March 2026

Shri Sai Baba Temple में सोलर सिस्टम से रोज बन रहा 40 हजार लोगों का खाना

शिर्डी स्थित श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट ने सौर ऊर्जा से चलने वाला ऐसा कुकिंग सिस्टम विकसित किया है, जो रोज हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार कर रहा है और बड़ी मात्रा में गैस की बचत भी कर रहा है। बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच यह मॉडल ऊर्जा बचत की मिसाल बन गया है। रोज 200 किलो गैस की बचत सोलर कुकिंग सिस्टम की मदद से प्रतिदिन लगभग 2,000 किलो भोजन तैयार किया जाता है, जो करीब 40 हजार श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त होता है। इससे रोज लगभग 200 किलो गैस की बचत हो रही है। इस पहल को Ministry of New and Renewable Energy ने देश के एक अनोखे मॉडल के रूप में सराहा है। प्रसादालय में मुफ्त भोजन शिर्डी में रोजाना औसतन 75 से 80 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। संस्थान के प्रसादालय में मुफ्त भोजन दिया जाता है, जिसका लाभ लगभग 40 हजार लोग प्रतिदिन उठाते हैं। पहले इतनी बड़ी मात्रा में भोजन बनाने के लिए करीब 1,700 किलो गैस खर्च होती थी। 2009 में शुरू हुई पहल ऊर्जा बचत और खर्च कम करने के उद्देश्य से जुलाई 2009 में इस सोलर कुकिंग सिस्टम की स्थापना की गई। इस परियोजना पर लगभग 1.37 करोड़ रुपये खर्च हुए। प्रसादालय परिसर में 73 सोलर डिश लगाई गई हैं, जिनकी सहायता से बड़े सोलर कुकर में भोजन तैयार किया जाता है। गर्म पानी की सुविधा भी सौर ऊर्जा से संस्थान ने सौर ऊर्जा से श्रद्धालुओं के लिए गर्म पानी की व्यवस्था भी की है। नए श्रद्धालु निवास, द्वारावती और साईं आश्रम में रोज 10 हजार से अधिक लोगों को 24 घंटे मुफ्त गर्म पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। बड़े पैमाने पर खाना पकाने की क्षमता प्रसादालय में 150 लीटर क्षमता वाले 10 बड़े कुकर लगाए गए हैं। इनकी मदद से एक समय में लगभग 15 क्विंटल चावल, 5 क्विंटल दाल और 5 क्विंटल सब्जी पकाई जा सकती है। करोड़ों की बचत साल 2009 से 2026 तक इस प्रणाली से दो लाख किलो से अधिक गैस की बचत हो चुकी है, जिससे संस्थान को दो करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक बचत हुई है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिला है।

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ईरान में 15 दिन बाद भी सत्ता कायम, जंग पर अनिश्चितता

