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भगवा वेश में साधु, सवाल पूछते ही टूटा भेष: दुर्ग में भीख मांग रहा युवक मुस्लिम निकला, वीडियो वायरल

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साधु का भेष धारण कर घर-घर भीख मांग रहे एक युवक की पहचान पर उस वक्त सवाल खड़े हो गए, जब स्थानीय लोगों ने उससे धार्मिक प्रश्न पूछे। युवक भगवा कपड़े पहनकर तंबूरा बजाते हुए “राम-राम” और “जय श्रीराम” का उद्घोष कर रहा था, लेकिन सवालों के जवाब नहीं दे सका और घबरा कर रोने लगा। बाद में जांच में सामने आया कि युवक मुस्लिम समुदाय से है और उत्तर प्रदेश का निवासी बताया जा रहा है। मामला जामुल थाना क्षेत्र का है। सवालों पर घबराया, गायत्री मंत्र सुनाने को कहा तो रो पड़ा स्थानीय लोगों को युवक के हाव-भाव पर शक हुआ। शंका दूर करने के लिए उससे पूछा गया कि भगवान राम के पिता का नाम क्या था, लेकिन वह जवाब नहीं दे सका। इसके बाद लंका किसने जलाई—इस प्रश्न पर भी वह चुप रहा। जब उससे गायत्री मंत्र सुनाने को कहा गया, तो वह घबरा गया और रोते हुए छोड़ देने की गुहार लगाने लगा। बिना एंट्री दरगाह में रुका, पहचान पत्र नहीं मिले जानकारी के अनुसार, युवक बिना किसी एंट्री के एक दरगाह में ठहरा हुआ था। उसके पास कोई वैध पहचान पत्र भी नहीं मिला। पहले उसने अपना नाम यादव बताया, लेकिन पुलिस पूछताछ में उसने अपना नाम हवलदार, पिता का नाम मुस्तफा बताते हुए खुद को मुस्लिम बताया। इसके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया। निशानदेही पर दूसरा व्यक्ति भी हिरासत में पूछताछ के दौरान युवक ने अपने एक साथी के बारे में जानकारी दी, जो मौर्या टॉकिज के पास एक मजार के आसपास ठहरा होने की बात कही गई। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर एक अन्य व्यक्ति को भी हिरासत में लिया है। पकड़े जाने पर लौटाने लगा भीख की रकम हिंदू संगठन की प्रतिनिधि ज्योति शर्मा ने बताया कि पूछताछ के दौरान युवक रोने लगा और मांगे हुए पैसे लौटाने लगा। संगठन का दावा है कि यह इकलौता मामला नहीं हो सकता, बल्कि साधु का भेष धारण कर भीख मांगने वाला 5 लोगों का समूह सक्रिय हो सकता है। बताया जा रहा है कि सभी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और खुद को प्रतापगढ़ का निवासी बताते हैं। पुलिस जांच जारी सीएसपी छावनी प्रशांत कुमार ने बताया कि सूचना मिलने पर कार्रवाई की गई है। संदेह के आधार पर दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

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मनरेगा को खत्म करने की साजिश कर रही बीजेपी सरकार: गांधी प्रतिमा के सामने उपवास, कांग्रेस का आरोप

