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छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।

राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले तीन दिनों तक राज्य के उत्तरी और मध्य हिस्सों के आठ जिलों में शीतलहर का असर बना रहेगा। राजधानी रायपुर में रात का न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। वहीं प्रदेश के सबसे ठंडे इलाकों में शामिल मैनपाट में तापमान 1.8 डिग्री तक गिर गया। अंबिकापुर में पारा 3.3 डिग्री, पेंड्रा में 7.6 डिग्री, दुर्ग और राजनांदगांव में 8 डिग्री तथा जगदलपुर में 8.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटों में प्रदेश का अधिकतम तापमान 29.1 डिग्री (जगदलपुर) और न्यूनतम तापमान 3.3 डिग्री (अंबिकापुर) रहा। ठंड के बढ़ते असर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बुजुर्गों, छोटे बच्चों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। ❄️ ठंड के कारण स्कूल बंद कड़ाके की ठंड को देखते हुए सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिलों में प्राइमरी स्कूलों को 10 जनवरी तक बंद कर दिया गया है। मिडिल, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल खुले रहेंगे, लेकिन दो पालियों में चलने वाले स्कूलों का समय बदल दिया गया है। अब पहली पाली सुबह 9:30 से 12:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 12:30 से शाम 4 बजे तक संचालित होगी। ⚠️ ठंड से जान का खतरा अंबिकापुर के श्रीगढ़ इलाके में नए साल की रात एक बुजुर्ग की ठंड से मौत हो गई। कम कपड़ों में खुले में सोने के कारण वे हाइपोथर्मिया की चपेट में आ गए। यह अंबिकापुर में ठंड से मौत का दूसरा मामला है। इससे पहले 11 दिसंबर को बस स्टैंड में सो रहे एक व्यक्ति की भी मौत हो चुकी है। 🏥 बच्चों की सेहत पर असर तेज ठंड का असर बच्चों पर भी साफ दिख रहा है। रायपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों में पिछले एक महीने में हाइपोथर्मिया के 400 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक नवजात और छोटे बच्चों का शरीर जल्दी ठंडा हो जाता है, जिससे उन्हें NICU और SNCU तक में भर्ती कराना पड़ रहा है। 🤒 अस्पतालों की OPD में बढ़ी भीड़ ठंड के चलते वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीज बढ़ गए हैं। अंबेडकर अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 2000 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभाग में सबसे ज्यादा भीड़ है। 🧊 क्या है हाइपोथर्मिया? हाइपोथर्मिया एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान सामान्य 37 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। डॉक्टरों के अनुसार ठंडी हवा या पानी के संपर्क में आने से शरीर तेजी से गर्मी खो देता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह स्थिति घातक साबित हो सकती है। 🔥 नगर निगम ने जलवाए अलाव शीतलहर के बढ़ते असर को देखते हुए रायपुर नगर निगम ने शहर के 12 से अधिक स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था की है। मेयर मीनल चौबे और निगम कमिश्नर विश्वदीप के निर्देश पर अधिकारियों को रात में फील्ड में रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करने को कहा गया है। 🦟 बदलते मौसम में मलेरिया का खतरा मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दिन में अधिक और रात में कम तापमान मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल स्थिति बनाता है। अगले कुछ दिनों में ग्रामीण और जंगल क्षेत्रों में मलेरिया का खतरा बढ़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरदानी के उपयोग, पानी जमा न होने देने और समय पर जांच कराने की सलाह दी है। 🛡️ ठंड से बचाव के उपाय डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के मौसम में भाप लेना, नमक-पानी से गरारे करना, विटामिन-C युक्त आहार, अदरक-तुलसी की चाय और गर्म कपड़ों का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और सर्दी-जुकाम व वायरल संक्रमण से बचाव होता है।

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कवासी लखमा से मुलाकात के बाद भूपेश बघेल का हमला, ईडी–ईओडब्ल्यू की कार्रवाई पर उठाए सवाल