करीब दो हफ्तों से चल रहे युद्ध के बावजूद ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump जल्द जीत का दावा कर सकते हैं, लेकिन अंतिम स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान आगे क्या कदम उठाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान हमले जारी रखता है, जहाजों को निशाना बनाता है या जवाबी कार्रवाई करता है, तो युद्ध वास्तव में खत्म नहीं माना जाएगा। बताया जा रहा है कि ईरान की नौसेना और मिसाइल क्षमता को नुकसान पहुंचा है तथा कई शीर्ष नेता भी मारे गए हैं, फिर भी शासन अब तक कायम है। होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक असर ईरान ने Strait of Hormuz में तेल आपूर्ति के रास्ते को प्रभावित कर वैश्विक बाजार में उथल-पुथल पैदा कर दी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान अभी भी हालात पलटने की क्षमता रखता है। अमेरिका के भीतर भी दबाव युद्ध का असर अमेरिका में भी दिखाई देने लगा है। पेट्रोल की कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है, खाद महंगी हुई है और अमेरिकी सैनिकों की मौत का आंकड़ा बढ़कर 13 तक पहुंच गया है। इसी साल होने वाले चुनावों को देखते हुए ट्रम्प पर युद्ध समाप्त करने का दबाव बढ़ रहा है। अकेले युद्ध रोकने से तेल सस्ता नहीं होगा ईरान ने यह भी दिखाया है कि वह होर्मुज मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना सकता है। इसलिए माना जा रहा है कि अमेरिका यदि एकतरफा युद्ध रोक भी दे, तो तेल की कीमतें तुरंत कम होना तय नहीं है। इससे फारस की खाड़ी के अमेरिकी सहयोगी देशों के सामने भी नई सुरक्षा चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध जीतना और लंबे समय के लिए खतरा खत्म करना अलग बातें हैं। आशंका जताई जा रही है कि ईरान के भीतर कट्टरपंथी ताकतें मजबूत हो सकती हैं और वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में तेजी ला सकता है। बताया जा रहा है कि ईरान के पास अब भी बड़ी मात्रा में समृद्ध यूरेनियम मौजूद है, जिसे पश्चिमी देश गंभीर खतरे के रूप में देखते हैं। पिछले समझौते की पृष्ठभूमि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Barack Obama ने 2015 में ईरान के साथ परमाणु समझौता किया था, लेकिन ट्रम्प ने सत्ता में आने के बाद उसे समाप्त कर दिया। उस समय कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि समझौता खत्म होने से भविष्य में टकराव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों की राय मिडिल ईस्ट मामलों के जानकारों का कहना है कि इस युद्ध ने स्थिति को आसान नहीं बल्कि अधिक जटिल बना दिया है। ईरान लंबे समय से अमेरिका के लिए सुरक्षा चुनौती रहा है और मौजूदा हालात में क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ सकती है।

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लक्षद्वीप में बन रहा अनोखा प्लांट: समंदर का पानी बनेगा पीने लायक, 24 घंटे मिलेगी बिजली

समुद्र से घिरे द्वीपों की सबसे बड़ी समस्या होती है — मीठे पानी की कमी और महंगी ऊर्जा। कवरत्ती में बन रहा नया प्लांट इन दोनों समस्याओं का समाधान एक साथ करने जा रहा है। यह प्लांट समुद्र के तापमान के अंतर से बिजली पैदा करेगा और उसी प्रक्रिया में खारे पानी को पीने योग्य बनाएगा। इस परियोजना पर National Institute of Ocean Technology (NIOT) काम कर रहा है, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत आता है। इसे दुनिया का पहला ऐसा हाइब्रिड प्लांट माना जा रहा है जो समुद्र से साफ पानी और लगातार बिजली दोनों उत्पन्न करेगा। OTEC तकनीक पर आधारित यह प्लांट ओशन थर्मल एनर्जी कन्वर्जन (OTEC) तकनीक से काम करेगा। इसमें समुद्र की सतह का गर्म पानी और गहराई का ठंडा पानी इस्तेमाल होता है। गर्म पानी को वैक्यूम में डालकर भाप बनाई जाती है, जिससे टरबाइन घूमती है और बिजली बनती है। इसके बाद इसी प्रक्रिया से समुद्री पानी को मीठे पानी में बदला जाता है। 1000 मीटर गहराई से आएगा ठंडा पानी इस प्लांट का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा गहरे समुद्र से ठंडा पानी लाना है। इसके लिए लगभग 3.8 किलोमीटर लंबी और 900 मिमी व्यास की पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जो समुद्र की करीब 1000 मीटर गहराई से ठंडा पानी ऊपर लाएगी। पहले से चल रही तकनीक लक्षद्वीप के आठ द्वीपों पर अभी लो टेम्परेचर थर्मल डीसैलिनेशन तकनीक से पानी बनाया जा रहा है। हालांकि इन प्लांट्स को चलाने के लिए डीजल जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे लागत और प्रदूषण दोनों बढ़ते हैं। ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनेगा लक्षद्वीप फिलहाल लक्षद्वीप बिजली के लिए डीजल पर निर्भर है, जिसे मुख्य भूमि से जहाजों द्वारा लाया जाता है। नया प्लांट प्रतिदिन लगभग 65 मेगावाट बिजली पैदा करेगा, जबकि पूरे लक्षद्वीप की दैनिक जरूरत सिर्फ 10 से 12 मेगावाट है। इससे द्वीपों को अतिरिक्त स्वच्छ ऊर्जा भी मिल सकेगी। केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने इस परियोजना को देश की भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

