के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी से पूछताछ भी की गई थी और बैंक खातों का विवरण मांगा गया था। सभी डिजिटल डिवाइस की जांच तकनीकी टीम कर रही है। 11 दिन पहले ACB–EOW ने 19 ठिकानों पर दी थी दबिश 24 नवंबर को ACB और EOW की टीमों ने शराब घोटाले और DMF फंड से जुड़े मामलों में संयुक्त कार्रवाई की थी। रायपुर, बिलासपुर, कोंडागांव, अंबिकापुर और दुर्ग में कुल 19 ठिकानों पर तड़के सुबह छापेमारी की गई। DMF मामले में हरपाल सिंह अरोड़ा और उनसे जुड़े ठेकेदारों के 11 ठिकानों पर सर्च की गई थी। वहीं शराब घोटाले में जेल में बंद अनिल टुटेजा और निरंजन दास के परिजनों से जुड़े रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर के कई स्थानों पर दबिश दी गई थी।

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