रायपुर। रायपुर सेंट्रल जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री और वरिष्ठ आदिवासी नेता कवासी लखमा से मुलाकात के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना ठोस सबूतों के लखमा और अन्य लोगों को परेशान किया जा रहा है और यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। मीडिया से बातचीत में भूपेश बघेल ने कहा कि फिलहाल कवासी लखमा का स्वास्थ्य ठीक है और उन्हें जेल में जरूरी दवाइयां मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछली मुलाकात के दौरान लखमा को सीने और पैर में दर्द की शिकायत थी, जिसके बाद उन्होंने डीजीपी को पत्र लिखकर मेडिकल जांच की मांग की थी। इसके बाद जेल प्रशासन द्वारा जांच कर इलाज कराया गया। जांच एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव का आरोप भूपेश बघेल ने कहा कि सबसे गंभीर विषय यह है कि जांच एजेंसियों के पास ठोस और तथ्यात्मक सबूतों का अभाव है, इसके बावजूद लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इसे केवल परेशान करने और दबाव बनाने की रणनीति बताया। पूर्व मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अदालत के निर्देश पर अपनी फाइनल रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है, लेकिन आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) अब तक रिपोर्ट दाखिल नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि बार-बार प्रोडक्शन वारंट जारी कर कवासी लखमा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। यह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि आदिवासी नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिश का हिस्सा है। ‘एजेंसियां खुद को अदालत से ऊपर समझ रही हैं’ भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि कुछ जांच एजेंसियां खुद को अदालत से ऊपर मानने लगी हैं, जो लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया जाएगा, तो यह न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। डिप्टी सीएम अरुण साव के बयान पर तंज डिप्टी सीएम अरुण साव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा नेताओं के मुंह से अनजाने में सच्चाई निकल रही है। उन्होंने कहा कि अरुण साव, केदार कश्यप और रामविचार नेताम जैसे नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि कवासी लखमा एक निर्दोष आदिवासी नेता हैं, जो पिछले एक साल से जेल में बंद हैं। भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि जब खुद भाजपा नेता उन्हें निर्दोष मान रहे हैं, तो फिर ईओडब्ल्यू की कार्रवाई आखिर किस आधार पर जारी है। आदिवासी राजनीति से जुड़ा मामला राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कवासी लखमा का मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि आदिवासी राजनीति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। भूपेश बघेल के लगातार आक्रामक बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस इस मुद्दे को आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक विषय बना सकती है। आदिवासी समाज में भी इस कार्रवाई को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।

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रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे भूपेश बघेल, बोले– अगर मेरे हाथ में होता तो बेटा जेल ही नहीं जाता

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुक्रवार को रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे, जहां उन्होंने शराब घोटाले के मामले में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से मुलाकात की। जेल से बाहर निकलने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए भूपेश बघेल ने जांच एजेंसियों और भाजपा पर तीखा हमला बोला। बघेल ने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियां राजनीतिक दबाव में काम कर रही हैं। उन्होंने अपने बेटे चैतन्य बघेल की जमानत को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि उन्होंने अपने बेटे को जेल से छुड़वा लिया, जबकि हकीकत यह है कि उसे अदालत से जमानत मिली है। पूर्व सीएम ने कहा, “अगर मेरे हाथ में होता, तो मेरा बेटा जेल जाता ही नहीं। कोर्ट ने जांच एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई, तभी जाकर उसे जमानत मिली।” कवासी लखमा को लंबे समय तक जेल में रखने की कोशिश भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि कवासी लखमा को जानबूझकर लंबे समय तक जेल में रखने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में समय पर जवाब दाखिल नहीं किया, जिससे मामले का फैसला टल गया। उन्होंने दावा किया कि यदि एजेंसी समय पर जवाब पेश करती, तो 17 दिसंबर को ही निर्णय आ सकता था। लेकिन जवाब रोका गया ताकि लखमा को जेल में रखा जा सके। भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि उनके बयानों से सच्चाई सामने आ रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब कवासी लखमा को निर्दोष बताया जा रहा है, तो फिर EOW और ED की कार्रवाई क्यों जारी है। साथ ही भाजपा नेताओं को “घड़ियाली आंसू” न बहाने की सलाह दी। कौन हैं कवासी लखमा कवासी लखमा बस्तर अंचल के प्रमुख आदिवासी नेताओं में गिने जाते हैं। वे सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं। 2013 के दरभा घाटी नक्सली हमले में वे उन नेताओं में शामिल थे, जो जीवित बच पाए थे। 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद उन्हें आबकारी मंत्री बनाया गया था। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार के मंत्रियों में से गिने-चुने नेता ही अपनी सीट बचा पाए, जिनमें कवासी लखमा भी शामिल रहे। क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। एजेंसी का दावा है कि करीब 3,200 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ है। इस मामले में एसीबी में दर्ज FIR में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों के नाम शामिल हैं। ED के अनुसार, पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया।