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Narendra Modi का बयान: अविश्वास प्रस्ताव निजी स्वार्थ से प्रेरित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Om Birla के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को निजी स्वार्थ से प्रेरित बताया है। उन्होंने स्पीकर को लिखे पत्र में कहा कि कुछ लोग लोकतांत्रिक संस्थाओं को संकीर्ण दायरे में सीमित करना चाहते हैं। यह पत्र विपक्ष द्वारा स्पीकर को पद से हटाने के प्रस्ताव के खारिज होने के कुछ दिन बाद लिखा गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रस्ताव गिरने के बाद स्पीकर का वक्तव्य लोकतांत्रिक मर्यादा की परिपक्व व्याख्या था और इससे यह स्पष्ट हुआ कि प्रस्ताव के पीछे अहंकार और निजी हित काम कर रहे थे। प्रस्ताव 11 मार्च को खारिज कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने लोकसभा में स्पीकर को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया था, जिसे 11 मार्च को ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। विपक्ष के 119 सांसदों ने आरोप लगाया था कि स्पीकर सदन की कार्यवाही चलाने में पक्षपात कर रहे हैं और विपक्ष को पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा। स्पीकर का सांसदों को पत्र Om Birla ने भी सभी सांसदों को पत्र लिखकर संसद की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद में उठने वाली हर आवाज देश के 140 करोड़ लोगों की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने चिंता जताई कि कुछ सदस्य संसद के भीतर और बाहर उसके सम्मान को ठेस पहुंचा रहे हैं। बिरला ने सभी दलों से उच्च नैतिक आचरण बनाए रखने और आत्ममंथन करने की अपील की। प्रस्ताव लंबित रहने तक नहीं की अध्यक्षता अविश्वास प्रस्ताव लंबित रहने के दौरान ओम बिरला ने संसदीय परंपरा का हवाला देते हुए सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता से स्वयं को अलग रखा था। इस दौरान कार्यवाही पैनल ऑफ चेयरपर्सन के सदस्य संचालित कर रहे थे। प्रस्ताव खारिज होने के बाद उन्होंने फिर से सदन की अध्यक्षता संभाल ली। सरकार का जवाब Amit Shah ने प्रस्ताव पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि 18वीं लोकसभा में कांग्रेस सांसदों को भाजपा की तुलना में लगभग दोगुना समय मिला। इसके बावजूद विपक्ष द्वारा बोलने का मौका न मिलने का आरोप लगाया जा रहा है।

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Ranthambore Tiger Reserve में वनकर्मियों पर बाघ का हमला, बाल-बाल बचे