दुर्ग-भिलाई। छत्तीसगढ़ में मनरेगा को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान के तहत रविवार से दुर्ग-भिलाई में कांग्रेस ने सार्वजनिक विरोध की शुरुआत कर दी है। शहर और ग्रामीण जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता दुर्ग के गांधी प्रतिमा स्थल पर सुबह से शाम तक उपवास पर बैठे रहे। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर मजदूर विरोधी नीतियां अपनाने और मनरेगा को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर करने का आरोप लगाया। 25 फरवरी तक चलेगा आंदोलन दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस जिला अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने बताया कि यह आंदोलन 25 फरवरी तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत ग्रामीणों को 100 दिन का रोजगार देने की कानूनी गारंटी थी, लेकिन भाजपा सरकार ने इस गारंटी के साथ छल किया है। उनका आरोप है कि बीते 11 वर्षों में मजदूरों को औसतन सिर्फ 38 दिन का काम मिला है और “गारंटी” शब्द को ही कानून से हटाने की कोशिश की जा रही है। हर साल घट रहे मानव दिवस राकेश ठाकुर ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि दुर्ग जिले में मनरेगा के मानव दिवस लगातार घट रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह साफ संकेत है कि सरकार मनरेगा को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पहले इस योजना में केंद्र सरकार का पूरा योगदान था, लेकिन अब इसे 60:40 कर दिया गया है, जिससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। सरकारी खजाने पर बढ़ाया जा रहा दबाव शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल ने कहा कि कांग्रेस मजदूरों और किसानों के हक की लड़ाई लड़ रही है। मनरेगा में लगातार कटौती कर राज्य सरकार के अंशदान को बढ़ाया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ेगा और इसका सीधा नुकसान मजदूरों को होगा। बीजेपी अमीरों की पार्टी: कांग्रेस भिलाई जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार और काम न मिलने पर भत्ता दिया जाता था। अब न सिर्फ योजना का स्वरूप बदला जा रहा है, बल्कि बजट में भी कटौती की गई है। उन्होंने भाजपा को अमीरों की पार्टी बताते हुए कहा कि यह मजदूर विरोधी सोच का परिणाम है, जिसके खिलाफ कांग्रेस सड़कों पर है। 125 दिन का वादा भी जुमला: साहू कांग्रेस नेता राजेंद्र साहू ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान में मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा की थी, लेकिन भाजपा सरकार मनरेगा कानून की मूल भावना को खत्म कर रही है। उन्होंने 125 दिन रोजगार के वादे को भी 15 लाख और 2 करोड़ नौकरियों की तरह जुमला करार दिया। योजना को खत्म करने का आरोप कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने की कोशिश केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों के अधिकारों पर सीधा हमला है। पार्टी ने VB-G RAM G योजना का हवाला देते हुए कहा कि इससे मनरेगा का संवैधानिक अधिकार कमजोर होगा और ठेकेदारी व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

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मुनाफे का झांसा, फर्जी ऐप का जाल: दुर्ग में शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 24 लाख की साइबर ठगी

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शेयर ट्रेडिंग और निवेश में भारी मुनाफे का लालच देकर करीब 24 लाख रुपये की साइबर ठगी के दो मामले सामने आए हैं। पहले मामले में फर्जी शेयर-ट्रेडिंग ऐप के जरिए एक युवक से 13.90 लाख रुपये ठगे गए, जबकि दूसरे मामले में QR कोड और लिंक के माध्यम से 11.15 लाख रुपये की ठगी की गई। दोनों मामलों में पीड़ितों की शिकायत पर साइबर थाना दुर्ग में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। व्हाट्सऐप लिंक से शुरू हुआ फर्जी ट्रेडिंग का खेल खुर्सीपार भिलाई निवासी मनीष कुमार गजपाल (39) ने बताया कि नवंबर 2025 में उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सऐप मैसेज आया। इसमें ट्रेडिंग ग्रुप जॉइन करने का लिंक भेजा गया। लिंक पर क्लिक करने पर वे “Stock Flights D2” नामक व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़े, जहां लगातार मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा किए जा रहे थे। दिसंबर 2025 में ग्रुप के निर्देश पर उनसे GTSS LLC नामक ऐप इंस्टॉल कराया गया, जिसमें निवेश और कथित मुनाफा दिखाया जाता था। भरोसा दिलाने के लिए शुरुआती तौर पर 50 हजार रुपये का एक बार विड्रॉल भी कराया गया। इसके बाद अलग-अलग तिथियों में कई बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई। 31 दिसंबर से 6 जनवरी के बीच पीड़ित से कुल 13.90 लाख रुपये जमा कराए गए। जब उन्होंने रकम निकालने की कोशिश की, तो “आईपीओ पेंडिंग” बताकर और पैसे जमा करने का दबाव बनाया गया। लगातार भुगतान के बावजूद रकम नहीं मिलने पर पीड़ित को ठगी का शक हुआ और उन्होंने 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। QR कोड और लिंक से दूसरी ठगी, GST के नाम पर मांग दूसरा मामला कोहका भिलाई क्षेत्र का है। पीड़ित शुभम जायसवाल (29) को 20 दिसंबर 2025 को एक अज्ञात व्हाट्सऐप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को “ब्रड सिक्योरिटी” कंपनी का प्रतिनिधि बताया और निवेश पर मोटे मुनाफे का ऑफर दिया। लिंक भेजकर QR कोड के जरिए ट्रांजेक्शन कराए गए। शुरुआत में 10 हजार रुपये निवेश पर 5 हजार रुपये का मुनाफा दिखाकर भरोसा दिलाया गया। इसके बाद 23 दिसंबर से 6 जनवरी 2026 के बीच अलग-अलग बैंक खातों और QR कोड के माध्यम से 11.15 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। इस दौरान कुछ रकम विड्रॉल भी कराई गई, जिससे ठगों पर भरोसा और बढ़ गया। 7 जनवरी 2026 को लिंक आईडी में करीब 16 लाख रुपये दिखने लगे। जब पीड़ित ने 5 लाख रुपये विड्रॉल करने की कोशिश की, तो 18% GST जमा करने का मैसेज आया। शक होने पर उन्होंने भुगतान नहीं किया। बाद में संपर्क करने पर एफआईआर की धमकी दी गई, जिससे ठगी का खुलासा हुआ। साइबर पुलिस कर रही जांच दोनों मामलों में साइबर थाना दुर्ग ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 318(2), 318(4) और 336(3) के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, ऐप्स, लिंक और डिजिटल ट्रांजेक्शन की तकनीकी जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में संगठित साइबर ठग गिरोह की आशंका जताई जा रही है।