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दुर्ग में शिवनाथ नदी पर ठेकेदार का 30 साल पुराना अवैध एनीकट ध्वस्त, पुलिस बल की मौजूदगी में चली बुलडोजर कार्रवाई

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिवनाथ नदी पर वर्षों से चल रही एक बड़ी अनियमितता सामने आई है। ईंट-भट्टा व्यवसाय से जुड़े ठेकेदार ने अपने निजी फायदे के लिए नदी पर अवैध एनीकट (अस्थायी पुल) का निर्माण कर लिया था, जिसकी जानकारी प्रशासन को करीब 30 साल बाद मिली। मामला सामने आते ही प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए सोमवार (5 जनवरी) को पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण को हटवा दिया। जानकारी के मुताबिक, ठेकेदार नीलकंठ पांडे ने अपने ईंट-भट्टे के लिए कच्चा माल लाने-ले जाने की सुविधा के उद्देश्य से शिवनाथ नदी पर मिट्टी और पाइप डालकर अस्थायी पुल बना लिया था। यह पुल पथरिया और रवेलीडीह पंचायत के बीच बनाया गया था, जबकि इस क्षेत्र में पहले से ही वैकल्पिक पुल मौजूद हैं। 10 किलोमीटर की दूरी बचाने बनाया निजी रास्ता स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के अनुसार, ठेकेदार ने करीब 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर बचाने के लिए नदी के ऊपर ही निजी रास्ता तैयार कर लिया था। हैरानी की बात यह है कि उसी क्षेत्र में एक पुराना एनीकट और एक नया पक्का पुल पहले से बना हुआ है, इसके बावजूद ठेकेदार ने अपने फायदे के लिए अवैध निर्माण कर लिया। बताया जा रहा है कि इसी तरह पिछले लगभग तीन दशकों से शिवनाथ नदी पर अस्थायी बांध बनाकर ईंट-भट्टे का संचालन किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान ठेकेदार ने किया विरोध सोमवार को जब प्रशासन ने एनीकट हटाने की कार्रवाई शुरू की, तो दो थानों की पुलिस फोर्स मौके पर तैनात की गई थी। कार्रवाई के दौरान ठेकेदार ने विरोध शुरू कर दिया और जेसीबी मशीन को भी बंद करवा दिया। इसके बाद पुलिस और तहसीलदार की मौजूदगी में दोबारा मशीन चालू कर एक छोर से पुल तोड़ने की कार्रवाई की गई। दोनों पंचायतों के सरपंचों ने जताया विरोध पथरिया पंचायत के सरपंच मीत कुमार निषाद ने बताया कि ईंट-भट्टा ठेकेदार ने पंचायत से किसी तरह की अनुमति नहीं ली थी। वर्षों से मिट्टी का बांध बनाकर नदी का उपयोग किया जा रहा था, जिससे ठेकेदार को लाखों रुपये का फायदा हो रहा था। वहीं रवेलीडीह पंचायत के सरपंच माधोलाल देवांगन ने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने अपने निजी लाभ के लिए नदी पर बांध बनाया। इससे ईंट और मिट्टी के परिवहन में उसे सुविधा मिलती थी। उन्होंने यह भी कहा कि ठेकेदार ने पंचायत की जमीन किराए पर ली है, लेकिन उसका किराया भी नहीं दिया जा रहा है। ठेकेदार का दावा, प्रशासन का सख्त रुख ठेकेदार नीलकंठ पांडे का कहना है कि नदी में बनाए गए बांध में पानी के बहाव के लिए पाइप लगाए गए थे और इसका उपयोग ग्रामीण किसान भी करते थे। उनका दावा है कि नियमों के तहत ही यह व्यवस्था की गई थी और इससे सभी को फायदा हो रहा था। हालांकि प्रशासन ने इस दावे को खारिज करते हुए कार्रवाई जारी रखी। कलेक्टर बोले—बिना अनुमति नदी में निर्माण गलत दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि शिवनाथ नदी में मिट्टी डालकर रास्ता बनाना नियमों के खिलाफ है। इस निर्माण के लिए किसी भी तरह की अनुमति नहीं ली गई थी। जल संसाधन विभाग और एसडीएम की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की है। जो हिस्सा अभी बचा है, उसे भी हटाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि नदी पर इस तरह के अवैध बांध से कभी भी गंभीर दुर्घटना हो सकती थी, इसलिए कार्रवाई जरूरी थी।