सवाई माधोपुर स्थित रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में गश्त पर निकले दो वनकर्मी उस समय खतरे में आ गए, जब अचानक एक बाघ उनके सामने आ गया और झपट पड़ा। दोनों वनकर्मी मोटरसाइकिल छोड़कर भागे और कुछ दूरी पर जाकर रुके, जिससे उनकी जान बच गई। कैसे हुआ सामना घटना सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे ROPT रेंज के सुल्तानपुर नाके के पास गाड़ा डूब वन क्षेत्र में हुई। वनकर्मी निरंजन और होमगार्ड जितेंद्र शर्मा बाइक से गश्त कर रहे थे। एक चढ़ाई वाले मोड़ पर बाघ पहले से बैठा था। जैसे ही बाइक वहां पहुंची, दोनों आमने-सामने आ गए। बाघ गुर्राया तो वनकर्मी तुरंत भागकर लगभग 15 मीटर दूर जाकर रुक गए और डंडों के सहारे सतर्क खड़े रहे। करीब 10 मिनट तक बाघ बाइक के पास ही रहा, जिससे दोनों की सांसें थमी रहीं। बाद में वह पहाड़ी की ओर चला गया। बाइक पर उतारा गुस्सा वनकर्मियों के हटने के बाद बाघ बाइक के पास आया और उसे पंजों व जबड़े से दबाकर घसीटने लगा। उसने बाइक की सीट फाड़ दी और कई बार हमला भी किया। टूरिस्ट जिप्सी ने बचाया घटना के कुछ ही मिनट बाद टूरिस्ट जिप्सी वहां पहुंची, जिसने वनकर्मियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। पहले भी हो चुके हैं हमले वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिटिकल टाइगर हैबिटैट में कुछ बाघ अत्यधिक आक्रामक व्यवहार दिखाते हैं। ऐसे क्षेत्रों में गश्त के लिए दोपहिया वाहन की बजाय चारपहिया वाहन उपलब्ध कराना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।

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6 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, कई जगह नुकसान

मौसम विभाग ने देश के उत्तर, पूर्वोत्तर और दक्षिण के लगभग 25 राज्यों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उत्तराखंड में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और ओलावृष्टि की संभावना भी है। हिमाचल में बर्फबारी, अटल टनल में फंसे पर्यटक हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण सड़कों पर फिसलन बढ़ गई, जिसके चलते यातायात रोक दिया गया। इससे Atal Tunnel में लगभग एक हजार वाहन पूरी रात फंसे रहे। ओडिशा में बवंडर से जनहानि ओडिशा के मयूरभंज जिला में आए बवंडर से दो लोगों की मौत हो गई और 25 से अधिक लोग घायल हो गए। तेज तूफान के कारण 70 से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त हो गए। सिक्किम में तूफान से नुकसान सिक्किम के कई इलाकों में तेज आंधी और मूसलाधार बारिश हुई। रकडोंग काफर क्षेत्र में पेड़ गिरने से एक महिला की मौत हो गई। कई स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए। कुछ राज्यों में गर्मी का असर मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और पुडुचेरी में फिलहाल कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है। यहां तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। रविवार को अमरावती देश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई। बर्फ जमने के कारण श्रीनगर-लेह नेशनल हाईवे को बंद करना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार 21 मार्च तक हल्की बारिश और बर्फबारी जारी रहने की संभावना है। मौसम बदलने की वजह मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण आंधी, बारिश, ओलावृष्टि और तूफान की स्थिति बनी हुई है। Category Data Heavy Rain Alert States 6 States Tourist Vehicles Stuck (Atal Tunnel) ~1000 Vehicles Deaths (Odisha Tornado) 2 People Injured (Odisha Tornado) 25+ People Houses Damaged (Odisha Tornado) 70+ Houses Death (Sikkim Storm) 1 Person

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कटक के SCB Medical College and Hospital में आग, 10 मरीजों की मौत

ओडिशा के कटक स्थित श्रीराम चंद्र भांजा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रविवार देर रात करीब 3 बजे भीषण आग लग गई। इस हादसे में 10 मरीजों की मौत हो गई। इनमें से 7 मरीजों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि 3 की मौत इलाज के दौरान हुई। आग अस्पताल की पहली मंजिल पर स्थित ट्रॉमा केयर यूनिट के आईसीयू में लगी थी। उस समय वहां लगभग 23 मरीज भर्ती थे। मरीजों को बाहर निकालने की कोशिश के दौरान अस्पताल के कम से कम 11 कर्मचारी झुलस गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। घटना के बाद Mohan Charan Majhi अस्पताल पहुंचे और घायलों का हाल जाना। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं। SCB Medical College and Hospital कटक का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां ओडिशा के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। इससे पहले अक्टूबर 2025 में Sawai Man Singh Hospital के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में भी आग लगने से 8 मरीजों की मौत हो गई थी। उस हादसे में भी शॉर्ट सर्किट को आग लगने की वजह माना गया था।