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दुर्ग–पाटन मार्ग पर दर्दनाक हादसा: हाईवा की टक्कर से युवक की मौत, इलाज के दौरान तोड़ा दम; लापरवाही का केस दर्ज

दुर्ग–पाटन मुख्य मार्ग पर एक भीषण सड़क हादसे में युवक की जान चली गई। दैमार गांव के पास हाईवा ट्रक की टक्कर से गंभीर रूप से घायल युवक ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतक की पहचान अर्क सिंह (35 वर्ष) के रूप में हुई है। घटना 8 जनवरी की रात करीब 11:30 बजे की है। जानकारी के अनुसार, अर्क सिंह बाइक से भिलाई के शंकराचार्य अस्पताल में भर्ती अपनी दादी को देखकर पाटन स्थित शासकीय अस्पताल क्वार्टर में अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान राजू ढाबा के पास पीछे से आ रहे हाईवा ट्रक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि अर्क सिंह सड़क पर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा पाटन थाना क्षेत्र में हुआ। इलाज के दौरान हुई मौत हादसे के बाद पाटन पुलिस ने घायल अर्क सिंह को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पाटन पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर उनका इलाज जारी रखा गया, लेकिन 9 जनवरी की रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। सिर, चेहरे और शरीर में आई गंभीर चोटें मौत का कारण बनीं। हाईवा चालक पर लापरवाही का आरोप प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाईवा ट्रक (CG07 BP 7880) तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाया जा रहा था। मृतक के पिता विजय बहादुर सिंह की शिकायत पर पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पाटन एसडीओपी अनूप लकड़ा ने बताया कि मर्ग कायम कर लिया गया है और लापरवाही से मौत के अपराध में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। काम की तलाश में मुंबई गए थे मृतक अर्क सिंह की पत्नी पाटन के शासकीय अस्पताल में नर्स के पद पर पदस्थ हैं। मृतक पूर्व में रोजगार की तलाश में मुंबई गए थे, लेकिन घटना के समय वे बेरोजगार थे और भिलाई में रह रहे थे। निजी विवाद भी जांच के दायरे में पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मृतक की पत्नी ने पहले पाटन थाने में नशे की हालत में मारपीट की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस का कहना है कि इस शिकायत का हादसे से सीधा संबंध नहीं है, लेकिन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

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दुर्ग में गंदे पानी से पीलिया फैला: उतई नगर पंचायत के 2 वार्ड प्रभावित, हैंडपंप बंद कर भेजे गए पानी के सैंपल