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डिप्टी सीएम अरुण साव पर टिप्पणी को लेकर भूपेश बघेल घिरे, साहू समाज ने जताया विरोध, 10 दिन में माफी की मांग

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा उप मुख्यमंत्री अरुण साव को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भूपेश बघेल के बयान से साहू समाज में भारी नाराजगी देखी जा रही है। समाज के विभिन्न संगठनों ने इसे अपमानजनक बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की है। बिलासपुर में साहू समाज ने इस मामले को लेकर एसएसपी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि भूपेश बघेल ने 10 दिनों के भीतर माफी नहीं मांगी, तो प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा। जंगल की कहानी से कसा था तंज दरअसल, बिलासपुर दौरे के दौरान भूपेश बघेल ने एक कथित उदाहरण देते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि जंगल में राजा चुनने की प्रक्रिया में सभी जानवरों ने मिलकर बंदर को राजा बना दिया। यह टिप्पणी सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से वायरल हुई, जिसे साहू समाज ने सीधे तौर पर अरुण साव का अपमान बताया। बयान सामने आने के बाद प्रदेश के कई जिलों में साहू समाज के लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ प्रदर्शन किए और कुछ जगहों पर पुतला दहन भी किया गया। 29 दिसंबर को बिलासपुर में दिया गया था बयान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 29 दिसंबर 2025 को बिलासपुर के लिंगियाडीह क्षेत्र पहुंचे थे। यहां वे बस्ती हटाने के विरोध में चल रहे आंदोलन के समर्थन में शामिल हुए थे। इसी दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विधायक अमर अग्रवाल पर तीखी टिप्पणियां की थीं। उन्होंने लिंगियाडीह क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे और स्थानीय लोगों से आंदोलन जारी रखने की अपील की थी। इसी भाषण के दौरान उन्होंने अरुण साव को लेकर विवादित टिप्पणी की, जिसे अब समाज विशेष के अपमान के रूप में देखा जा रहा है। जशपुर में सौंपा गया ज्ञापन जशपुर जिले में भी साहू समाज ने पूर्व मुख्यमंत्री के बयान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समाज के प्रतिनिधियों ने जशपुरनगर में एसएसपी शशि मोहन सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए 10 दिनों के भीतर माफी की मांग की है। जिला साहू संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि उप मुख्यमंत्री अरुण साव साहू समाज के प्रतिनिधि हैं और एक संवैधानिक पद पर आसीन हैं। ऐसे में उनके खिलाफ इस तरह की टिप्पणी न केवल व्यक्तिगत बल्कि पूरे समाज का अपमान है। सक्ती जिले में भी आक्रोश सक्ती जिले में भी 5 जनवरी को जिला साहू संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की। जिला अध्यक्ष डॉ. खिलावन साहू ने प्रेस वार्ता में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री की टिप्पणी असंवेदनशील और निंदनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि साहू समाज अपनी गरिमा से समझौता नहीं करेगा और यदि माफी नहीं मांगी गई तो संगठित रूप से आंदोलन किया जाएगा।

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दुर्ग: पेशाब करने पर विवाद, सगनी पुन्नी मेला से लौट रहे दो युवकों पर चाकू से हमला; 13 आरोपी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मामूली बात को लेकर हुई कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया। धमधा थाना क्षेत्र में सगनी पुन्नी मेला देखकर लौट रहे दो युवकों पर गांव के आउटर में चाकू से हमला कर दिया गया। इस घटना में दोनों युवक घायल हो गए। पुलिस ने मामले में तेजी दिखाते हुए 4 जनवरी को सभी 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें 11 बालिग और 2 नाबालिग शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक घायलों की हालत अब खतरे से बाहर है। मेला से लौटते वक्त हुई वारदात यह घटना 3 जनवरी की शाम करीब 5:30 बजे की है। जानकारी के अनुसार, दोनों युवक सगनी पुन्नी मेला देखकर अपने गांव लौटे थे। गांव पहुंचने के बाद घर जाने से पहले वे गांव के बाहरी हिस्से में पेशाब करने के लिए रुके। इसी दौरान वहां पहले से मौजूद युवकों के एक समूह ने इस पर आपत्ति जताई और बातों-बातों में विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते कहासुनी मारपीट और चाकूबाजी में बदल गई। एकजुट होकर किया हमला, आरोपी मौके से फरार पुलिस के अनुसार, मौके पर मौजूद आरोपी युवक एक समूह में खड़े थे और वे नंदिनी थाना क्षेत्र के चार अलग-अलग गांवों के निवासी हैं। सभी आरोपी भी मेला देखकर लौट रहे थे। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने मिलकर दोनों युवकों पर चाकू से वार कर दिए, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां एक युवक को प्राथमिक उपचार के बाद उसी दिन छुट्टी दे दी गई, जबकि दूसरे की हालत भी अब स्थिर बताई जा रही है। दो नाबालिग समेत सभी आरोपी गिरफ्तार घटना की सूचना मिलते ही धमधा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तफ्तीश के बाद पुलिस ने 13 आरोपियों की पहचान कर सभी को गिरफ्तार कर लिया। नाबालिग आरोपियों के खिलाफ बाल न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है और आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है।