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सुल्तानपुर में आपदा मित्रों ने रखीं अहम मांगें

सुल्तानपुर में आपदा मित्र एसोसिएशन ने केंद्रीय गृह मंत्री और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी सुविधाओं और अधिकारों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें उठाई हैं। लगातार कर रहे हैं जोखिम भरा काम एसोसिएशन का कहना है कि वर्ष 2018 से आपदा मित्र प्रशासन के साथ मिलकर विभिन्न आपदा प्रबंधन कार्यों और बड़े आयोजनों में सेवा दे रहे हैं। इनमें कोरोना महामारी के दौरान राहत कार्य, माघ मेला और कुंभ मेला की ड्यूटी, गणतंत्र दिवस समारोह, प्रशिक्षण कार्यक्रम और मॉक ड्रिल जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं। पहले भी मिली हैं कुछ सुविधाएं सरकार की ओर से कुछ प्रोत्साहन दिए गए थे, जिनमें कुछ आपदा मित्रों को टैबलेट और वर्दी, होमगार्ड भर्ती में अतिरिक्त अंक, डीजी वॉकर प्रमाणपत्र, तीन वर्ष के लिए 5 लाख रुपये का जीवन व दुर्घटना बीमा तथा सड़क सुरक्षा कार्यों से जोड़ने का आश्वासन शामिल है। मुख्य मांगें बीमा और वेतनएसोसिएशन ने बीमा राशि 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने और सभी आपदा मित्रों के लिए 26,910 रुपये प्रति माह का न्यूनतम वेतन तय करने की मांग की है। सामाजिक सुरक्षास्वास्थ्य बीमा, पीएफ, वित्तीय सुरक्षा, सेवानिवृत्ति लाभ और व्यापक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की भी मांग की गई है। कर्मचारी का दर्जाआपदा मित्रों को सड़क सुरक्षा, अग्निशमन सेवाओं और विभिन्न सरकारी योजनाओं में नियमित कर्मचारी घोषित करने की मांग भी रखी गई है। अन्य सुविधाएंइसके अलावा स्वीकृत आपदा कार्यालयों में नियुक्ति, मानसून से पहले बीमा सक्रिय करना, बैंक केवाईसी कार्ड, ड्रेस किट, नियमित प्रशिक्षण और किए गए कार्यों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई है। आपदा मित्रों का कहना है कि वे कठिन और जोखिम भरी परिस्थितियों में जनता की सुरक्षा के लिए काम करते हैं, इसलिए उन्हें स्थायी सुरक्षा, सम्मानजनक वेतन और आवश्यक सुविधाएं मिलनी चाहिए।

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यूपी में बदला मौसम: मुजफ्फरनगर में ओले, बिजनौर में आंधी से पेड़ गिरे; सहारनपुर में 2 की मौत, 43 जिलों में बारिश का अलर्ट