दुर्ग।छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की नगर पंचायत उतई में दूषित पानी पीने से पीलिया (जॉन्डिस) फैलने का मामला सामने आया है। वार्ड क्रमांक 14 और 15 में बीते करीब एक महीने से लगातार मरीज मिल रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नालियों में जमा गंदे पानी की वजह से घरों और सार्वजनिक हैंडपंपों का जल स्रोत दूषित हो गया, जिसके बाद बदबूदार पानी की शिकायतें मिलने लगीं। शुरुआत में कुछ परिवारों ने इसे व्यक्तिगत समस्या समझा, लेकिन धीरे-धीरे पूरे मोहल्ले में एक जैसे लक्षण नजर आने लगे। हैंडपंप और बोरिंग का पानी बना बीमारी की वजह सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब 20 मरीजों के घरों में जाकर जांच की। जांच के दौरान पाया गया किअधिकांश परिवार हैंडपंप या बोरिंग के पानी का उपयोग कर रहे थे। एहतियातन वार्ड में मौजूद एक सार्वजनिक हैंडपंप को तुरंत बंद कर दिया गया है। साथ ही सभी संदिग्ध जलस्रोतों से पानी के नमूने लेकर लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। एक ही वार्ड में मिले 12 मरीज जानकारी के अनुसार, वहीं वार्ड 14 में पहले 12 मरीज सामने आए थे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सभी मरीज अब स्वस्थ हैं। यहां एक बोरिंग को संदिग्ध मानते हुए तुरंत बंद कर दिया गया। बीएमओ और डॉक्टरों की टीम ने किया घर-घर निरीक्षण बीएमओ डॉ. देवेंद्र बेलचंदन ने बताया किडॉक्टरों की टीम ने प्रभावित वार्डों के घरों में जाकर स्थिति का आकलन किया है।हालांकि हाल ही में दो घरों में हल्के लक्षण दिखे थे, लेकिन उनकी हालत फिलहाल सामान्य है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया गया है। लोगों को केवल उबला हुआ पानी पीने की सख्त सलाह दी गई है। हैंडपंप बंद, टैंकर से हो रही पानी की सप्लाई सुरक्षा के लिहाज से प्रभावित इलाकों में इसके साथ ही का काम भी तेज कर दिया गया है। नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी राजेंद्र नायक ने बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। पानी के सैंपल जांच में, स्थिति नियंत्रण में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया किप्रभावित घरों के सभी पानी के सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं।फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन वार्ड 14 और 15 में निगरानी लगातार जारी है।

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मौसम बदलते ही बीमारियां बढ़ीं: रायपुर में रोज 600 से ज्यादा वायरल और सर्दी-खांसी के मरीज, डॉक्टरों की चेतावनी

रायपुर।मौसम में अचानक आए बदलाव का सीधा असर अब लोगों की सेहत पर दिखने लगा है। राजधानी रायपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों में पिछले कुछ दिनों से वायरल फीवर, सर्दी और खांसी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। हालात यह हैं कि शहर में हर दिन 600 से अधिक मरीज वायरल जैसे लक्षणों के साथ इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार कई मरीजों में बीमारी ठीक होने के बाद 2–3 दिन के भीतर दोबारा बुखार लौट रहा है, जो सामान्य वायरल से अलग संकेत माना जा रहा है। 🏥 चार दिनों में अस्पतालों पर बढ़ा दबाव पिछले चार दिनों के आंकड़ों के मुताबिक, रायपुर के अलग-अलग अस्पतालों में रोज औसतन इतने मरीज पहुंच रहे हैं: अस्पतालों में ओपीडी का लोड लगातार बढ़ रहा है। 🔁 ठीक होने के बाद फिर लौट रहा बुखार डॉक्टरों का कहना है कि इस बार वायरल का पैटर्न अलग नजर आ रहा है।अधिकतर मामलों में: इस वजह से मरीज लंबे समय तक थकान और चक्कर की शिकायत कर रहे हैं। ⚠️ 3 दिन बाद दोबारा बुखार आए तो तुरंत डॉक्टर से मिलें डॉक्टरों की सलाह है कि यदि तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और जरूरी जांच कराएं। 💊 बिना जांच दवा लेना हो सकता है खतरनाक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी ने बताया किमौसम में उतार-चढ़ाव, बढ़ता प्रदूषण और कमजोर इम्यूनिटी के कारण वायरल और बुखार के मामलों में तेजी आई है। उन्होंने कहा कि कई मरीजों में डेंगू और मलेरिया जैसे लक्षण भी देखे जा रहे हैं।ऐसे में बिना ब्लड जांच, प्लेटलेट काउंट और अन्य जरूरी टेस्ट कराए दवा लेना नुकसानदायक हो सकता है। 🦠 ऐसे पहचानें नया वायरल फीवर ✅ बचाव के जरूरी उपाय डॉक्टरों का कहना है कि लापरवाही इस वायरल को गंभीर और लंबा बना सकती है, इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें।