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दुर्ग: नशा मुक्ति केंद्र से ही नशे की दवाएं बाहर ले जाने का आरोप, BJP महिला मोर्चा ने पकड़ा मामला

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित सुपेला के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के नशा मुक्ति (OST) केंद्र से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। नशा छुड़ाने के लिए संचालित इस केंद्र में दी जाने वाली दवाओं के दुरुपयोग का आरोप लगा है। भाजपा जिला महिला मोर्चा अध्यक्ष स्वीटी कौशिक ने शनिवार को अस्पताल परिसर में एक मरीज को नशे की दवाएं बाहर ले जाते हुए पकड़ने का दावा किया है। स्वीटी कौशिक का कहना है कि OST सेंटर में तय नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। नियमानुसार मरीजों को नशा मुक्ति की दवाएं अस्पताल परिसर में ही खिलाई जानी चाहिए, लेकिन यहां दवाएं मरीजों को बाहर ले जाने के लिए दी जा रही थीं। नशे की दवाएं बरामद बताया गया कि चार मरीजों के पास से इव्लिन (Evelyn) की शीशियां, इंजेक्शन में उपयोग होने वाली दवा और OST पाउडर की बड़ी मात्रा बरामद की गई। आरोप है कि इन दवाओं का इस्तेमाल मरीज इंजेक्शन के जरिए नशा करने के लिए कर रहे थे। लंबे समय से स्थानीय लोगों में नाराजगी भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष ने कहा कि सुपेला क्षेत्र में यह OST सेंटर लंबे समय से विवादों में है। स्थानीय लोग लगातार इसे हटाने या अन्य स्थान पर शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं। केंद्र के आसपास नशाखोरी, हंगामा और असामाजिक गतिविधियों के कारण अस्पताल आने वाले मरीजों, विशेषकर महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। निरीक्षण के दौरान पकड़ा गया मामला जानकारी के अनुसार, रायपुर से डॉक्टर सोनवानी OST सेंटर का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इसी दौरान स्वीटी कौशिक भी अपने समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचीं और एक मरीज को बड़ी मात्रा में दवा बाहर ले जाते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। यह दवाएं तत्काल सेवन के लिए थीं, जिन्हें बाहर ले जाना नियमों के खिलाफ बताया गया है। शिकायत दर्ज, जांच शुरू OST सेंटर के डॉक्टर और स्टाफ संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। स्वीटी कौशिक ने पूरे मामले को एक संगठित लापरवाही बताते हुए सुपेला थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। भाजपा महिला मोर्चा ने प्रशासन से मांग की है कि OST सेंटर को या तो स्थानांतरित किया जाए या सख्त निगरानी में संचालित किया जाए, ताकि नशा मुक्ति अभियान अपने उद्देश्य से भटके नहीं।

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शराब घोटाला मामला: चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत, DGP को कड़ी फटकार