उत्तर प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। मुजफ्फरनगर में देर रात तेज बारिश के साथ कई इलाकों में ओलावृष्टि हुई, जबकि बिजनौर में तेज आंधी के कारण पेड़, बिजली के खंभे और होर्डिंग्स गिर गए। सहारनपुर में आंधी के दौरान टीन शेड गिरने से पूर्व प्रधान समेत दो लोगों की मौत हो गई। मौसम विभाग ने वाराणसी सहित राज्य के 43 जिलों में हल्की बारिश और 17 जिलों में ओले गिरने की चेतावनी जारी की है। कई स्थानों पर तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। विभाग के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में यह बदलाव आया है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। रविवार को भी नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और अयोध्या समेत कई शहरों में तेज हवा के साथ हल्की बारिश हुई थी। लखनऊ में धूलभरी आंधी चली, जबकि हरदोई और सीतापुर में बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई और तीन लोग झुलस गए। तेज हवा, बारिश और ओलों का असर खेती पर भी पड़ा है। कई इलाकों में खेतों में खड़ी फसलें झुक गई हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि मौसम ठंडा होने से लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली। पिछले 24 घंटों में बांदा सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 38.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सहारनपुर हादसा सहारनपुर के सरसावा क्षेत्र में देर रात तेज आंधी और बारिश के दौरान सड़क किनारे बना टीन शेड गिर गया। इसके नीचे दबने से भटपुरा के पूर्व प्रधान जयपाल सैनी और नवादा निवासी रामकेश सैनी की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों उत्तराखंड से एक कार्यक्रम में शामिल होकर बाइक से लौट रहे थे और खराब मौसम से बचने के लिए शेड के नीचे रुके थे। फसलों को नुकसान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं सहित कई फसलें प्रभावित हुई हैं। किसानों के अनुसार इस समय फसल पकने की अवस्था में है, ऐसे में तेज हवा से बालियां झुक जाती हैं और दानों के खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। कृषि विशेषज्ञों ने भी अधिक नमी के कारण रोग लगने की आशंका जताई है, हालांकि हल्की बारिश कुछ फसलों के लिए लाभकारी हो सकती है। प्रशासन सतर्क मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में जाकर नुकसान का आकलन करने और किसानों से सीधे संवाद करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि जिन क्षेत्रों में फसलों को नुकसान हुआ है, वहां किसानों को समय पर राहत और मुआवजा दिया जाए। मार्च में जल्दी बढ़ रही गर्मी विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का पैटर्न बदल रहा है और गर्मी पहले की तुलना में जल्दी शुरू हो रही है। हाल ही में बांदा में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जो सामान्य से अधिक है। मौसम विभाग ने इस वर्ष कुछ क्षेत्रों में लंबे समय तक हीटवेव चलने की संभावना भी जताई है।

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फरवरी में थोक महंगाई 12 महीने के उच्च स्तर पर, रोजमर्रा का सामान और खाद्य वस्तुएं महंगी

फरवरी 2026 में थोक महंगाई दर (WPI) बढ़कर 2.13% पर पहुंच गई, जो पिछले 12 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले जनवरी में यह 1.81% और दिसंबर में 0.83% थी। कॉमर्स मंत्रालय ने 16 मार्च को ये आंकड़े जारी किए। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव लंबा चलता है तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। इससे पेट्रोल और डीजल महंगे होंगे, परिवहन लागत बढ़ेगी और फल-सब्जियों समेत रोजाना इस्तेमाल की वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ेगा। फरवरी में आवश्यक वस्तुओं (प्राइमरी आर्टिकल्स) की महंगाई 2.21% से बढ़कर 3.27% हो गई। खाद्य पदार्थों की महंगाई दर भी माइनस 1.41% से बढ़कर 1.85% हो गई। फ्यूल और पावर सेक्टर में महंगाई अभी भी नकारात्मक रही, हालांकि इसमें हल्का सुधार दर्ज किया गया। मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की महंगाई दर भी बढ़कर 2.92% पर पहुंच गई। थोक महंगाई तीन मुख्य वर्गों से मिलकर बनती है—प्राइमरी आर्टिकल्स, फ्यूल एंड पावर और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स। इनमें सबसे अधिक हिस्सेदारी मैन्युफैक्चर्ड उत्पादों की होती है। इसी दौरान खुदरा महंगाई (CPI) भी फरवरी में बढ़कर 3.21% हो गई, जो जनवरी में 2.74% थी। जब थोक कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो कंपनियां इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डाल देती हैं, जिससे बाजार में सामान महंगा हो जाता है। भारत में महंगाई दो तरीकों से मापी जाती है—खुदरा महंगाई (CPI), जो आम उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है, और थोक महंगाई (WPI), जो थोक बाजार में व्यापारियों के बीच होने वाले लेन-देन की कीमतों को दर्शाती है।

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