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महादेव सट्टा ऐप मामला: ED ने 92 करोड़ की संपत्ति की सीज, दुबई से चल रहा था रिग्ड बेटिंग नेटवर्क

रायपुर / नई दिल्ली।महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 92 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई PMLA कानून के तहत की गई है और इसे अब तक की सबसे अहम कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। ED की जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगियों का संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था, जो भारत से अवैध तरीके से करोड़ों रुपये विदेश भेज रहा था। 💰 किन संपत्तियों पर ED की कार्रवाई ED के अनुसार, इसके अलावा, 🌍 दुबई से संचालित हो रहा था महादेव ऐप जांच एजेंसी के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) ऐप को सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल प्रमोट कर रहे थे। दोनों छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और फिलहाल UAE (दुबई) में मौजूद बताए जा रहे हैं।भारत सरकार उनकी प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है। 🎰 रिग्ड गेम्स से होती थी ग्राहकों की लूट ED की जांच में खुलासा हुआ है किMahadev Online Book और Skyexchange जैसे प्लेटफॉर्म पर रिग्ड गेम्स चलाए जा रहे थे,जहां इस तरह लाखों यूजर्स से अवैध तरीके से रकम वसूली जाती थी। 💸 हवाला, क्रिप्टो और FPI से विदेश पहुंचा पैसा जांच में सामने आया कि सट्टेबाजी से कमाई गई रकम को के जरिए विदेश भेजा गया।बाद में इसी पैसे को FPI (Foreign Portfolio Investment) के नाम पर भारतीय शेयर बाजार में निवेश किया गया। 🔁 कैशबैक रैकेट का भी खुलासा ED ने एक बड़े कैशबैक रैकेट का भी पर्दाफाश किया है।जांच में पता चला कि ED का दावा है कि गगन गुप्ता कोSalasar Techno Engineering और Tiger Logistics से जुड़े सौदों में करीब 98 करोड़ रुपये का फायदा हुआ। 📂 अब तक की कार्रवाई ED के अनुसार, इस नेटवर्क में छत्तीसगढ़ के कई हाई-प्रोफाइल नेता और अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसी का कहना है कि महादेव ऐप एक ‘अंब्रेला सिंडिकेट’ की तरह काम कर रहा था। 💎 सर्राफा कारोबारी के जरिए पहुंची प्रोटेक्शन मनी EOW की जांच में यह भी सामने आया है किमहादेव बुक प्रमोटर्स ने कार्रवाई से बचने के लिएराजनेताओं, ब्यूरोक्रेट्स और पुलिस अफसरों तक प्रोटेक्शन मनी पहुंचाई। इसमें छत्तीसगढ़ के सर्राफा कारोबारी सुनील कुमार दम्मानी (श्री आभूषण ज्वैलर्स) की भूमिका सामने आई है।हवाला के जरिए पैसा कलेक्ट करचंद्रभूषण वर्मा और राहुल वक्टे के माध्यम से आगे पहुंचाया जाता था। 👥 पैनल चलाने वाले नाम सामने आए जांच में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं: ⚠️ चालान में अफसरों के नाम गायब EOW द्वारा कोर्ट में पेश किए गए चालान मेंकिसी भी ब्यूरोक्रेट या पुलिस अधिकारी को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है।चालान में केवल पदनामों का उल्लेख किया गया है। 🔍 जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद ED और EOW का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल सट्टा और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।

राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले तीन दिनों तक राज्य के उत्तरी और मध्य हिस्सों के आठ जिलों में शीतलहर का असर बना रहेगा। राजधानी रायपुर में रात का न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। वहीं प्रदेश के सबसे ठंडे इलाकों में शामिल मैनपाट में तापमान 1.8 डिग्री तक गिर गया। अंबिकापुर में पारा 3.3 डिग्री, पेंड्रा में 7.6 डिग्री, दुर्ग और राजनांदगांव में 8 डिग्री तथा जगदलपुर में 8.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटों में प्रदेश का अधिकतम तापमान 29.1 डिग्री (जगदलपुर) और न्यूनतम तापमान 3.3 डिग्री (अंबिकापुर) रहा। ठंड के बढ़ते असर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बुजुर्गों, छोटे बच्चों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। ❄️ ठंड के कारण स्कूल बंद कड़ाके की ठंड को देखते हुए सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिलों में प्राइमरी स्कूलों को 10 जनवरी तक बंद कर दिया गया है। मिडिल, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल खुले रहेंगे, लेकिन दो पालियों में चलने वाले स्कूलों का समय बदल दिया गया है। अब पहली पाली सुबह 9:30 से 12:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 12:30 से शाम 4 बजे तक संचालित होगी। ⚠️ ठंड से जान का खतरा अंबिकापुर के श्रीगढ़ इलाके में नए साल की रात एक बुजुर्ग की ठंड से मौत हो गई। कम कपड़ों में खुले में सोने के कारण वे हाइपोथर्मिया की चपेट में आ गए। यह अंबिकापुर में ठंड से मौत का दूसरा मामला है। इससे पहले 11 दिसंबर को बस स्टैंड में सो रहे एक व्यक्ति की भी मौत हो चुकी है। 🏥 बच्चों की सेहत पर असर तेज ठंड का असर बच्चों पर भी साफ दिख रहा है। रायपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों में पिछले एक महीने में हाइपोथर्मिया के 400 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक नवजात और छोटे बच्चों का शरीर जल्दी ठंडा हो जाता है, जिससे उन्हें NICU और SNCU तक में भर्ती कराना पड़ रहा है। 🤒 अस्पतालों की OPD में बढ़ी भीड़ ठंड के चलते वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीज बढ़ गए हैं। अंबेडकर अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 2000 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभाग में सबसे ज्यादा भीड़ है। 🧊 क्या है हाइपोथर्मिया? हाइपोथर्मिया एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान सामान्य 37 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। डॉक्टरों के अनुसार ठंडी हवा या पानी के संपर्क में आने से शरीर तेजी से गर्मी खो देता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह स्थिति घातक साबित हो सकती है। 🔥 नगर निगम ने जलवाए अलाव शीतलहर के बढ़ते असर को देखते हुए रायपुर नगर निगम ने शहर के 12 से अधिक स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था की है। मेयर मीनल चौबे और निगम कमिश्नर विश्वदीप के निर्देश पर अधिकारियों को रात में फील्ड में रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करने को कहा गया है। 🦟 बदलते मौसम में मलेरिया का खतरा मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दिन में अधिक और रात में कम तापमान मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल स्थिति बनाता है। अगले कुछ दिनों में ग्रामीण और जंगल क्षेत्रों में मलेरिया का खतरा बढ़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरदानी के उपयोग, पानी जमा न होने देने और समय पर जांच कराने की सलाह दी है। 🛡️ ठंड से बचाव के उपाय डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के मौसम में भाप लेना, नमक-पानी से गरारे करना, विटामिन-C युक्त आहार, अदरक-तुलसी की चाय और गर्म कपड़ों का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और सर्दी-जुकाम व वायरल संक्रमण से बचाव होता है।

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कवासी लखमा से मुलाकात के बाद भूपेश बघेल का हमला, ईडी–ईओडब्ल्यू की कार्रवाई पर उठाए सवाल