रायपुर।छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और ACB/EOW द्वारा दर्ज मामलों में हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है। हाईकोर्ट ने जमानत आदेश जारी करते हुए जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने खास तौर पर सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल को गिरफ्तार न किए जाने को लेकर नाराजगी जताई और इसे कानून का ‘चुनिंदा इस्तेमाल’ बताया। सह-आरोपी पर कार्रवाई नहीं, जांच की पारदर्शिता पर सवाल हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष लक्ष्मी नारायण बंसल के बयान पर भरोसा कर रहा है, लेकिन उसके खिलाफ स्थायी वारंट होने के बावजूद उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। कोर्ट के अनुसार, आरोपी को खुला छोड़ना जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने इस लापरवाही को “Grave Violation of Law” करार देते हुए राज्य के DGP को व्यक्तिगत रूप से मामले की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भविष्य में ऐसी चूक न हो, इसके लिए सभी पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने को कहा गया है। जुलाई से जेल में थे चैतन्य बघेल चैतन्य बघेल 18 जुलाई से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। ED ने उन्हें पिछले साल मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया था, जबकि ACB/EOW ने भ्रष्टाचार मामले में सितंबर में तब गिरफ्तार किया जब वे पहले से जेल में थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। ED और ACB के आरोप ED का आरोप है कि चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के संरक्षक थे और उन्होंने करीब 1000 करोड़ रुपए के लेनदेन को संभाला।वहीं ACB का दावा है कि उन्हें 200 से 250 करोड़ रुपए की अवैध राशि मिली और पूरे घोटाले की रकम 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है। भूपेश बघेल का बयान बेटे को जमानत मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। आज सत्य की जीत हुई है।” जमानत की खबर के बाद समर्थकों ने पटाखे फोड़कर खुशी जताई। बचाव पक्ष की दलील चैतन्य बघेल के वकील फैजल रिजवी ने कहा कि गिरफ्तारी केवल सह-आरोपी के बयान के आधार पर की गई, जो खुद नॉन-बेलेबल वारंट का आरोपी है और खुलेआम घूम रहा था।उन्होंने दावा किया कि चैतन्य बघेल ने जांच में पूरा सहयोग किया, बावजूद इसके उन्हें कभी समन नहीं भेजा गया और सीधे गिरफ्तार कर लिया गया। क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला? ED की जांच के अनुसार, भूपेश सरकार के कार्यकाल में शराब सिंडिकेट के जरिए— इस कथित सिंडिकेट में तत्कालीन IAS अधिकारी, आबकारी विभाग के अफसर और कारोबारी शामिल बताए गए हैं।

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छत्तीसगढ़ में बिजली महंगी होने के आसार, पावर कंपनी ने 24% टैरिफ बढ़ाने का दिया प्रस्ताव

रायपुर।छत्तीसगढ़ में नए वित्तीय वर्ष 2026-27 से बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लग सकता है। छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी ने राज्य विद्युत नियामक आयोग में याचिका दाखिल कर करीब 6 हजार करोड़ रुपये के घाटे का दावा किया है। इसी के आधार पर कंपनी ने औसतन 24 प्रतिशत तक बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। अगर नियामक आयोग पावर कंपनी के घाटे को आंशिक या पूरी तरह से स्वीकार करता है, तो प्रदेश के घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं की बिजली बिल में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। दिसंबर में दाखिल की गई याचिका नियमों के अनुसार पावर कंपनी को हर साल दिसंबर में आगामी वित्तीय वर्ष के टैरिफ निर्धारण के लिए याचिका दाखिल करनी होती है। इस बार कंपनी ने 31 दिसंबर की समय-सीमा से एक दिन पहले 30 दिसंबर को ही आयोग में अपनी याचिका प्रस्तुत कर दी। याचिका में कंपनी ने 2026-27 के लिए अनुमानित आय, खर्च, संभावित लाभ और पूर्व वर्षों के घाटे का विस्तृत ब्यौरा दिया है। कंपनी का कहना है कि नए सत्र में होने वाले लाभ को पुराने घाटे में समायोजित करने के बाद भी लगभग 6 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व की जरूरत पड़ेगी। 24% तक दर बढ़ाने का सुझाव पावर कंपनी ने याचिका के साथ नया टैरिफ प्लान भी जमा किया है, जिसमें बिजली दरों में औसतन 24 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव शामिल है। अब इस पर राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा गहन समीक्षा की जाएगी। प्रक्रिया के तहत आम उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों से दावा-आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। इसके बाद जनसुनवाई आयोजित होगी, जिसमें लोग अपनी राय और आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। सभी पक्षों को सुनने के बाद आयोग अंतिम टैरिफ का फैसला करेगा। पहले भी किया था घाटे का दावा यह पहला मौका नहीं है जब पावर कंपनी ने बड़े घाटे का हवाला दिया हो। पिछले वित्तीय वर्ष में भी कंपनी ने करीब 5 हजार करोड़ रुपये के घाटे का दावा किया था। हालांकि, नियामक आयोग ने उस दावे को पूरी तरह स्वीकार न करते हुए घाटा केवल 500 करोड़ रुपये ही माना था। उस समय कंपनी ने 28,397.64 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता बताई थी, लेकिन आयोग ने केवल 25,636.38 करोड़ रुपये को ही मंजूरी दी थी। तब मामूली बढ़ोतरी पर लगी थी मुहर यदि पिछली बार कंपनी का पूरा घाटा मान लिया जाता, तो बिजली दरों में लगभग 20 प्रतिशत तक वृद्धि होती। लेकिन आयोग के हस्तक्षेप के चलते बिजली दरें दो प्रतिशत से भी कम बढ़ाई गई थीं। अब एक बार फिर सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार नियामक आयोग पावर कंपनी के घाटे को कितनी मान्यता देता है। इसी पर तय होगा कि छत्तीसगढ़ के लोगों को आने वाले दिनों में बिजली कितनी महंगी पड़ेगी।

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छत्तीसगढ़ में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के प्रवचन और भूपेश बघेल की प्रतिक्रिया पर नया रूप

छतरपुर जिले के बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हाल ही में अपने प्रवचन के दौरान कहा कि उनका दरबार लगाना कुछ लोगों को अंधविश्वास लग सकता है, लेकिन चादर चढ़ाना और मोमबत्ती जलाना विश्वास माना जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आस्था के पैमाने अलग-अलग क्यों बनाए जाते हैं। भिलाई के जयंती स्टेडियम में धीरेंद्र शास्त्री की हनुमान कथा का सोमवार को आखिरी दिन था। इस दौरान उन्होंने सरकारी विमान से यात्रा करने को लेकर कहा कि “सनातन जगाने वाला व्यक्ति हवाई जहाज पर क्यों नहीं बैठ सकता?” उन्होंने अपने तंज में कहा कि यह सोच समझ से परे है। धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि जब वे प्लेन से भिलाई पहुंचे, तो उनके साथ मंत्री खुशवंत साहेब भी थे। उन्होंने कहा कि बहुत लोग उनके आने पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन असली दोषी वे नहीं हैं, जो लाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “बाबा भी देश का आदमी है, विदेशी नहीं। देश को लूटने वाले घूम सकते हैं, लेकिन सनातन जगाने वाला, कैंसर अस्पताल बनाने वाला, बेटियों की शादी करवाने वाला और नशा छुड़वाने वाला व्यक्ति हवाई जहाज पर नहीं बैठ सकता, यह कैसी बुद्धि है।” कथा के दौरान उन्होंने कुछ घटनाओं का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि एक भक्त उनकी गाड़ी के सामने आ गया और उसकी शादी नहीं हो रही थी। साथ ही उन्होंने बताया कि किसी लड़की ने उनसे मिलने के लिए अपनी नस काट ली थी। उन्होंने भावुक होकर कहा कि बहनजी से प्रार्थना करेंगे कि ऐसा न करें। धर्मांतरण के मुद्दे पर शास्त्री ने कहा कि कुछ लोग भोले-भाले हिंदुओं को लालच देकर और ढोंग करके उनका धर्म बदलवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी को दूसरे धर्म के लोग अच्छे लगते हैं तो वे वहां जाएं, अपने देश में परेशान न करें। पुलिसकर्मियों द्वारा प्रणाम करने पर उन्होंने कहा कि वर्दी के अंदर भी इंसान होता है, उसकी भी आस्था होती है। कोई अपने माता-पिता या गुरु को प्रणाम करे तो इसमें गलत क्या है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 29 दिसंबर को बिलासपुर में मीडिया से बातचीत में कहा कि कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री और प्रदीप मिश्रा दोनों चंदा लेना बंद कर दें और प्रवचन करते रहें। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार चाहे उन्हें सम्मान दे, झूला झुलाए या कंधों पर बिठाए, लेकिन सरकार के पैसों का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। भूपेश ने कहा कि शास्त्री को समझ नहीं है और उन्होंने कई विवादित बयान दिए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि छत्तीसगढ़ के साधु-संत उनसे शास्त्रार्थ करें और दोनों कथावाचक चंदा लेना बंद करें।

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