रायपुर। रायपुर सेंट्रल जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री और वरिष्ठ आदिवासी नेता कवासी लखमा से मुलाकात के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना ठोस सबूतों के लखमा और अन्य लोगों को परेशान किया जा रहा है और यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। मीडिया से बातचीत में भूपेश बघेल ने कहा कि फिलहाल कवासी लखमा का स्वास्थ्य ठीक है और उन्हें जेल में जरूरी दवाइयां मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछली मुलाकात के दौरान लखमा को सीने और पैर में दर्द की शिकायत थी, जिसके बाद उन्होंने डीजीपी को पत्र लिखकर मेडिकल जांच की मांग की थी। इसके बाद जेल प्रशासन द्वारा जांच कर इलाज कराया गया। जांच एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव का आरोप भूपेश बघेल ने कहा कि सबसे गंभीर विषय यह है कि जांच एजेंसियों के पास ठोस और तथ्यात्मक सबूतों का अभाव है, इसके बावजूद लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इसे केवल परेशान करने और दबाव बनाने की रणनीति बताया। पूर्व मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अदालत के निर्देश पर अपनी फाइनल रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है, लेकिन आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) अब तक रिपोर्ट दाखिल नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि बार-बार प्रोडक्शन वारंट जारी कर कवासी लखमा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। यह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि आदिवासी नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिश का हिस्सा है। ‘एजेंसियां खुद को अदालत से ऊपर समझ रही हैं’ भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि कुछ जांच एजेंसियां खुद को अदालत से ऊपर मानने लगी हैं, जो लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया जाएगा, तो यह न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। डिप्टी सीएम अरुण साव के बयान पर तंज डिप्टी सीएम अरुण साव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा नेताओं के मुंह से अनजाने में सच्चाई निकल रही है। उन्होंने कहा कि अरुण साव, केदार कश्यप और रामविचार नेताम जैसे नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि कवासी लखमा एक निर्दोष आदिवासी नेता हैं, जो पिछले एक साल से जेल में बंद हैं। भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि जब खुद भाजपा नेता उन्हें निर्दोष मान रहे हैं, तो फिर ईओडब्ल्यू की कार्रवाई आखिर किस आधार पर जारी है। आदिवासी राजनीति से जुड़ा मामला राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कवासी लखमा का मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि आदिवासी राजनीति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। भूपेश बघेल के लगातार आक्रामक बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस इस मुद्दे को आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक विषय बना सकती है। आदिवासी समाज में भी इस कार्रवाई को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।

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रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे भूपेश बघेल, बोले– अगर मेरे हाथ में होता तो बेटा जेल ही नहीं जाता

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुक्रवार को रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे, जहां उन्होंने शराब घोटाले के मामले में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से मुलाकात की। जेल से बाहर निकलने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए भूपेश बघेल ने जांच एजेंसियों और भाजपा पर तीखा हमला बोला। बघेल ने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियां राजनीतिक दबाव में काम कर रही हैं। उन्होंने अपने बेटे चैतन्य बघेल की जमानत को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि उन्होंने अपने बेटे को जेल से छुड़वा लिया, जबकि हकीकत यह है कि उसे अदालत से जमानत मिली है। पूर्व सीएम ने कहा, “अगर मेरे हाथ में होता, तो मेरा बेटा जेल जाता ही नहीं। कोर्ट ने जांच एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई, तभी जाकर उसे जमानत मिली।” कवासी लखमा को लंबे समय तक जेल में रखने की कोशिश भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि कवासी लखमा को जानबूझकर लंबे समय तक जेल में रखने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में समय पर जवाब दाखिल नहीं किया, जिससे मामले का फैसला टल गया। उन्होंने दावा किया कि यदि एजेंसी समय पर जवाब पेश करती, तो 17 दिसंबर को ही निर्णय आ सकता था। लेकिन जवाब रोका गया ताकि लखमा को जेल में रखा जा सके। भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि उनके बयानों से सच्चाई सामने आ रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब कवासी लखमा को निर्दोष बताया जा रहा है, तो फिर EOW और ED की कार्रवाई क्यों जारी है। साथ ही भाजपा नेताओं को “घड़ियाली आंसू” न बहाने की सलाह दी। कौन हैं कवासी लखमा कवासी लखमा बस्तर अंचल के प्रमुख आदिवासी नेताओं में गिने जाते हैं। वे सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं। 2013 के दरभा घाटी नक्सली हमले में वे उन नेताओं में शामिल थे, जो जीवित बच पाए थे। 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद उन्हें आबकारी मंत्री बनाया गया था। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार के मंत्रियों में से गिने-चुने नेता ही अपनी सीट बचा पाए, जिनमें कवासी लखमा भी शामिल रहे। क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। एजेंसी का दावा है कि करीब 3,200 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ है। इस मामले में एसीबी में दर्ज FIR में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों के नाम शामिल हैं। ED के अनुसार, पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया।

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